बेघर लोगों को आसरे की तलाश

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चंदराम राजगुरु, त्यूणी

प्रकृति की मार से बेहाल नेपाली मूल के कुछ मजदूर परिवार आसरे की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। आपदा में सब कुछ गंवा चुके इन परिवारों के पास न रहने को घर है और न ही खाने को राशन। सालों पूर्व रोजी-रोटी की तलाश में अपना घर छोड़ उत्ताराखंड के बंगाण क्षेत्र में आकर बसे इन मजदूर परिवारों को अब स्थायी ठौर की चिंता खाए जा रही है। मेहनत मजदूरी कर खड़ा किया सपनों का आशियाना आंखों के सामने जमींदोज हो गया। साथ ही अब दो जून की रोटी का संकट भी गहरा गया है। बरसात के चलते दुचाणू खड्ड उफनने से जहां एक ओर नेपाली मजदूरों के आशियाने ताश के पत्ताों की तरह बिखर गए, वहीं दर्जनभर से ज्यादा बागवानों के सेब के बगीचे तबाह हो गए।

जौनसार-बावर की सीमांत तहसील त्यूणी से सटे बंगाण क्षेत्र के कोटीगाड़ पट्टी में कुछ दिन पहले प्रकृति ने जमकर कहर बरपाया। आसमान से बरसी आफत ने कुछ मजदूर परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए और कई बागवानों को गहरे जख्म दिए, जिससे उभरने में लंबा वक्त लगेगा। वर्षो पूर्व अपना मुल्क छोड़ रोजी रोटी की तलाश में बंगाण क्षेत्र में आकर बसे कुछ नेपाली मूल के परिवार कुदरत की मार से बेहाल हैं।

हाल ही में हुई अतिवृष्टि के चलते पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा-बोल्डर आने से माकुड़ी के पास सेब के बगीचा तहस-नहस हो गया। यहीं रहने वाले नेपाली मूल के शिवशंकर का 13 वर्षीय बेटा सूरज मकान के अंदर घुसे मलबे में जिंदा दफन हो गया। वहीं, दुचाणू खड्ड उफनने से टिकोची में रह रही बालो देवी पत्नी धर्म सिंह थापा का आशियाना मलबा-बोल्डर गिरने से ढेर हो गया। आशियाने उजड़ने से बेघर हुए ये परिवार अब आसरे की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

सालों पूर्व नेपाल छोड़ यहां आकर बसे इन परिवारों के बच्चे उत्ताराखंड में पैदा हुए, जिन्हें अपने मुल्क की कोई जानकारी नहीं है। इनमें कई नेपाली परिवारों के तो यहां बाकायदा राशन कार्ड व फोटो पहचान पत्र भी हैं। ऐसे में खानाबदोश जिंदगी जी रहे इन नेपाली मजदूर परिवारों को बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। आपदा से प्रभावित इन बेघर परिवारों को स्थानीय प्रशासन ने सहायता के नाम पर सिर्फ चार कंबल, तिरपाल व कुछ राशन देकर इतिश्री कर ली।

दुचाणू खड्ड उफनने से माकुड़ी, दुचाणू, टिकोची व डगोली निवासी विक्रम सिंह रावत, मनमोहन चौहान, सुरेंद्र सिंह, सरदार सिंह, ज्ञान सिंह, तोताराम समेत दर्जनभर से ज्यादा बागवानों के सालों की मेहनत कर तैयार किए गए सेब के बगीचे तबाह हो गए। वहीं, भूस्खलन से डगोली गांव का अस्तित्व भी खतरे में है। गांव के दोनों ओर नाला बहने से लगातार हो रहे भूकटाव के चलते लायकराम, खिमदत्ता, कामेश्वर नौटियाल, जयकृष्ण, सीताराम, विष्णुदत्ता व मस्तराम समेत आधा दर्जन से ज्यादा लोगों के मकानों में दरारें आ गई हैं। प्रभावितों ने शासन-प्रशासन से गांव के विस्थापन और आपदा की मार से बेहाल कुछ मजदूर परिवारों व बागवानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

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