गायब होने के कगार पर एक्स्ट्रामाइल, स्पीड जैसे ईंधन

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माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता बढ़ाने के दावे के साथ विभिन्न तेल कंपनियों की ओर से बाजार में उतारे गए एक्स्ट्रामाइल, स्पीड जैसे प्रीमियम ईंधन गायब होने के कगार पर हैं। महंगाई के दौर में उपभोक्ताओं की इन ईंधनों से दूरी लगातार बढ़ रही है।

आलम यह है कि महज दस फीसदी मांग के बीच दो-तीन पंप संचालक ही अपने यहां यह ईंधन बेच रहे हैं, बाकी 90 प्रतिशत से अधिक पंपों पर प्रीमियम ईंधन के टैंकों को साधारण ईंधन से बदल लिया गया है। सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए तेल कंपनियों ने वर्ष 2004-05 में अलग-अलग नामों से प्रीमियम ईंधन बाजार में उतारे थे।

शुरुआत में माइलेज बढ़ाने की उम्मीद में साधारण तेल से एक-दो रुपये महंगे इस ईंधन की ओर लोगों का खासा रुझान बढ़ा। लेकिन, धीरे-धीरे दाम बढ़ते गए और अंतर दस रुपये तक जा पहुंचा। इसका असर भी प्रीमियम तेल की� बिक्री पर नजर आया। दून तेल एसोसिएशन के सचिव अमरजीत सेठी कहते हैं कि शहर में मौजूद करीब 38 पंपों में से बमुश्किल 2-3 में ही यह ईंधन उपलब्ध होगा।

गांधी रोड स्थित मेघदूत फिलिंग स्टेशन के संचालक पंकज का कहना है कि लोग यह तेल नहीं डलवाते, लिहाजा उन्होंने प्रीमियम ईंधन मंगाना बंद कर दिया है। एस्ले हाल स्थित स्टार फिलिंग स्टेशन के संचालक पंकज ने बताया कि उन्होंने तो प्रीमियम तेल टैंक को साधारण टैंक में बदल लिया है।

हाई क्लास ही खरीदार

राजपुर रोड स्थित यूनिवर्सल पेट्रोल पंप के संचालक मनीष बताते हैं कि उनके यहां प्रीमियम ईंधन मिलता है, लेकिन हाई क्लास लोग ही महंगे एसयूवी वाहनों में यह तेल डलवाते हैं। बताया कि रेट में भारी अंतर की वजह से बिक्री कम हो गई है। पहले हर महीने 200 किलोलीटर तक पेट्रोल बिकता था और 40 किलोलीटर भी मुश्किल से बिक पाता है। डीजल की बिक्री तो 15 हजार किलोलीटर तक ही पहुंच पाती है।

तेल की कीमत
साधारण पेट्रोल- 71.93 रुपये, प्रीमियम- 81.24 रुपये
साधारण डीजल-54.31 रुपये, प्रीमियम- 67.50 रुपये

तेल की खूबी
-ऑक्टेन की मात्रा अधिक होती है
-गाड़ी से धुआं कम निकलता है
-इंजन साफ रखने का भी करता है काम
-माइलेज में 10-15 फीसदी तक बढ़ोतरी

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