सीमा विवाद पर चीन का ये बयान मोदी को कर सकता है परेशान

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india-china-553652a1dcac0_exlstप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के वक्त भारत और चीन के बीच सीमाई मुद्दों का हल निकलने की उम्मीद को चीन ने कोई खास तवज्जो नहीं दी है। उसने सपाट शब्दों में कहा है कि सीमा विवाद के मुद्दे रातोंरात नहीं सुलझते।

ऐसे मुद्दे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से वार्ताओं के बाद ही सुलझाए जा सकेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय का यह बयान उस वक्त आया है, जब भारत पीएम मोदी के चीन दौरे के वक्त सीमा विवाद का हल होने की दिशा में किसी नतीजे तक पहुंचने की उम्मीद कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे से संबंधित एक सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, ‘हमें इस दौरे से बहुत उम्मीदें हैं। मगर, सीमा विवाद का मुद्दा हम दोनों के लिए अहम है, जिसे हम चर्चा के जरिए ही सुलझाएंगे। दोनों पक्ष जल्द से जल्द इस मुद्दे को हल करने को इच्छुक हैं और इसको अंजाम तक पहुंचाने के लिए जबरदस्त कोशिश भी कर रहे हैं।

दोनों देश के लोगों की भावनाएं भी इस मुद्दे का जल्द से जल्द निपटारा चाहती हैं। मगर, हम सभी जानते हैं कि� सीमा का यह सवाल इतिहास की देन है और इसे रातोंरात नहीं सुलझाया जा सकता है।’

उन्होंने कहा कि इस दिशा में विशेष प्रतिनिधियों और सीमा मुद्दे से संबंधित प्रक्रियाओं के तहत ही कोशिशें चल रही हैं। चुनयिंग ने कहा इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए हम सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए हमें इस दिशा में संयुक्त रूप से कोशिश करनी होगी।

दौरे से एक दिन पहले ही मंगलवार को चीनी मीडिया ने मोदी को सयाना बताकर चीनी नेतृत्व को एक तरह से सावधान किया। अपने ओपेड पेज में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपनी घरेलू छवि चमकाने के लिए सीमा विवाद और चीन के खिलाफ सुरक्षा मुद्दों को लेकर ‘सयानापन’ दिखाने के आरोप लगाए थे।

इस लेख में शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज में शोधकर्ता हू झियोंग ने कहा कि मोदी ने जब से सत्ता संभाली है, उन्होंने जापान, अमेरिका, यूरोपीय देशों से भारत के संबंध बढ़ाने पर जोर दिया है, ताकि देश के खराब आधारभूत ढांचे और आर्थिक विकास को बढ़ाया जा सके। दरअसल वह दूरदर्शी होने के बजाए यथार्थवादी हैं।’

अखबार के मुताबिक, अपने राजनीतिक हितों के लिए मोदी को विवादित सीमा क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश) का दौरा नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें ऐसी कोई टिप्पणी करनी चाहिए, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को ठेस पहुंचती हो। भारत सरकार को दलाईलामा का समर्थन करना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए और चीन-भारत के बीच संबंधों में रुकावट के लिए तिब्बत को मुद्दा बनाना बंद करना चाहिए।

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