Category: राजनीति

  • पति-पत्नी और ‘वो’ के विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूल

    पति-पत्नी और ‘वो’ के विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूल

    ‘मंत्री पत्नी रेखा आर्य के भ्र्ष्टाचार की शिकायत सीएम धामी से भी की थी’

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    देहरादून। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या द्वारा अपने पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी ने वीडियो जारी कर पलटवार करते हुए मंत्री पर 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है।

    कार में बैठकर जारी किए गए वीडियो में साहू ने मंत्री द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को फर्जी और निराधार बताया है। उन्होंने वायरल ऑडियो को भी फर्जी करार दिया है।

    साहू ने कहा, “माननीय मंत्री जी, जिस ऑडियो को आपने डाला है, वो AI से बनाई गई है, घर तोड़ने के लिए बनाई गई है। आप घमंड में चूर हैं कि मैं जीवन भर मंत्री रहूंगी। ऐसा नहीं है, जीवन में चढ़ाव-उतार आते हैं।”

    उन्होंने अपने राजनीतिक योगदान का जिक्र करते हुए कहा, “आप वो दिन भूल गईं कि मैंने सड़क पर खड़ी एक महिला को कहां से कहां पहुंचा दिया। ये पूरा उत्तराखंड जानता है कि दो सलवार-कुर्ते में शादी करके आई महिला को मैंने कहां पहुंचाया।”

    चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा, “मैं ईमानदारी से कह रहा हूं, अगर आपने ये फर्जी तहरीर वापस नहीं ली तो भोले बाबा, बनखंडी नाथ बाबा तुमसे चुन-चुन कर एक-एक चीज का हिसाब लेंगे।”

    भ्रष्टाचार को लेकर साहू ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “साहू जी ने हमेशा यही कहा कि भ्रष्टाचार मत करो। इन बच्चों के पेट का राशन मत काटो। आज किसी और मंत्री का नाम भ्रष्टाचार में नहीं है, तुम्हारा नाम पूरे देश में है।”

    साहू ने दावा किया, “जिस महिला के पास पांच रुपये नहीं थे, आज उसके पास 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है। इसकी किसी भी एजेंसी से जांच करा लो।”

    उन्होंने मुख्यमंत्री और जनता से न्याय की अपील भी की। “मैंने 17 साल तक सोमेश्वर की जनता के सामने झोली फैलाकर आपके लिए वोट मांगे। पत्रकार बंधुओं और मुख्यमंत्री जी, जो मेरे मित्र और भाई भी हैं, आप न्याय करें। मैंने पहले भी मुख्यमंत्री जी से इनके भ्रष्टाचार की शिकायत की थी,”। और सीएम धामी ने इन्हें डांटा भी था।

    मंत्री ने लगाए थे ये आरोप

    इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने अपने ही पति के खिलाफ कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह मामला 15 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया था।

    मंत्री ने धोखाधड़ी, मारपीट, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

    एफआईआर में उन्होंने खुद को अनुसूचित जाति की सदस्य बताया था। तहरीर में कहा गया था, “प्रार्थिनी रेखा आर्या पुत्री स्व. गोपाल राम, निवासी यमुना कॉलोनी, देहरादून उत्तराखंड में अधिसूचित अनुसूचित जाति की सदस्य हैं।”

    उनके मुताबिक, उनकी शादी 6 जुलाई 2004 को गिरधारी लाल साहू से हुई थी। आरोप था कि पति ने शादी के समय खुद को अविवाहित बताया था।

    तहरीर में लिखा है, “श्री गिरधारी लाल साहू ने विवाह के समय ही प्रार्थिनी को धोखे में रखा कि वह अविवाहित है।”

    मंत्री का कहना था कि बाद में पता चला कि पति पहले से विवाहित है और उसके बच्चे भी हैं।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पति के अन्य महिलाओं से संबंध हैं। “इस बारे में जब आपत्ति की तो शुरुआत में मेरे पति ने अपनी गलती मानते हुए लिखित और मौखिक रूप में माफीनामा दिया, परंतु माफीनामा के बाद भी वह इन कार्यों में लिप्त रहा,” एफआईआर में दर्ज है।

    विरोध पर मारपीट और धमकी का आरोप भी लगाया गया था। तहरीर में कहा गया था, “इन संबंधों का विरोध करने पर गिरधारी लाल साहू प्रार्थिनी के साथ मार-पिटाई और गाली-गलौज करने लगा और जान से मारने की धमकी देने लगा।”

    साथ ही आर्थिक धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा गया था, “गिरधारी लाल साहू ने प्रार्थिनी के कूट रचित हस्ताक्षर कर एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संबंधित कंपनियों में प्रार्थिनी को कंपनी के निदेशक के पद से निवृत्त दर्शा दिया।”

    सबसे गंभीर आरोप एक ऑडियो को लेकर था। मंत्री ने कहा था, “जिसमें गिरधारी लाल साहू एक महिला से बात करते हुए प्रार्थिनी को जान से मारने का षड्यंत्र रच रहा है।”

    उन्होंने सुरक्षा की मांग करते हुए कहा था, “प्रार्थिनी को लगातार अपने और अपने नाबालिग बच्चों की जान का खतरा बना हुआ है।”

    कथित ऑडियो में क्या है?

    इधर मंत्री रेखा आर्य द्वारा जारी किया गया कथित ऑडियो भी खूब वायरल हो रहा है। ऑडियो में एक पुरुष आवाज कहती है, “रिंकू को तुम कतई जितना मुझ पे भरोसा करते हो उससे ज्यादा रिंकू पे भरोसा करना।”

    उसमें जमानत का भी जिक्र है, “वन परसेंट अगर जमानत नहीं हुई तो दो-तीन दिन हो सकता है जेल भी जाना पड़े।”

    महिला आवाज कहती है, “मैं क्यों जाऊं जेल? मेरी कितनी बदनामी होगी?”…..

    पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों और ऑडियो-वीडियो की जांच कर रही है। फिलहाल मंत्री स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती बताई जा रही हैं। पति के करप्शन के आरोप का मंत्री रेखा आर्य क्या जवाब देती है,इस पर भी नजरें टिकी हुई है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल पति,पत्नी और वो की आग में खूब हाथ सेंक रहे है।

  • मंत्री रेखा आर्य पर पति ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

    मंत्री रेखा आर्य पर पति ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

    देखें वीडियो, पति-पत्नी और ‘वो’ की जंग से निकला भ्र्ष्टाचार का जिन्न

    पति ने मंत्री पत्नी पर कसा तंज, दो कपड़ों में आई थी

    देहरादून/बरेली। उत्तराखण्ड भाजपा के प्रभारी रहे दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाने से उठे तूफान में अब भाजपा मंत्री के घर की जंग की आग भी लिपट गयी।
    बीते 24 घण्टे में भाजपा सरकार में महिला व बाल विकास मंत्री रेखा आर्य की अपने पति और ‘वो’ के लफड़े ने प्रदेश और देश में हलचल मचा दी।
    कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या द्वारा पति के खिलाफ FIR दर्ज कराने के बाद अब उनके पति गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर पलटवार किया है।

    कार में बैठकर बयान देते हुए साहू ने मंत्री पर लगाए गए सभी आरोपों को फर्जी और निराधार बताया है। उन्होंने दावा किया है कि वायरल ऑडियो AI से तैयार किया गया है।

    साहू ने कहा, “माननीय मंत्री जी, जिस ऑडियो को आपने डाला है, वो AI से बनाई गई है, घर तोड़ने के लिए बनाई गई है। आप घमंड में चूर हैं कि मैं जीवन भर मंत्री रहूंगी। ऐसा नहीं है, जीवन में चढ़ाव-उतार आते हैं।”

    उन्होंने अपने राजनीतिक योगदान का हवाला देते हुए कहा, “आप वो दिन भूल गईं कि मैंने सड़क पर खड़ी एक महिला को कहां से कहां पहुंचा दिया। ये पूरा उत्तराखंड जानता है कि दो सलवार-कुर्ते में शादी करके आई महिला को मैंने कहां पहुंचाया।”

    पति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “मैं ईमानदारी से कह रहा हूं, अगर आपने ये फर्जी तहरीर वापस नहीं ली तो भोले बाबा, बनखंडी नाथ बाबा तुमसे चुन-चुन कर एक-एक चीज का हिसाब लेंगे।”

    भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। साहू ने कहा, “साहू जी ने हमेशा यही कहा कि भ्रष्टाचार मत करो। इन बच्चों के पेट का राशन मत काटो। आज किसी और मंत्री का नाम भ्रष्टाचार में नहीं है, तुम्हारा नाम पूरे देश में है।”

    उन्होंने आगे दावा किया, “जिस महिला के पास पांच रुपये नहीं थे, आज उसके पास 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है। इसकी किसी भी एजेंसी से जांच करा लो।”

    गिरधारी साहू ने मुख्यमंत्री और जनता से न्याय की अपील की। उन्होंने कहा, “मैंने 17 साल तक सोमेश्वर की जनता के सामने झोली फैलाकर आपके लिए वोट मांगे। पत्रकार बंधुओं और मुख्यमंत्री जी, जो मेरे मित्र और भाई भी हैं, आप न्याय करें। मैंने पहले भी मुख्यमंत्री जी से इनके भ्रष्टाचार की शिकायत की थी।” और उन्हींने इसे डांटा भी था।

    मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरधारी साहू के भ्र्ष्टाचार के आरोप के बाद भाजपा बैकफुट पर दिखाई दे रही है। घर की आग से 210 करोड़ की संपत्ति और भ्र्ष्टाचार की कहानी प्रदेश के घर घर तक पहुंचनी शुरू हो गयी है। चुनावी साल में हाई प्रोफाइल पत्नी व पति के बीच मची
    मची महाभारत से पार्टी की छवि पर लग रहे डेंट को भाजपा कैसे क्लीन करेगी,यह देखना भी काबिलेगौर होगा।

  • मंत्री रेखा के पति पर गंभीर आरोप, हत्या की साजिश के मामले में FIR दर्ज

    मंत्री रेखा के पति पर गंभीर आरोप, हत्या की साजिश के मामले में FIR दर्ज

    मंत्री रेखा ने पति की दूसरी महिला से ऑडियो क्लिप की वॉयरल

    देहरादून के कैंट थाने में मामला दर्ज, मंत्री अस्पताल में भर्ती

    कांग्रेस बोली- कर्मा रिटर्न्स

    देहरादून। नवरात्र पर प्रदेश में हाईप्रोफाइल सनसनीखेज मामला सामने आया है। भाजपा सरकार की महिला मंत्री ने स्वंय व बच्चों की सुरक्षा की मांग की है।

    उत्तराखंड सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने अपने ही पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। तबियत बिगड़ने पर मंत्री रेखा को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    मंत्री द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक, उन पर धोखाधड़ी, मारपीट, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला 15 अक्टूबर 2026 को कैंट थाने में दर्ज किया गया है।फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सभी आरोप जांच के दायरे में हैं।

    एफआईआर में मंत्री ने खुद को अनुसूचित जाति की सदस्य बताया है। तहरीर में कहा गया है, “प्रार्थिनी रेखा आर्या पुत्री स्व. गोपाल राम, निवासी यमुना कॉलोनी, देहरादून उत्तराखंड में अधिसूचित अनुसूचित जाति की सदस्य हैं।”

    मंत्री के अनुसार, उनकी शादी 6 जुलाई 2004 को हिंदू रीति-रिवाज से गिरधारी लाल साहू निवासी बरेली, उत्तर प्रदेश के साथ हुई थी।

    आरोप है कि पति ने शादी के समय खुद को अविवाहित बताया था। तहरीर में लिखा है, “श्री गिरधारी लाल साहू ने विवाह के समय ही प्रार्थिनी को धोखे में रखा कि वह अविवाहित है।”

    पति गिरधारी साहू

    मंत्री का कहना है कि कुछ साल बाद उन्हें पता चला कि पति पहले से ही विवाहित है और उसकी पहली शादी से बच्चे भी हैं।

    तहरीर में कहा गया है कि तब तक उनके खुद के बच्चे हो चुके थे। घर वालों के समझाने और बच्चों के भविष्य को देखते हुए वह चुप रहीं।

    पिछले कुछ समय से पति का व्यवहार बदलने का आरोप लगाया गया है। मंत्री को पता चला कि पति के अन्य महिलाओं से भी संबंध हैं।

    “इस बारे में जब आपत्ति की तो शुरुआत में मेरे पति ने अपनी गलती मानते हुए लिखित और मौखिक रूप में माफीनामा दिया, परंतु माफीनामा के बाद भी वह इन कार्यों में लिप्त रहा,” एफआईआर में दर्ज है।

    विरोध करने पर मारपीट का आरोप है। तहरीर में कहा गया है, “इन संबंधों का विरोध करने पर गिरधारी लाल साहू प्रार्थिनी के साथ मार-पिटाई और गाली-गलौज करने लगा और जान से मारने की धमकी देने लगा।”

    मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने कई बार सरकारी आवास में स्टाफ के सामने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया।

    आर्थिक धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया गया है। तहरीर में लिखा है, “गिरधारी लाल साहू ने प्रार्थिनी के कूट रचित हस्ताक्षर कर एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संबंधित कंपनियों में प्रार्थिनी को कंपनी के निदेशक के पद से निवृत्त दर्शा दिया, जबकि प्रार्थिनी द्वारा ऐसा कोई भी दस्तावेज निष्पादित नहीं किया गया।”

    सबसे गंभीर आरोप एक ऑडियो को लेकर है। मंत्री का दावा है कि उन्हें एक ऑडियो प्राप्त हुआ है।

    “जिसमें गिरधारी लाल साहू एक महिला से बात करते हुए प्रार्थिनी को जान से मारने का षड्यंत्र रच रहा है,” तहरीर में कहा गया है।

    तहरीर के अंत में मंत्री ने सुरक्षा की मांग की है। “प्रार्थिनी को लगातार अपने और अपने नाबालिग बच्चों की जान का खतरा बना हुआ है, यह व्यक्ति कभी भी कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है,” उन्होंने कहा।

    इस बीच मंत्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह रोते-बिलखते हुए अपनी पीड़ा बता रही हैं।

    उन्होंने अपने पति के कथित 8 से 9 मिनट के ऑडियो क्लिप भी सार्वजनिक किए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    गौरतलब है कि ऑडियो में गिरधारी महिला को 25 लाख देने की भी बात कर रहा है। यही नहीं, आगरा में फ्लैट खरीदने पर भी जोर दे रहा हस। गिरधारी साहू हत्या का आरोपी रह चुका है। इस हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। पूर्व में भी साहू और एक अन्य महिला के रिश्ते को लेकर मंत्री ने बरेली में कानूनी कार्रवाई करवाई थी।

    कांग्रेस ने बोला हमला, कहा- कर्मों का फल

    इधर, इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इसे अति संवेदनशील मामला बताया।

    दसौनी ने कहा, “सच कहूं तो रेखा आर्या जी का यह वीडियो देखकर मन बहुत दुखी हुआ, लेकिन कहते हैं न, कर्मा रिटर्न्स।”

    उन्होंने कहा कि दो दिन पहले ही मंत्री रेखा आर्या ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम को क्लीन चिट देकर पैरोकारी की थी।

    “मैं रेखा जी से कहना चाहती हूं, जब आप एक महिला एवं बाल विकास मंत्री होते हुए शोषित और प्रताड़ित महिलाओं के साथ खड़ी नहीं होंगी, तो ऐसे मौकों पर कौन साथ आकर खड़ा होगा?” दसौनी ने सवाल उठाया।

    कांग्रेस प्रवक्ता ने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, “जिस राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हो, उस राज्य की आम महिला पर क्या बीत रही होगी? क्या आप सोच सकते हैं?”

    उन्होंने ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच की मांग की। “हम मांग करते हैं कि रेखा आर्या जी द्वारा जारी किए गए इन ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच हो। यदि यह केवल सहानुभूति लेने के लिए जारी नहीं किया गया है और पति पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो आरोपियों पर कठोर से कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए,”

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी निशाना साधा गया। दसौनी ने कहा, “पुष्कर सिंह धामी जी, आपने आज तक महिलाओं पर हुए किसी भी शोषण को गंभीरता से नहीं लिया। हम नौ हिमालयी राज्यों में महिला अपराध में नंबर एक पर आ गए हैं।”

    उन्होंने अंत में कहा, “कम से कम अपनी कैबिनेट मंत्री, अपनी सहयोगी रेखा आर्या की इस पीड़ा को तो सुनिए और इस पर कार्रवाई करिए, ऐसी हम आपसे मांग करते हैं।”

    12. First Information contents (प्रथम सूचना तथ्य):
    नकल तहरीर टाईप शुदा हिन्दी वादिनी – सेवा में, श्रीमान प्रभारी निरीक्षक, थाना कैन्ट, जनपद देहरादून । महोदय, निवेदन है कि प्रार्थिनी रेखा आर्य पुत्री स्व० श्री गोपाल राम, उम्र 48 वर्ष, निवासी 10/11, यमुना कॉलोनी चकराता रोड, देहरादून की निवासी है। प्रार्थिनी उत्तराखंड राज्य में अधिसूचित अनुसूचित जाति की सदस्य है। प्रार्थिनी का विवाह श्री गिरधारी लाल साहू (पप्पू गिरधारी), निवासी श्रीबाबा बनखण्डी नाथ मंदिर, जोगी नवादा बरेली, उत्तरप्रदेश साथ दिनांक 06/07/2004 को हिंदू रीति रिवाज से संपन्न हुआ था। प्रार्थिनी का पति बरेली उत्तर प्रदेश का निवासी है तथा अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है तथा जिसे प्रारंभ से ही ज्ञात है कि प्रार्थिनी अनुसूचित जाति की सदस्य है। श्री गिरधारी लाल साहू ने विवाह के समय ही प्रार्थिनी को धोखे में रखा कि वह अविवाहित है, विवाह के कुछ वर्ष बाद प्रार्थिनी को सच्चाई पता चली कि वह पूर्व से विवाहित है और इनके पूर्व विवाह से बच्चे भी हैं, परन्तु तब तक प्रार्थिनी के बच्चे हो चुके थे और घर वालों के समझाने पर और बच्चों के भविष्य के दृष्टिगत प्रार्थिनी चुप रही।
    पिछले कुछ समय से प्रार्थिनी के प्रति गिरधारी लाल साहू का व्यवहार बदलने लगा, जिसमें यह ज्ञात हुआ कि गिरधारी लाल साहू के अन्य महिलाओं से भी अवैध संबंध है। इस बारे में जब प्रार्थिनी ने आपत्ति की तो शुरूआत में मेरे पति ने अपनी गलती मानते हुए लिखित और मौखिक रूप में माफीनामा दिया, परंतु माफीनामा के बाद भी वह इन कार्यों में लिप्त रहा। इन संबंधों का विरोध करने पर गिरधारी लाल साहू प्रार्थिनी के साथ मार-पिटाई और गाली-गलौज करने लगा और जान से मारने की धमकी देने लगा। कई बार प्रार्थिनी के सरकारी आवास में स्टॉफ के समक्ष भी अपमानजनक रूप से जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया।
    प्रार्थिनी को यह ज्ञात हुआ है कि गिरधारी लाल साहू ने प्रार्थिनी के कूट रचित हस्ताक्षर कर एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संबंधित कंपनियों में प्रार्थिनी को कंपनी के निदेशक के पद से निवृत्त दर्शा दिया जबकि प्रार्थिनी के द्वारा ऐसा कोई भी दस्तावेज निष्पादित नहीं किया गया ना ही कोई त्यागपत्र दिया गया। हाल ही में प्रार्थिनी को एक ऑडियो प्राप्त हुई है जिसमें गिरधारी लाल साहू एक महिला से बात करते हुए प्रार्थिनी को जान से करने का षड्यंत्र रच रहा है। प्रार्थिनी को लगातार अपने और अपने नाबालिक बच्चों की जान का खतरा बना हुआ है यह व्यक्ति कभी भी कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है।
    अतः आपसे निवेदन है की गिरधारी लाल साहू के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें।
    दिनांक- प्रार्थिनी sd अंग्रेजी अपठित 15/10/2026 रेखा आर्य पुत्री स्व० गोपाल राम, निवासी 10/11, यमुना कॉलोनी चकराता रोड, देहरादून – 248001
    नोट – मैं C/C प्रमाणित करता हूँ कि नकल तहरीर शब्द व शब्द टाईप की गयी है , शिवाये
  • दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने के फैसले के खिलाफ दिल्ली में विरोध तेज

    दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने के फैसले के खिलाफ दिल्ली में विरोध तेज

    अंकिता के माता-पिता को मिला राहुल-प्रियंका का साथ, हिरासत में लिया

    सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की मांग

    देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के आरोपों से घिरे दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाने से उपजी विरोध की लपटें दिल्ली के इंडिया गेट तक पहुंच गई।
    बुधवार को अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना देकर सभी को चौंका दिया। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और प्रियंका ने मौके पर पहुंचकर माता पिता की मांग के साथ अपनी आवाज बुलंद कर मामले को गर्मा दिया।

    गुरुवार की सुबह अंकिता के माता पिता को हिरासत में लिया। इसके बाद अफरा तफरी मच गई। विरोध के बाद रिहा कर दिया।

    उधर, देर रात तक इंडिया गेट पर पर राष्ट्रीय मीडिया ने डेरा डालकर इस मुद्दे को देश भर में पहुंचा दिया।  दुष्यंत गौतम की नियुक्ति से आक्रोशित अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक मामले में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े पहलुओं की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती। इधऱ, उत्तराखण्ड कांग्रेस ने इसे जनभावनाओं को रौंदने वाला फैसला बताकर पूरे प्रदेश में प्रदर्शन का कार्यक्रम तय कर दिया है।

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर को जारी विज्ञप्ति में दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा की थी।
    इसके बाद अंकिता के माता-पिता ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील की।
    अंकिता के पिता ने आग्रह किया कि सीबीआई की जांच पूरी होने तक गौतम को राज्यपाल पद पर नियुक्त न किया जाए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कथित वीआईपी प्रकरण में सामने आए सवालों के बीच यह नियुक्ति क्यों की गई।

    राहुल-प्रियंका बैठे धरने पर

    दिल्ली में धरने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर परिवार के संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि वह और कांग्रेस पार्टी न्याय की इस लड़ाई में उनके साथ हैं।

    हालांकि, दुष्यंत गौतम की कथित वीआईपी प्रकरण में भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित आधिकारिक निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।

    चार साल बाद फिर गरमाया मामला

    सितंबर 2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठते रहे सवालों ने मामले को समय-समय पर चर्चा में बनाए रखा है।

    अब दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के बाद परिवार ने जांच से जुड़े सवालों को फिर उठाया है। इस घटनाक्रम ने न्याय, जांच की पारदर्शिता और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कांग्रेस इस नियुक्ति को वापस लेने की मांग कर रही है, जबकि परिवार का आग्रह है कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति को रोका जाए। हाल ही में 9 अक्टूबर को सीबीआई ने अंकिता के माता-पिता से पूछताछ की थी।।

    उधर, भाजपा का कहना है कि प्रदेश सरकार ने मजबूत पैरवी कर तीनों अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा दिलवाई। और फरवरी 2026 में सीबीआई जांच की संस्तुति भी की। इस मामले में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की मोबाइल वार्ता में कथित वीआईपी के तौर पर दुष्यंत गौतम का नाम प्रमुखता से लिया गया था।
    इस मामले में भाजपा के तत्कालीन संगठन मंत्री अजेय कुमार का नाम भी कथित वीआईपी के तौर पर गरमाया था। बाद में भाजपा नेतृत्व ने अजेय कुमार को राजस्थान में महत्वपूर्ण दायित्व दे दिया। और अब प्रदेश प्रभारी रहे दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाकर जनभावनाओं को नये सिरे से भड़का दिया।

    उत्तराखंड कांग्रेस उतरी सड़क पर

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पार्टी की संगठनात्मक इकाइयों से जिला, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर कैंडल मार्च तथा मशाल जुलूस आयोजित करने की अपील की है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में पार्टी का पक्ष रखने और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति वापस लेने की मांग को मजबूती से उठाने को कहा है।

    गोदियाल ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई केवल उसके परिवार का मामला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ा प्रश्न है। कांग्रेस की मांग है कि जांच में किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को विशेष संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और मामले से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।

    महिला कांग्रेस आज करेगी प्रदर्शन

    इस मामले में उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस ने भी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में 15 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे देहरादून स्थित राजीव भवन, कांग्रेस मुख्यालय में पुतला दहन किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।

    महिला कांग्रेस ने उर्मिला सनावर द्वारा सार्वजनिक किए गए वीडियो और बयानों में कथित वीआईपी को लेकर किए गए दावों का भी उल्लेख किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

    अंकिता के माता-पिता का दिल्ली में धरना, राहुल और प्रियंका गांधी की उनसे मुलाकात और उत्तराखंड कांग्रेस के विरोध कार्यक्रमों ने इस प्रकरण को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। चुनावी साल में इस मुद्दे पर आहूत धरना प्रदर्शन से भाजपा के लिए नई चुनौती खड़ी हो गयी है।
    अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि परिवार की मांग पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं । और सीबीआई जांच किस मोड़ पर पहुंचती है ।

  • दून में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जोरदार भिड़ंत

    दून में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जोरदार भिड़ंत

    SIR पर बवाल, आंदोलनकारी हिरासत में

    SIR प्रक्रिया रद्द करने और हटाए गए नामों की बहाली की मांग

    देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एवं प्री-SIR प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सोमवार को देहरादून में विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र एवं जन संगठनों ने नागरिक मार्च निकाला।

    उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में आयोजित इस मार्च में अग्रगामी छात्र नौजवान सभा, स्त्री मुक्ति लीग संगठन, BGVS, जनवादी महिला संगठन, जन संवाद, AIDSO, एस॰एफ॰आई, महिला एकता केंद्र, इप्टा एवं अन्य जन संगठनों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया। विभिन्न चुनावी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मार्च में शामिल हुए।

    मार्च गांधी पार्क से शुरू होकर सचिवालय स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड के कार्यालय की ओर बढ़ा। लेकिन सचिवालय के निकट तैनात भारी पुलिस बल ने मार्च को रोक दिया। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की एवं हाथापाई हुई। पुलिसकर्मियों ने आंदोलनकारियों को धकेलते हुए बसों तक पहुँचाया और उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के चलते आंदोलनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन नहीं सौंप सके। हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा शामिल थे।

    प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और मतदाता सूची में नाम दर्ज होना इसके इस्तेमाल की पहली शर्त है। पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक एवं पारदर्शी बनाना होना चाहिए, न कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में प्री-SIR एवं SIR के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से नागरिकों के मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

    प्रस्तावित ज्ञापन में उल्लेख किया गया था कि प्री-SIR और SIR के दौरान उत्तराखंड में लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची की तुलना में नामों की संख्या में आई इस बड़ी कमी पर संगठनों ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि नाम हटाने से पहले मतदाताओं से संपर्क, पात्रता का सत्यापन और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए क्या कदम उठाए गए।

    वक्ताओं ने कहा कि अनुपस्थिति, स्थान परिवर्तन की आशंका या सत्यापन में कठिनाई मात्र के आधार पर उचित जांच एवं निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। उन्होंने गलत तरीके से हटाए गए नामों की बहाली तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की मांग की।

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करना तथा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रयुक्त मतदाता सूची को आधार बनाकर नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करना शामिल था। उन्होंने कहा कि पारदर्शी सत्यापन और उचित प्रक्रिया के बिना किसी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

    प्रस्तावित ज्ञापन में प्री-SIR के दौरान हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच, नाम हटाने से पूर्व सूचना एवं सुनवाई, सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में बूथ-स्तरीय शिकायत निवारण शिविर तथा मतदाता सूची के स्वतंत्र ऑडिट की मांग भी शामिल थी। संगठनों ने शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं से राहत देने पर भी जोर दिया।

    जनसंगठनों के साथ विभिन्न चुनावी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी मार्च में भाग लिया। आंदोलनकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नागरिकों के मताधिकार से जुड़े सवालों पर निर्वाचन अधिकारियों को जवाब देना चाहिए और शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

    मार्च के दौरान आंदोलनकारियों को ज्ञापन सौंपने का अवसर नहीं मिला और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। संगठनों ने मताधिकार की रक्षा, हटाए गए नामों की बहाली और वर्ष 2026 की SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग दोहराई।

    प्रदर्शन में उत्तराखंड इंसानियत मंच, उत्तराखंड महिला मंच, अग्रगामी छात्र नौजवान सभा, स्त्री मुक्ति लीग संगठन, BGVS, जनवादी महिला संगठन, जन संवाद, AIDSO, एस॰एफ॰आई, महिला एकता केंद्र, इप्टा एवं अन्य जन संगठन शामिल हुए।

  • दिनेश आर्य बनेंगे राज्यसभा में उत्तराखंड की बुलंद आवाज

    दिनेश आर्य बनेंगे राज्यसभा में उत्तराखंड की बुलंद आवाज

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य ने मुख्यमंत्री आवास में शिष्टाचार भेंट की।
    इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट भी मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री धामी ने दिनेश आर्य को राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आर्य अपने अनुभव, कार्यकुशलता और जनसेवा के प्रति समर्पण के माध्यम से संसद में उत्तराखंड की जनभावनाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश के विकास, जनकल्याण और जनहित से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि दिनेश आर्य प्रदेश की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और राज्य के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने दिनेश आर्य के सफल संसदीय कार्यकाल की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि उनके प्रयासों से उत्तराखंड के विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

  • मतदाता सूची से नाम कटने पर गरमाई सियासत, आयोग-भाजपा पर आरोप

    मतदाता सूची से नाम कटने पर गरमाई सियासत, आयोग-भाजपा पर आरोप

    कांग्रेस जाएगी कोर्ट, एसआईआर में 13.85 लाख वोट काटे

    देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की एसआईआर कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान प्रदेश में 13.85 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए। उन्होंने इसे छोटे राज्य में वोटों की बड़ी लूट बताते हुए कहा कि प्री-एसआईआर और एसआईआर प्रक्रिया में हुई मतदाता कटौती के वास्तविक आंकड़े निर्वाचन आयोग सार्वजनिक नहीं कर रहा है।

    कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में रावत ने कहा कि फॉर्म-7 को ऑटो जनरेट करने, भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित फर्जी शिकायतों का संज्ञान लेने और फर्जी शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने में निर्वाचन आयोग और भाजपा की मिलीभगत रही है।

    रावत ने कहा कि उत्तराखंड में करीब 14 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काटा जाना वोट चोरी की बड़ी वारदात है। कांग्रेस इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बीएलओ की सजगता के कारण आयोग के कथित मंसूबे पूरी तरह सफल नहीं हो पाए और अधिकांश पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल रह सके।

    उन्होंने आगामी समय में फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को भी असंगत बताया। रावत ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए तथा निर्वाचन आयोग को एसआईआर से जुड़े सभी वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।

    पत्रकार वार्ता में प्रदेश महासचिव राजेंद्र भंडारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (अल्पसंख्यक) हाजी सुलेमान अंसारी, मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी, एसआईआर कमेटी के सदस्य अमेंद्र बिष्ट और अधिवक्ता संदीप चमोली मौजूद रहे।

  • हरदा के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व सख्त! जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

    हरदा के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व सख्त! जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

    प्रभारी के पत्र के बाद भी हरदा आज निकालेंगे जनसंवाद यात्रा

    कांग्रेस आलाकमान भी सख्ती के मूड में

    नई दिल्ली/ देहरादून। कांग्रेस आलाकमान भी सख्त रुख अपनाए हुए है। और पूर्व सीएम हरीश रावत भी कुमाऊं के जसपुर से हल्द्वानी तक जनसंवाद कार्यक्रम में जुटे हैं। यह यात्रा आज सोमवार 5 अक्टूबर को होनी है।

    पार्टी संगठन से इतर निकाली जा रही हरदा की इस निजी जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी हाईकमान कड़ा पत्र जारी कर चुका है।
    प्रदेश प्रभारी सैलजा ने जनसंवाद यात्रा को लेकर हरदा को नसीहत देते हुए यात्रा रोकने को कहा है। लेकिन हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया में अपने तेवर जाहिर कर दिए है।
    हरीश रावत को भेजे पत्र में प्रभारी सैलजा ने कहा कि –
    हमारे संज्ञान में आया है कि आप राज्य में एक यात्रा निकाल रहे हैं। इस संबंध में न तो मुझसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से कोई चर्चा की गई है। इसके अलावा, हाल ही में आपके द्वारा कुछ विवादास्पद बयान दिए जाने की भी जानकारी मिली है।
    राज्य में विधानसभा चुनाव अगले कुछ महीनों में होने हैं और ऐसे समय में पार्टी को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। आप समझेंगे कि इस महत्वपूर्ण समय पर इस तरह का कोई समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा।
    अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इन कार्यक्रमों को आगे न बढ़ाएं।

    इधऱ, कुछ घण्टे पहले हरीश रावत ने भी इशारों में ‘प्यार पर पहरा’आदि शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस के झंडे तले जनसंवाद यात्रा के श्रीगणेश के लिए कमर कस ली है।
    हरदा ने जसपुर से हल्द्वानी जनसंवाद यात्रा से ठीक पहले सोशल पोस्ट में लिखा है-
    साथियों, चुनौती बड़ी है। लेकिन उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए हमारा संकल्प भी दृढ़ है! ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ के इस दौर में अब रुकना नहीं है। उठो, चलो… राज्य में बदलाव लाना है और कांग्रेस को वापस लाना है!
    जसपुर से हल्द्वानी तक, आइए आज साथ मिलते हैं, संवाद करते हैं और देवभूमि के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं।

    कांग्रेस हाईकमान के पत्र के बाद हरदा ने अपना कार्यक्रम स्थगित नहीं किया। चुनावी टीम से साल भर पहले बाहर किये गए हरदा की इस जनसंवाद यात्रा के बाद कांग्रेस नेतृत्व के कड़ा रुख अपनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
    कुछ दिन पहले ही बीमारी से उठने के बाद हरीश रावत की पार्टी के समानांतर अपने कार्यक्रम आयोजित करने से दिल्ली तक कलह ने भी पैर पसार लिए है।
    कांग्रेस के बाकी सभी गुट हरदा के एकला मूव को चुनावी तैयारियों के लिए ग्रहण मानकर चल रहे है। हालांकि, हरीश समर्थक जनसंवाद यात्रा को कांग्रेस के हक में बता रहे हैं।
    लेकिन इस चकल्लस के बाद कांग्रेस का रायता बिखरना शुरू हो गया है। भाजपा भी इसी स्वर्णिम मौके को लपकने के लिए तैयार बैठी है।अगर, हरदा की निजी स्तर पर किए जा रहे कार्यक्रम नहीं रुके तो पार्टी हाईकमान बड़ा कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं। कांग्रेस की यह अंदरूनी जंग ‘निर्णायक’ मोड़ पर पहुंचती दिख रही है…

  • निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

    निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

    सचिवालय स्थित चुनाव कार्यालय घेरा

    एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप, कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग की

    देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून में प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सचिवालय तक मार्च निकाला और सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी दहन किया गया।

    प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा समेत विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल रहे।

    कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन

    उपजिलाधिकारी सदर को सौंपकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों को पद से हटाने की मांग की। ज्ञापन में आयोग के पूर्व फैसलों को निरस्त करने तथा नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की मांग भी की गई। कांग्रेस ने निर्वाचन आयुक्तों की गिरफ्तारी की मांग भी उठाई।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और चुनावी पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में विपक्षी दलों की शिकायतों पर अपेक्षित संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। कांग्रेस ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी राजनीतिक दलों के प्रति समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की।

    फार्म-7 के इस्तेमाल पर सवाल
    कांग्रेस ने उत्तराखंड में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फार्म-7 दाखिल किए जाने पर भी सवाल उठाए। पार्टी का दावा है कि कई विधानसभा क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें मिली हैं, जहां कुछ लोगों ने बड़ी संख्या में फार्म-7 दाखिल कर अलग-अलग मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया।

    कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान प्राप्त सभी फार्म-7 का विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। असामान्य संख्या में फार्म-7 दाखिल करने वालों की सूची जारी कर उनके आवेदनों की विशेष जांच कराने की मांग भी की गई। पार्टी ने कहा कि किसी वैध मतदाता का नाम केवल आपत्ति या फार्म-7 के आधार पर नहीं हटाया जाना चाहिए, बल्कि बीएलओ और ईआरओ के स्तर पर भौतिक सत्यापन तथा संबंधित मतदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।

    कांग्रेस ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, आपत्तियों पर उचित सुनवाई और निर्वाचन प्रक्रिया में कथित पक्षपात या दबाव की शिकायतों की स्वतंत्र जांच की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का मत सर्वोच्च है और मतदाता सूची की विश्वसनीयता सीधे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ी है।

  • उत्तराखण्ड भाजपा के संगठन महामंत्री बने फणीन्द्र नाथ शर्मा

    उत्तराखण्ड भाजपा के संगठन महामंत्री बने फणीन्द्र नाथ शर्मा

    अजेय कुमार और दुष्यंत गौतम की छुट्टी के बाद नई टीम मैदान में

    देहरादून। प्रदेश प्रभारी व दो सह प्रभारी की नियुक्ति के बाद भाजपा ने लम्बे समय से खाली चल रहे प्रदेश महामंत्री संगठन की कुर्सी फणीन्द्र नाथ शर्मा को सौंप दी।

    गौरतलब है कि अंकिता भंडारी मामले से चर्चा में आये संगठन महामंत्री अजेय कुमार का राजस्थान तबादला कर दिया गया था।
    इसके बाद 23 सितंबर को प्रभारी दुष्यंत गौतम की छुट्टी करते हुए राम माधव को नया प्रदेश प्रभारी बनाया गया।

    संगठन से जुड़े अहम पदों पर नियुक्ति करते हुए भाजपा ने चुनावी तैयारियों को एक कदम आगे बढ़ा दिया है।

    सीएम धामी व प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने फणीन्द्र नाथ शर्मा को उत्तराखंड भाजपा का नया प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    उन्होंने पार्टी शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फणीन्द्र नाथ शर्मा की संगठनात्मक कार्यशैली, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और बूथ सशक्तीकरण का वृहद एवं कुशल अनुभव प्रदेश संगठन को मिलेगा।
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    भट्ट ने कहा कि असम, त्रिपुरा और हरियाणा में संगठन महामंत्री एवं अन्य दायित्वों के रूप में उनके द्वारा किए गए कार्य और माइक्रो-बूथ प्रबंधन का लाभ आगामी चुनावों की जीत में निश्चित रूप से मिलेगा। उनके मार्गदर्शन में प्रदेश में भाजपा संगठन और अधिक सशक्त, जीवंत एवं ऊर्जावान होकर उभरेगा।

    प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि नए प्रदेश संगठन महामंत्री के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड में संगठन की नींव बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत होगी तथा केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में नई ऊर्जा के साथ कार्य किया जाएगा।