यहाँ बनें बहुमंजिले भवन पर्यटकों को करते आकर्षित

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  • नीरज उत्तराखंडी
    जनपद उत्तरकाशी के विकास खण्ड मोरी के सीमांत गांव फिताडी में बनें बहुमंजिले भवन आगंतुकों में कौतूहल तो पैदा करते ही है साथ ही विशिष्ट भवन निर्माण शैली और इतिहास को जानने की जिज्ञासा भी पैदा कर जाते हैं ।पौराणिक भूकंप रोधि भवन निर्माण शैली आधुनिक इंजीनियरी को सबक सीखाती भी नजर आती है। यहाँ लंकडी से निर्मित बहुत मंजिले मकान इतिहास तो समेंटे ही है साथ ही विशिष्ट भवन निर्माण शैली और नक़्क़ाशी की निपुणता और भूकंपरोधि पारम्परिक भवन निर्माण शैली के लिए भी विख्यात है ।
    जनपद के युवा उर्जावान तेजतर्रार जिला अधिकारी डा आशीष चौहान के मोरी ब्लाक के सीमांत गाँव फिताडी कांसला लिवाडी में भ्रमण कार्य क्रम के दौरान सीमांत गाँव जाने का अवसर मिला ।शाम को फिताडी गाँव में अधिवक्ता बलबीर राणा जिनकी पत्नी रेवती राणा वर्तमान समय में जखोल वार्ड से जिला पंचायत सदस्य के साथ जिला नियोजन समिति की सदस्यता भी है के यहाँ हुआ ।जिला अधिकारी तथा तहसीलदार भी वही ठहरे थे जिस कमरे में मीडिया के लोगों रूके थे वहाँ उपजिला अधिकारी को ठहराया जाना था।एसडीएम पूर्ण सिंह राणा ने जब पत्रकारों को कमरे में पाया तो वे पत्रकारों का सम्मान करते हुए पूर्व ब्लाक प्रमुख रहे शिव सिंह के यहाँ चले गये।जिस कमरे में हम ठहरे थे हम उसकी सजावट और नक़्क़ाशी देख ही रहे थे कि अचानक मेरी नजर लकड़ी पर उकेरे गये अक्षरों पर पड़ी तो अपने साथियों से उसे पढ़ने को कहा जिससे लिखा था-“संवत1585 अशाड 2गतेअगाम जीत की कोटी सुरम दास मित्री कुमार मृल दास” कलात्मक ढंग से उकेरा गया है । इस संबंध में जब बलवीर राणा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मकान संवत 1585को 2गते आशाड को बनाया गया है आगमजीत उनके परदादा का नाम है आगमजीत के पुत्र ताली राम उनके दादा तथा ठाकुर सिंह उनके पिता है।यह छःपीढी पुराना मकान है। कोटी का मतलब मकान तथा सुरम दास मकान बनाने वाले मिस्त्री का नाम है जो हिमाचल प्रदेश के किन्नौर से लाया गया था तथा मृलदास स्थानीय मिस्त्री बताया जा रहा है । पांच मंजिले इस भवन में कलात्मक तरीके से जानवरों के चित्र भी उकेरे गये है ।नीचे वाली मंजिल में गाय दूसरी मंजिल में भेड़ तीसरी में बकरियां तथा चौथी मंजिल में मेजबान मेहमान तथा रसोई और अंतिम मंजिल में लकड़ियाँ रखने की सुनियोजित व्यवस्था की गई हैं । यह मकान देवदार तथा थुनेर की इमारती लकड़ियों से निर्मित है।भवन निर्माण में तीन से चार फीट लम्बे तथा चार इंच मोटे तराशे गये पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।सीमेंट तथा गारे की जगह उडद की दाल यानि माश के मिश्रण लेप का उपयोग किया गया है मौसम,परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदा जैसे भूकम्प तूफान बर्फवारी आदि के मध्य नजर दरवाजे के चौखट की ऊंचाई कम रखी गई है । अद्भुत इंजीनियरिंग ।बेमिसाल नक्काशी ।
    सुबह जब गाँव देखने का अवसर मिला तो बडा मनमोहक नजारा एक से बढ़ कर एक बहुमंजिले मकानों पर की नक्काशी से उकेरे गये अद्भुत चित्र । प्राकृतिक आपदा तथा शत्रुओं के आक्रमण से बचने के लिए पारम्परिक तकनीकी से लैस सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित ढंग से बनाये गये बहुमंजिले मकान एतिहासिक व दर्शनीय तो है ही शोध के विषय भी है।ग्रामीण एवं शिक्षक कृपा सिंह राणा ने बताया कि ये मकान गोरखा आक्रमणकारियों के साक्षात् गवाही दे रहे हैं ।उन्होंने हमें मकानों के चौखट पर धारदार हथियार से किये गये प्रहार से बनें निशान भी दिखाए।जो गोरखयाणी युद्ध के जख्म झेल चुके थे और एक जख्म के निशान छोड़ गये थे।इतिहास समेटे है यह गाँव ।पूर्व प्रमुख शिव सिंह राणा ने बाताया कि गाँव में पंगु राम राणा का पांच मंजिला भवन अपने आप में गाँव का पूरा इतिहास समेटे हुए है।जो शोध और खोज का विषय है।पंगु राम राणा गाँव के सयाणा भी है ।उनका मकान सबसे प्राचीन लगभग 100साल पुराणा बताया जा रहा है।यह भी पांच मंजिला भव्य मकान है।ग्रामीण महावीर राणा का कहना कि फिताडी गाँव अपने आप में इतिहास समेटे हुए हैं ।यहाँ की भवन निर्माण शैली अद्वितीय है ।जो आगंतुकों तथा पर्यटकों को आकर्षित करते है।तथा एक जिज्ञासा पैदा करते हैं ।