नेपाल ने राहतकर्मियों से कहा, अब वापस जाओ, आखिर क्यों?

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nepal-earhquake-3-1-554079c7f24c4_exlstकुदरती कहर की मार झेल रहे नेपाल में विदेशी सहायता को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भारत सहित अन्य देशों से मिलने वाली सहायता पर कुछ कम्युनिस्ट नेताओं के सवाल उठाने और सोशल मीडिया पर भारतीय मीडिया के प्रति नेपाली लोगों की नाराजगी के बीच सरकार ने विदेशी राहत टीमों से स्वदेश लौटने को कहा है।

नेपाल सरकार ने कहा है कि आपदा के आठ दिन बीत जाने के बाद अब मलबे में किसी के बचे होने की संभावना ना के बराबर है, ऐसे में भारत और 33 अन्य देशों के करीब 4500 राहत कर्मी अपने देश लौट जाएं। अब लोगों के पुनर्वास पर ध्यान दिया जाएगा और बाकी काम नेपाली सेना और पुलिस करेगी।

इस फैसले के पीछे उस अंतरराष्ट्रीय निर्देश का हवाला दिया गया है जिसके तहत किसी भी देश में विदेशी राहत टीमें एक सप्ताह से अधिक नहीं रह सकतीं। गौरतलब है कि कुछ कम्युनिस्ट नेताओं ने नेपाल को मिल रही व्यापक विदेशी सहायता को देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।

वहीं, नेपाली नागरिकों ने सोशल मीडिया में भारतीय मीडिया पर भारत के राहत कार्यों को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, नेपाल के उप प्रधानमंत्री प्रकाश मान सिंह ने कम्युनिस्ट नेताओं के दबाव से इनकार किया है।

उन्होंने कहा कि इस समय नेपाल को विदेशी सहायता, विदेशी विशेषज्ञ और राहत सामग्री की जरूरत है, और जो देश ऐसा कर रहे हैं उसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि बचाव कार्य में लगे भारतीय विमान उसकी उत्तरी हवाई सीमा (चीन से लगी नेपाल की सीमा) का उल्लंघन कर पड़ोसी देश में घुस गए।

उन्होंने कहा कि सभी विमानों के संचालन की कमान नेपाली सेना के पास है और ऐसी कोई संभावना नहीं है। नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश की सरकारों से कहा गया है कि वे अपनी पहली प्रतिक्रिया टीमें वापस बुला लें। अब मलबों को हटाने के लिए उपकरणों की जरूरत है और इसके लिए भारत से सहयोग मांगा गया है।

उधर, नेपाल के सूचना मंत्री मिनेंद्र जिराल ने कहा कि काठमांडू और आसपास के इलाकों में अधिकतर राहत और बचाव कार्य पूरा हो चुका है और बाकी के काम स्थानीय मजदूर पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि मेडिकल टीमें कुछ और समय तक नेपाल में रहेंगी।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद धकल ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय कुछ मेडिकल टीमों को उनकी विशेषज्ञता के आधार फिलहाल देश में सेवा देने की अनुमति देगी। बाकी टीमों से स्वदेश लौटने को कहा जाएगा।

नेपाल सरकार के राहत और बचाव अभियान रोकने के अनुरोध के बाद हमने अपनी यूनिटों को स्वदेश भेजने का पहला चरण शुरू कर दिया है। पहले चरण में तीन टीमें सोमवार को सड़क मार्ग से पटना के लिए रवाना हो रही है। अगले कुछ दिनों में शेष टीमों को हवाई या सड़क मार्ग से स्वदेश पहुंचाया जाएगा।� -ओपी सिंह, महानिदेशक, एनडीआरएफ

नेपाल में राहत और बचाव अभियान चलता रहेगा। नेपाल सरकार ने मलबे हटाने के लिए अर्थ-मूविंग मशीनों की मांग की है।
– विकास स्वरूप, प्रवक्ता, भारतीय विदेश मंत्रालय

नेपाल सरकार के विदेशी राहत और बचाव टीमों को स्वदेश भेजने के फैसले के बीच नई दिल्ली में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा है कि यह फैसला भारत को लक्षित कर नहीं लिया है, बल्कि यह फैसला अभियान में जुटे 33 अन्य देशों के लिए है। नेपाल अब पुनर्वास की ओर बढ़ रहा है और भारत पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल रहेगा।

नेपाल सरकार के फैसले पर उठे सवाल के बीच विदेश सचिव एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद उपाध्याय ने कहा कि आपदा के 6-7 घंटे के भीतर राहत और बचाव पहुंचाने के लिए नेपाल भारत का आभारी है। मीडिया स्थिति को सकारात्मक रूप में देखे।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार की प्रतिबद्धता उनके साथ है। हम अपनी प्राथमिकता बताएंगे। जहां तक बचाव ऑपरेशन का विषय है तो यह पूरा होने के कगार पर है। इसलिए नेपाल सरकार ने सभी मित्रों से अपने देश लौटने की तैयारी करने को कहा है।

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