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  • ऋषिपर्णा नदी पुनर्जीवन: कार्ययोजना को मिली अंतिम स्वीकृति

    ऋषिपर्णा नदी पुनर्जीवन: कार्ययोजना को मिली अंतिम स्वीकृति

    उद्गम स्थल से होगा जीर्णोद्धार का श्रीगणेश

    बार्लोगंज से काठबंगला तक 10 किमी क्षेत्र का प्लान तैयार

    डीएम ने सभी विभागों को दिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश

    नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, हमारी संस्कृति और सांसों की डोरी- डीएम

    देहरादून। जिला प्रशासन ने देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली ऋषिपर्णा (रिस्पना) नदी के पुनर्जीवन की दिशा में बड़ी पहल करते हुए उद्गम स्थल से इसके जीर्णाेद्धार की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है।

    प्रथम चरण में बार्लोगंज से काठबंगला तक लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में संबंधित विभागों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप अभियान को गति देने के निर्देश दिए गए।

    जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ एवं निर्मल नदियाँ केवल पर्यावरण संरक्षण का ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का भी आधार हैं। उन्होंने कहा कि नदियों को प्रदूषणमुक्त रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है और इसके लिए प्रशासन तथा समाज को मिलकर कार्य करना होगा।

    उन्होंने निर्देश दिए कि प्रथम चरण में ऋषिपर्णा नदी बेसिन के ऊपरी क्षेत्र में भू-जल पुनर्भरण के लिए छोटे-छोटे चेकडैमों का निर्माण, व्यापक पौधरोपण, सौंदर्यीकरण तथा ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के माध्यम से स्रोत क्षेत्र को स्वच्छ एवं संरक्षित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि साबरमती नदी के पुनर्जीवन में कार्य कर चुकी विशेषज्ञ टीम से तकनीकी सहयोग लिया जाए तथा पर्यावरण मित्रों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को जनभागीदारी आधारित ‘ग्रैंड अभियान’ के रूप में संचालित किया जाए।

    जिलाधिकारी ने नगर पालिका मसूरी को लालटिब्बा से शिखर फॉल तक तथा नगर निगम देहरादून को काठबंगला से डाउनस्ट्रीम क्षेत्र तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई विभाग को चेकडैम निर्माण एवं तटों के सुदृढ़ीकरण के लिए शीघ्र कंसल्टेंसी फर्म के साथ अनुबंध करने को कहा।

    उन्होंने निर्देश दिए कि मैदानी क्षेत्रों में ऋषिपर्णा नदी में मिलने वाले सभी छोटे-बड़े नालों और सीवर के दूषित जल का उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही नालों के माध्यम से नदी में पहुंचने वाले ठोस अपशिष्ट और सिंगल यूज प्लास्टिक को रोकने के लिए जालियां लगाकर पृथक्करण (सेग्रीगेशन) की व्यवस्था की जाए। उन्होंने आमजन को जागरूक करने के साथ ही नदी में कूड़ा-करकट डालने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए चालान करने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में नगर निगम, नगर पालिका, सिंचाई एवं वन विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि नदी में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों तथा गारबेज प्वाइंट्स का चिन्हांकन पूरा कर लिया गया है। डम्पिंग साइट के चयन के बाद बजट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं नदी बेसिन के ऊपरी क्षेत्र में चेकडैम निर्माण एवं उनके सुदृढ़ीकरण के लिए डीपीआर तैयार करने और विशेषज्ञ फर्म के चयन की कार्रवाई भी प्रगति पर है।

    बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, अधीक्षण अभियंता संजय राय सहित वन, सिंचाई, नगर निगम एवं नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • पेपर लीक और चढ़ावे की चोरी पर कांग्रेस का चुनावी वार

    पेपर लीक और चढ़ावे की चोरी पर कांग्रेस का चुनावी वार

    ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी पर आरोप लगा रही भाजपा

    देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा और राज्य सरकार पर पेपर लीक, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ तथा जन मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।

    उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं भाजपा वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष और राहुल गांधी पर आरोप लगाने में जुटी है।
    कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में धस्माना ने कहा कि वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में सामने आए पेपर लीक मामले ने सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में लगभग एक दर्जन पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है और नकल माफिया को संरक्षण मिला हुआ है।

    धस्माना ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आस्था के केंद्र भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम में 223 किलो सोना गायब होने, बद्रीनाथ धाम में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी तथा अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन मामलों पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में पेपर लीक, नकल माफिया और मंदिरों के चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी।

    कैबिनेट मंत्री खजान दास की ओर से राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए धस्माना ने कहा कि देशभर में युवा और छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष संसद और सड़कों पर युवाओं की आवाज उठा रहा है, लेकिन भाजपा इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर अनर्गल आरोप लगा रही है।
    उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं की मांगों की अनदेखी करती है और आंदोलनरत छात्रों पर बल प्रयोग करती है, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराए। राहुल गांधी ने भी युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाने का काम किया है, जिससे भाजपा असहज महसूस कर रही है।

    धस्माना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पेपर लीक की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जबकि भाजपा और राज्य सरकार वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं।

  • यूटीयू पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन, सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

    यूटीयू पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन, सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

    पेपर लीक- व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए थे प्रश्न

    परीक्षा गोपनीयता भंग करने के आरोप में कार्रवाई, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच जारी

    देहरादून। उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सम-सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से पहले व्हाट्सएप ग्रुप और छात्रों के आंतरिक पोर्टल के माध्यम से प्रश्नपत्र से मेल खाते महत्वपूर्ण प्रश्न साझा कर छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।
    पेयर लीक मामले के सामने आते ही सीएम धामी ने कड़े एक्शन लेने के निर्देश दिए थे।

    यूटीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की तहरीर पर कोतवाली प्रेमनगर में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार, विश्वविद्यालय को एक ई-मेल के माध्यम से जानकारी मिली थी कि 3 जुलाई को आयोजित परीक्षा से पूर्व आरोपी ने छात्रों के साथ महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे। परीक्षा के बाद जब इन प्रश्नों का वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलान किया गया, तो उनमें काफी समानता पाई गई।

    विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति की जांच में भी यह तथ्य सामने आया कि आरोपी सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा से पूर्व परीक्षा से संबंधित प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 316, 318 (4) और 61 (2) के तहत मुकदमा दर्ज किया।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी परमेन्द्र डोभाल के निर्देश पर पुलिस ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है तथा इस प्रकरण में अन्य संभावित आरोपियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। साक्ष्य मिलने पर उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    आशीष कुमार गुप्ता मूल रूप से शाकुम्भरी विहार, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) का निवासी है और शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था।

  • डॉ. सुशील बनेंगे हिंदी संवाद के सशक्त सेतु

    डॉ. सुशील बनेंगे हिंदी संवाद के सशक्त सेतु

    केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा चुने गए देश भर से आठ विद्वान

    देहरादून। चमन लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षाविद् डॉ. सुशील उपाध्याय का चयन भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय की ‘प्राध्यापक व्याख्यानमाला’ के लिए किया गया है। इस योजना के अंतर्गत वे गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी विद्वानों, शोधार्थियों तथा हिंदी के विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।

    केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र द्वारा जारी पत्र में डॉ. सुशील उपाध्याय के चयन की सूचना दी गई। इस योजना के अंतर्गत देशभर से आठ हिंदी विद्वानों का चयन किया गया है, जिनमें चार हिंदी भाषी क्षेत्रों तथा चार गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के अध्यापन एवं शोध से जुड़े हुए हैं। हिंदी भाषी क्षेत्र से चयनित चार प्राध्यापकों में डॉ. सुशील उपाध्याय भी शामिल हैं। वे उत्तराखंड से चयनित एकमात्र प्राध्यापक हैं।

    इस योजना के अंतर्गत डॉ. सुशील उपाध्याय आगामी दिनों में महाराष्ट्र के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिंदी के प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। केंद्रीय हिंदी निदेशालय की यह योजना हिंदी एवं गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों के बीच हिंदी भाषा और साहित्य विषयक संवाद को बढ़ावा देने तथा भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इसी योजना के अंतर्गत केरल की हिंदी विदुषी प्रो. सिंधु टी.आई. आगामी सितंबर में उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिंदी प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों से संवाद करेंगी।

    डॉ. सुशील उपाध्याय ने कहा कि वे गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषा, साहित्य और हिंदी परिवेश से जोड़ने का प्रयास करेंगे।उन्होंने बताया कि व्याख्यानमाला के दौरान हिंदी के व्यावहारिक उपयोग, प्रशासन, शिक्षा और व्यवसाय में उसकी भूमिका, हिंदी तथा भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद की आवश्यकता, समकालीन मीडिया में हिंदी की स्थिति, न्यू मीडिया और सोशल मीडिया में हिंदी के बदलते स्वरूप, हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श और दलित साहित्य आदि पर व्याख्यान देंगे।

    साथ ही, हिंदी में सृजनात्मक लेखन, सिनेमा और समाज के अंतर्संबंध, नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में भारत की भाषिक विविधता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और हिंदी भाषा, हिंदी के माध्यम से करियर निर्माण की संभावनाओं एवं चुनौतियों तथा राजभाषा के रूप में हिंदी के विविध आयामों पर संवाद करेंगे।

    केंद्रीय हिंदी निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. दीपक पांडेय ने बताया कि व्याख्यान माला का आयोजन निदेशालय की विस्तार कार्यक्रम योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इस योजना के जरिए हिंदीतर भाषी क्षेत्रों के हिंदी विद्यार्थियों की अध्ययन यात्रा,
    हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखक शिविरों का आयोजन और राष्ट्रीय संगोष्ठियों भी आयोजित की जा रही हैं।

  • LIU निरीक्षक के निधन पर मुख्यमंत्री ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    LIU निरीक्षक के निधन पर मुख्यमंत्री ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एलआईयू निरीक्षक मनोज मनराल के आकस्मिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
    मुख्यमंत्री ने पुलिस लाइन देहरादून में स्व. मनोज मनराल को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति एवं धैर्य प्रदान करने की कामना की है। उन्होंने कहा कि इस दुःख की घड़ी में उनकी संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं।
    गौरतलब है कि 50 वर्षीय मनोज मनराल का 22 जुलाई को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

  • दून में चार नर्सिंग बेरोजगार महिलाओं ने पिया फिनायल

    दून में चार नर्सिंग बेरोजगार महिलाओं ने पिया फिनायल

    एक महिला प्रदर्शनकारी दून अस्पताल की आईसीयू में भर्ती,मचा हड़कंप

    मंत्री से वार्ता विफल होने पर फैली हताशा में उठाया जानलेवा कदम

    देहरादून । वर्षवार नियुक्ति और नर्सिंग भर्ती परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहीं चार महिला नर्सिंग बेरोजगारों ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास के बाहर फिनायल पी लिया।

    इस घटना में उत्तरकाशी जिले की किरण रावत की हालत बिगड़ने पर उसे पहले सिनर्जी अस्पताल में ले गए। और उसके बाद दून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस समय किरण को आईसीयू में रख कर इलाज किया जा रहा है।

    गौरतलब है कि नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले बेरोजगार अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से लिखित परीक्षा के बजाय वर्ष के आधार पर वरिष्ठता के अनुसार नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थी 25-26 जुलाई की लिखित परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे।

    नर्सिंग बेरोजगार एकता मंच के नवल पुंडीर , राजेन्द्र कुकरेती और लीला चौहान ने 22 जुलाई को मंत्री सुबोध उनियाल से वार्ता की थी। पुंडीर का आरोप है कि मंत्री ने उनकी मांगों पर गौर नहीं किया और उन्हें बाहर जाने को कह दिया।

    बातचीत विफल होने के बाद विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। जिसमें चार प्रदर्शनकारी महिलाओं ने फिनायल का सेवन कर लिया।स्थिति गंभीर होने पर एक महिला प्रदर्शनकारी को तुरंत अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया।

    पहले ही पेपर लीक मामले से जूझ रहा सत्ता पक्ष नर्सिंग बेरोजगारों के फिनायल पीने से हड़कंप मच गया।

  • डॉ. आर.पी. सिंह को आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाओं के प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी

    डॉ. आर.पी. सिंह को आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाओं के प्रभारी निदेशक की जिम्मेदारी

    देहरादून। उत्तराखण्ड शासन के आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग ने संयुक्त निदेशक डॉ. आर.पी. सिंह को निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखण्ड का प्रभार सौंप दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
    जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, डॉ. आर.पी. सिंह अपने वर्तमान दायित्वों के साथ प्रभारी निदेशक के रूप में कार्य करेंगे। उन्हें इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त वेतन अथवा भत्ता देय नहीं होगा।

    आयुष सचिव रंजना राजगुरु की ओर से यह आदेश किए गए।

  • आयुष विभाग के निदेशक पद से विजय कुमार जोगदंडे कार्यमुक्त

    आयुष विभाग के निदेशक पद से विजय कुमार जोगदंडे कार्यमुक्त

    प्रभारी निदेशक बने डॉ आर पी सिंह

    शासन ने तत्काल प्रभाव से वापस लिया अतिरिक्त प्रभार

    देहरादून।  उत्तराखण्ड शासन के आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग ने अपर सचिव विजय कुमार जोगदंडे (आईएएस) को निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखण्ड के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया है।
    बुधवार को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, 29 अगस्त 2023 को जारी शासनादेश के तहत उन्हें यह अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया था।

    सक्षम स्तर से प्राप्त अनुमोदन के बाद उक्त आदेश को निरस्त करते हुए उनका अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है।
    गौरतलब है कि बीते दिनों आयुर्वेद चिकित्सक को निदेशक आयुष विभाग से हटाने की मांग कर रहे थे।

    इस प्रकरण पर आयुष मंत्री मदन कौशिक ने सीएम से आयुष निदेशक के अतिरिक्त प्रभार से हटाने की मंजूरी ले ली थी।

  • पीएम पोषण योजना के तहत सामग्री लागत में हो वृद्धिः डाॅ. धन सिंह रावत

    पीएम पोषण योजना के तहत सामग्री लागत में हो वृद्धिः डाॅ. धन सिंह रावत

    पीएम पोषण व समग्र शिक्षा की राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने रखे कई सुझाव

    उत्तराखंड में दोनों योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की केन्द्र सरकार ने की सराहना

    देहरादून/दिल्ली । सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज भारत सरकार द्वारा आयोजित पीएम-पोषण एवं समग्र शिक्षा अभियान की समीक्षा बैठक में कई सुरक्षा रखे। डा. रावत ने पीएम-पोषण योजना के तहत विद्यालयों में उपलब्ध कराये जा रहे भोजन की सामग्री लागत (मैटेरियल काॅस्ट) में वृद्धि करने का सुझाव दिया ताकि बच्चों को अधिक पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसा जा सके। साथ ही समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाले केन्द्रांश के व्यय हेतु निर्धारित 75 प्रतिशत की बाध्यता घटाकर 50 प्रतिशत करने का भी सुझाव रखा ताकि राज्यों को आगामी किश्त आसानी से उपलब्ध हो सके और राज्यों में विकास कार्यो निर्बाध रूप से संचालित हो सके।

    केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की अध्यक्षता में आज भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम प्रेक्षागृह, आईसीआर पूसा नई दिल्ली में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम-पोषण) एवं समग्र शिक्षा अभियान की दो दिवसीय समीक्षा बैठक का शुभारम्भ हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने उत्तराखंड द्वारा दोनों योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की विशेष सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने अपेक्षा से अधिक प्रदर्शन किया है, जो अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है। बैठक में प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कई अहम सुझाव रखे। जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम-पोषण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सामग्री लागत में वृद्धि किया चाहिये ताकि बच्चों को पौष्टिक व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने प्राथमिक स्तर पर मैटेरियल काॅस्ट 10 रूपये जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर 15 रूपये करने का सुझाव रखा। इसके अलावा उन्होंने भोजनमाताओं के मानदेय में वृद्धि तथा राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत किचन कम स्टोर के निर्माण हेतु धनराशि 50 हजार की सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।

     

    डा. रावत ने बैठक में यह भी सुझाव रखा कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत व्यय की बाध्यता में शिथिलता दी जाय। उन्होंने कहा कि रिकरिंग व नाॅन रिकरिंग मदों में प्राप्त धनराशि के 75 फीसदी व्यय पर ही आगामी किस्त की मांग की जा सकती है, जिसे 50 फीसदी तक किया जाना चाहिये तथा अपरिहार्य परिस्थितियों में मद व्यय के लिये शिथिलता प्रदान की जानी चाहिये। इसके अलावा उन्होंने पर्वतीय राज्यों के लिये वार्षिक रखरखाव अनुदान में वृद्धि करने, सीपैक्स परिसम्पतियों के रखरखाव को मानव संसाधन नियुक्ति करने हेतु मानदेय स्वीकृत करने, एनआईओएस डाटा का यूडायस प्लस से एकीकरण करने, राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश हेतु एक हजार प्रति छात्र करने, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के आधार पर प्रत्येक तिमाही केन्द्रीय अंश समयबद्ध जारी करने का सुझाव भी दिया। बैठक के दौरान डॉ. रावत ने उत्तराखंड में पीएम-पोषण एवं समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों एवं उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की, जिसकी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय एवं अधिकारियों ने जमकर सराहना की।

  • उत्तराखण्ड में संस्कृत आयोग गठन को मंजूरी

    उत्तराखण्ड में संस्कृत आयोग गठन को मंजूरी

    राज्य सरकार ने मांगे सुझाव

    देहरादून। धामी सरकार राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्द्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है।

    आयोग के गठन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों तथा संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।
    इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

    संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में नई पहल की थी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी के बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

    प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार, प्रशासन तथा तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल माध्यमों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी कार्य करेगा। आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। राज्य सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने और समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री