दवाओं की ऑनलाइन खरीद बिक्री पर हो कड़ी निगरानी 

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medisinनई दिल्ली।  पिछले 14 अक्टूबर को आनलाइन दवाइयों की बिक्री के विरोध में पूरे भारत में दवाइयों को दुकानें बंद कर गई थीं। लगभग 18 हजार दुकानें इस हड़ताल में शामिल हुई। ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की यह हड़ताल थी। आनॅलाइन दवाइयां बेचने के विरोध में हुई हड़ताल कुछ हद तक सही भी हैं। क्योंकि कई मामलों में ऑनलाइन दवाइयां खरीदना खतरनाक भी हो सकता है।

डाक्टरों की राय मानें तो ऑनलाइन दवाई की बिक्री फायदेमंद हो सकती हैं, बशर्ते इसे ठीक से मैनेज किया जाए। उत्तरी अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में यह बखूबी काम कर करा है। मगर भारत जैसे देश में आनलाइन दवाई की खरीद बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत हैं। यहां कई लोग ऐसे भी हैं, जो अपने मन से कोई भी दवाई खा लेते हैं। ऑनलाइन दवाइयां खरीदने में न कोई बंधन हैं और न ही कोई पूछताछ। ऐसे में इन दवाइयों का गलत इस्तेमाल होना कोई बड़ी बात नहीं है।

डिजिटल इंडिया का सपना देखने वालों के लिए यह अच्छी पहल है। ऑनलाइन दवाइयों की खरीदारी में कुछ अच्छाई भी है, तो कुछ खामियां भी। अगर इस सिस्टम को बेहतर तरीके से निगरानी में नहीं रखा गया, तो लाखों जिंदगियां खतरे में पड़ सकती हैं।

कई कफ सीरप और अन्य दवाइयां ऐसी होती हैं जिसे ज्यादा मात्रा में लेने पर यह खतरनाक हो सकता है। आजकल कॉलेज या स्कूली छात्र में इतना भी सब कहीं हैं कि वो कुछ दिन इंतजार कर सकें बीमारी ठीक होने का। उन्हें बस झटपट इलाज चाहिए। ऐसे में ऑनलाइन शापिंग खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती हैं।

ऑनलाइन खरीदारी के कई फायदे भी हैं।

जैसे-

– यह आसान, सहज और प्राइवेट है।

– घर बैठे दवाइयां उपलब्ध हो जाती हैं और समय भी बचता है।

– जो मरीज चल-फिर नहीं सकते और बुजुर्ग लोगों के लिए ऑनलाइन दवाइयां मंगवाना बेहतर होता है। ऐसे में इन्हें परिवार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

– ऑनलाइन दवाइयां कइ्र बार सस्ते दामों में मिल जाती है इन पर चल रहे डिस्काउंट के कारण। जहां इसके कई फायदे हैं, वहीं इसके कई नुकसान भी हैं।

– कई बार दवाइयों की डिलीवरी के दौरान दवाइयां मिक्स होने का खतरा बना रहता है।

– ऑनलाइन डिलीवरी में दवाइयों के खाने के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। ऐसे में गलती से दवाई का ज्यादा सेवन खतरनाक हो सकता है।

– कई बार ऐसी दवाइयां भी आर्डर कर मंगवा ली जाती हैं, जो खराब हो चुकी होती हैं।

– ऑनलाइन दवाइयों का सबसे बडा नुकसान यह हैं कि लोग खुद इलाज करने लग जाएंगे। नतीजा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में इजाफा।

ऑनलाइन दवाइयां अपने डाक्टर की सलाह के बिना न मंगवाएं। दवाइयां वहीं से खरीदें, जिसे लाइसेंस मिला हो। अगर दवाई मंगवाने या आनलाइन आर्डर में दिक्कत हो, तो मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया से संपर्क करें। बच्चों को ऑनलाइन फार्मेसी से दूर रखें, वरना वे इनका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इमरजैंसी के दौरान पास के फार्मेसी दुकान से ही दवाइयां खरीदें क्योंकि ऑनलाइन डिलीवरी में समय लगता हैं।

आनलाइन फार्मेसी सुरक्षित करने के लिए पोर्टल को डॉक्टर से रजिस्टर्ड कराएं। जितनी भी दवाइयां उपलब्ध हैं सब डॉक्टर से जांची होनी चाहिए। सही कंपनी की ही दवाइयां उपलब्ध होनी चाहिए। मेडिकल स्टोर्स के समान की कीमत ही ऑनलाइन दवाइयां की कीमत भी तय होनी चाहिए।

 

 

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