Category: साहित्य एवं संस्कृति

  • विदुषी निशंक को प्रथम ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ से नवाजा गया

    विदुषी निशंक को प्रथम ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ से नवाजा गया

    शिक्षा, न्याय, साहित्य एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हुईं सम्मानित

    नई दिल्ली। उत्तराखंड की बेटी विदुषी निशंक को शिक्षा, न्याय, साहित्य एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रथम ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। संस्कृति युवा संस्था एवं इंडियन ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार आयोजित यह सम्मान समारोह नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (PMML) ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ।

    समारोह में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री  कलराज मिश्र, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने विदुषी निशंक को ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ प्रदान कर सम्मानित किया।

    पेशे से अधिवक्ता विदुषी निशंक भारत के प्रथम ‘लेखक गाँव’ (Writers’ Village) की निदेशक हैं तथा सामाजिक क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैं। वे अपनी स्वर्गीय माता की स्मृति में स्थापित ‘कुसुम कांता फाउंडेशन’ के माध्यम से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक सेवा के कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं। शैक्षणिक रूप से वे विधि में स्वर्ण पदक विजेता हैं तथा यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से एलएलएम हैं। साथ ही वे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के लिए कॉमनवेल्थ स्कॉलर रही हैं। शिक्षा, विधि और सामाजिक सरोकारों में उनकी सक्रिय भागीदारी महिला सशक्तिकरण एवं युवा नेतृत्व के प्रेरक उदाहरण के रूप में उत्तराखंड को गौरवान्वित कर रही है।

    समारोह में विदुषी निशंक के साथ प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना  शोवना नारायण, भारतीय फिल्म एवं मीडिया जगत के श्री संदीप मारवाह, लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिन्हा, स्वामी प्रेम अन्वेष जी महाराज,  स्वाति गर्ग सहित देशभर से विभिन्न क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों को भी ‘दिल्ली गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।

  • साहित्यकार डॉ. योजना साह ने मुख्यमंत्री से की शिष्टाचार भेंट

    साहित्यकार डॉ. योजना साह ने मुख्यमंत्री से की शिष्टाचार भेंट

    देहरादून। साहित्यकार एवं इंडो-जर्मन सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. योजना साह जैन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की।
    इस अवसर पर उन्होंने अपनी साहित्यिक कृतियां ‘इमली का चटकारा’ (कहानी-संग्रह), ‘बनारस मीट्स बर्लिन’ (उपन्यास) तथा ‘कागज पे फुदकती गिलहरियां’ (कविता-संग्रह) मुख्यमंत्री को भेंट की।

    मुख्यमंत्री ने डॉ. योजना साह जैन को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साहित्य समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने भारत और जर्मनी के मध्य सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करने में डॉ. जैन के योगदान की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और संवेदनाओं को वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक होंगी।

  • लेखक गांव में बिखरी साहित्य और संस्कृति की मनमोहक छटा

    लेखक गांव में बिखरी साहित्य और संस्कृति की मनमोहक छटा

    रस्किन बॉन्ड फेस्टिवल

    थानों। भारत के पहले “लेखक गाँव” में आयोजित रस्किन बॉन्ड फेस्टिवल साहित्य, कला, संगीत और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बनकर सामने आया। द रस्किन बॉन्ड फाउंडेशन तथा स्टोनएक्स ग्लोबल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में देशभर से साहित्य प्रेमियों, कलाकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और संस्कृति से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
    इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री, भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी उपस्थित रहीं।
    डॉ. किरण बेदी ने लेखक गाँव की अवधारणा की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, शिक्षा, संस्कृति और रचनात्मक चेतना का जीवंत केंद्र है, जहाँ साहित्य समाज निर्माण की शक्ति बनकर उभरता है।
    मंच पर लेखक गाँव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’, सिद्धार्थ बॉन्ड, स्टोनएक्स के सीएमओ सुशांत पाठक, आर्ट डायरेक्टर श्वेता अग्रवाल एवं स्टोनएक्स सीबीओ श्रेयांश शर्मा भी उपस्थित रहे।
    स्वागत उद्बोधन में आयोजकों ने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है और कहानियाँ पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य करती हैं। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से पुस्तकों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि रस्किन बॉन्ड जैसे साहित्यकार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के दीपस्तंभ हैं।
    विशिष्ट अतिथि डॉ. किरण बेदी ने अपने संबोधन में कहा कि कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक जागरूकता का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव जैसे रचनात्मक केंद्र युवाओं को संवेदनशीलता, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं, जो भविष्य के समाज निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
    सिद्धार्थ बॉन्ड ने रस्किन बॉन्ड फाउंडेशन की सांस्कृतिक दृष्टि, साहित्यिक विरासत और संस्था की रचनात्मक पहलों पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात स्टोनएक्स ग्लोबल की विशेष प्रस्तुति में सुशांत पाठक ने “आर्ट आइकॉन और मास्टरी” विषय पर संस्था की सांस्कृतिक पहल “साधना श्रृंखला” का परिचय देते हुए कहा कि कला और साहित्य में वर्षों की तपस्या, अनुशासन और समर्पण को नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है।
    कार्यक्रम में “मास्टरी” शीर्षक विशेष चलचित्र का प्रदर्शन किया गया, जिसमें रस्किन बॉन्ड के जीवन, उनकी लेखन यात्रा, प्रकृति प्रेम और हिमालय से उनके गहरे संबंध को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रसिद्ध कवयित्री प्रिया मलिक ने “द आर्ट ऑफ़ बिलॉन्गिंग” विषय पर अपनी विशेष काव्य प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
    कार्यक्रम के अंतर्गत लेखक सक्षम गर्ग एवं एरिक चोपड़ा के मध्य एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित हुई। चर्चा का विषय था — “ऐसे पात्रों का निर्माण जो वास्तविक प्रतीत हों”। इस दौरान कहानी कहने की परंपरा, संवेदनशील लेखन और चरित्र निर्माण की कला पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। लेखक गाँव द्वारा एक विशेष वीडियो प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें लेखक गाँव की अवधारणा, उसकी सांस्कृतिक यात्रा और रचनात्मक पहलों को दर्शाया गया।
    लेखक गाँव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने साहित्य, संस्कृति और संवेदनशीलता के महत्व पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में रचनात्मक चेतना को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं। इसके पश्चात रस्किन बॉन्ड के सम्मान में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अवसर पर श्वेता अग्रवाल ने कला अवधारणा एवं उसके सृजनात्मक पक्ष पर प्रकाश डाला।

    समारोह का समापन सुप्रसिद्ध उत्तराखंडी लोक गायिका मीना राणा की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर रस्किन बॉन्ड का विशेष संदेश भी साझा किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि कहानियाँ तभी जीवित रहती हैं जब लोग उन्हें पढ़ते हैं, साझा करते हैं और पीढ़ियों तक आगे बढ़ाते हैं। लेखक गाँव की वादियों में आयोजित इस साहित्य महोत्सव को उन्होंने अत्यंत आत्मीय और भावुक अनुभव बताया।

  • उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित हुए डॉ. जितेन ठाकुर

    उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित हुए डॉ. जितेन ठाकुर

    कई वरिष्ठ रचनाकारों को मिला “दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार”

    साहित्यकार समाज के मार्गदर्शक और प्रेरक होते हैं: मुख्यमंत्री

    राज्य में स्थापित होंगे दो आधुनिक “साहित्य ग्राम”

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025 में उत्तराखंड के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया।

    इसके साथ मुख्यमंत्री ने डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय एवं अता ए साबिर अफजल मंगलौरी को “उत्तराखंड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट साहित्यकारों एवं “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
    मुख्यमंत्री ने साहित्य नारी वंदन सम्मान के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य हेतु प्रो. दिनेश चमोला, उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार के अंतर्गत डॉ भूपेंद्र बिष्ट, डॉ सुधा जुगरान, शीशपाल गुसाई, उत्कृष्ट कुमाऊनी एवं गढ़वाली साहित्य हेतु तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट एवं गजेंद्र नौटियाल आदि को सम्मानित किया |

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनके लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्हें प्रदेश के महान साहित्यकारों को सम्मानित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से सम्मानित डॉ. जितेन ठाकुर न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

    उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि वे अपनी रचनात्मकता के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान” समारोह प्रदेश की साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक चेतना और साहित्यकारों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि सदियों से ज्ञान, संस्कृति और सृजन का केंद्र रही है, जहां हिमालय, गंगा और प्राकृतिक सौंदर्य ने अनेक लेखकों और कवियों को प्रेरित किया है। सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत “शिवानी”, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों ने इस धरा को गौरवान्वित किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और लेखक केवल शब्दों के निर्माता नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और उत्तराखंड राज्य निर्माण में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा विभिन्न पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य में दो “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं, जहां साहित्यकारों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है और साहित्यिक धरोहर को पुनर्स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। इसी प्रेरणा से राज्य सरकार भी उत्तराखंड की बिखरी साहित्यिक धरोहर को संकलित एवं संरक्षित करने के लिए प्रयासरत है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश के साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाएं तथा समाज को दिशा देने का कार्य निरंतर करते रहेंगे।

    इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास, विधायक सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

  • 33वां उमेश डोभाल स्मृति समारोह: 24-25 मार्च को अल्मोड़ा में आयोजन

    33वां उमेश डोभाल स्मृति समारोह: 24-25 मार्च को अल्मोड़ा में आयोजन

    सुप्रसिद्ध साहित्यकार कपिलेश भोज को मिलेगा “उमेश डोभाल स्मृति सम्मान”

    अल्मोड़ा। 33वां उमेश डोभाल स्मृति सम्मान समारोह 24 और 25 मार्च को अल्मोड़ा में होगा।
    पत्रकार स्वर्गीय डोभाल की याद में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान समारोह समिति हर साल प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम आयोजित करती है। कार्यक्रम में पत्रकारिता अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं।
    इस वर्ष का कार्यक्रम 24 और 25 मार्च को जिला पंचायत सभागार अल्मोड़ा में होगा। कार्यक्रम की तैयारी को लेकर वीरवार को अल्मोड़ा में आयोजन समिति की बैठक हुई। बैठक में समारोह की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा कर सहयोगियों को दायित्व सौंपे गए। तय हुआ 24 मार्च को प्रातः 11.30 बजे गांधी पार्क से समारोह स्थल तक सांस्कृतिक जुलूस निकलेगा।
    2:00 बजे से विशेषज्ञ उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष विषय पर व्याख्यान देंगे। 25 मार्च को सम्मान समारोह समिति नामित प्रतिभागियों का सम्मान करेगी।

    आयोजन समिति ने सामाजिक, सांस्कृतिक, कर्मचारी, पत्रकार आदि संगठनों से कार्यक्रम में भागीदारी का आह्वान किया है। बैठक में डॉ. हयात सिंह रावत, प्रकाश पांडेय,डा. निर्मल जोशी, राजेंद्र रावत, सीएस द्विवेदी, प्रेस क्लब उपाध्यक्ष कमलेश कनवाल, सचिव अशोक पांडे,उप सचिव कपिल मल्होत्रा, मोहित अधिकारी, किशन जोशी, हरीश भंडारी, हिमांशु लटवाल,
    दयाकृष्ण कांडपाल,नसीम अहमद आदि थे

    ‘गिर्दा’ स्मृति जनकवि सम्मान सुप्रसिद्ध रंगकर्मी यमुना राम को मिलेगा

    उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा प्रति वर्ष उमेश डोभाल स्मृति सम्मान, राजेन्द्र रावत ‘राजू’ स्मृति जनसरोकार सम्मान, गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ स्मृति जनकवि सम्मान एवं मीडिया के विभिन्न क्षेत्रों में पुरस्कार दिया जाता है।
    ट्रस्ट द्वारा उमेश डोभाल स्मृति सम्मान 2025 कपिलेश भोज को उनकी साहित्यधर्मिता के लिए उनके समर्पण, प्रेरणादायक और अनुकरणीय कार्य हेतु दिया जाएगा ।

    समारोह में राजेन्द्र रावत ‘राजू’ स्मृति जनसरोकार सम्मान पर्यावरण संवर्द्धन के प्रति समर्पित और “वृक्ष प्रेमी” के नाम से मशहूर किशन सिंह मलड़ा को दिया जायेगा।

    गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ स्मृति जनकवि सम्मान सुप्रसिद्ध रंगकर्मी यमुना राम को उनकी जनपक्षीय नाटकों और जनगीत के लिए दिया जायेगा।

    ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया के युवा पत्रकारों को उनके विगत वर्षों में किये गये कार्यों के आधार पर पुरस्कार दिया जाता है। इसमें 11 हजार रूपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र भेंट किया जाता है।

  • सनातन संस्कृति की अखंड ज्योति है गीता प्रेस – शाह

    सनातन संस्कृति की अखंड ज्योति है गीता प्रेस – शाह

    मासिक पत्र ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक के विमोचन समारोह

    मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों के निर्माण के लिए कार्य करने वाला संस्थान है – गीता प्रेस

     

    ऋषिकेश। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने ऋषिकेश में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित मासिक पत्र ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक के विमोचन समारोह को संबोधित किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने लक्ष्मीनारायण मंदिर एवं मां गंगा के दर्शन और पूजन भी किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि सनातन धर्म से आकांक्षा रखने वाला, दुनिया की समस्याओं के समाधान लिए भारतीय संस्कृति की ओर देख रहा है और इस भूमि से प्रेम करने वाला भारत और दुनिया का कोई भी व्यक्ति गीता प्रेस से अनजान नहीं हो सकता।
    उन्होंने कहा कि पूज्य भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने गीता प्रेस के माध्यम से लगभग 103 वर्षो से सनातन धर्म की लौ को ताकत देने का काम किया है। उन्होंने करोडों लोगों को भक्ति के माध्यम से आध्यात्म की ओर प्रेरित किया और इस रास्ते पर चलते हुए मोक्ष तक का रास्ता प्रशस्त किया।
    शाह ने कहा कि पोद्दार जी ने सब कुछ छोड़कर अपना पूरा जीवन गीता प्रेस को समर्पित किया। पोद्दार जी ने गीता प्रेस के माध्यम से हर व्यक्ति और परिवार के हृदय में भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा निर्मित करने का काम किया है।

    अमित शाह ने कहा कि गीता प्रेस मुनाफे के लिए नहीं बल्कि पीढ़ियों का निर्माण करने के लिए चलती है। स्वावलंबी तरीके से सद्साहित्य को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने का काम गीता प्रेस ने किया है।

    उन्होंने कहा कि कल्याण एक प्रकार से ज्ञान की सनातन ज्योति को हर वाचक तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।  शाह ने कहा कि आज सनातन चेतना का उत्सव देश में दिखाई दे रहा है और कल्याण ने हर संकट में भारतीय संस्कृति के दीप को जलाए रखने का काम किया है।

    उन्होंने कहा कि कल्याण एक पत्रिका मात्र नहीं है बल्कि भारतीयों के लिए आध्यात्मिक जगत का पथप्रदर्शक है। भारत की संस्कृति को अमर करने के लिए बहुत सारे महत्वपूर्ण प्रयासों में से सबसे मज़बूत प्रयास का नाम कल्याण पत्रिका है।
    उन्होंने कहा कि कल्याण ने अपने 100 साल में सनातन धर्म के अनुयायियों की सज्जनशक्ति को संगठित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जो भारत को जानते हैं वो गीता प्रेस के अतुलनीय योगदान का मूल्यांकन नहीं कर सकते।

    केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कल्याण जैसी पत्रिका का 100 वर्ष पूरा करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। अपनी शुरूआत से लेकर आज तक निरंतर कल्याण का एक एक शब्द, वाक्य और अंक, सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को समर्पित रहा है।
    उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने आदि शंकराचार्य जी के उपनिषदों की मीमांसा को लोगों तक पहुंचाकर एक बहुत बड़ा काम किया है। श्री शाह ने कहा कि गीता प्रेस ने चार पीढ़ियों से निरंतर हर पीढ़ी के लिए वही साहित्य बिना किसी प्रकार से डाइल्यूट किए लोकभोग्य बनाने का काम किया है।

    अमित शाह ने कहा कि कल्याण ने अब तक सनातन समर्पित 100 विशेषांक प्रकाशित किए हैं। उन्होंने कहा कि 1932 के अंक में श्री कृष्ण को श्रद्धा की दृष्टि से, राजनीतिज्ञ, तत्वज्ञानी और सभी दुष्टों का दमन करने वाले महापुरुष के रूप में एक ही अंक में कल्याण ने लोगों के सामने रखने का काम किया है।
    उन्होंने कहा कि कल्याण ने योग अंक 1936 में प्रकाशित किया था, जिसमें योग की व्याख्या, स्वरूप और प्रणालियों पर विस्तार से प्रकाश डालने का काम किया गया था। स्वतंत्रता के बाद कल्याण का पहला प्रकाशित होने वाला अंक नारी अंक था।
    उन्होंने कहा कि कल्याण का हिंदू संस्कृति अंक उस समय आया जब 1950 में पाश्चात्य असर से हमारे देश की नीतियां गढ़ी जा रही थीं। श्री शाह ने कहा कि इस अंक के पीछे विचार रहा होगा कि जब देश आज़ाद होकर अपनी नीतियां बना रहा है तब उनके मूल में हमारी भारतीय संस्कृति के विचार समाहित होने चाहिए न कि विदेशी विचार होने चाहिए।
    उन्होंने कहा कि आज कल्याण के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्यों को नीतियों के मूल में समाहित कर, नीतियों को गढ़ा जा रहा है।

    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जब अंग्रेज़ों का शासन था उस वक्त धर्म को अंधविश्वास कहना एक प्रकार से फैशन बन चुका था, उस वक्त भाई जी ने किसी प्रकार की आक्रामक भाषा का उपयोग किए बिना, कल्याण नाम का ज्ञान का एक दीपक जलाने का काम किया। इसका उद्देश्य लोगों का मंगल और जगत का कल्याण ही था।

    उन्होंने कहा कि पूरे विश्व के कल्याण की भावना को कल्याण में समाहित किया गया है। श्री शाह ने कहा कि तर्क, शास्त्र और शांति के माध्यम से जितना विरोध हमारे मूल विचारों का होता था, पोद्दार जी ने उसका उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन की रक्षा शोर से नहीं बल्कि शास्त्र और तर्क से ही हो सकती है। श्री शाह ने कहा कि गीता प्रेस ने कभी अपने प्रचार और धन एकत्रित करने के लिए कुछ नही किया क्योंकि इसका उद्देश्य व्यक्ति-केन्द्रित नहीं बल्कि विचार-केन्द्रित था।
    गृह मंत्री ने कहा कि कल्याण ने हमें बताया कि सभ्यताएं तलवार से नहीं बल्कि शब्दों और ज्ञान से ही खड़ी होती हैं और शब्द तभी प्रभावी होते हैं जब वो सत्य और सत्व के प्रकाश से चमकते हों।

    अमित शाह ने कहा कि जब कल्याण शुरू हुआ तब महात्मा गांधी ने कहा था कि कल्याण में कभी विज्ञापन मत छापना और आज तक कल्याण ने एक भी विज्ञापन नहीं छापा है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ग्रथों और पत्रिकाओं को बाज़ार के दबाव से मुक्त रहना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि गीता प्रेस का उद्देश्य चरित्र और राष्ट्र निर्माण है।
    गीता प्रेस ने अनेक प्रकार के साहित्यों की रचना की है और जिससे राष्ट्र में एक चेतना की जागृति हुई है। गीता प्रेस ने करोड़ों संतों के अहर्निश प्रयास को रेखांकित कर लोगों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया है। इसके कारण हम एक बार फिर से सनातन धर्म के प्रति आकर्षण, आशा और भारतीय संस्कृति में विश्वास दृढ़ होता देख रहे हैं।

    केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी  के 11 साल के कार्यकाल में हमारे युवाओं में एक बहुत बड़ा गुणात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि 550 साल बाद रामलला का एक गगनचुंबी मंदिर अयोध्या में बन चुका है। औरंगजेब द्वारा तोड़ा गया काशी विश्वनाथ कॉरीडोर पूरी दुनिया को संदेश देता है कि तोड़ने वालों से श्रद्धा की ताकत बहुत बड़ी होती है। हाल ही में सोमनाथ मंदिर को तोड़े हुए 1000 साल हुए हैं औऱ भारत सरकार पूरा वर्ष सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष के रूप में मनाने जा रही है। सोमनाथ को 16 बार तोड़ा गया और इसे 16 बार फिर से बनाया गया है और इसे तोड़ने वाले गज़नी, खिलजी आदि सब कहीं गुम हो गए लेकिन सोमनाथ की सनातन की ध्वजा आज भी लहरा रही है।
    शाह ने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हट गई, महाकालेश्वर का कॉरिडोर बना, केदारनाथ का पुनर्रूद्धार किया गया, बद्रीधाम का स्ट्रेच पूरा हो चुका है। देशभर में 35 से अधिक तीर्थों की पुनर्जागृति और महिमामंडन पर विचार हो रहा है।
    उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा का अब कोई विरोध नहीं हो रहा है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी विश्व में हर जगह हिंदी में बोलते हैं तो पूरे देश का सीना गर्व  से चौड़ा हो जाता है।
    उन्होंने कहा कि भारत से चुराकर पूरी दुनिया में गई 642 से अधिक मूर्तियों को वापिस लाकर उनके पहले के स्थान पर पुनर्स्थापित करने का भी काम हुआ है। शाह ने कहा कि करोड़ों संतों ने विकट समय में धर्म, सत्व और संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन और गीता प्रेस और कल्याण जैसी पत्रिकाओं ने सनातन की लौ को हमेशा बचाकर रखा है।

  • डॉ. निशंक की दो नई पुस्तकों का विश्व पुस्तक मेले में लोकार्पण

    डॉ. निशंक की दो नई पुस्तकों का विश्व पुस्तक मेले में लोकार्पण

    देहरादून। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में आज प्रसिद्ध साहित्यकार एवं देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की दो पुस्तकों का विमोचन संपन्न हुआ।

    विकसित भारत संकल्प और यह मच्छी मांगते हैं भारत के युवाओं और शिक्षा नीति पर आधारित इन दो पुस्तकों ‘आत्मनिर्भरता से नवभारत निर्माण’ तथा ‘बदलते वैश्विक परिवेश में मूल्य आधारित शिक्षा’ मैं डॉक्टर निशंक की विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारों टीजक आलेख हैं।‘आत्मनिर्भरता से नवभारत निर्माण’ पुस्तक में डॉ. निशंक ने आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और नीतिगत संदर्भों में गहराई से विश्लेषित किया है। पुस्तक में संकलित आलेख बताते हैं कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि, स्वदेशी नवाचार और राष्ट्रीय आत्मसम्मान से जुड़ा व्यापक विचार है।

    दूसरी पुस्तक ‘वैश्विक बदलते परिदृश्य में मूल्य आधारित शिक्षा’ वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति (NEP) पर केंद्रित एक गंभीर और दूरदर्शी विमर्श प्रस्तुत करती है। लेखक का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए। पुस्तक में यह तथ्य उभरकर आता है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यदि शिक्षा मूल्यविहीन होगी, तो समाज दिशाहीन हो जाएगा। डॉ. निशंक ने भारतीय संस्कृति, गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर विशेष बल देते हुए नई शिक्षा नीति को भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया है।

    दोनों पुस्तकों में युवाओं के भविष्य को केंद्र में रखा गया है। लेखक का विश्वास है कि भारत की युवा शक्ति ही देश को विश्वगुरु की ओर ले जाएगी, बशर्ते उन्हें सही शिक्षा, सही मूल्य और सही दिशा मिले।

    हंस प्रकाशन द्वारा द्वारा प्रकाशित इन दोनों पुस्तकों का विमोचन शिक्षाविद और हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर रमा, वरिष्ट साहित्यकार श्रीमती वंदना यादव, स्तंभ लेखक डॉ. वेद प्रकाश, कथाकार डॉ. अंजू रानी और डॉ. बेचैन कंडियाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

    इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश को विश्वगुरु की ओर ले जाएगी, बशर्ते उन्हें सही शिक्षा, सही मूल्य और सही दिशा मिले। ये दोनों पुस्तकें समकालीन भारत के सपनों, चुनौतियों और संभावनाओं का प्रामाणिक दस्तावेज हैं।
    कहा कि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का यह लेखन राष्ट्रबोध, शिक्षा-दृष्टि और वैचारिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। नवभारत के निर्माण और मूल्य आधारित शिक्षा पर चिंतन करने वाले प्रत्येक पाठक के लिए ये पुस्तकें अत्यंत उपयोगी हैं।

  • शैलेश मटियानी को मरणोपरांत  ‘उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2025’

    शैलेश मटियानी को मरणोपरांत ‘उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2025’

    मुख्यमंत्री ने स्व. शैलेश के पुत्र राकेश मटियानी को सौंपा सम्मान

    देहरादून। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक सादगीपूर्ण एवं गरिमामय समारोह में प्रख्यात हिन्दी साहित्यकार स्वर्गीय श्री शैलेश मटियानी को प्रदत्त “उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार–2025” उनके पुत्र राकेश मटियानी को प्रदान किया।

    यह सम्मान स्व. मटियानी की साहित्यिक उपलब्धियों, हिन्दी कहानी जगत में उनके अमूल्य योगदान तथा उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त पहचान दिलाने के लिए दिया गया है।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि शैलेश मटियानी केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि संवेदनाओं के कुशल शिल्पी थे। आधुनिक हिन्दी कहानी आंदोलन में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

    उन्होंने आम जनमानस की पीड़ा, संघर्ष, और जीवन-सत्य को जिस प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया, वह उन्हें भारतीय साहित्य के श्रेष्ठ रचनाकारों की पंक्ति में स्थापित करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार राज्य के उन महान प्रतिभाओं के योगदान को हमेशा सम्मान देती है, जिन्होंने अपनी लेखनी, कर्म और रचनात्मकता से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

    स्व. मटियानी के “बोरीवली से बोरीबन्दर”, “मुठभेड़”, “अधागिनी”, “चील” सहित अनेक कथा-कृतियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और हिन्दी साहित्य में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।

    उन्होंने कहा कि मरणोपरांत यह सम्मान स्वर्गीय  मटियानी के परिवार को सौंपना राज्य सरकार के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने उनके पुत्र का सम्मान करते हुए कहा कि साहित्यकारों का सम्मान समाज और प्रदेश दोनों को समृद्ध करता है।

    स्व. शैलेश मटियानी के पुत्र ने उत्तराखण्ड सरकार तथा मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान समूचे प्रदेश के साहित्य प्रेमियों और मटियानी जी के प्रशंसकों के लिए गौरव का क्षण है|

    कार्यक्रम में सचिव  विनोद कुमार सुमन सहित वरिष्ठ अधिकारी, साहित्यकार तथा परिवारजन उपस्थित रहे।

  • हिमालय: भारत की आध्यात्मिक आत्मा का प्रतीक – किरेन रिजिजू

    हिमालय: भारत की आध्यात्मिक आत्मा का प्रतीक – किरेन रिजिजू

    ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’ में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

    रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ पहल की सराहना करते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं पारिस्थितिक पुनर्जागरण का जीवंत उदाहरण बताया

    देहरादून। ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’, जिसका विषय “अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव” था, देहरादून के लेखक गांव में सोमवार को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान धनवंतरि की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया। यह महोत्सव उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष एवं अटल बिहारी वाजपेयी  के ‘लेखक ग्राम’ के स्वप्न के 25 वर्ष को समर्पित था।

    केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनका स्वागत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ को रचनात्मकता, ज्ञान और हिमालयी प्रेरणा का केंद्र बनाने के लिए डॉ. निशंक के उल्लेखनीय कार्य की प्रशंसा की।

    अपने संबोधन में रिजिजू ने महोत्सव का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि वे स्वयं अरुणाचल प्रदेश से होने के कारण हिमालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि “हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के प्रतीक हैं।”

    हिमालयी राज्यों की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमा क्षेत्रों जैसे गुंजी में सड़क संपर्क एवं अवसंरचना के विस्तार हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, “भारत की सुंदरता इसकी विविधता में निहित है — हम भले अलग भाषाएँ बोलते हों और अलग परंपराएँ निभाते हों, परंतु हमारे मूल्य और दृष्टि हमें एक सूत्र में बांधते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा संविधान लोकतंत्र को दिया गया सबसे सुंदर योगदान है — जो हमारी एकता, करुणा और सामूहिक भावना का जीवंत प्रतीक है।”

    कार्यक्रम में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया और महोत्सव को उत्तराखंड के 25 वर्ष एवं अटल बिहारी वाजपेयी जी के ‘ग्राम भारत’ के स्वप्न को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ‘लेखक ग्राम’ पहल का उद्देश्य गाँवों को रचनात्मकता, संस्कृति और शिक्षा के केंद्रों में विकसित करना है।

    आचार्य बालकृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पतंजलि ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, आयुर्वेद और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में पतंजलि के योगदान का उल्लेख करते हुए रिजिजू का हार्दिक स्वागत किया।

    प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने ‘लेखक ग्राम’ की अवधारणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की उस भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ती है।

    इस अवसर पर प्रो. सोमवीर (इंडोनेशिया) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक और संसदीय संवाद को प्रोत्साहित करने में रिजिजू की भूमिका की सराहना की तथा भारत के ‘स्वच्छता अभियान’ की भी प्रशंसा की।

    पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय (एम्स गुवाहाटी) ने हिमालयी परंपराओं के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में महत्व को रेखांकित किया। स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने उपस्थित जनसमूह को आशीर्वाद दिया और जीवन में अध्यात्म, सेवा एवं नैतिक अनुशासन के महत्व पर बल दिया। प्रो. पृथ्वीराज, उपाध्यक्ष, ने डॉ. निशंक के हिमालयी एवं सांस्कृतिक विकास में योगदान की प्रशंसा की और उन्हें सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया।

    अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किरेन रिजिजू का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके प्रेरणादायी शब्दों ने हिमालय और जनमानस के बीच के गहरे संबंध को पुनः जीवंत कर दिया।

  • “लेखक गांव और अकादमी का साझा संकल्प: भारतीय भाषाओं की समृद्धि”

    “लेखक गांव और अकादमी का साझा संकल्प: भारतीय भाषाओं की समृद्धि”

    डॉ झा को लेखक गांव सृजन सम्मान

    देहरादून। गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष एवं पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. भाग्येश झा अपने दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर “भारतीय भाषाओं की स्मृति और समृद्धि” विषयक संगोष्ठी में भाग लेने लेखक गांव (थानों, देहरादून) पहुँचे।
    इस अवसर पर उन्हें “लेखक गांव सृजन सम्मान” से सम्मानित किया गया।

    डॉ. झा ने अपने उद्बोधन में लेखक गांव की स्थापना को एक विलक्षण कल्पना बताया और कहा कि निकट भविष्य में गुजरात साहित्य अकादमी और लेखक गांव मिलकर भारतीय भाषाओं के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और समृद्धि के लिए साझा प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इंटरनेट आधारित ज्ञान को अध्ययन का प्रमुख स्रोत माना जा रहा है, जबकि भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा — वेद, पुराण और शास्त्रों में — समृद्ध एवं प्रामाणिक सामग्री मौजूद है। इस पारंपरिक ज्ञान को नवाचार के साथ देश और विदेश तक पहुँचाने की आवश्यकता है।

    गांव

    साहित्य, शोध और संस्कृति के केंद्र के रूप में उभर रहा है लेखक गांव

    ज्ञातव्य है कि हाल ही में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ गुजरात दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने गुजरात साहित्य अकादमी के कार्यक्रम में लेखक गांव की परिकल्पना का उल्लेख किया था। इसी कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री ने लेखक गांव आने की उत्सुकता भी प्रकट की थी। उसी क्रम में डॉ. भाग्येश झा और अकादमी के महासचिव डॉ. जयेंद्र यादव उत्तराखंड आए।

    डॉ. निशंक ने लेखक गांव को साहित्य सृजन और भावी रचनाकारों के निर्माण का केंद्र बताते हुए कहा कि उत्तराखंड न केवल वेद-पुराणों की जन्मस्थली है, बल्कि आयुर्वेद और अध्यात्म की वैश्विक धरोहर भी है। उन्होंने बताया कि लेखक गांव नालंदा पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के प्रथम चरण में 10 लाख पुस्तकों के संकलन का लक्ष्य है, जिसमें अब तक 60 हजार से अधिक पुस्तकें संग्रहित की जा चुकी हैं। यह केंद्र शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

    पद्मश्री प्रीतम भारतवान ने लेखक गांव को उत्तराखंड की अमूल्य सांस्कृतिक पूंजी बताया। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय, डॉ. योगी एरोन, श्रीमती माधुरी बर्थवाल, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. काशीनाथ जेना, पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. सविता मोहन, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’, लेखक गांव के मुख्य कार्याधिकारी ओ. पी. बडोनी सहित देशभर से अनेक वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और वृक्षारोपण के साथ हुआ।