रुद्रप्रयाग में ‘मंगेश’ के ‘मंगल अभियान’ के १०० दिन पूरे। आमजन के लिए बने देवदूत।

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संजय चौहान
संजय चौहान

आज तक आपने अखबारों से लेकर टीवी में केवल सरकारों, प्रधानमंत्रीयों, मुख्यमंत्रियों, के १०० दिनों के कार्यकाल का लेखाजोखा और रिपोर्ट कार्ड देखा होगा। लेकिन पहली बार ग्राउंड जीरो से आपको लीक से हटकर एक ऐसे जिलाधिकारी के १०० दिनों का रिपोर्ट कार्ड दिखा रहें हैं। जिन्होंने महज १०० दिनों में उतना कार्य कर लिया है। जितना जनपद के २० सालों के इतिहास में २२ जिलाधिकारी नहीं कर पाये हैं। जो आमजन के लिए किसी देवदूत से कम नहीं हैं।

बाबा केदार की धरती रुद्रप्रयाग जनपद हमेशा से ही आईएएस अधिकारीयों के लिए एक प्रयोगशाला का केंद्र और प्रशिक्षण संस्थान के रूप में जाना जाता रहा है। १९९७ में चमोली से पृथक होकर रुद्रप्रयाग जनपद का गठन हुआ था। २९ सितम्बर १९९७ को भुवनेश कुमार जनपद के पहले जिलाधिकारी बने। कुछ समय बाद ही उनका यहाँ से तबादला हो गया। तब से लेकर तबादलों की ये परिपाटी बदस्तूर जारी है। आज २० बरस पूरे होने को है और इन २० बरसों में जनपद ने २२ जिलाधिकारी देख लिए हैं।

१८ मई को मंगेश घिल्डियाल ने रुद्रप्रयाग जनपद के २३ वें जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। और आज २५ अगस्त को उन्होंने रुद्रप्रयाग जनपद में अपने कार्यकाल के १०० दिन पूरे कर लियें हैं। विगत २० सालों में मंगेश घिल्डियाल जनपद के पहले ऐसे जिलाधिकारी हैं। जिन्होंने इन १०० दिनों में केवल और केवल जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। रुद्रप्रयाग में जिलाधिकारी का कार्यभार ग्रहण करते ही जनपद में समस्याओं के पहाड़ ने उनका स्वागत किया। उनकी सबसे बडी और पहली प्राथमिकता केदारनाथ यात्रा की ब्यवस्थाओं को चाक चौबन्द करना था। जिसको अमलीजामा पहनाते हुए उन्होंने सबसे पहले केदारनाथ यात्रा में तीर्थयात्रियों को हो रही समस्याओं का संज्ञान लिया और खुद यात्री बनकर गोरीकुंड से पैदल केदारनाथ धाम पहुंचे। जहाँ उन्हें भारी अनियमितिता मिली और सभी विभागों को तत्काल व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने की हिदायत दी। हैली कम्पनियों द्वारा मनमानी/ निर्धारित मूल्य से ज्यादा धनराशी लिए जाने की यात्रियों से मिल रही शिकायत की सत्यता जांचने के लिए वे एक यात्री बनकर टिकट लेने गए। जहाँ उन्हें शिकायत सही मिली। जिसके बाद उनके द्वारा कार्यवाही हेतु नागरिक उड्डयन विभाग को लिखा गया। यही नहीं केदारनाथ में भोले के दर्शनार्थ लम्बी लम्बी कतारों में खड़े तीर्थयात्रियों के लिए धूप और बारिश से बचने के लिए ३ हजार छातों का बंदोबस्त करवाया। ताकि तीर्थयात्रीयों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। केदारनाथ से शुरू हुआ मंगेश का मंगल अभियान आज १०० वें दिन भी बदस्तूर जारी है। इन १०० दिनों में मंगेश ने जनपद की हर समस्या का निदान ढूंढने की कोशिस की है। जिनमे काफी हद तक वो सफल भी रहे। इन १०० दिनों में उन्होंने अपना फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पारदर्शिता पर किया जबकि वहीँ आमजन का सरकारी तंत्र में पुनः भरोसा और विश्वास दिलाया है। आखिरकार २० बरस बाद ही सही जनता का सिस्टम पर भरोषा और विश्वास तो बढा है। जनपद में शिक्षा खासतौर पर प्राथमिक स्कूलों की स्थिति से वे ख़ासा आहात हुए। उन्होंने नौनिहालों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए जिला के सभी अधिकारीयों को एक एक प्राथमिक स्कूल गोद लेने को कहा। ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। जिसके बाद जिले के सभी अधिकारियों ने एक एक विद्यालय गोद लिया। जिनकी संख्या 80 के लगभग है। अब इन स्कूलों में अधिकारी हर महीने जांच करते हैं और कमियों को दूर करते हैं। जबकि ‘बढे चलो’ कार्यक्रम के तहत जनपद के सभी प्राथमिक स्कूलों के कक्षा ५ के सभी छात्रों को नवोदय व अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी हेतु प्रत्येक महीने संकुल स्तर पर परीक्षाएं आयोजित कराने की अभिनव पहल शुरू करवाई है। उन्होंने खुद जनपद के कई विद्यालयों में बच्चों को आखर ज्ञान दिया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय भाणाधार में छात्रो को पढ़ाया। वहीँ प्राथमिक विद्यालय डोभा में बच्चो के संग बैठकर मिड डे मील का खाना भी खाया। ग्रामीणों की शिकायत का त्वरित निराकरण करते हुए प्राथमिक विद्यालय नारी खतेणा में शिक्षक की तैनाती करवाई। जबकि समय समय पर जनपद के विभिन्न विद्यालयों का निरिक्षण भी किया। विजयनगर में ट्राली से स्कूल जा रहे बच्चों के लिए स्कूल बस की ब्यवस्था करवाई। नवोदय विद्यालय जाखधार का निरिक्षण भी किया और समस्याओं को दूर करने के निर्देश भी दिये। जनपद के विभिन्न अस्पतालों, एएनएम सेंटरों का निरिक्षण कर दवाइयों, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, सहित कर्मचारियों को हिदायत दी की लोगों को अस्पताल में ही समुचित चिकित्सा सेवा उपलब्ध होनी चाहिए। अस्पताल परिसर से बाहर किसी भी दशा में मरीजों को दवाई न लिखी जाय। जिला मुख्यालय में जल संस्थान द्वारा आपूर्ति की जा रही गंदे पानी की सप्लाई की हकीकत देखने के लिए स्रोत पर गये। जहां टैंक में गंदगी देख जलसंस्थान को कड़ी फटकार लगाईं। और लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए। लोकनिर्माण विभाग को जनपद के सम्पर्क सडक मार्गो को २४ घंटे सुचारू रखने हेतु निर्देशित किया। स्वच्छता पर मंगेश घिल्डियाल का अधिक जोर रहा है। उन्होंने जनपद को स्वच्छता के पहले पायदान पर लाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वे खुद ही सफाई करने निकले। वहीँ भरदार क्षेत्र के ग्राम पंचायत ढौण्डा पालीपुर में स्वजल द्वारा निर्मित शौचालयों का भौतिक सत्यापन किया। जिनमें ७९ शौचालयों में से महज २९ ही धरातल पर पाये। जिसके बाद उन्होंने ग्राम प्रधान पर मुकदमा दायर करने और स्वजल के क्षेत्रीय समन्वयक को निलम्बित करने के निर्देश दिए। स्वच्छता के तहत जनपद में रात्रि चौपाल का आयोजन कर पूरे प्रदेश में एक नई मिशाल कायम की। रात्रि चौपाल लगाने वाले वे सूबे के पहले जिलाधिकारी हैं। इस चौपाल के तहत उन्होंने लोगों को स्वच्छता का सन्देश दिया और लोगों की समस्याओं का निदान भी किया। अब वे प्रत्येक बुधवार को रात्रि चौपाल लगायेंगे। 100 दिनों में जनपद के विभिन्न हिस्सों में उनके द्वारा इस अवधि में जनता दरबारों का आयोजन किया गया और जनता दरबार में मिली शिकायतों का तत्काल निस्तारण भी किया गया। जनपद के दूरस्थ गांव रांसी, गौंडार, और मद्द्महेश्वर धाम का पैदल भ्रमण कर जनता की समस्याओं को सुना और अधिकारियों को निश्चित समयवधि में समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए। जबकि पर्यटन विभाग को कॉफ़ी टेबल (जनपद के अनछुए पर्यटन स्थलों की जानकारी फोटो सहित एक बुकलेट) बनाने को कहा। जिसकी एक एक प्रति देश और विदेश के सभी दुतावासों को भेजी जायेगी। जिससे देश विदेश के लोग उन पर्यटक स्थलों के बारे में जान सकें और यहाँ का रुख कर पायें। इससे पर्यटन तो बढेगा ही अपितु स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। मंगेश घिल्डियाल द्वारा जनपद में बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को सम्मानित भी किया गया और उन्हें बधाई भी दी। जबकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों को दंडित भी किया और कर्मियों को सख्त हिदायत दी कि बिना पूर्व सूचना के कार्यस्थल न छोड़े जनपद के किसानों, स्वरोजगार कर रहे युवाओं की बैठक लेकर उन्हें प्रोत्साहन देने की बात कही। कलश संस्था के मेधावी छात्रों को सम्मान करने को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपनी दुधबोली भाषा में संबोधन कर हर किसी को हतप्रभ कर दिया। ये जिलाधिकारी का अपने लोकभाषा के प्रति एक प्यार और लगाव ही तो है। इस मंगल अभियान में वे अकेले ही नहीं लगे हुये है। बल्कि उनकी धर्मपत्नी भी उनका हर कदम पर साथ दे रही है। विगत दिनों राजकीय बालिका इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग में विज्ञान विषय की शिक्षिका न होने पर उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ाने का आग्रह किया। उनके आग्रह को उनकी पत्नी ने सहर्ष स्वीकार किया और छात्राओं को पढ़ाने लगी। इस कदम की पूरे देश नें सराहना की और भूरी भूरी प्रशंसा भी हुई।

वास्तव में विगत २० सालों से रुद्रप्रयाग जनपद जिलाधिकारियों के लिए एक प्रयोगशाला बनी हुई थी। यहाँ के जिलाधिकारी का कब तबादला हो जाए किसी को नहीं मालूम होता। जिस कारण जनपद के दूरस्थ इलाको के निवाशियों को ये भी पता नहीं चलता की पूराने डीएम कब गए और नए डीएम् कब आये। जिलाधिकारियों के जल्द तबादलों से जनपद का विकास प्रभावित होता रहा है। लेकिन इस बार जनपद की जनता ने नए जिलाधिकारी से विकास की उम्मीदें संजोयी हैं। लोगों का कहना है के २० बरस बात उन्हें अहसास हुआ की जिलाधिकारी ऐसे होते हैं। रुद्रप्रयाग जनपद के निवासी अपने को खुशनसीब समझ रहें हैं की उन्हें मंगेश घिल्डियाल जैसे अधिकारी मिले हैं। वहीँ मंगेश घिल्डियाल ने अपने १०० दिन के कार्यकाल में समस्याओं के निदान के लिए हर मुमकिन कोशिस की है। उन्होंने १०० दिनों में ही वो कार्य कर दियें है जितने २० सालों में यहाँ के २२ जिलाधिकारी अपने पूरे कार्यकाल में नहीं कर पाये। जिलाधिकारी के मंगल अभियान से पटरी पर लौट आया है जनपद का सरकारी तंत्र। साथ ही विकसित हुई कार्य करने की एक नई कार्य संस्कृति।

dm rudrprayag2

– काश सारे अफसर ऐसे ही होते। ऐसे जिलाधिकारी पर रुद्रप्रयाग ही नहीं बल्कि पूरे देश को नाज है।

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