उत्तराखंड में बेनामी संपत्ति जब्त करेगी सरकार : सीएम रावत

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त्रिवेंद्र रावत सरकार बेनामी संपत्ति को जब्त करने के लिए जल्द मजबूत कानून लाने जा रही है। जब्त संपत्ति का उपयोग स्कूल, अस्पताल और जनहित के कार्यों में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र डोईवाला के बालावाला में यह ऐलान किया। यहां एक फॉर्म हाउस में आयोजित सभा में सीएम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध की तरह लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, उनकी कोशिश है कि, सरकार अपनी संस्कृति को बढ़ाने वाली, विकास करने वाली और भ्रष्टाचार से मुक्त हो। वे इस दिशा में मजबूती से काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार से मुक्त है।

त्रिवेंद्र ने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कई कदम उठाए हैं। जल्द ही बेनामी संपत्ति को जब्त करने के लिए मजबूत कानून लाने जा रहे हैं।

अपना-पराया किसी को नहीं छोड़ेंगे
त्रिवेंद्र ने कहा कि आपका भाई, विधायक और मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध लड़ रहा है। अपना हो या कोई पराया, भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर किसी को नहीं छोड़ा जाएगा। इसमें कोई भेदभाव नहीं होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरों टॉलरेंस नीति पर सरकार काम कर रही है। सरकार ऐसा काम करेगी, जिससे आप लोगों को सीना चैड़ा होगा।

300 करोड़ रुपये बचाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार में भ्रष्टाचार का किस कदर बोल बाला था कि यह इससे साबित होता है कि पूर्व में जिन योजनाओं के लिए बड़े-बड़े स्टीमेट तैयार किए थे, उन्हें भाजपा सरकार ने रिवाइज स्टीमेट तैयार कर 300 करोड़ से अधिक बचाए। अन्यथा यह सब पैसा भ्रष्ट लोगों की जेबों में चला जाता।

बेनामी संपत्ति जब्त करने का है कानून
केंद्र सरकार ने वर्ष 2006 में बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन एक्ट बनाया था। इसके तहत बेनामी संपत्ति को जब्त किया जा सकता है। अब राज्य सरकार भी इस कानून को उत्तराखंड में लागू करने के लिए अमली-जामा पहनाने जा रही है।

16 हजार करोड़ का निवेश
त्रिवेंद्र ने कहा कि डेस्टिनेशन उत्तराखंड में सिर्फ 10 माह में 16 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है। इससे 40,000 युवाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं, राज्य बनने के 17 साल में मात्र 40,000 करोड़ का ही निवेश हुआ। वह भी तब जब औद्योगिक पैकेज में टैक्स छूट समेत कई तरह की सहूलियतें दी गई थीं।