नहीं सुधरी व्यवस्थाएं

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09_03_2015-8gopp1-c-2गोपेश्वर : चमोली जिले में शिक्षा महकमे को मिला बजट तो विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही खर्च कर दिया। लेकिन, अधिकतर कार्य आज भी धरातल पर विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहे हैं। स्कूलों में विद्युत सुविधा नहीं है। आपदा में क्षतिग्रस्त अधिकतर विद्यालय भवनों पर मरम्मत का कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है और शिक्षा विभाग धनराशि की कमी का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।
वर्ष 2013 में आई आपदा से क्षतिग्रस्त हुए विद्यालय भवनों का निर्माण तक विभाग अभी पूरा नहीं कर पाया है। ऐसे में कई जगह तो क्षतिग्रस्त भवनों के अंदर ही पठन-पाठन चल रहा है। इसके अलावा कुछ जगह पंचायत भवनों में नौनिहालों का पठन-पाठन चल रहा है। विभाग किस प्रकार अपने कार्यो के प्रति संजीदा है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आपदा में क्षतिग्रस्त 500 विद्यालय भवनों पर अभी कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं सरकार की ओर से स्कूलों को विद्युतीकृत करने की योजना भी धूल फांक रही है। पहले तो विभाग की लेट लतीफी से मीटर लगाने का कार्य शुरू नहीं किया गया। मीटर पहुंचने के बाद मीटर लगाए भी गए। लेकिन, अब सरकार की ओर से धनराशि न मिलने के कारण विद्यालयों में विद्युत फिटिंग का कार्य ही शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा रमसा के अंतर्गत निर्माणाधीन पांच से अधिक भवनों का निर्माण भी विभाग पिछले कई सालों में पूरा नहीं कर पाया है। इससे अव्यवस्थाएं छात्र-छात्राओं के अध्ययन पर भारी पड़ रही है।
यह है स्थिति
प्राथमिक शिक्षा-सर्व शिक्षा
राज्य सेक्टर
अनुमोदित परिव्यय- 1573.87
अवमुक्त- 1047.08
व्यय- 1041.04
केंद्र पोषित
अनुमोदित परिव्यय- 2922.91
अवमुक्त-1944.58
व्यय-1933.37
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माध्यमिक शिक्षा
जिला सेक्टर
अनुमोदित परिव्यय-675.00
अवमुक्त-60.25
व्यय-60.25
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यह है स्थिति
प्राथमिक- 976
क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन-400
माध्यमिक-200
क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन-98
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जो विद्यालय क्षतिग्रस्त हैं और आपदा के मानकों में नहीं आ पाए। उनके सुदृढ़ीकरण के लिए सर्व शिक्षा अभियान की री-प्लानिंग में धनराशि की मांग की गई है। आपदा में क्षतिग्रस्त 50 प्रतिशत विद्यालय भवनों पर कार्य पूर्ण कर दिया गया है।
हरीशचंद्र सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली

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