साहित्यकार संदीप रावत की पुस्तक ‘लोक का बाना’ का हुआ विमोचन!

0
226

book-releasedउत्तराखंड में गढ़वाली लोकभाषा साहित्य के संरक्षण व संवर्द्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करने वाले साहित्यकार संदीप रावत की पुस्तक ‘लोक का बाना’का विमोचन श्रीनगर गढ़वाल में किया गया

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य के प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी सहित मौजूद कई नामचीन साहित्यकार व संस्कृतिकर्मियों ने पुस्तक का विमोचन किया

बद्रीनाथ हाईवे स्थित एक निजी बारातघर में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद राज्य के कालजयी लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने विमोचित पुस्तक और उसके लेखक की सराहना की उन्होंने गढ़वाली लोकभाषा पर शोध के साथ प्रचार-प्रसार कर उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के कार्य की सराहना की

नेगी ने कहा कि लोकभाषा के साहित्य पर कार्य कर रहे संदीप रावत के लेखन में लम्बे समय पूर्व गढ़वाली में लेखन कर चुके उन जैसे लोगों का जिक्र है जिसे सुनना, पढ़ना और देखना अच्छा लग रहा है

उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि गढ़वाली भाषा के पुर्नत्थान का समय आ गया है नेगी ने कहा कि जिस तरह वे हर माह गढ़वाली साहित्य पर लिखी भाषा का विमोचन कर रहे हैं उससे उन्हें खुशी है कि पुराने लोगों के किये गए कार्य वर्तमान पीढ़ी में झलक रहे हैं

विमोचित पुस्तक ‘लोक का बाना’सहित लोकभाषा गढ़वाली पर 3 पुस्तकें लिख चुके साहित्यकार संदीप रावत ने इस अवसर पर कहा कि लोकजीवन और लोकभाषा को उन्होंने मौजूदा पुस्तक का विषय बनाया है

उन्होंने कहा कि 14वीं सदी से प्रचलित गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाएं बहुत समृद्धशाली साहित्य लिये हुए हैं और जिना शब्द भंडार इन भाषाओं में है उतना किसी और भाषा में नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा से विमुख होती नई पीढ़ी से पुस्तकों के माध्यम से जोड़ना उनका मकसद है

इस अवसर पर कलश संस्था द्वारा गढ़वाली कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने विभिन्न विषयों पर काव्यपाठ कर लोगों को जमकर गुदगुदाया हास्य कवियों ने जहां अपनी चुटीली कविताओं से हर किसी को लोटपोट किया तो वहीं मार्मिक विषयों पर लोगों की आंखों को नम भी किया

अपनी धारदार कविताओं से कवियों ने एकतरफ गढ़वाली भाषा की अपनों द्वारा की जा रही उपेक्षा पर तंज कसा तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी द्वारा अपने बुजुर्गों के तिरस्कार के साथ अन्य कई विषयों पर रचनाएं सुनाकर उपस्थित श्रोताओं का को ताली बजाने पर मजबूर किया

इस मौके पर मौजूद ओमप्रकाश सेमवाल, जगदम्बा चमोला, गिरीश सुन्द्रियाल, संदीप रावत, वीरेन्द्र पंवार सहित अन्य कवियों ने काव्यपाठ किया

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here