उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने अपना पहला दीक्षांत समारोह मनाया!

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उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने सोमवार को अपना पहला दीक्षांत समारोह मनाया। नौ साल में पहली बार हुए इस दीक्षांत समारोह में राज्यपाल केके पाल ने बीस स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। साथ ही 500 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां देकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

गाउन पहने राज्यपाल केके पाल और उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा हदयेश के साथ कईं प्रोफेसर दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। हल्द्वानी में 2006 से शुरू हुए उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से अलग-अलग विषयों में दूर दराज के हजारों छात्र-छात्राओं में आज बीस छात्र छात्राओं को राज्यपाल ने गोल्ड मेडल दिया। 500 स्टूडेंट्स को उपाधि देकर सम्मानित किया। साथ ही उनके बेहतर भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए एक स्वस्थ समाज बनाने में भागीदारी करने की अपील की।

वहीं उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा हदयेश ने भी विश्वविद्यालय के कुलपति को इस आयोजन के लिए बधाई दी और नये पाठयक्रम के जरिए छात्रों की संख्या बढाने के लिए चर्चा की। वहीं कुलपति नागेश्वर राव ने कहा है कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय पहली यूनिवर्सिटी है, जहां दूरस्थ शिक्षा के साथ-साथ छात्रो को कौशल परक रोजगार देने की दिशा में भी सर्टीफिकेट दिए जा रहे हैं।

सेवानिवृत्त होने और बढती उम्र के बाद भी शिक्षा में रूचि रखने वाले सैकडों छात्र छात्राओं के लिए यह दीक्षांत समारोह किसी उत्सव से कम नहीं रहा। साथ ही अपने मनचाहे कोर्स की डिग्री हासिल करने वाले तमाम छात्र छात्राओं के बचपन का सपना हकीकत बना है।

हरिद्वार निवासी डॉक्टर अजीत सिंह तोमर ने एमएसडब्ल्यू में गोल्ड मेडल हासिल किया। उनका कहना है कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ऐसा स्थान है, जहां नयी तकनीकी के साथ मनचाहे कोर्स को पढ़ने का सपना पूरा होता है।

जबकि यूपी के सिंचाई विभाग से सेवा निवृत्त हो चुके 64 वर्षीय राम प्रसाद तयाल के मुताबिक वे बचपन से योग की शिक्षा लेना चाहते थे, लेकिन रिटायर्ड होने के बाद मुक्त विश्वविद्यालय की वजह से उनको यह डिग्री मिल सकी है।

शिक्षिका शकुन्तला लखेडा के मुताबिक महिलाओ के ओपन यूनवर्सिटी के माध्यम से शिक्षा लेना किसी वरदान से कम नही है।

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