पहाड़ी क्षेत्रों के विकास का नया ‘सरकारी फॉर्मूला’

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पहाड़ पर उद्योग चढ़ाने के सरकार के प्रयास तो पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं, लेकिन अब डाटा सेंटर पार्क बनाने के प्रस्ताव पर मंथन किया जा रहा है। राज्य में आईसीटी इलेक्ट्रोनिक पॉलिसी तैयार की जा रही है। जिसके तहत डिजीटल दुनिया से जुड़ी कंपनियों को पहाड़ पर अपने डाटा सेंटर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि रोज़गार भी बढ़े।

पर्वतीय विकास को लेकर राज्य सरकार कई प्रयोग कर रही है। इसी के चलते अब पहाड़ पर डाटा सेंटर पार्क बनाने की तरफ भी मंथन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने पहाड़ पर औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई पॉलिसी भी लागू की है, लेकिन उसका उम्मीद के मुताबिक नतीजा नहीं मिल पा रहा है।

आटी सचिव दीपक कुमार का कहना है कि सरकार पॉलिसी पर काम कर रही है। इससे राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के रास्ते खुलेंगे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग नीति के तहत पहाड़ पर नए उद्यम ज्यादा नहीं स्थापित हो पा रहे हैं। इसके अलावा अब आईटी विभाग के जरिये पहाड़ पर डाटा सेंटर पार्क बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। जिसके तहत ई-बिज़नेस और डिजीटल वर्लड्स से जुड़ी कंपनियां अपना डाटा सेंटर उत्तराखंड में बना सकेंगी। इसमें जरुरत के मुताबिक उत्तराखंड से कुशल युवाओं को रोज़गार भी मिल सकेगा।

दरअसल डाटा सेंटर पार्क एक ऐसा कंसेप्ट है, जिसके तहत कंपनियां अपना सारा डाटा एक स्थान पर स्टोर करती हैं। ये इलेक्ट्रोनिक और डिजीटल डाटा स्टोर करने के लिए बड़े केंद्र में सर्वर स्थापित करने पड़ते हैं। इसमें सेटेलाईट नेटवर्किंग की उपलब्धता अहम होती है और इसमें किसी प्रकार के मालवाहक वाहनों का आवागमन ज्यादा नहीं होता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के संगठन से जुड़े लोग सरकार की इस प्रयास को अच्छा मान रहे हैं। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि डाटा सेंटर पार्क की स्थापना पहाड़ पर सुरक्षा और सामाजिक नजरिये से अच्छा विकल्प हो सकता है।

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