उत्तराखंड में हल्की शीतकालीन बारिश की संभावना

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उत्तराखंड में अगले तीन दिन हल्की बारिश की संभावना है। शीतकाल की इस पहली वर्षा की शुरुआत तीन पर्वतीय जिलों से होगी। इस बारिश से जहां सूबेभर में वायु प्रदूषण का स्तर घटेगा, वहीं खेती-किसानी के लिए यह किसी संजीवनी से कम नहीं होगी।

स्मॉग की मार से त्रस्त दिल्ली जैसे हालात भले ही उत्तराखंड में नहीं हैं, मगर बारिश न होने से वातावरण में खुश्की अधिक है। साथ ही धूल के कणों की अधिकता के कारण कुछ क्षेत्रों में धुंध भी है। जाहिर है कि वायु प्रदूषण बढ़ा है। देहरादून का ही उदाहरण लें तो यहां आइएसबीटी में आमतौर पर हवा में सस्पेंडेंट पार्टिकुलेट मैटर यानी श्वसनीय निलंबित ठोस कण 300 के आसपास रहते हैं, लेकिन इन दिनों यह 400 के आंकड़े को पार कर चुका है।

दून समेत अन्य मैदानी क्षेत्रों में भी स्थिति इससे जुदा नहीं है। सूरतेहाल, इसका असर जनसामान्य की सेहत पर भी पड़ रहा है। यही नहीं, मानसून सीजन के बाद शीतकाल में अब तक बारिश नहीं हुई, जिससे किसानों के माथों पर भी चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इंद्रदेव पर टिकी हैं कि वे कब मेहरबान हों।

मौसम विभाग की मानें तो तीन दिन तक राज्य में शीतकाल की पहली बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार पश्चिमी हवा में द्रोणी और पंजाब व हरियाणा में बने सर्कुलेशन के मेल से उत्तराखंड में 13 से 15 नवंबर तक हल्की वर्षा और चोटियों पर बर्फ गिरने की संभावना बन रही है।

उन्होंने बताया कि सोमवार को चमोली, उत्तरकाशी व पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की वर्षा और बर्फ पडने की संभावना है। 14 व 15 नवंबर को राज्य के ज्यादातर स्थानों में वर्षा और चोटियों पर बर्फबारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि बारिश होने से वायु प्रदूषण का लेवल तो घटेगा ही, किसानों को भी राहत मिलेगी। अलबत्ता, ठंडक में काफी इजाफा हो जाएगा।