ऋषिकेश के एम्स में 30 वर्षीय महिला के फेफड़े के दुर्लभ ट्यूमर की जटिल सर्जरी

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में कैंसर सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने दिल्ली निवासी एक 30 वर्षीय महिला के फेफड़े के दुर्लभ ट्यूमर की जटिल सर्जरी करने में सफलता प्राप्त की है। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने जटिलतम व जोखिमभरी सर्जरी में कामयाबी हासिल करने के लिए चिकित्सकीय दल की सराहना की है। निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड में इस तरह के फेफड़े के ऑपरेशन की सुुविधा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के माध्यम से मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि फेफड़े के ऑपरेशन की सुविधा अब तक उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं थी। एम्स में पहली मर्तबा इस तरह की जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि एम्स राज्य में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है। वरिष्ठ कैंसर सर्जन डा. पंकज गर्ग ने बताया कि यह ट्यूमर आमतौर पर गर्भाशय में पाया जाता है, मगर इस महिला में यह ट्यूमर फेफड़े में था, जो कि महिला की पसलियों और छाती से निकलकर लीवर तक में फैल गया था। इस लिहाज से यह एक जटिल ऑपरेशन था, जिस टास्क को टीम के साथ सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया गया। डा. पंकज ने बताया कि महिला इस ऑपरेशन के लिए दिल्ली एम्स समेत तमाम बड़े चिकित्सालयों में उपचार करा चुकी थी, आराम नहीं मिलने पर सुल्तानपुरी, ​दिल्ली निवासी महिला इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंची थी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन में महिला के ट्यूमर से ग्रसित फेफड़ा, दो पसलियां और लीवर का यह हिस्सा सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि मरीज ऑपरेशन के बाद अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उत्तराखंड में रहकर ही स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। सर्जीकल ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. एसपी अग्रवाल ने बताया कि लंग कैंसर के केस उत्तराखंड में राष्ट्रीय अनुपात के हिसाब से तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश एम्स लंग कैंसर के सभी तरह के ईलाज के लिए पूरी तरह से सक्षम है और इसके लिए सभी प्रकार की सर्जरी की सुविधाएं एम्स में उपलब्ध हैं। बताया कि एम्स इस तरह के विकार के निराकरण को प्रतिबद्ध है। सफल सर्जरी करने वालि चिकित्सकीय दल में कैंसर सर्जरी विभाग के डा.पंकज गर्ग,डा. राजकुमार, डा.धर्माराम व एनेस्थीसिया डा. निशीथ गोविल शामिल थे।