संसाधनों का सदुपयोग

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24_03_2015-23utilization1aहम में से तमाम लोग संसाधन न होने या सीमित संसाधनों का रोना रोते हुए अपनी विफलताओं के लिए अक्सर इसी को जिम्मेदार ठहराते हैं। आइसीसी वल्र्ड कप के खिताब के करीब पहुंच चुकी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने हाल में कहा कि उनकी अब तक की सफलता का राज सीमित संसाधनों का दुखड़ा रोने की बजाय उपलब्ध संसाधनों का बेहतरीन इस्तेमाल करना रहा है। जो नहीं है, उसके लिए परेशान होने की बजाय जो कुछ भी हमारे पास है, उसी के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देना क्यों जरूरी है, बता रहे हैं अरुण श्रीवास्तव…
वर्ल्ड कप क्रिकेट शुरू होने से पहले भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया से हर मोर्चे पर हार रही थी। न तो बल्लेबाजी कोई खास चल रही थी और न ही गेंदबाजी। ऐसे में विशेषज्ञ, पूर्व खिलाड़ी और सबसे ज्यादा मीडिया सभी भारतीय टीम में शामिल खिलाड़ियों के चयन पर सवाल उठा रहे थे। इतना ही नहीं, कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को भी चुका हुआ बताया जाने लगा था। ऐसे में कोई भी भारतीय टीम से उम्मीद नहीं कर रहा था कि वह अपराजेय रहते हुए इतना आगे तक जाएगी, लेकिन वर्ल्ड कप के आगे बढ़ने के साथ जैसे-जैसे भारतीय टीम का विजय रथ आगे बढ़ा, हर किसी के सुर बदल गए। धौनी की कूल-कामयाब स्ट्रेटेजी और बल्लेबाजों-गेंदबाजों के जोरदार प्रदर्शन में कसीदे पढ़े जाने लगे। इस दौरान एक सवाल के जवाब में धौनी ने कहा कि जीवन एक सर्किल की तरह की तरह है, जिसमें हम बार-बार एक ही जगह पहुंचते हैं। 2007 का ट्वेंटी-20 और 2011 का वल्र्ड खिताब दिला चुके धौनी ने यह भी कहा कि उनके सामने भी अक्सर पर्याप्त संसाधन न होने की चुनौती आती रही है, लेकिन उनके आगे हथियार डालने या हार मान लेने की बजाय उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ ही आगे बढ़ने का लगातार हौसला रखा। खराब प्रदर्शन पर आलोचना के बावजूद उन्होंने खुद को शांत रखते हुए टीम को संभाला और उसे लगातार मोटिवेट किया।
धौनी की सीख
दुनिया के कामयाब कप्तानों में शुमार हो चुके धौनी के अनुभव से निकली ये बातें हम सभी के लिए बड़ी सीख हैं। भारतीय टीम में प्रभावशाली तेज गेंदबाजों की कमी हमेशा से खलती रही है। कुछ तो बात है, जिसके कारण उसी ऑस्ट्रेलिया में कुछ माह पहले खराब प्रदर्शन से जूझ रहे हमारे गेंदबाज न सिर्फ असरदार गेंदबाजी करने लगे, बल्कि पिछले सात मैचों में विपक्षी टीम के सभी सत्तर विकेट लेकर सबको चुप करा दिया। दरअसल, धौनी ने अपने टीम मेंबर्स की कमियों पर विचार करके चुपचाप उन्हें सुधारने की स्ट्रेटेजी पर काम किया। कोई बहाना बनाने की बजाय उन्होंने और उनकी टीम ने खुद को साबित करके दिखा दिया।
तलाशें अवसर
धौनी, उनकी टीम और उनकी कूल स्ट्रेटेजी से आपको भी सबक लेने चाहिए। कई किशोर और युवा इस बात से परेशान रहते हैं कि परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें मनपसंद क्षेत्र में आगे बढ़ने और पढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा। कई का यह भी कहना होता है कि उनके यहां पढ़ने-लिखने का उपयुक्त माहौल नहीं है। उन्हें पढ़ने, जानने, सीखने का मौका और संसाधन नहीं मिल पाते। जरा सोचें, इस तरह की स्थिति सिर्फ आपके साथ ही नहीं है। देश में लाखों-करोड़ों लोग आपकी तरह ही अभावों-सीमित संसाधनों के बीच रह रहे हैं। लेकिन अभावों का रोना रोते रहने से क्या हासिल होगा? इसके बजाय आपको रास्ते तलाशने चाहिए। आप पढ़ना चाहते हैं, तो ट्यूशन या पार्टटाइम काम करके अपनी फीस और जेबखर्च के पैसे जुटा सकते हैं। ईमानदारी, मेहनत से काम करते हुए दिमाग का सही इस्तेमाल करेंगे, तो अपनी अलग पहचान बनाते हुए अपनी योग्यता के मुताबिक और बेहतर काम भी पा सकते हैं।
स्किल निखारें
पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पसंद के किसी क्षेत्र में स्किल डेवलप करने पर भी जरूर ध्यान दें। अगर किसी आइटीआइ, पॉलिटेक्निक, बीटेक/बीई या समकक्ष रेगुलर कोर्स में एडमिशन मिल जाए, तो वहां पढ़ाई करने के साथ-साथ संबंधित ब्रांच/क्षेत्र में इंडस्ट्री के साथ निजी स्तर पर अपने संपर्क बढ़ाएं और वहां से धैर्य के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करें। संस्थान के संसाधनों को कोसते न रहें। खुद पहल करें। काम सीखने के दौरान खुद को हमेशा विनम्र रखें और किसी काम को छोटा या बड़ा न समझते हुए सीखने से संकोच न करें। सीखने-प्रशिक्षण लेने का यह सिलसिला लगातार बनाए रखें। अगर यह लगे कि एक जगह आपने सभी काम सीख लिए हैं, तो इसके बाद दूसरी जगह प्रयास करें।
प्रैक्टिकल तकनीकी नॉलेज हासिल करने से आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आप जब कोर्स पूरा करके निकलेंगे, तो आपको नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अगर किसी कारण आप रेगुलर कोर्स नहीं कर पा रहे, तो भी परेशान न हों। आज के समय में ऐसे तमाम निजी संस्थान भी हैं, जो कई तरह के तकनीकी कोर्स संचालित करते हैं। बस, आपको देखना यह होगा कि वह संस्थान प्रामाणिक है या नहीं और वहां मार्केट/इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक ट्रेनिंग दी जाती है या नहीं। अगर वहां इंडस्ट्री की रिक्वॉयरमेंट के मुताबिक जरूरी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध है, तो उसे ज्वॉइन कर सकते हैं।
बेस्ट देकर बनाएं पहचान
आप पढ़ाई कर रहे हों या फिर कहीं कोई जॉब, आपको टाइम पास करने या कैजुअल अप्रोच अपनाने की बजाय अपना बेस्ट देने का प्रयास करना चाहिए। आप अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे, तभी उसका बेहतर रिजल्ट आएगा और आपकी पहचान बनेगी। ऐसे लोग कभी भी अपनी पहचान नहीं बना पाते, जो काम से जी चुराते हैं या काम में अपना मन नहीं लगा पाते। अगर कोई काम आपको मुश्किल लगता है या फिर आप खुद को उसमें कमजोर पाते हैं, तो पूरी इच्छाशक्ति के साथ उस कमजोरी को दूर करने पर ध्यान दें।

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