केजरीवाल बनाम जंग: दोनों पक्षों की संवैधानिक स्थिति पर एक नजर…

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20_05_2015-20jung1aपिछले एक सप्ताह से नौकरशाहों की नियुक्ति को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग आमने-सामने हैं। अधिकारों को लेकर दोनों पक्षों में जंग छिड़ी हुई है। इस संदर्भ में दोनों पक्षों की संवैधानिक स्थिति पर एक नजर:

शक्तियों का बंटवारा: संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत विधायी शक्तियों का त्रिस्तरीय बंटवारा किया गया है। इसके तहत संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में वर्णित विषयों पर केंद्र और राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है। * पूर्ण राज्यों को भूमि, कानून व्यवस्था, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा पर नियंत्रण दिया गया है।

* दिल्ली और पुडुचेरी ऐसे केंद्रशासित प्रदेश हैं जहां विधानसभा मौजूद हैं। इस वजह से इनको आंशिक या अद्र्ध राज्य कहा जाता है। इनके पास पूर्ण राज्य की कुछ महत्वपूर्ण शक्तियां नहीं हैं।

सीमित शक्तियां

1991 में 69वें संविधान संशोधन के तहत अनुच्छेद 239एए और 239एबी के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में विधानसभा और मंत्रिपरिषद का प्रावधान किया गया और भूमि, पुलिस एवं कानून-व्यवस्था को राज्य सरकार के दायरे से बाहर रखा गया। यानी कि इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार दिल्ली विधानसभा को नहीं है।

विवाद

इस स्थिति के बावजूद केजरीवाल ने आदेश दिया कि पुलिस, कानून व्यवस्था और भूमि समेत सभी मामलों की फाइलें पहले संबंधित मंत्रियों के पास भेजी जाएंगी। इस संबंध में उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि कानून व्यवस्था, पुलिस और भूमि जैसे मामलों में उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री से सलाह कर निर्णय लेगा। लेकिन यह तभी संभव है जब अनुच्छेद 239 के तहत राष्ट्रपति इससे संबंधित आदेश पारित करें।

अधिसूचना

* 24 सितंबर, 1998 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना उपराज्यपाल के अधिकार का समर्थन करती है।

* उस अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का उपराज्यपाल ‘कानून व्यवस्था’, ‘पुलिस’ और ‘सेवाओं’ के मामलों में राष्ट्रपति और केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी शक्तियों का उपयोग करेगा। इस संबंध में वह उन मामलों को छोड़कर मुख्यमंत्री की सलाह लेगा जिसमें वह ऐसा करना व्यावहारिक नहीं समझता हो।

नियुक्ति का मसला

* मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, राज्य गृह सचिव और सचिव (भूमि) की नियुक्ति का अधिकार उपराज्यपाल के पास है। बाकी अन्य नियुक्तियां आमतौर पर राज्य कैबिनेट की सलाह के आधार पर की जाती हैं।

* इसके अतिरिक्त यदि उपराज्यपाल को लगता है कि किसी नौकरशाह का उत्पीडऩ हो रहा है तो केंद्र की तरफ से हस्तक्षेप कर सकता है।

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