उत्तराखंड में कांग्रेस, भाजपा के लिए क्यों आसान नहीं है नंबर जुटाना: जानें

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vidhansabha-uttarakhandउत्तराखण्ड की सत्ता की जंग निर्णायक मोड़ पर आती दिख रही है शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार बताएगी कि वह फ्लोर टेस्ट को तैयार है या नहीं इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के रुख ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है सियासी गलियारों में फ्लोर टेस्ट की चर्चा गरमाने लगी है ऐसे में चर्चा है कि भाजपा ने नंबर जुटाने को सेंधमारी अभियान शुरू कर दिया है उधर कांग्रेसी कुनबे में नयी टूट न हो इसलिये किलेबंदी की जा रही है

फ्लोर टेस्ट से ही निकलेगी राह : अभी कईं सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं क्या 18 मार्च को विधानसभा के फ्लोर से शुरू हुई सूबे की सियासी जंग का नतीजा फ्लोर टेस्ट से ही निकलेगा ऐसे अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो बहुमत की बाजी कौन मारेगा? इस समय सदन में भाजपा के पास 28 विधायकों का संख्याबल है लेकिन निलंबित विधायक भीमलाल आर्य को भाजपा कैंप में जोड़ना अब मुमकिन नहीं दिख रहा है यानी वोटिंग की ताकत भाजपा की 27 ही समझी जा सकती है इसी तरह नौ बागी विधायकों को घटाने के बाद कांग्रेस भी 27 के आंकड़े पर खड़ी है लेकिन कांग्रेस को फिलहाल छह पीडीएफ सदस्यों की बैसाखी का सहारा हासिल है और एक नामित सदस्य भी उसके पास है

बागियों पर दांव : अगर बागियों की सदस्यता रद्द ही रहती है तो कांग्रेस 62 के हाउस में बहुमत के हसीन सपने देख रही है जबकि भाजपा का दारोमदार नौ बागियों के वोटिंग राइट बचने पर टिका है भाजपा दूसरी तस्वीर में पीडीएफ कोटे के दो बसपाई विधायकों, यूकेडी के प्रीतम पंवार और निर्दलीय दिनेश धनै से अभी आस लगाए बैठी है भाजपा को कांग्रेसी विधायकों की ‘अंतरआत्मा की आवाज’ पर कुछ ज्यादा ही भरोसा है

अंतरआत्मा की आवाज’ से कांग्रेस में डर: कहते हैं दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है 18 मार्च के बाद कम से कम कांग्रेस की तो यही हालत है अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी को भाजपा के अंतरात्मा की आवाज के नारे से डर नहीं लगता मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय कुछ घंटों के लिये देहरादून आए और कांग्रेस कैंप में हलचल पैदा कर गए दरअसल, कांग्रेस नहीं चाहती कि नौ बागियों को सदन में वोटिंग का मौका मिले साथ ही उसकी कोशिश है कि उसके 27 विधायकों के साथ पीडीएफ के छह सदस्यों का कुनबा एकजुट रहे लेकिन कुनबे की हिफाजत करना अगले कुछ घंटों में उसके लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी

पीडीएफ पर टिकी भाजपा की उम्मीदें: उत्तराखण्ड की सत्ता की चाबी यानी पीडीएफ अब भाजपा के निशाने पर है, तो अपनों से धोखा खाए बैठी कांग्रेस की उम्मीद भी पीडीएफ पर ही टिकी है दरअसल 6 सदस्यीय पीडीएफ का फिलहाल दावा है कि वो कांग्रेस के साथ खड़ी है कई बार पीडीएफ अध्यक्ष मंत्री प्रसाद नैथानी ने भी ये जाहिर करने की कोशिश की है कि पीडीएफ एकजुट है, लेकिन ये भी चर्चा जोरों पर हैं कि पीडीएफ के भीतर भी सब कुछ ठीक ठाक नहीं है अब देखने वाली बात होगी कि पीडीएफ की ये एकजुटता बनी रहती है या नहीं क्योंकि मौजूदा वक्त में सत्ता का केन्द्र बिन्दू पीडीएफ ही बना हुआ है

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