…और ‘चीन-पाकिस्तान की दोस्ती’ पर मोदी ने उठा दिए सवाल

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china-5554e269c9091_exlstअपनी तीन दिवसीय यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार सुबह चीन पहुंचे। आपसी मुलाकात में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के आपसी भरोसे को और मजबूत करने व साझी सीमाओं पर शांति बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की। सीमा मुद्दा दोनों देशों के बीच दशकों से रिश्तों में तल्खी की वजह बनता रहा है।

पहली बार किसी दूसरे देश के नेता का राजधानी बीजिंग से बाहर शियान में स्वागत करते हुए जिनपिंग ने पीएम मोदी से व्यापक बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक मुद्दों पर चर्चा तो हुई ही साथ में आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी गंभीरता से बातचीत हुई।

इस चर्चा में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता भी एक अहम मुद्दा रहा। विदेश सचिव एस जयशंकर ने मीडिया को करीब डेढ़ घंटे तक चली प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की जानकारी देते हुए बताया, ‘दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक तौर पर भरोसे को बढ़ाने और नजदीकियां बढ़ाने पर चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने के बारे में भी चर्चा की।’

सीमा मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच अब तक 18 दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत हो चुकी है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने और नेपाल में भूकंप की त्रासदी से निपटने के लिए की जा रही कोशिशों पर भी बात हुई। पीएम शुक्रवार को बीजिंग में रहेंगे, जहां उनका औपचारिक स्वागत चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग करेंगे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जिनपिंग से चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने अरुणाचल प्रदेश को स्टेपल वीजा दिए जाने का मुद्दा उठाया। चीन अरुणाचल पर अपना दावा जताता रहा है, जिसे भारत ने हमेशा सिरे से खारिज किया है।

पीएम मोदी ने जिनपिंग के समक्ष पाक अधिकृत कश्मीर में चीन द्वारा किए जा रहे 46 अरब डॉलर के पाक-चीन आर्थिक गलियारे समेत व्यापक निवेश पर भी सवाल उठाया। हाल ही में जिनपिंग ने पाक दौरे के वक्त भारी भरकम निवेश का ऐलान किया था। यह गलियारा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।

दोनों नेताओं के बीच व्यापार घाटे को लेकर भी चर्चा हुई, जो इस समय चीन के पक्ष में है। दोनों ने निवेश के माहौल और आर्थिक सुधारों पर चर्चा की। इस संदर्भ में जिनपिंग ने पीएम से उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान ‘गुजरात के चमत्कार’ की सराहना की और कहा कि अब मोदी उसी तर्ज पर अपने देश को भी आगे ले जाना चाहते हैं।

आतंकवाद की चुनौती पर बातचीत
काबुल और कराची में हुए आतंकी हमलों पर चर्चा करते हुए दोनों नेताओं के बीच आतंकवाद के मुद्दों पर भी जमकर चर्चा हुई। भारत और चीन के बीच आतंकवाद निरोधी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। मोदी ने ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी)’ पर किसी समझौते तक जल्द पहुंचने की जरूरत बताई, जो अरसे से संयुक्त राष्ट्र में लंबित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की रिपोर्ट दिखाने के दौरान चीन के सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी ने भारत का जो नक्शा प्रसारित किया, उससे जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश गायब था। इससे नया विवाद खड़ा होने की आशंका है।

यह मैप तब प्रसारित किया गया जब मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के गृहनगर में उनसे बातचीत कर रहे थे। चीन अरुणाचल और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अपना दावा जताता रहा है, लेकिन भारत उसके दावे को खारिज करता रहा है।

मोदी और जिनपिंग वार्ता में संबंधों की मजबूती पर चर्चा
अपने तीन दिवसीय चीन दौरे पर शियान पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने गृह नगर शियान में प्रोटोकॉल तोड़ कर मोदी का स्वागत किया।

दोनों के बीच सीमा विवाद और बढ़ते व्यापार घाटा समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई और भारत-चीन के बीच भरोसा मजबूत करने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर प्रतिबद्धता जताई गई। पीएम शुक्रवार को बीजिंग में रहेंगे, जहां उनका औपचारिक स्वागत चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग करेंगे।

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