जानिए, मोदी की बीमा योजनाओं से किसे होगा असली फायदा?

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accidetal-insurance-553b21432c401_exlstप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रचारित जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना पर अभी से सवाल उठने लगे हैं। जीवन ज्योति बीमा योजना का कवरेज सिर्फ 18 से 50 साल के लोगों को ही मिल रहा है, जबकि इस उम्र में मृत्यु दर सबसे कम होती है। इसी तरह सुरक्षा बीमा योजना में भी अपंग होने की स्थिति में पर्याप्त मुआवजे का प्रावधान नहीं किया गया है।

इन दोनों योजनाओं का कवरेज आगामी एक जून से शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 18 से 50 साल तक के लोगों को दो लाख रुपये के बीमा का पात्र बनाया गया है। उनसे हर साल 330 रुपये का प्रीमियम लिया जाएगा। इसमें से बैंक का 11 रुपये तथा एजेंसी/बैंकिंग कॉरिस्पान्डन्ट का 30 रुपये का कमीशन काट दिया जाए तो बीमा कंपनी को प्रति लाभार्थी 289 रुपये मिलेंगे।

देश में 18 साल से पहले, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर काफी अधिक है। इसी तरह 50 वर्ष की उम्र से ऊपर के लोगों की मृत्यु दर भी अधिक है लेकिन उन्हें बीमा के दायरे से बाहर कर दिया गया है।

हालांकि 330 रुपये के सालाना प्रीमियम के मुकाबले दो लाख रुपये का बीमा काफी सस्ता है लेकिन अगर आप करोड़ों पॉलिसी होल्डर से मिलने वाली राशि का हिसाब लगाएंगे तो पता चलेगा कि एलआईसी एवं अन्य जीवन बीमा कंपनियों को काफी फायदा होने की गुंजाइश है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लें कि हर साल 10 करोड़ लोगों ने इस योजना में बीमा कराया तो बीमा कंपनी को दस साल में 28,900 करोड़ रुपये मिलेंगे।

दो लाख रुपये की दर से यदि मुआवजा राशि की गणना करें तो मूल धन से ही करीब 14.50 लाख लोगों को मुआवजा दिया जा सकेगा। कंपनी इस राशि को बैंक में रखेगी तो ब्याज के पैसे अलग से मिलेंगे। वैसे भी भारत में लोगों की औसत उम्र 65.5 वर्ष है।

सुरक्षा बीमा योजना में 12 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपये के दुर्घटना बीमा का प्रावधान है। इसमें 18 से 70 साल के लोगों को पात्र बनाया गया है।

योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति के इलाज का इंतजाम नहीं है। दुर्घटना में दोनों हाथ, दोनों पैर या दोनों आंखें खराब होने पर ही दो लाख रुपये का क्लेम मिलेगा। यदि एक आंख, एक पैर या एक हाथ खराब होता है तो एक लाख का ही क्लेम मिलेगा।

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