सरकार की कमजोर कूटनीति देश के लिए घातकः कांग्रेस

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tiwariभारत-पाकिस्तान की प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार स्तरीय वार्ता अलगाववादियों के मुद्दे के कारण खटाई में पड़ने की कगार पर है। पाकिस्तान से जुड़ी नीति को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने ‘अपना मजाक’ बनवा लिया है और उकसावों के बावजूद वह स्पष्ट संदेश भेजने में ‘नाकाम’ रही है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ‘‘ढुलमुल कूटनीति देश को बहुत नुकसान’’ पहुंचा रही है। हालांकि भारत ने पाकिस्तान को यह स्पष्ट कर दिया था कि जब उसके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार सरताज अजीज अपने भारतीय समकक्ष अजित डोभाल के साथ वार्ता के लिए यहां आएं तो वह कश्मीरी अलगाववादियों के साथ बैठक न करें। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ जिस तरह की नीति भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार अपना रही है उससे वह ‘अपना मजाक’ बनवा रही है।

तिवारी ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने भी इस बातचीत को रद्द करने की वकालत की है और कहा है कि यह पड़ोसी देश के प्रति पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीति के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरीके से पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार सरताज अजीज और पाकिस्तान बर्ताव कर रहे हैं, उससे वे यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि उन्हें बातचीत में दिलचस्पी नहीं है।’’ कांग्रेसी नेता ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार ने यह जानकारी भी नहीं भेजी है कि भारत में अपने एक दिवसीय प्रस्तावित दौरे के दौरान उनका कार्यक्रम क्या है। उन्होंने कहा, ‘‘तो, इसलिए, श्रीमान प्रधानमंत्री, आपको देश को यह बताना होगा कि क्या आप पाकिस्तान से बात करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव में हैं?’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने कहा कि भारत को बहुत पहले ही कड़े संदेश भेज देने चाहिए थे। उन्होंने कहा, ‘‘सीमा पर हमारे जवानों की बार-बार हत्याएं हुई हैं, बार-बार महिलाओं और बच्चों को मारा गया है। 20 साल बाद पंजाब के गुरदासपुर में हमला हुआ। एक पाकिस्तानी आतंकी उधमपुर में पकड़ा गया। ये ऐसे मौके थे, जब भारत को पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के लिए कदम उठा लेने चाहिए थे।’’

इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की कथित ‘चुप्पी’ को लेकर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता सिंह ने कहा कि ऐसा लगता है कि ‘‘हम इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या पाकिस्तान को हुर्रियत के नेताओं से मिलना चाहिए?’’ उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक सीमा पर हमारे जवानों, महिलाओं और बच्चों की हत्याओं का सवाल है, तो दुर्भाग्यवश, इस पर प्रधानमंत्री की चुप्पी भयावह है। जहां तक भ्रष्टाचार की बात है, तो हम बेचैन कर देने वाली खामोशी से जूझ रहे हैं। जहां तक की जा रही हत्याओं की बात है, तो हम बेचैन कर देने वाली खामोशी से जूझ रहे है।’’

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