कोलगेट: मनमोहन की अपील पर 21 को नहीं होगी सुनवाई 

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manmohanउच्चतम न्यायालय ने कोयला ब्लाक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य द्वारा दाखिल की गयी विभिन्न याचिकाओं को अदालती कामकाज की 21 सितंबर की सूची से हटाए जाने का आज आदेश दिया। इस मामले में सिंह को सुनवाई अदालत द्वारा बतौर आरोपी तलब किया गया था। प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू और न्यायाधीश अरुण मिश्रा की पीठ ने कपिल सिब्बल की अगुवाई में वरिष्ठ वकीलों के एक समूह द्वारा 21 सितंबर को अदालत के समक्ष आने वाले मामलों की सूची से इस मामले को हटाए जाने की मांग पर आदेश देते हुए कहा, ”इन मामलों को सूची से हटाया जाता है।’’

पीठ ने कहा कि इन अपीलों को अदालत के समक्ष उल्लिखित किए जाने के बाद इन पर सुनवाई होगी। आज के इस आदेश के साथ ही सुनवाई अदालत में कार्यवाही पर शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए स्थगनादेश को बढ़ाया जा सकता है। सूची से इस मामले को हटाया जाना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि विशेष पीठ ने हाल ही में पूर्व कोयला राज्य मंत्री संतोष बागरोडिया को एक अन्य कोयला घोटाला मामले में अंतरिम राहत प्रदान करने से इंकार कर दिया था और संकेत दिया था कि वह जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री की याचिका के साथ उनकी याचिका को ले सकती है। जब बागरोडिया की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने समानता के आधार पर सुनवाई अदालत में निजी पेशी से छूट की मांग की तो विशेष पीठ ने यह राहत देने से इंकार कर दिया था और कहा था कि उनकी अपील को जल्द ही 10-12 दिनों में सिंह की याचिका के साथ लिया जाएगा।

पीठ ने पूर्व में यह भी कहा था कि वह दोनों याचिकाओं को खारिज कर सकती है। सिब्बल ने आज प्रधान न्यायाधीश वाली पीठ को बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री और उस समय कोयला मंत्रालय भी संभाल रहे सिंह द्वारा दाखिल की गयी याचिका में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने एक अप्रैल को कोयला ब्लाक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री को बतौर आरोपी तलब करने के निचली अदालत के आदेश और साथ ही उसमें चल रही कार्यवाही पर स्थगनादेश जारी किया था। यह राहत हिंडाल्को के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिरला को भी दी गयी थी जिनकी कंपनी को वर्ष 2005 में ओडिशा में तालाबीरा 2 कोयला ब्लाक आवंटित किया गया था।

इसके साथ ही पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख, हिंडाल्को के दो अधिकारियों शुभेंदु अमिताभ और डी भट्टाचार्य तथा खुद कंपनी को भी राहत दी गयी थी। निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा था कि समन आदेश से ‘‘सामने आने वाली ’’आनुषंगिक कार्यवाही पर भी स्थगनादेश जारी रहेगा। विशेष सीबीआई न्यायाधीश भरत पराशर ने 11 मार्च को सीबीआई की मामले को बंद करने संबंधी रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और सिंह तथा पांच अन्य आरोपियों को तलब किया था। सुनवाई अदालत ने समन जारी करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आपराधिक साजिश, जो शुरूआत में बिरला, हिंडाल्को और इसके दो अधिकारियों के दिमाग की उपज थी, उसे ‘पारेख को साथ लेकर’ आगे बढ़ाया गया और उसके बाद तत्कालीन कोयला मंत्री मनमोहन सिंह को शामिल किया गया। अदालत ने कहा था कि हिंडाल्को को कोयला ब्लाक आवंटन की सिंह द्वारा मंजूरी दिए जाने से ‘‘प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि निजी कंपनी को भारी मुनाफा हुआ’’ और इसके परिणाम स्वरूप सरकारी लोक उद्यम नेयवेली लिग्नाइट कोरपोरेशन लिमिटेड (एनएलसी) को घाटा हुआ।

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