दयारा बुग्याला के पर्यटन गांव ‘बार्सू’ के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के बादल !

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दुनियाभर में दयारा बुग्याल के बेस कैंप पर्यटन  बार्सू गांव के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सौ परिवारों वाले बार्सू गांव में बडे पैमाने पर भू-धंसाव हो रहा है। अभी तक करीब तीस से अधिक मकान, कई नाली कृषि भूमि इसकी जद में आ चुकी हैं। आलू और राजमा जैंसी फसलों के लिए उपजाऊ भूमि, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, पर्यटकों की पहली पसंद माने जाने वाला पर्यटन गांव बार्सू का अस्तित्व मिटने की कगार पर है। गांव तक पक्की सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवर लाइन से लेकर जीएमवीएन का गेस्ट हाऊस और वो सब कुछ जो पर्यटन के लिहाज से जरूरी होता है, आपको यहां आसानी से मिल जाएगा।  बार्सू के जगमोहन रावत कहते हैँ कि इस खूबसूरत गांव को न जाने किस की नजर लग गई। पूरा का पूरा बार्सू गांव जबरदस्त भू-धंसाव की जद में है. गांव के बीचोंबीच धंसाव की रप्तार और भी तेज है। कृषि भूमि लगातार धंस रही है। गांव में हाल ही में बनाए गए पुल धंस चुके हैं। गांव का जूनियर हाईस्कूल, प्राथमिक विद्यालय व दो मंजिला सामुदायिक भवन ध्वस्त होने के कगार पर हैँ। भरत सिंह रावत, सत्ये सिंह रावत समेत गांव के तीस से अधिक परिवारों के भवनों पर या तो मोटी दरारें आ गई हैं या फिर मकान टेडे हो गए हैं। लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। बार्सू निवासी सत्ये सिंह रावत बताते हैं कि 2103 में गांव के ठीक नीचे बहने वाली स्वारीगाड जब उफान पर आई,तो उसने नदी के स्थाई किनारों को उधेड़ कर रख दिया। तब से ही पूरे गांव में भू-धंसाव शुरू हो गया था। जमीन धीरे-धीरे धंस रही है। पिछले तीन सालों में कटाव इतना बड़ा कि पूरा का पूरा क्षेत्र धंसने लगा है। ग्रामीण अब विस्थापन की बजाय धंसाव रोकने के लिए सुरक्षा दीवार लगाने की मांग उठा रहे हैं। गांव के जूनियर हाई स्कूल की बिल्डिंग ढहने के कगार पर है. तीन कमरे टूट चुके हैं। अब मात्र एक कमरा बचा है, जिसमें जूनियर हाईस्कूल के 16 बच्चे पठन-पाठन करते हैँ । स्कूल की शिक्षिका मधुबाला, कुसुम व प्रधानाध्यापक रणवीर सिंह राणा कहते हैं कि स्कूल भवन कब ढह जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. बस सुबह स्कूल खोलने से पहले हम भगवान को याद कर लेते हैँ।

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