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  • पीएम मोदी के 12 वर्षों में विकास को मिली नई गति : धामी

    पीएम मोदी के 12 वर्षों में विकास को मिली नई गति : धामी

    उत्तराखंड से विशेष लगाव के चलते राज्य को मिली विकास की लाखों करोड़ की योजनाएं

    आत्मविश्वास, सुरक्षित और विश्व पटल मे दस्तक का स्वर्णिम कालखंड हैं पीएम मोदी का कार्यकाल

    देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पीएम मोदी के सर्वाधिक बतौर निर्वाचित प्रधानमंत्री कार्यकाल देश की प्रगति और विकास के लिए समर्पित रहा है।

    यह कालखंड आत्मविश्वास से भरा, सुरक्षित और विश्व में श्रेष्ठता स्थापित करने का कालखंड रहा है। जहाँ तक उत्तराखंड का प्रश्न है तो उत्तराखंड से लगाव के चलते इसका लाभ भी सामने आया और राज्य में बड़े बदलाव को लेकर आया है। .
    पीएम का कार्यकाल देश और प्रत्येक देवभूमिवासी के लिए गौरवमयी और आनंददायक पलों को लेकर आया है।

    पार्टी प्रदेश मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के सफल और शानदार पूरा होने के अवसर पर मीडिया संवाद का कार्यक्रम मे उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन 12 वर्षों में न केवल सबसे लंबे समय तक निर्वाचित पीएम बनने का रिकॉर्ड ही नहीं बनाया, बल्कि बल्कि लंबे समय से विकासशील देश की अवधारणा पर अटके भारत को विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया है।

    इस दौरान जनता ने 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीसरी बार आशीर्वाद देकर साबित किया कि देश अब “नारे नहीं, काम पर वोट” देता है। आज भारत आत्मविश्वास से भरा, सुरक्षित और विश्व में सम्मानित राष्ट्र बन चुका है।
    उन्होंने कहा कि देश ने वह दौर देखा है जब विशेषकर कांग्रेस के शासन में योजनाएं कागजों पर बनती थीं। लेकिन मोदी सरकार में योजनाएं बनती भी है और जमीन पर उतरती भी हैं। पहले सरकारें शिलान्यास करती थीं और अगली पीढ़ियां उ‌द्घाटन का इंतजार करती थीं। लेकिन मोदी के नेतृत्व में शिलान्यास और उद्घाटन दोनों देखने को मिल रहे हैं।

    सीएम ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक गरीब हटाने के नारे दिए, लेकिन सिर्फ अपने नेताओं की गरीबी हटाई।लेकिन मोदी ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का अभूतपूर्व काम किया, जिसे दुनिया भी अचंभित होकर तारीफ कर रही है। विपक्ष विशेषकर कांग्रेस की सरकारों में न विकास हुआ और न ही गरीबों की दशा में परिवर्तन, क्योंकि उनके समय भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बना हुआ था। जबकि मोदी सरकार ने डिजिटल क्रांति की और डीबीटी के माध्यम से 4.31 लाख करोड़ गलत हाथों में जाने से बचाए। इसी का नतीजा है कि यह पैसा जरूरतमंदों के पास गया और विकास की गति बढ़ाने वाली योजनाओं में वालिस लौटा। आज हम दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल लेन देन करने वाले देश बन गए हैं जो बड़े बड़े देशों के लिए आज भी चमत्कार से कम नहीं है।

    उन्होंने पीएम मोदी के गौरवमयी कार्यकाल में हुए देश के धार्मिक सांस्कृतिक पुनरोत्थान का जिक्र करते हुए कहा कि अब से पहले की विपक्षी सरकारों ने लगभग 6 दशक तक राम मंदिर निर्माण के प्रश्न को टालते रहे। लेकिन मोदी जी ने श्री राम जन्म भूमि मंदिर ही नहीं, काशी, श्री बद्रीनाथ, केदारनाथ, उज्जैन महाकाल, सोमनाथ आदि तमाम पावन स्थलों का विकास कर, सांस्कृतिक आस्था और राष्ट्रीय गौरव दोनों का सम्मान किया।

    उन्होंने पूर्व की सरकारों द्वारा स्थित राजनीति की मूल अवधारणा में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति तुष्टिकरण और वोट बैंक तक सीमित रही, जबकि मोदी सरकार की नीति तुष्टिकरण की नहीं संतुष्टीकरण की है।

    उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता का प्रमाण है कि दूसरी बार शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री का पहला हस्ताक्षर किसान सम्मान निधि की फाइल पर था। इसी तरह 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 4 करोड़ गरीबों को पक्के मकान और 11 करोड़ माताओं-बहनों को उज्ज्वला योजना का लाभ मिला।

    जन-धन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान ने गरीबों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया है।

    सीएम ने देश की सुरक्षा नीति में आए जमीन आसमान के फर्क को स्पष्ट करते हुए कहा कि ये नया भारत है जो आतंकवादी घटना पर केवल निंदा भर नहीं करता बल्कि आतंकवाद का जवाब घर में घुसकर देता है। ऑपरेशन सिंदूर, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक ने दुनिया को भारत की नई सुरक्षा कार्य संस्कृति से परिचय कराया है। एक दशक पहले जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी उस नक्सलवाद की समाप्ति करने में मोदी सरकार सफल हुई है।

    ऐसे तमाम प्रभावित क्षेत्रों में भय का वातावरण समाप्त हुआ है और विकास का दायरा बढ़ रहा है। जुड़ते भारत, बढ़ते भारत की परिकल्पना का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में देश में 11 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क बनती थी, आज 34 किलोमीटर प्रतिदिन से अधिक सड़कें बन रही हैं।
    इसी तरह डीजल से चलने वाली ट्रेन नहीं बल्कि बिजली से हवा में बात करने वाली वंदे भारत ट्रेनें और अटल टनल, चेनाब ब्रिज और आधुनिक रेलवे स्टेशन नए भारत की पहचान बन गए हैं। आसमान की बात करें तो भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है।

    सीएम ने उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह और मार्गदर्शन से राज्य में 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाएं संचालित हैं। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पुनर्विकास ने देवभूमि को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थापित किया है।

    चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आया है। केदारनाथ एवं हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएं तीर्थयात्रा को नई ऊंचाई देने जा रही हैं।

    वाइब्रेंट विलेज योजना से सीमांत गांवों में विकास की नई धारा पहुंची है।2.54 लाख रुपए से अधिक महिलाओं का लखपति दीदी बनना प्रदेश मे महिला सशक्तिकरण का प्रमाण है, जिसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को है। माणा गांव जिसे मोदी जी ने सकारात्मक सोच की दृष्टि से पहला गाँव बताया और विकास की धारा को सबसे पहले वहां पहुंचाने का निर्णय लिया। उसी का परिणाम है कि यह देश का पहला गांव आज शतप्रतिशत लखपत दीदी वाला बन गया है।

    इसी तरह वाइब्रेंट विलेज योजना से सीमावर्ती क्षेत्रों का तेज गति से विकास हो रहा है। कांग्रेस के समय सीमांत गांव खाली हो रहे थे, आज वाइब्रेंट विलेज योजना से वहां फिर से विकास और उम्मीद लौट रही है। इसी तरह पीएम के मार्गदर्शन में एसडीजी इंडेक्स और निर्यात तैयारी सूचकांक में उत्तराखंड का प्रथम स्थान डबल इंजन सरकार की सफलता का प्रमाण है।

    देश की तरह प्रदेश में भी जिन परियोजनाओं को कांग्रेस दशकों तक फाइलों में दबाकर बैठी रही, उन्हें मोदी और धामी की डबल इंजन सरकार ने धरातल पर उतारा। जिसका उदाहरण है जमरानी परियोजना, लखवाड़ व्यासी और किसाऊ परियोजना है।

    उन्होंने राहुल के हालिया दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं के लिए उत्तराखंड चुनावी पर्यटन का विषय रहा, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपने आध्यात्मिक और भावनात्मक संबंधों से जोड़ा है।
    क्योंकि अल्मोड़ा में मौसम खराब था तो पैड़ी में तो साफ था और यदि पहाड़ में नहीं तो देहरादून के मैदानों में तो मौसम साफ था। जबकि वहां तो अगले दिन आना था, लेकिन युवराज का मूड खराब हो गया और वे वापिस लौट गए।

    उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस के 60 वर्षों में जो काम अधूरे रहे, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 वर्षों में गति, दिशा और परिणाम दिए हैं। आज देश और उत्तराखंड दोनों एक ही विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
    उन्होंने दोनों पार्टियों के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास विरासत में मिली राजनीति है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास जनता से मिला विश्वास है। यही विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का आधार बन रहा है। हम सभी उत्तराखंडवासियों के सामर्थ्य पर भरोसे से कह सकते है कि विकसित भारत निर्माण के लिए विकसित उत्तराखंड की दिशा में हम मजबूती से बढ़ रहे हैं।

    इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद शल महेंद्र भट्ट ने अपने सम्बोधन में कहा कि हम सभी यहाँ एक ऐतिहासिक अवसर पर एकत्रित हुए हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प के 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं।
    यह केवल एक सरकार के 12 वर्ष नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास, वैश्विक प्रतिष्ठा और जन-जन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की गौरवशाली यात्रा के ये 12 वर्ष हैं। इन 12 वर्षों में भारत ने अनेकों क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ प्राप्त की हुई हैं। गरीब कल्याण से लेकर महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान से लेकर युवाओं के लिए नए अवसर प्रदान करना, आधारभूत संरचना के विस्तार से लेकर डिजिटल क्रांति तक, हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। भारत आज विश्व मंच पर एक मजबूत, सक्षम और निर्णायक नेतृत्व वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ है।
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    जहां तक सवाल है उत्तराखंड का तो हमारे लिए भी ये 12 वर्ष विशेष महत्व रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश विकास, निवेश, पर्यटन, कनेक्टिविटी, रोजगार और सांस्कृतिक गौरव के नए आयाम स्थापित कर रहा है। आज उत्तराखंड विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
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    मीडिया संवाद के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश और उत्तराखंड में हुए ऐतिहासिक कार्यों, जन-कल्याणकारी योजनाओं तथा विकसित भारत 2047 के विजन पर एक संक्षिप्त वृत्त चित्र प्रस्तुत किया गया।
    संवाद कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, अनिल गोयल, मनवीर चौहान, सह प्रभारी राजेंद्र नेगी एवं प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन मुख्य रूप से मौजूद रही।

  • मुख्यमंत्री ने दिवंगत निशानेबाज जसपाल को भावभीनी श्रद्धांजलि की अर्पित

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत निशानेबाज जसपाल को भावभीनी श्रद्धांजलि की अर्पित

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज पद्मश्री से सम्मानित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज स्वर्गीय श्री जसपाल राणा के देहरादून आवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय जसपाल राणा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की।

  • निशानेबाजी में जसपाल राणा का अहम योगदान : सीएम

    निशानेबाजी में जसपाल राणा का अहम योगदान : सीएम

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पद्मश्री से सम्मानित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज जसपाल राणा के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, कठिन परिश्रम और उल्लेखनीय उपलब्धियों से न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया।
    निशानेबाजी के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को प्रेरित कर खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जसपाल राणा का निधन खेल जगत, उत्तराखंड तथा राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की ईश्वर से कामना है।

  • अनुभव आधारित शिक्षा की अनूठी पहल: बच्चों ने किया फलोद्यान का भ्रमण

    अनुभव आधारित शिक्षा की अनूठी पहल: बच्चों ने किया फलोद्यान का भ्रमण

    रामनगर। सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम के तहत पाठ्यक्रम निर्माण समिति की टीम ने सोमवार को सांवल्दे स्थित लगभग 200 बीघे के फलोद्यान का भ्रमण कराया। जोतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले सायंकालीन विद्यालय से जुड़े 30 से अधिक बच्चों ने इस दौरान आम, कटहल, लीची, अमरूद और आंवले की विभिन्न प्रजातियों, वृक्षों की देखभाल तथा सिंचाई व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की।

    फल उत्पादक अंकित बेलवाल ने बच्चों को बागवानी के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराते हुए बताया कि वानिकी के नियमों के अनुसार प्रत्येक पेड़ के रोपण का एक निर्धारित स्थान होता है। उन्होंने कहा कि आम और लीची के बागों के बाहरी हिस्से में कटहल के पेड़ लगाए जाते हैं, जिससे आंधी और तूफान के दौरान तेज हवाओं का प्रभाव कम हो और फलदार वृक्षों को नुकसान न पहुंचे।

    बेलवाल ने बताया कि देश में आम की एक हजार से अधिक किस्में पाई जाती हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आम से अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आम की नई किस्मों का विकास कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में किया जाता है।

    शाम के सत्र में विद्यार्थियों ने भ्रमण के अनुभवों के आधार पर चित्र बनाए और अनुभव लेखन किया। बच्चों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए एक-दूसरे के कार्यों की सराहना भी की।

    एससीईआरटी देहरादून में विद्यालयी शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माण समिति के सदस्य रह चुके मदन पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान स्कूल प्रणाली में प्रत्यक्ष अनुभवों के अवसर सीमित हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी भ्रमण और अवलोकन के माध्यम से सीखते हैं तथा बाद में उन अनुभवों को लेखन और चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी बनती है।

    कार्यक्रम संयोजक नवेंदु मठपाल ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियों से सायंकालीन विद्यालय के लिए तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम को समृद्ध करने में मदद मिलेगी।

    इस अवसर पर नवेंदु मठपाल, मदन पाण्डेय, अंकित बेलवाल, नंदराम आर्य, रितु बेलवाल, वंदना और सुमित कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

  • भारतीय खेल जगत में शोक: दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का हार्ट अटैक से निधन

    भारतीय खेल जगत में शोक: दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का हार्ट अटैक से निधन

    अचानक डूब गया , खेल जगत का चमकता सितारा

    खेल जगत में शोक की लहर

    देहरादून। भारत के दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का निधन हो गया है। कुछ समय पूर्व उन्हें स्वदेश लौटते हुए जहाज में हृदय घात हुआ था, जिसका उपचार दिल्ली के मैक्स अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर से खेल जगत और देश व उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

    जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हुआ था। वह मूल रूप से नैनबाग चिलामू के रहने वाले हैं। उनके पिता नारायण सिंह राणा उत्तराखंड सरकार में खेल मंत्री रहे हैं। उन्होंने 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी थी। महज 18 साल की उम्र में एशियाई खेलों में देश का परचम लहराने वाले जसपाल को भारतीय शूटिंग टीम का ‘मशाल वाहक’ माना जाता था।

    उनकी उपलब्धियों की सूची बेहद लंबी है। एशियाई खेलों के अलावा राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने भारत के लिए कई स्वर्ण और अन्य पदक जीते। 1995 में चेन्नई और 1999 में काठमांडू में आयोजित SAIF खेलों में उन्होंने 8-8 स्वर्ण पदक जीतकर रिकॉर्ड बनाया। 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में उनकी महारत को आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है।

    देश ने भी उनके योगदान को समय-समय पर सम्मानित किया। उन्हें वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया। द्रोणाचार्य पुरस्कार उन्हें एक सफल कोच के रूप में भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मिला।
    खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग में कदम रखा और जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच बने। उनके मार्गदर्शन में सौरभ चौधरी और अनीस भनवाला जैसे युवा निशानेबाज तैयार हुए। वे ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर की कोच भी रहे।
    मनु भाकर ने 2024 के पेरिस ओलंपिक में दो ऐतिहासिक कांस्य पदक जीते, जिसमें जसपाल राणा की अहम भूमिका रही। राष्ट्रीय राइफल संघ NRAI ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था।

    जसपाल राणा के निधन से भारतीय शूटिंग ने अपना सबसे बड़ा स्तंभ खो दिया है। उनके शिष्यों और खेल प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

  • कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत

    कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत

    अल्मोड़ा जनपद उच्च शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण

    दौरे के दौरान विभिन्न शैक्षणिक व सहकारी संस्थानों का भी करेंगे निरीक्षण

    देहरादून । सूबे के कैबिनेट मंत्री डाॅ धन सिंह रावत कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। अपने भ्रमण के दौरान डाॅ. रावत अल्मोड़ा जनपद में विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे। इस दौरान डाॅ. रावत राजकीय महाविद्यालय तल्ला-सल्ट व स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग कर नवनिर्मित भवनों का लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा वह अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न शैक्षणिक व सहकारी संस्थानों का औचक निरीक्षण भी करेंगे। डाॅ. रावत अल्मोड़ा में केन्द्र सरकार के विकास, विश्वास व जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रेस वार्ता को सम्बोधित करेंगे।

    कैबिनेट मंत्री व अल्मोड़ा जनपद के प्रभारी मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि वह 11 व 12 जून को कुमाऊं मण्डल के भ्रमण पर रहेंगे। उन्होंने बताया कि 12 जून शुक्रवार को वह अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में प्रतिभाग करेंगे। इसके अलावा वह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में वाणिज्य संकाय के नव निर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। इसके उपरांत डाॅ. रावत केन्द्र सरकार द्वारा विकास के, विश्वास के, जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने पर प्रेस वार्ता को सम्बोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने अपने 12 वर्ष पूर्ण कर लिये हैं। डाॅ. रावत अपने कुमाऊं भ्रमण के दौरान विभिन्न शैक्षिणिक कार्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों व सहकारी समितियों का भी औचक निरीक्षण करेंगे।

     

    इससे पहले डाॅ. रावत अपने तीन दिवसीय श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र भ्रमण के अंतिम दिन आज डुमणीकोट, पाटों में व्यापक स्तर पर जनसम्पर्क कर आम लोगों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। इसके अलावा उन्होंने 230.93 लाख की लागत से गणतखाल-कठुखाल मोटर मार्ग के डामरीकरण का लोकार्पण तथा 25 लाख की लागत से बनने वाले देवराड़ी खेल मैदान के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया, साथ ही उन्होंने बूंगीधार में प्रभागीय वनाधिकारी पौड़ी, उपजिलाधिकारी थलीसैण व दूधातोली विनसर चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विनसर महादेव मंदिर की भूमि हस्तांतरण पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये। बैठक के उपरांत डाॅ. रावत ने अल्मोड़ा जनपद के सल्ट पहुंचकर राजकीय महाविद्यालय तल्ला-सल्ट में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के नवनिर्मित अकादमिक भवन का लोकापर्ण किया।

  • iGOT प्रशिक्षण में लापरवाही पर शिक्षा विभाग सख्त, दिए कड़े निर्देश

    iGOT प्रशिक्षण में लापरवाही पर शिक्षा विभाग सख्त, दिए कड़े निर्देश

    3534 शिक्षक-कर्मचारी अब तक नहीं कर पाए एक भी कोर्स

    जून वेतन से पहले प्रशिक्षण प्रमाणपत्र देना होगा

    सभी अधिकारियों को अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश

    देहरादून। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने iGOT (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की धीमी प्रगति पर गंभीर नाराजगी जताई है।
    विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि अब तक 3534 अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक iGOT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध एक भी प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा नहीं कर पाए हैं।
    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों तथा मंडलीय अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विभाग के अधीन कार्यरत सभी अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक अपने दायित्वों के अनुरूप iGOT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कम से कम एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तत्काल पूरा करें।
    निदेशक ने बताया कि पूर्व में भी इस संबंध में कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कार्मिकों द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा नहीं किया जाना चिंताजनक है। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
    आदेश में कहा गया है कि अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों, अतिथि शिक्षकों तथा आउटसोर्स कार्मिकों को भी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जाए और उन्हें न्यूनतम एक कोर्स पूर्ण कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
    विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जून 2026 के वेतन आहरण से पूर्व सभी अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक यह प्रमाणित करें कि उन्होंने iGOT प्लेटफॉर्म पर कम से कम एक प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कर लिया है।

    इसके लिए संबंधित अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्राप्त कर अभिलेखों में सुरक्षित रखने को कहा गया है।
    शिक्षा विभाग का मानना है कि iGOT प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी कार्मिकों की क्षमता वृद्धि, कार्यकुशलता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार लाया जा सकता है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहभागिता को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाय।

  • मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध पूरा करें, लापरवाही नहीं होगी सहन: डीएम

    मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध पूरा करें, लापरवाही नहीं होगी सहन: डीएम

    565 में से 353 मुख्यमंत्री घोषणाएं पूर्ण, शेष कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

    लंबित घोषणाओं पर विभागों को नोटिस, समयसीमा तय कर होगी जवाबदेही

    126 मुख्यमंत्री घोषणाओं पर कार्यवाही गतिमान, शीघ्र जनता को समर्पित करने पर जोर

    जन आकांक्षाओं से जुड़ी हैं मुख्यमंत्री घोषणाएं, युद्धस्तर पर पूरा करें कार्य-डीएम

    देहरादून । वजिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार को कहा कि जनहित से जुड़ी मुख्यमंत्री घोषणाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता पर युद्धस्तर पर पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही, देरी अथवा शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री घोषणाओं की अद्यतन स्थिति को पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाए। शासन स्तर पर स्वीकृति अथवा अन्य कारणों से लंबित प्रस्तावों के संबंध में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी स्वयं शासन के उच्चाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर उनकी प्रगति सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की लगातार पैरवी कर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए।

    बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद स्तर पर कोई भी मुख्यमंत्री घोषणा तीन माह से अधिक समय तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। जिन विभागों द्वारा अभी तक कार्यदायी संस्थाएं नामित नहीं की गई हैं, वे तत्काल कार्यदायी संस्था का चयन कर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करें। जिन योजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता है, उनमें संबंधित उप जिलाधिकारी से समन्वय स्थापित कर शीघ्र भूमि चयन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री घोषणाओं की मॉनिटरिंग के लिए नियुक्त नोडल अर्थ एवं संख्या अधिकारी को निर्देश दिए कि सभी अपूर्ण घोषणाओं के लिए विभागवार समयसीमा निर्धारित की जाए।

    निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण न करने वाले विभागों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, उन्हें युद्धस्तर पर पूरा कर जल्द से जल्द जनता को समर्पित किया जाए, ताकि मुख्यमंत्री घोषणाओं का लाभ समयबद्ध रूप से आमजन तक पहुंच सके।

    समीक्षा बैठक के दौरान सिंचाई विभाग में सर्वाधिक घोषणाएं लंबित पाए जाने तथा सक्षम अधिकारी की अनुपस्थिति एवं सहायक अभियंता स्तर पर समुचित जानकारी प्रस्तुत न किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने विभाग को नोटिस जारी करते हुए भविष्य में बैठकों में पूर्ण तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए।

    सिंचाई, शहरी विकास, पेयजल, लोक निर्माण विभाग, विद्यालयी शिक्षा, पर्यटन, आवास तथा समाज कल्याण विभागों में अपेक्षाकृत अधिक घोषणाएं लंबित पाए जाने पर संबंधित विभागों को भी नोटिस जारी करते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। साथ ही मुख्य विकास अधिकारी के स्तर पर मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने को कहा गया।

    जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं क्षेत्र विशेष की जन आकांक्षाओं और विकास का आधार हैं। इनके क्रियान्वयन में किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि घोषणा पटल पर अपने विभाग से संबंधित घोषणाओं की अद्यतन जानकारी भी नियमित रूप से प्रदर्शित करें।

    बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2021 से अब तक जनपद में मुख्यमंत्री द्वारा कुल 565 घोषणाएं की गई हैं। इनमें से 353 घोषणाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है। 76 घोषणाएं अपूर्ण, 10 आंशिक रूप से पूर्ण तथा 126 घोषणाओं पर कार्यवाही गतिमान है। गतिमान घोषणाओं में सिंचाई विभाग की 40, शहरी विकास, आवास एवं लोक निर्माण विभाग की 10-10, संस्कृति विभाग की 9, विद्यालयी शिक्षा की 8, पर्यटन की 7, चिकित्सा की 5, खेल विभाग की 4 तथा ऊर्जा एवं पेयजल विभाग की 3-3 घोषणाएं शामिल हैं।

    बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, लोक निर्माण विभाग, यूपीसीएल, पेयजल, सिंचाई, समाज कल्याण, बाल विकास आदि विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • नैनीताल में 238 होम स्टे पर गिरी गाज, पंजीकरण रद्द

    नैनीताल में 238 होम स्टे पर गिरी गाज, पंजीकरण रद्द

    नैनीताल में 91 होम स्टे पर लगा जुर्माना

    नैनीताल। जिलाधिकारी के निर्देश पर जनपद में संचालित होम स्टे इकाइयों का व्यापक निरीक्षण समस्त तहसीलों में उप जिलाधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों तथा पर्यटन विभाग द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान विभिन्न होम स्टे संचालकों द्वारा नियमावली के प्रावधानों के उल्लंघन के मामले सामने आए, जिसके आधार पर कुल 580 इकाइयों को नोटिस जारी किए गए।
    प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पूर्व में 55 तथा 10 जून 2026 तक 36 अन्य इकाइयों सहित कुल 91 होम स्टे संचालकों पर 10 हजार रुपये प्रति इकाई का अर्थदंड अधिरोपित किया है।
    वहीं, नोटिसों के जवाब में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त न होने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व में 150 तथा 10 जून 2026 तक 88 अन्य होम स्टे सहित कुल 238 होम स्टे इकाइयों का पंजीकरण निरस्त कर दिया है।
    प्रशासन के अनुसार पंजीकरण निरस्त किए जाने के प्रमुख कारणों में होम स्टे स्वामी का इकाई में निवासरत न होना, पार्किंग सुविधा का अभाव, होम स्टे का होटल, कैफे अथवा रेस्तरां के रूप में संचालन तथा इकाई को लीज पर देकर व्यावसायिक उपयोग में लाया जाना शामिल है।
    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि होम स्टे योजना के मूल उद्देश्य और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आगे भी निरीक्षण एवं प्रवर्तन की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ने जारी की नई नीति-2026

    नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ने जारी की नई नीति-2026

    विज्ञान आधारित विकास, नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार

    देहरादून। धामी सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी कर दी गई है।

    इस नीति का उद्देश्य राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास और नवाचार को बढ़ावा देते हुए उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
    नई नीति में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक का प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया है।

    नीति का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाना है।
    इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो नीति के कार्यान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन का कार्य करेगा। इसके साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विकेन्द्रीकृत संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    नीति के तहत राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए व्यापक सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा।

    राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्ट-अप्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा। नीति के अंतर्गत वैज्ञानिक जानकारी, शोध निष्कर्षों और संसाधनों तक सभी हितधारकों की सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक निधि से संचालित शोध कार्यों से प्राप्त डेटा का डिजिटल भंडारण किया जाएगा तथा इसे सभी हितधारकों तक सुरक्षित और सरल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार की “एक राष्ट्र, एक सदस्यता” पहल के माध्यम से शोध और विज्ञान संबंधी अभिलेखागारों तक पहुंच भी उपलब्ध होगी। “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की अवधारणा को साकार करने के लिए तकनीक के स्वदेशीकरण और स्थानीयकरण को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।

    स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप समाधान

    नई नीति के तहत राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भी आधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ा जाएगा। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों के कौशल विकास हेतु अत्याधुनिक शिक्षण-अधिगम केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

    वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के बीच सहयोग

    नई नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और मिश्रित वास्तविकता (एमआर) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक, खाद्य-जल-ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नई नीति के तहत जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्तियां संचालित की जाएंगी। राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष सहभागिता पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

    नवाचार वेधशाला

    इसके अतिरिक्त राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला की स्थापना की जाएगी, जो सभी योजनाओं, कार्यक्रमों, अनुदानों और प्रोत्साहनों से संबंधित जानकारी का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार होगी। अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे तथा नवप्रवर्तकों को पेटेंट, कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा अधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जाएगी। उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 राज्य में विज्ञान आधारित विकास, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी तथा विकसित और सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

    चुनौतियों के समाधान पर जोर

    राज्य में विज्ञान प्रसार के लिए नोडल एजेंसी के रूप में उत्तररखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्वोगिकी परिषद (यूकॉस्ट) कार्य कर रही है। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के अनुसार उत्तराखडं वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन के साथ ही हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई नीति इन चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोध संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। प्रो दुर्गेश पंत के अनुसार यह नीति महिलाओं, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, सीमांत समुदायों और दिव्यांगजनों को समान अवसर प्रदान करते हुए विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में समावेशी और समान भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

    “उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार

    नीति-2026 हमारे राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हमारा उद्देश्य केवल विज्ञान और तकनीक का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है। यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तराखंड के निर्माण को नई गति मिलेगी।
    पुष्कर सिंह धामी
    मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड