सेना ने बद्रीनाथ हाईवे पर व्यावसायिक वाहनों को रोक की जांच-पड़ताल!

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श्रीनगर गढ़वाल में सैन्यकर्मियों की ओर से बद्रीनाथ हाईवे पर आ-जा रहे व्यावसायिक वाहनों को रोककर वाहन चालकों से की जा रही पूछताछ से जहां वाहन चालक परेशान हैं। वहीं, इस जांच पड़ताल पर कई सवाल भी उठ रहे हैं।

हाईवे पर वाहनों को रोककर उनके चालकों से एसएसबी प्रशिक्षण अकादमी की पार्किंग में 6 कुमाऊं रेजीमेंट के अधिकारी वाहन और चालक से जुड़ी जानकारियां दर्ज कर वाहन पर स्टीकर लगा रहे हैं। खास बात यह है कि इस पूरी कार्यवाही के दौरान ना तो परिवहन विभाग और ना ही पुलिस के अधिकारी या सिपाही शामिल हैं।

वाहन चालक कुंदनराम और संजय रावत का कहना है कि सेना के जवानों ने उन्हें रोका और उनके अधिकारियों की ओर से हमारे लाइसेंस, पते-ठिकाने की जानकारी और अन्य जानकारियां हासिल की हैं, जिन्हें उन्होंने दर्ज किया है. उनका कहना है कि हमने सेना कर्मियों से इस बारे में पूछा तो उनका कहना है कि भविष्य में कभी आपदा आई तो आपसे सीधा सम्पर्क हो पाएगा.

दूरभाष पर एसएसपी पौड़ी निवेदिता कुकरेती कुमार से जब सेना की ओर से की जा रही जांच पड़ताल से उनके संज्ञान में होने के बावल पूछा गया तो उन्होंने इस तरह की किसी कार्यवाही के संज्ञान में न होने की बात कही। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार पुलिस-प्रशासन की बगैर अनुमति या जानकारी के आखिरकार सेना की ओर से एकाएक ऐसा क्यों किया जा रहा है?

इस पूरी कार्यवाही को देख रहे 6 कुमाऊं रेजीमेंट के सूबेदार नरेन्द्र सिंह का कहना है कि रक्षा मंत्रालय और सेना की ओर से कोई भी एक्सरसाइज चलेंगी या कभी ऐसा नौबत आ जाय कि हमें सिविल से गाड़ियां हायर करनी पड़ जाएंगी तो इसलिए सारी डिटेल ली जा रही हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि हम किसी को परेशान कर रहे हो या शुल्क ले रहे हो।

खास बात यह है कि अकेले हाईवे पर चलते वाहनों को रोककर उनसे जानकारियां जुटाते सेना से जुड़े लोग यदि हाईवे पर जांच पड़ताल करने के लिए सीधे जिम्मेदार पुलिस और परिवहन विभाग के लोगों को साथ रख ऐसा करते तो इस पूरी कार्यवाही पर सवाल भी नहीं उठते।

महत्वपूर्ण बिंदु ये भी है कि सेना को यदि वाहन चालकों या वाहनों से जुड़ी जानकारियां ही जुटानी होती तो वो किसी भी राज्य या जिले के परिवहन विभाग से भी इस आशय की सारी जानकारियां आसानी से हासिल कर सकती थी।

दूसरी तरफ ध्यान देने वाली बात ये भी है कि सैन्यकर्मी वाहनों की तलाशी नहीं ले रहे हैं बल्कि केवल वाहनों को रोककर उनके वाहन चालकों से ही आवश्यक जानकारी लेकर दर्ज कर रहे हैं।

हालांकि ये भी माना जा रहा है कि बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम को बम से उड़ा देने की मिली धमकी या सीमा पर किसी संभावित गतिविधि के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा हो, लेकिन यदि ऐसा भी हो तो फिर वाहनों की तलाशी भी ली जाती। बहरहाल सेना ऐसा क्यों कर रही है और आखिरकार वो कौन सी गोपनीय योजना पर कार्य कर रही है, ये सवाल फिलहाल सवाल ही बना हुआ है।

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