उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से कहा- जल्द निपटेगा परिसंपत्तियों का मामला!

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाका की। इस दौरान दोनों ही मुख्यमंत्रियों ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच 17 साल से लंबित परिसंपत्तियों के बंटवारे पर चर्चा की।

बैठक में दोनों ही प्रदेशों के परिसंपत्तियों से जुड़े विभागों के प्रमुख सचिव भी मौजूद रहे। बैठक में सीएम योगी ने त्रिवेन्द्र सिंह रावत को आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी मामलों का निपटारा किया जाएगा।

इससे पहले लखनऊ पहुंचे रावत ने उत्तर प्रदेश को अपना बड़ा भाई बताया और कहा कि पिछले 17 सालों से उत्तराखंड को जो हक नहीं मिल पाया है, उसे मांगने के लिए ही वे लखनऊ आए हैं।

रावत ने कहा कि यूपी से अलग हुए 17 साल बीत गए, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने परिसंपत्तियों के बंटवारे के मामले को हल करने को लेकर सार्थक पहल नहीं की। इस वजह से नहरों, भूमि और भवनों के अलावा जमरानी बांध में हिस्सेदारी नहीं तय हो पाई है। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन से पैदा की जा रही बिजली में भी उत्तराखंड को हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।

रावत ने कहा कि  वे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे और सभी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने का अनुरोध करेंगे।

उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भी सीएम रावत के साथ बैठक में मौजूद हैं। उनका कहना है कि दोनों ही राज्यों के साथ केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है, लिहाजा सभी मामलों का निपटारा सम्मानजनक तरीके से से हो सकेगा।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा

जमरानी बांध: उत्तराखंड के हल्द्वानी जिले में बन रहे जमरानी बांध से सिंचाई के लिए 57 प्रतिशत पानी यूपी को और 43 फ़ीसदी पानी उत्तराखंड को देने पर सहमति बन गई है लेकिन बात आगे नहीं बढ़ रही है।

सिंचाई: 37 ऐसी नहरें हैं जिनसे अधिकांश सिंचाई उत्तराखंड में होती है, लेकिन नहरों का स्वामित्व यूपी के पास है। गत 2 फ़रवरी को हुए समझौते में 28 नहरों को उत्तराखंड को सौंपने पर सहमति बन गई है लेकिन मामला अभी भी लंबित है।

उर्जा: टिहरी हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट उत्तराखंड की जमीन और पानी से संचालित हो रहा है, लेकिन इसका फायदा वहां की जनता को नहीं मिल रहा। दरअसल यह प्रोजेक्ट राज्य के बंटवारे से पहले का है। उस समय हुए समझौते के मुताबिक पैदा होने वाली बिजली का 75 फीसदी हिस्सा केंद्र को और 25 फीसदी हिस्सा यूपी को मिलेगा। लेकिन बंटवारे के बाद यह 25 फीसदी हिस्सा उत्तराखंड के हिस्से में जाना चाहिए था।

अतिथिगृह और आवास: नई दिल्ली स्थित अथितिगृह और हरिद्वार में यूपी के जमाने में बने पर्यटक आवासगृहों के हस्तांतरण के मामले पर भी चर्चा होगी।

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