देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व उत्तराखण्ड की लोक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अद्वितीय प्रतीक है। हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित जीवन शैली को अपनाने का जनसंदेश है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब हरेला पर्व प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों, जल स्रोतों और भूमि का संरक्षण मानव अस्तित्व से जुड़ा विषय है तथा प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा, हरेला हमें अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और प्रकृति के साथ अपने गहरे संबंध का स्मरण कराता है।
राज्यपाल ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे हरेला पर्व के अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल का संकल्प भी लें। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान आवश्यक है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामना दी है। हरेला पर्व की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करने तथा लोक संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ हमें अपनी परम्पराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। हमारे लोक पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत की भी पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की अध्यात्म और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति विशिष्ट पहचान रही है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता हर किसी को आकर्षित करती है। इसलिए, पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हमें अपने जल स्रोतों, नदियों और गाड़-गदेरों के पुनर्जीवन और संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान से समाज में वृक्षारोपण के प्रति जन-जागरुकता का प्रसार हुआ है। प्रदेश में हरेला पर्व पर वन एवं उद्यान विभाग द्वारा शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में वृहद वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के लिये प्रभावी कार्य-योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण आज सामाजिक दायित्व के साथ जन-भावना से जुड़ा विषय बन गया है। हमारा यह प्रयास भावी-पीढ़ी को अपनी परम्पराओं से जुड़ने तथा प्रकृति-संरक्षण की दिशा में अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन हेतु प्रेरित करने में भी मददगार होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने इस दिशा में जन सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी सामाजिक संगठनों और संस्थाओं से भी सक्रिय सहयोग की अपील की है।
उत्तराखण्ड में 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन सेवा फिर हुई सक्रिय
आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण
देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखण्ड के अंतर्गत संचालित 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं आवश्यक तकनीकी एवं विद्युत संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद आज से पुनः शुरू हो गई ।
हेल्पलाइन पूर्व की भांति 24 घंटे और सातों दिन संचालित रहेगी। इसके माध्यम से प्रदेश के नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, आवश्यक जानकारी, शिकायत एवं अन्य निर्धारित सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
डॉ. अरीता सक्सेना (नोडल अधिकारी, 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन में मुख्य विद्युत आपूर्ति से संबंधित आर्मर्ड केबल के प्रतिस्थापन के साथ आवश्यक तकनीकी उन्नयन का कार्य किया गया है।
तकनीकी कार्यों के चलते हेल्पलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुई थीं। अब सभी आवश्यक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं और हेल्पलाइन को नियमित संचालन के लिए तैयार कर लिया गया है।
तकनीकी उन्नयन और विद्युत संबंधी कार्य हुए पूरे
डॉ. अरीता सक्सेना, नोडल अधिकारी, 104 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड के अनुसार 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन के निर्बाध एवं सुचारू संचालन के लिए मुख्य विद्युत आपूर्ति से संबंधित आर्मर्ड केबल को बदला जाना आवश्यक था।
इसके साथ ही हेल्पलाइन की तकनीकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से आवश्यक तकनीकी उन्नयन का कार्य भी किया गया। इन कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए हेल्पलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित रहीं। तकनीकी टीमों द्वारा सभी आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। आवश्यक परीक्षण एवं तकनीकी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के बाद अब 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन सोमवार से पूर्ववत नियमित रूप से संचालित होगी।
24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध रहेगी हेल्पलाइन
डॉ. अरीता सक्सेना ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं जानकारी प्राप्त करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अपनी शिकायतें और सुझाव भी दर्ज करा सकते हैं। हेल्पलाइन की सेवाएं पुनः शुरू होने के बाद प्रदेश के नागरिक 104 नंबर पर संपर्क कर निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, परामर्श, शिकायत अथवा हेल्पलाइन से संबंधित अन्य सेवाओं के लिए सोमवार से 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन का निर्बाध रूप से उपयोग किया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच को आसान बनाती है 104 हेल्पलाइन
डॉ. अरीता सक्सेना ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद एवं सहायता के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में कार्य करती है। दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक भी हेल्पलाइन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने में भी हेल्पलाइन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों और समस्याओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों एवं विभागों तक पहुंचाया जाता है, जिससे उनका नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना निर्बाध सेवाओं के लिए आवश्यक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुचारू और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की विद्युत एवं तकनीकी व्यवस्थाओं का आवश्यक उन्नयन किया गया है। तकनीकी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण से हेल्पलाइन के संचालन को सुचारू बनाए रखने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
असुविधा के लिए खेद, सहयोग के लिए प्रदेशवासियों का आभार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड ने तकनीकी एवं विद्युत संबंधी आवश्यक कार्यों के दौरान 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं प्रभावित होने से प्रदेशवासियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। एनएचएम ने इस अवधि में प्रदेशवासियों द्वारा दिए गए सहयोग एवं धैर्य के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि सभी आवश्यक कार्य पूर्ण होने के बाद सोमवार से हेल्पलाइन सेवाएं पूर्ववत 24×7 उपलब्ध रहेंगी। प्रदेश के नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, आवश्यक जानकारी, शिकायत एवं अन्य निर्धारित हेल्पलाइन सेवाओं के लिए 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं।
शहर की यातायात व्यवस्था अधिक सुगम एवं सुरक्षित होगी
देहरादून। जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान द्वारा ने आज तहसील चौक चौड़ीकरण परियोजना की प्रगति का स्थलीय निरीक्षण करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने योजना की प्रगति की जानकारी प्राप्त करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप देहरादून शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने की दिशा में आढ़त बाजार/ तहसील चौक सड़क चौड़ीकरण परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित किया जा रहा है।
परियोजना के तहत प्रभावित संपत्ति धारकों को पारदर्शी एवं समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से मुआवजा वितरण किया जा रहा है।
परियोजना से प्रभावित संपत्ति धारकों को मुआवजा वितरण की कार्यवाही गतिमान है तथा मुआवजा प्राप्त करने के बाद कई संपत्ति धारकों द्वारा अपनी प्रभावित परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री लोक निर्माण विभाग के नाम कर दी गई है।
इससे परियोजना के कार्यों को गति मिल रही है। ज्ञातब्य है कि परियोजना के अंतर्गत कुल 410 संपत्तियां प्रभावित हो रही हैं, जिनमें से शेष संपत्तियों के दस्तावेजों का परीक्षण एवं आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। दस्तावेज सही पाए जाने पर पात्र प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जा रहा है।
आढ़त बाजार/तहसील चौक सड़क चौड़ीकरण परियोजना देहरादून के यातायात तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सड़क चौड़ीकरण से जाम की समस्या में कमी आएगी और आमजन को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
परियोजना में प्रभावितों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने से प्रभावित संपत्ति धारकों का प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। कई प्रभावितों ने स्वेच्छा से अपनी संपत्तियां खाली करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, जिससे परियोजना को गति मिल रही है।
बुजुर्गों और महिलाओं के उत्पीड़न पर कड़ा रुख, तत्काल कार्रवाई के निर्देश
देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के दिशा-निर्देशों पर सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा की अध्यक्षता में ‘समाधान दिवस’ का आयोजन किया गया।
जनता की समस्याओं को सुनने और उनके त्वरित निस्तारण के लिए आयोजित इस शिविर में फरियादियों का सैलाब उमड़ पड़ा। करीब 4 घंटे तक चले इस आयोजन में भूमि विवाद, अवैध कब्जे, अतिक्रमण, घरेलू हिंसा, आर्थिक सहायता और फीस माफी जैसे गंभीर विषयों से संबंधित कुल 176 शिकायतें दर्ज की गईं।
अपर जिलाधिकारी ने मौके पर ही अधिकांश शिकायतों का निपटारा किया। वहीं, शेष बचे गंभीर और जांच योग्य मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए साफ हिदायत दी कि तय समय सीमा के भीतर कानूनी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाधान दिवस में पारिवारिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़ी कई दर्दनाक कहानियां सामने आईं, जिस पर प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाया। जीवनगढ़ निवासी 65 वर्षीय विधवा सावित्री देवी ने अपने ही बेटे-बहू पर मकान कब्जाने और मारपीट का आरोप लगाया। इस पर एसडीएम विकासनगर को तत्काल भरण-पोषण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं, वरिष्ठ नागरिक नसीम चंद की ऐसी ही शिकायत पर नगर निगम और तहसीलदार को तत्काल जांच सौंपी गई।
संजय कॉलोनी की विधवा और बेसहारा पूजा देवी ने बताया कि पति के निधन के बाद ननदों ने मकान पर कब्जा कर उसे बच्चों सहित मायके रहने पर मजबूर कर दिया। अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम विकासनगर को इस मामले में तुरंत एक्शन लेने को कहा गया। घेरलू हिंसा से पीडित जोगीवाला की तुलसी देवी और निरंजनपुर की फूलों देवी ने पतियों द्वारा मारपीट और दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस और प्रशासन को तुरंत पीड़िता की मदद के निर्देश दिए गए।
जमीन से जुड़े विवादों और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण को लेकर अधिकारियों को तुरंत मौके पर जाकर रिपोर्ट देने को कहा गया है। केदारपुरम की अनीता गुप्ता ने रजिस्ट्री में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बताया कि पति की मृत्यु के बाद, पूरा पैसा लेने के बावजूद विक्रेता ने धोखा देकर जमीन अपने नाम ही रख ली। इस फर्जीवाड़े की जांच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सौंपी गई है।
ग्राम पंचायत झाझरा में एक वार्ड सदस्य द्वारा और डोईवाला के कान्हरवाला में ग्राम समाज की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायत पर बीडीओ और एसडीएम डोईवाला को तत्काल पैमाइश कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए। वही प्रेमपुर माफी में भूमि खरीदने के बाद भी कब्जा न मिलने पर तेजस्विनी लक्ष्मी बिष्ट और अन्य की शिकायत पर एसडीएम को जांच के आदेश दिए गए।
जनता की रोजमर्रा की दिक्कतों को देखते हुए कई विकासात्मक कार्यो को धरातल पर उतारने के निर्देश भी जारी किए गए। बैंक ऋण चुकता न होने पर एक मकान सीज होने के साथ वहां चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र का सामान भी सीज हो गया था। जिला कार्यक्रम अधिकारी को बैंक से तालमेल बिठाकर तुरंत आंगनबाडी केंद्र का सामान वापस दिलाने को कहा गया।
शीला शेर मोटर मार्ग पर पुल निर्माण में देरी से बच्चों को हो रही परेशानी पर पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता को काम में तेजी लाने और तब तक के लिए वैकल्पिक मार्ग को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। ग्राम पंचायत कावाखेड़ा में टोंस नदी से पंपिंग योजना तथा खनन प्रभावित क्षेत्र फनार, नीनूस, मेन्द्रथ, पुनहा पोखरी में सिंचाई और पाइपलाइन के लिए खनिज फाउंडेशन न्यास निधि से प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। श्रावण मास के प्रसिद्ध ‘गणियात मेले’ और ‘दखडान मेले’ में सांस्कृतिक दलों की व्यवस्था के लिए जिला पर्यटन अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई।
समाधान दिवस में सिटी मजिस्ट्रेट राजेश तिवारी, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम अपर्णा ढौंडियाल, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार समेत सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।
देहरादून। साहित्यकार एवं इंडो-जर्मन सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. योजना साह जैन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी साहित्यिक कृतियां ‘इमली का चटकारा’ (कहानी-संग्रह), ‘बनारस मीट्स बर्लिन’ (उपन्यास) तथा ‘कागज पे फुदकती गिलहरियां’ (कविता-संग्रह) मुख्यमंत्री को भेंट की।
मुख्यमंत्री ने डॉ. योजना साह जैन को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साहित्य समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने भारत और जर्मनी के मध्य सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करने में डॉ. जैन के योगदान की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और संवेदनाओं को वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक होंगी।
700 श्रद्धालु छह दिवसीय विशेष तीर्थ यात्रा में हुए शामिल
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को रेलवे स्टेशन हर्रावाला से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के उपलक्ष्य में वेरावल (सोमनाथ) के लिए विशेष रेल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर उन्होंने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए इसे केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि छह दिवसीय इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न वर्गों से लगभग 700 श्रद्धालु सहभागी बन रहे हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी माताएं-बहनें, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने इस पहल के लिए संस्कृति विभाग की सराहना करते हुए सभी यात्रियों की मंगलमय, सुरक्षित एवं सुखद यात्रा की कामना भगवान सोमनाथ और बाबा केदार से की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा भारत की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, गौरवशाली विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर भारत की अटूट आस्था, अदम्य विश्वास और पुनरुत्थान का प्रतीक है। अनेक आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद सोमनाथ ने पूरे विश्व को यह संदेश दिया है कि भारत हर चुनौती के बाद और अधिक शक्ति एवं संकल्प के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक गौरव का अनुभव कराने वाला विशेष अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अभूतपूर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर चल रहा है। अयोध्या से सोमनाथ, केदारनाथ से काशी विश्वनाथ, महाकाल से बद्रीनाथ धाम तक मंदिरों का व्यापक पुनरुद्धार और विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की जीवनरेखा हैं। लंबे समय तक जिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की उपेक्षा हुई, आज उन्हें पुनः सम्मान और गौरव प्राप्त हो रहा है, जो बदलते भारत की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केदारखंड और मानसखंड के मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार पर कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर तथा शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के गहन अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है, जो केवल भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान नहीं बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और पवित्रता की रक्षा का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधारात्मक कदम उठाते हुए 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया तथा मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की गई है, ताकि शिक्षा राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां आधुनिक विकास और सनातन संस्कृति दोनों समान रूप से आगे बढ़ें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और आशीर्वाद से यह संकल्प अवश्य साकार होगा।
मुख्यमंत्री ने यात्रा पर जा रहे सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे जहां भी जाएं, देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि सभी यात्री इस यात्रा के माध्यम से केवल सोमनाथ के दर्शन करने नहीं जा रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना, समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के भी प्रतिनिधि हैं। उन्होंने सभी से अपने आचरण, व्यवहार और विचारों से राज्य की सकारात्मक पहचान को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विधायक बृज भूषण गैरोला, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी ने किया देहरादून साइंस सिटी निर्माण कार्यों का निरीक्षण
विज्ञान एवं नवाचार नीति पर विशेषज्ञों के साथ किया सार्थक संवाद
देहरादून।।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में साइंस सिटी परियोजना के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति (STIP) परिसंवाद कार्यक्रम में भी प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में ये साइंस सिटी केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगी।
उन्होंने कहा कि इस साइंस सिटी में हमारे युवाओं को अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जो उनके सपनों और विचारों को नई उड़ान देने का कार्य करेंगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में ‘विज्ञान सेतु’ परिकल्पना के अंतर्गत सामुदायिक विज्ञान रेडियो ‘विज्ञान वाणी’ (88.8 मेगाहर्ट्ज), ‘विज्ञान दृश्यम’ तथा ‘विज्ञान धारा’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि इन प्रयासों से प्रयोगशालाओं के जटिल ज्ञान को उत्तराखंड के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
तकनीकी में नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय प्रदेश में हरेला सप्ताह मनाया जा रहा है। हरेला केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारे दायित्व का “प्रतीक पर्व” भी है।
उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में हरेला पर्व पूरी दुनिया को ये संदेश देता है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज पूरी दुनिया एक अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब रोबोट्स कारखानों से लेकर अस्पतालों तक में काम कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। वहीं, डेटा साइंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और बायो-टेक्नोलॉजी जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियां आज दुनिया की दिशा और दशा तय कर रही हैं। ऐसे समय में, हमें इस बदलाव को न केवल स्वीकार करना है, बल्कि इसका नेतृत्व भी करना है।
उत्तराखंड की बेस्ट प्रैक्टिस को मिल रही सराहना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज देश के कई राज्य उत्तराखंड को कई क्षेत्रों में बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में देख रहे हैं। सिलल्यारा टनल में फंसे श्रमिकों का सुरक्षित निकालने का अभियान इसमें शामिल है। जिसे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में पेश किया गया।
इसीलिए सरकार ने अब से हर वर्ष 28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में अद्भुत प्रतिभा और मेधा है। इसलिए अब हमें प्रदेश में ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है जहाँ हमारी इस युवा प्रतिभा को सही दिशा मिले ताकि वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
विकसित भारत का आधार- विज्ञान, अनुसंधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने “विकसित भारत 2047” का जो ‘अमृत संकल्प’ रखा है, उसकी सबसे मजबूत आधारशिला विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान ही है।
इसीलिए प्रधानमंत्री ने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ के नारे में ‘जय अनुसंधान’ जोड़कर देश के वैज्ञानिकों और युवाओं को एक नया मंत्र दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और नेशनल क्वांटम मिशन जैसे बड़े अभियानों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से भारत में अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। वहीं, सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर होने की राह पर है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी उत्तराखंड को विज्ञान, तकनीक और आधुनिक अनुसंधान का एक वैश्विक हब बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित होकर कार्य कर रही है।
इसी दिशा में राज्य की पहली ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति’ लागू हो चुकी है। इस नीति का उद्देश्य एक ऐसा आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित करना है जहाँ हमारा युवा केवल रोजगार खोजने वाला न रहे, बल्कि अपने इनोवेटिव आइडियाज के दम पर ‘जॉब क्रिएटर’ बने। ये नीति विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं की सीमाओं तक नहीं रखेगी, बल्कि उसे आम जनजीवन से जोड़ते हुए जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।
चुनौतियों का स्थानीय समाधान तलाशने का प्रयास मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमारे सामने कई कठिन चुनौतियां खड़ी करती हैं। लेकिन हमारा हिमालय ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और हमारी जैव-विविधता, अमूल्य औषधीय वनस्पतियां, बारहमासी जल स्रोत, जैविक कृषि और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर हमारी असली पूंजी हैं। इसलिए यदि हम अपनी स्थानीय समस्याओं के स्थानीय और वैज्ञानिक समाधान विकसित कर लें, तो उत्तराखंड पूरे देश के लिए विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने नई पॉलिसी तैयार की है। साथ ही सरकार प्रदेश में तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला एक मजबूत इकोसिस्टम भी विकसित कर रही है। इसी तरह वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देते हुए उत्तराखंड को ‘साइंस बेस्ड नॉलेज इकॉनॉमी’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।
स्टार्टअप सेंटर विकसित करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट सूचना केंद्र, स्टेम लैब्स और जीआईएस आधारित आधुनिक तकनीकी प्रणालियों का भी विस्तार कर रही है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर तथा प्री-इन्क्यूबेशन लैब जैसी भविष्य की तकनीकों को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इस मौके पर उन्होंने यूकॉस्ट परिसर में स्टार्टअप सेंटर विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की भी घोषणा की। मुख्यमत्री ने इस अवसर पर पौधारोपण भी किया।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, सहसपुर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव नितेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविन्द सिंह, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित हुए।
रानीखेत। झलोड़ी – प्रिपेरटरी पब्लिक जूनियर हाई स्कूल, झलोड़ी के छात्र कुनाल राज का जवाहर नवोदय विद्यालय, ताड़ीखेत में कक्षा 9 में चयन होने पर हर्ष का माहौल है।
इस उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य नवीन चन्द्र एवं प्रबंधक अंजलि तिवारी ने कुनाल राज को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्र की लगन, मेहनत एवं अनुशासन का परिणाम है तथा अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने कुनाल राज के पिता चन्द्र शेखर ( इंटर कॉलेज, खिर्खेत के प्रधानाचार्य ) को भी पुत्र की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी ।
विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं कर्मचारियों ने कुनाल के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी विद्यालय, क्षेत्र एवं अपने परिवार का नाम रोशन करेंगे।
देहरादून। बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में चमोली पुलिस ने आरोपी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया।
रविवार की रात लगभग 10 बजे प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार किया गया। अभी कोतवाली बदरीनाथ में पूछताछ चल रही है। पुलिस जल्द ही आरोपी को जिला न्यायालय गोपेश्वर में पेश करेगी।
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया है।
देर रात की गई इस कार्रवाई के बाद आरोपी को बद्रीनाथ थाने लाया गया, जहां उससे मामले में गहन पूछताछ की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से चढ़ावा चोरी और हेराफेरी के मामले में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और आरोपी को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का कहना है कि मामले में आवश्यक पूछताछ और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जांच समिति ने गणना कक्ष के वीडियो फुटेज में आरोपी को रुपए ले जाते पाया। इसी के आधार पर आरोपी प्रमोद नौटियाल से पूछताछ की जा रही है।
गौरतलब है कि आरोपी प्रमोद नौटियाल ने हाईकोर्ट में अपने निलंबन के खिलाफ याचिका दायर की है।इस मामले में हाईकोर्ट ने 16 जुलाई की तारीख तय की है।
बद्रीनाथ चढ़ावा (दान) चोरी प्रकरण: अब तक की प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन
2 जुलाई 2026
बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित अनियमितता और चोरी का आरोप सामने आया।
आरोप है कि गणना के दौरान दान राशि में हेराफेरी की गई। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि घटना सीसीटीवी में कैद हुई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि उस समय नहीं हुई।
3 जुलाई 2026
भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री ने बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत भेजी।
शिकायत में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
4 जुलाई 2026
मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जांच के आदेश दिए।
प्रारंभिक जांच शुरू हुई और सीसीटीवी फुटेज व दस्तावेज खंगाले जाने लगे।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जिस कर्मचारी को उनका “निजी सचिव” बताया जा रहा है, वह समिति का वैयक्तिक सहायक (पीए) है।
8–9 जुलाई 2026
प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद संबंधित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया।
उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की, जिसे पूरे प्रकरण की जांच और भविष्य में व्यवस्था सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई।
9 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने मामले को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बताते हुए कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।
11–12 जुलाई 2026
पुलिस और जांच एजेंसियों ने पूछताछ का दायरा बढ़ाया।
बीकेटीसी के कई कर्मचारियों से पूछताछ की गई और दस्तावेजों व सीसीटीवी की गहन जांच शुरू हुई।
13 जुलाई 2026 (ताजा स्थिति)
प्रमोद नौटियाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
उच्चस्तरीय समिति और पुलिस दोनों स्तरों पर जांच जारी है।
यह भी जांच की जा रही है कि क्या मामला किसी एक कर्मचारी तक सीमित था या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका है।
वर्तमान स्थिति
एक कर्मचारी निलंबित।
एफआईआर दर्ज।
आरोपी से पूछताछ जारी।
उच्चस्तरीय समिति जांच कर रही है।
सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और गणना प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।
अब तक किसी अंतिम जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष की घोषणा नहीं हुई है।