पहाड़ के मांझियों की मेहनत रंग लाई! खेतों में लगाई रोपणी, मात्रशक्ति नें कुदाल, फवाडे से बनाई थी नहर!

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संजय चौहान

बीते दिनों सीमांत जनपद चमोली के पोखरी ब्लाक के सांकरी गाँव में गांव की नहर में पानी न होने से ग्रामीणों को खेतों में रोपाई करना बेहद मुश्किल लग रहा था। जिस कारण से ग्रामीण बेहद चिंतित थे। इन सबके बीच गाँव वालों नें खुद कुदाल और फवाडे हाथों मे लेकर नहर में पानी चालू करने के लिए गाँव के समीप (बामनाथ मंदिर) बहने वाले गदेरे से गाँव की क्षतिग्रस्त और सूखी नहर में पानी चालू करने का बीड़ा उठाया था। जिसमें गाँव के सभी ग्रामीण और महिलाएँ इस काम में जुट्टी थी। और गाँव की क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत कर खेतों तक पानी पहुंचाया।

जिसके उपरांत आज गाँव की महिलाओं नें पारम्परिक लोकगीतों को गाते हुये गांव में नहर से पहुंचे पानी से रोपणी लगाई। इस दौरान सभी लोग बेहद खुश दिखाई दिये। आखिर हो भी क्यों नहीं क्योंकि रोपणी के दौरान अपनी माटी की सौंधी खुशबू की अलग महक रोमांचित जो करती है। रोपणी के दौरान सभी नें एक दूसरे के साथ पानी और मिट्टी में खूब अटखेलिंया भी खेली।

इस अवसर पर सांकरी गाँव की मुन्नी रावत, पूजा रावत, दीपा देवी, मनोरमा डिमरी, कविता रावत, बसंती देवी, वंदना देवी, विनीता देवी, अनिता देवी, अंजना देवी, पुष्पा देवी, संतोषी भंडारी सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।

वास्तव में देखा जाय तो सांकरी गाँव के सभी ग्रामीणों और महिलाओं के सामूहिक प्रयासों को सफलता मिली है। अगर इसी तरह सभी लोग अपने अपने गाँव की समस्याओं को सहभागिता के जरिए दूर करने का प्रयास करें तो दूसरों पर निर्भरता स्वतः समाप्त हो जायेगी। और समस्याओं का समाधान भी तत्काल हो जायेगा।