गंगा दे रही बड़े खतरे की चेतावनी

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हरिद्वार: मोक्षदायिनी गंगा में जलस्तर का यही हाल रहा तो भविष्य में इसके किनारों पर रहने वाले करोड़ो लोगों को और भी भयानक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बीते दो माह में गंगा का जलस्तर 42 दिन चेतावनी निशान के पार रहा। सात बार गंगा इस निशान के नीच रही। इसकी रिपोर्ट आयोग ने मुख्यालय दिल्ली को भेजी है। इसमें उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लोगों को अन्यत्र बसाने की सिफारिश कही गई है।

गत जून में ऊफनाई गंगा अब किसी बड़े खतरे की चेतावनी दे रही है। गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए रखने और इससे संभावित खतरों के आंकलन को भारत सरकार ने हरिद्वार और ऊपरी इलाकों में केंद्रीय जल आयोग की टीमें तैनात की हैं। आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल जून से 15 अगस्त तक मात्र दस दिन गंगा चेतावनी निशान के पार रही। लेकिन, इस बार 42 दिन गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर यानि 293 मीटर के पार रहा। आयोग का यहां पर जीरो गेज 285 मीटर है।

इसके साथ ही अब तक आयोग ने सात बार गंगा के खतरे के निशान से ऊपर या बराबर बहने की पूर्व चेतावनी दी थी। अब हरिद्वार के आयोग डिविजन ऑफिस की ओर से देहरादून, लखनऊ और दिल्ली रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें उन्होंने उत्तराखंड के हरिद्वार सहित तीन जिलों, यूपी के बिजनौर, मेरठ, बागपत, आदि जिलों के करीब पांच हजार गांवों को अन्यत्र बसाने की सिफारिश की है। इसके लिए आयोग ने केंद्र सरकार को भी इसकी एक रपट प्रस्तुत की है।

नदी क्षेत्र के पुनर्निधारण की जरूरत

केंद्रीय जल आयोग की विस्तृत रिपोर्ट में नदियों के क्षेत्र के पुनर्निधारण की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय नदियां अपने वास्तविक पथ के अलावा बाढ़ पथ की ओर भी बढ़ सकती हैं। मौजूदा अतिक्रमण से नदियों का वास्तविक पथ ही गायब हो चला है।

उत्तराखंड के सभी डिविजन कार्यालयों सहित दिल्ली को रिपोर्ट भेज दी गई है। इसमें हमने दोनों प्रदेशों के हजारों गांवों को अन्यत्र बसाने और नदियों के क्षेत्र को समझने पर जोर दिया है।

चंद्रसेन, प्रभारी, डिविजन ऑफिस केंद्रीय जल आयोग हरिद्वार

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