खराब मौसम के चलते केदारनाथ में फैले मलबे को नहीं हटाया जा सका

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देहरादून (राजेन्द्र जोशी)। खराब मौसम के चलते केदारनाथ में फैले मलबे को हटाने और पुनर्निर्माण और पुनर्वास का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। एक अधिकारी ने यहां बताया कि मलबा हटाने के लिये केदारनाथ रवाना किये जरूरी भारी उपकरण खराब मौसम के कारण अभी भी रास्ते में ही फंसे पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ में फैले पड़े कई टन मलबे को हटाने के लिये जरूरी उपकरण जैसे पोकलाइन, बुलडोजर और रॉकब्रेकर रूक-रूक कर जारी बारिश और लो विजिबिलटी जैसी मौसमी दशाओं की वजह से अभी भी केदारनाथ के रास्ते गुप्तकाशी में अटके पड़े हैं। अधिकारी ने बताया कि मशीनों को गुप्तकाशी से गौचर भेजा जायेगा जहां उन्हें कई हिस्सों में अलग कर (डिस्मेंटल) हैलीकाप्टर के जरिये केदारनाथ धाम में पहुंचाया जायेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह सब तभी हो पायेगा जब मौसम इसकी इजाजत देगा।  केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह और अंदरूनी भागों की सफाई तो पूरी की जा चुकी है, लेकिन क्षेत्र से मलबा हटाने का कार्य मशीनों के वहां पहुंचने पर ही प्रारंभ हो पायेगा। केदारनाथ धाम इलाके में मलबा हटाने का काम राज्य सरकार के लिये सबसे चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अब तक भेजी गयी ज्यादातर टीमें वहां जाकर इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं कर पायी हैं। अधिकारी ने कहा, केदारनाथ मंदिर के पास फैले पड़े टनों मलबे को हटाने का काम बहुत बड़ा है। खासतौर से मौसम की दिक्कतों को देखते हुए यह और चुनौतीपूर्ण हो गया है और इस काम में बहुत ज्यादा समय या शायद महीनों भी लग सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर मौसम इजाजत देता है, तो पहले चरण की कवायद में मंदिर के आसपास स्थित करीब 40 क्षतिग्रस्त ढ़ांचों को गिराया जायेगा और उसके बाद मलबे को हटाया जायेगा, जिसके नीचे अभी भी शव दबे हो सकते हैं। केदारनाथ में मलबा हटाने के काम को वैज्ञानिक ढ़ंग से करने के लिये राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग प्रोजेक्टस इंडिया लिमिटेड के अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और भारतीय भूगर्भ सवेंक्र्षण के विशेषज्ञों की मदद भी ली है। अधिकारी ने कहा कि मलबा हटाने के कार्य में आने वाली सर्दियां भी बाधक बन सकती हैं क्योंकि उस दौरान इस क्षेत्र में भारी हिमपात होता है। सर्दियों के दौरान बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के इलाके भारी हिमपात की चपेट में रहते हैं जिस वजह से उनके कपाट बंद कर दिये जाते हैं और उन्हें फिर अप्रैल-मई में खोल दिया जाता है।

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