मुख्यमंत्री जी क्या 13 विधानसभाओं के लोग उत्तराखंड के नागरिक नहीं हैं ?

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क्या इन 13 विधानसभा के लोगों को विकास नहीं चाहिए है ? या आप की सरकार बनने के बाद इन 13 विधानसभाओं में कोई विकास कार्य हुआ ही नहीं जिन की समीक्षा आप कर सकें ?

आज मुख्यमंत्री के निजी सचिव की ओर से एक पत्र जारी कर राज्य की 57 विधानसभाओं (जंहा से BJP के विधायक जीते हैं ) , के विकास कार्यों की समीक्षा का कार्यक्रम जारी किया है ।
राज्य की विधान सभा के विकास कार्यों की समीक्षा के इस कार्यक्रम से कांग्रेस के 11 विधायकों और 2 निर्दलीय विधायकों की विधानसभाएं गायब हैं ।
मुख्यमंत्री जी शायद आप यह भूल गए हैं कि आपने संविधान की शपथ ली है । आप ने शपथ ली थी कि आप राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे।
खैर लोकतंत्र पर और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आपका और आपकी पार्टी का भरोषा कँहा था ।
आप क्यों कांग्रेसी विधायकों और निर्दलीय विधायकों की समीक्षा भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के साथ नहीं करना चाहते हैं ? या आपके अनुसार इन विधानसभाओं के विकास कार्यों की समीक्षा होनी ही नही चाहिए ?
खैर अब BBC जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने आपको जिन उपाधियों से नवाजा है उससे यह सिद्ध हो जाता है आप लोकतांत्रिक सरकारों में असली और अंतिम निर्विवाद राजा हैं। फिर आप क्यों विरोधियों की परवाह करेंगे ?
या आप जिन 13 विधानसभाओं में जहां कांग्रेस पार्टी के या निर्दलीय विधायक जीते हैं उन विधानसभाओं की के विकास कार्यों की समीक्षा करना ही नहीं चाहते।


मुख्यमंत्री बनने के बाद स्वयं को बहुत ही लोकतांत्रिक मुख्यमंत्री सिद्ध करने के लिए घोषणा की थी कि, हर विधायक को एक साल में 10 करोड़ की सड़कें दी जाएंगी और एक साल में उनकी संस्तुति पर 50 लाख रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष से जरूरतमंदों को दिए जाएंगे लेकिन आप 1 साल के आंकड़ों को उठाकर देखें तो कांग्रेस के विधायकों को कुछ भी नहीं दिया गया है ।
मुख्यमंत्री जी भले ही आप कांग्रेस के विधायकों को विकास योजनाएं न दें , लेकिन कम से कम गरीब बीमारों और जरूरतमंदों को आवश्यकता पड़ने पर कुछ सहायता तो दें।
मुख्यमंत्री जी उत्तरा कांड और पौड़ी की महिला के पत्थर मारकर भगाने वाले बयान के बाद इस आदेश को देख कर मैं निश्चिंत हो गया हूं कि आपके साथी, सहयोगी और सलाहकार आप को राजनीतिक रुप से डुबाने में और भविष्य में कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतरने के बाद (जिसकी आप कल्पना भी नही कर सकते) दुआ-सलाम से भी दूर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

मनोज रावत , विधायक, केदारनाथ