बिना लाइसेंस के चल रही है यहाँ मटन-चिकन की दुकानें!

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LICENSE-4पौड़ी गढ़वाल  श्रीनगर गढ़वाल व आसपास के क्षेत्रों में मांस विक्रेता बिना लाइसेंस और नियमों को ताक पर रख मटन-चिकन की दुकानें चला रहे हैं आश्चर्यजनक बात तो यह है मांस विक्रेताओं द्वारा बिना सोकपिट बनाए वधशालाओं से निकलने वाला खून खुलेआम नदियों व नालियों में बहाया जा रहा है

चारधाम यात्रामार्ग के महत्वपूर्ण पड़ाव श्रीनगर गढ़वाल में नियम-कायदों को ताक पर रखकर लम्बे समय से संचालित की जा रही मटन-चिकन की दुकानों से आम जनता परेशान है हाईवे, अस्पतालों, स्कूलों व धार्मिक स्थलों से बिना उचित दूरी बनाए हुए दुकानें संचालित करने के साथ बड़े-बड़े फ्लैक्स लगाकर मांस विक्रेताओं द्वारा प्रचार भी किया जा रहा है

सबसे हैरत की बात तो यह है कि क्षेत्र में स्थित किसी भी मांस विक्रेता के पास मांस बेचने के लिए लाइसेंस तक नहीं है मांस विक्रेताओं से जब इस बारे में पूछा गया तो कुछ का कहना था कि जिला पंचायत द्वारा उनसे वार्षिक शुल्क लिया जाता है, जिसके एवज में केवल शुल्क की रसीद दी जाती है, लाइसेंस नहीं कुछ विक्रेताओं के पास जिला पंचायत की सामान्य सी रसीद तो थी, लेकिन अधिकांश विक्रेताओं के पास वो भी नहीं मिली

मांस विक्रेता इस्लाम व अनूप चन्द्र का कहना है कि जिला पंचायत द्वारा उनसे दुकान संचालित करने की एवज में शुल्क लिया जाता है, लेकिन कोई लाइसेंस कभी नहीं दिया गया और ना ही लिखित तौर पर कोई नियम ही बताए गए हैं

उनका कहना था कि जानवरों को मारने के लिए बनाई गई वधशालाओं के लिए उन्होंने अलग से कोई सोकपिट नहीं बनाए हैं और वधशालाओं से निकलने वाला खून नालियों व नदियों में ही बहाया जाता है

इस मामले पर न तो जिला पंचायत और स्थानीय प्रशासन और ना ही खाद्य विभाग कुछ करने को तैयार है इस बारे में उपजिलाधिकारी रज्जा अब्बास का कहना है कि सभी मांस विक्रेताओं से एक बैठक में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए कहा गया था उनका कहना है कि यदि मांस विक्रेताओं के पास लाइसेंस नहीं हैं या फिर वे नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं तो एक अभियान चलाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

कुछ मांस विक्रेताओं ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यहां तक कहा कि खाद्य निरीक्षक द्वारा उनकी दुकानों में आकर उनसे सुविधा शुल्क तो लिया जाता है, लेकिन कभी उनकी दुकानों का ना तो निरीक्षण होता है और ना ही उन्हें कोई आवश्यक जानकारियां दी जाती हैं

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