छवि बचाने को अब संघ से आमने-सामने बात करेंगे मोदी

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modi-rss-53457702f1348_exlstभारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हो रही बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता भी बेंगलूरु में रहेंगे और कार्यकारिणी की बैठक से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक करेंगे।

यह बैठक तीन अप्रैल को होगी। इसमें संघ नेता प्रधानमंत्री से उन तमाम मुद्दों पर दो सीधी बात करेंगे जिन्हें लेकर संघ और उसके कार्यकर्ताओं के बीच खासी बेचैनी है। प्रधानमंत्री के साथ संघ के शीर्ष नेताओं की इस बैठक को बेहद अहम और गंभीर माना जा रहा है।

यह जानकारी देने वाले संघ नेताओं का कहना है कि बैठक में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों जिनसे संघ वैचारिक रूप से सहमत नहीं है, सरकार के कुछ मंत्रियों के कामकाज, हिंदुत्व के एजेंडे और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री से चर्चा होगी।

जिनकी वजह से संघ को लगता है कि जनता और संघ कार्यकर्ताओं के बीच सरकार और भाजपा को लेकर अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। बैठक के बाद संघ नेता दिल्ली में चार से छह अप्रैल तक आयोजित एक कार्यक्रम के लिए राजधानी आ जाएंगे।

मंगलवार को दिल्ली में संघ के सह सरकार्यवाह और राजनीतिक मामलों के प्रभारी कृष्णगोपाल ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महासचिव रामलाल के साथ लंबी बैठक करके बेंगलूरु में प्रधानमंत्री के साथ संघ नेतृत्व की बैठक की रूपरेखा तैयार की।

संघ नेतृत्व जुड़े एक नेता ने बताया कि सर संघ चालक मोहन राव भागवत की पहल पर सरकार के साथ संवाद बनाए रखने के लिए गठित समन्वय समिति के सदस्य सर कार्यवाह सुरेश राव भैया जी जोशी, संघ के राजनीतिक मामलों के प्रभारी सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल और पूर्व प्रभारी सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी बेंगलूरू में प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक करेंगे।

बैठक में संघ नेताओं के अलावा भाजपा के संगठन महासचिव रामलाल भी होंगे और जरूरत पडऩे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हो सकते हैं। बताया जाता है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलूरू जाएंगे।

संघ नेतृत्व चाहता है कि इस मौकेपर सीधे मोदी के साथ सरकार की नीतियों, कार्यशैली, मंत्रियों के कामकाज और जनता के बीच भाजपा और मोदी सरकार को लेकर बनती बिगड़ती छवि पर स्पष्ट बातचीत की जाए।

हालाकि संघ की ओर से भैया जी जोशी, कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय होसबोले जैसे वरिष्ठ नेता दिल्ली में यदा कदा प्रधानमंत्री से संवाद करते रहते हैं। लेकिन इसमें समग्रता में बातचीत होने की बजाय संबंधित मुद्दे पर ही ज्यादा चर्चा होती है।

जबकि संघ नेतृत्व प्रधानमंत्री के साथ ऐसी मुलाकात चाहता था कि जिसमें संघ के प्रमुख वरिष्ठ नेता एक साथ सीधे प्रधानमंत्री से समग्रता में चर्चा कर सकें। हालाकि यह बातचीत दिल्ली में भी हो सकती थी।

लेकिन दिल्ली में प्रधानमंत्री की अन्य तमाम व्यस्तताओं के साथ मीडिया की अधिकता भी एक अड़चन है। इसलिए बेंगलूरु में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मौके को इसके लिए बेहतर माना गया।

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