पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे दो से ज्यादा बच्चे वाले

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देश में अगले साल होने प्रस्तावित पंचायत चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। राज्य सरकार नगर निकायों की भांति पंचायतों में भी यह प्रावधान करने जा रही है। इसके अलावा हरियाणा और राजस्थान की तर्ज पर पंचायत प्रतिनिधियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का भी निर्धारण किया जाएगा। पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए 2016 में बने एक्ट की कुछ व्यवस्थाओं में सरकार ने संशोधन का मन बनाया है। इस क्रम में शुक्रवार को सचिवालय में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में पंचायती राज मंत्री पांडेय ने अधिकारियों के साथ विमर्श किया। बैठक के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार निकायों में व्यवस्था है कि दो से अधिक बच्चों वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, उसी तरह की व्यवस्था पंचायतों में भी लागू की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों को विधिक राय समेत अन्य पहलुओं पर मंथन के बाद प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों को हरियाणा और राजस्थान के पंचायती राज एक्ट का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन राज्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित है। इसके तहत सामान्य श्रेणी के लिए दसवीं और आरक्षित श्रेणी में न्यूनतम शैक्षिणिक योग्यता आठवीं पास रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में भी इसी प्रकार पंचायत प्रतिनिधियों के लिए शैक्षिक योग्यता का मानक रखा जाएगा। इसके लिए भी मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिसके पास शौचालय नहीं है, वह भी पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएगा।

राज्य के पंचायती राज एक्ट में यह प्रावधान है और इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। लगातार निगरानी रखें अधिकारी विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में पंचायती राज मंत्री ने केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायतों में हो रहे और होने वाले कार्यो की मॉनीट¨रग को लगातार निगरानी रखें। इसमें कोई कोताही सहन नहीं होगी।