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  • मॉक ड्रिल से आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ेगी: सीएम

    मॉक ड्रिल से आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ेगी: सीएम

    राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक क्षमता का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी तथा तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है, जिससे संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया गया है तथा अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोत संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही आपदा जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संचालित विभिन्न राहत एवं बचाव अभियानों ने वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीकों, त्वरित निर्णय क्षमता तथा टीमवर्क की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों एवं कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन संपर्क नंबरों एवं प्राथमिक सावधानियों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को न्यूनतम करना, जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उत्तराखण्ड को देश का सबसे सक्षम, तकनीक-सक्षम एवं जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है। उन्होंने सभी से पूर्व तैयारी, आधुनिक तकनीक, प्रभावी समन्वय एवं जनभागीदारी के बल पर उत्तराखण्ड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीएमपी राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए सभी विभागों की भूमिका, दायित्व एवं समन्वय व्यवस्था निर्धारित करती है। वहीं डीडीएमपी प्रत्येक जनपद की स्थानीय परिस्थितियों, संभावित आपदाओं, उपलब्ध संसाधनों एवं त्वरित कार्रवाई की विस्तृत कार्ययोजना उपलब्ध कराती है, जिससे आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावी एवं समन्वित ढंग से कार्य कर सके। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई ये योजनाएं राज्य एवं जनपद स्तर पर बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन तथा त्वरित एवं सुनियोजित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्हें उपकरणों के संचालन, उपयोगिता एवं आपदा के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित अनेक आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।

    इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि)रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव विनोद सुमन, गढ़वाल मंडल आयुक्त श्री आनंद स्वरूप, आईजी अग्निशमन विम्मी सचदेव, अपर सचिव प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • मदरसा बोर्ड समाप्त, नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत: मुख्यमंत्री धामी

    मदरसा बोर्ड समाप्त, नए शिक्षा मॉडल की शुरुआत: मुख्यमंत्री धामी

    अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ

    उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू

    अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रदान किए गए मान्यता प्रमाण पत्र

    ” वन नेशन-वन एजुकेशन” की दिशा में उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक पहल

    धामी सरकार का बड़ा फैसला : सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान शैक्षणिक अवसर देने की नई व्यवस्था लागू

    किताब-कॉपी और कौशल से सशक्त होगा अल्पसंख्यक समाज, शिक्षा को बनाया विकास का आधार : मुख्यमंत्री

    आस्था और आधुनिकता के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड में शिक्षा व्यवस्था का नया युग शुरू

    राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य पर फोकस : अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से बदलेगी तस्वीर

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उत्तराखण्ड में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मिला नया विस्तार

    छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को मिलेंगे समान अवसर, आधुनिक शिक्षा से जुड़ेगा भविष्य

    शिक्षा के मंदिरों में अब गुणवत्ता, पारदर्शिता और कौशल विकास होगा प्राथमिक लक्ष्य : मुख्यमंत्री

    श्रेष्ठ उत्तराखण्ड के संकल्प को मजबूती देगा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण : धामी

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया।
    इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। इस पवित्र धरती ने सदियों से विश्व को ज्ञान और संस्कार का संदेश दिया है। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।

    उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिले और वह आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं कौशल के माध्यम से आगे बढ़ सके।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।

    उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें।

    उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता सभी को जोड़ने वाली शक्ति है। राज्य सरकार इसी भावना के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

    उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।

  • मानसून अलर्ट: देहरादून में हाई अलर्ट, अवैध खनन पर सख्ती

    मानसून अलर्ट: देहरादून में हाई अलर्ट, अवैध खनन पर सख्ती

    नदी किनारों पर सायरन-सीसीटीवी और 24 घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूम

    मानसून में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: डीएम डॉ. आशीष चौहान

    देहरादून। मानसून के मद्देनज़र देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार को आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रखते हुए हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    इसके बाद एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उप जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क, पेयजल, विद्युत, जलभराव, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए।

    जिलाधिकारी ने निर्माणदायी संस्थाओं को मानसून के दौरान खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि विभागीय लापरवाही से यदि कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी और कार्यदायी संस्था के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को स्टोन क्रशरों का सत्यापन कराने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि वे संचालित न हों। साथ ही 1 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में खनिज परिवहन करते पाए जाने वाले वाहनों को सीज कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।

    नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर वार्निंग सायरन और सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए गए कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनका प्रसव अगले 7 से 10 दिनों में संभावित है, उन्हें पहले से सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था की जाए।

    नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश तथा अन्य निकायों को डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग, खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत तथा आवश्यक स्थानों पर नई स्ट्रीट लाइट लगाने के निर्देश भी दिए गए।

    जिलाधिकारी ने नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। नगर निगम ने जलभराव और नदी किनारे स्थित 29 संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया है, जहां लगभग 3,700 परिवार और 900 मकान प्रशासन की निगरानी में हैं।
    बैठक में वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

  • SIR में मतदाता सूची के परिवेक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे मंडलायुक्त

    SIR में मतदाता सूची के परिवेक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे मंडलायुक्त

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दानों मंडलायुक्तों के साथ बैठक कर SIR पर की समीक्षा

    दावे-आपत्तियों के निस्तारण में मतदाता को न हो परेशानी, निस्तारण के लिए न्याय पंचायत और वार्ड स्तर पर लगाए जाएं कैंम्प – सीईओ

    14 जुलाई से SIR के अलगे चरण के लिए DEO/ERO बनाएंगे विस्तृत कार्ययोजना – सीईओ

    “अन कलेक्टेबल” श्रेणी में दर्ज मतदाताओ की बीएलए के संग पुनः जांच करें बीएलओ- सीईओ

    देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने बुधवार को कुमांऊ एवं गढ़वाल के मंडल आयुक्तों (रोल ऑब्जर्वर) के साथ वीडियो कांन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की। बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि दोनों मंडल में मंडलायुक्त जनपदों की फील्ड विजिट कर ऐसे पोलिंग बूथ का भ्रमण करें जहां “अन कलेक्टेबल” श्रेणी में मार्क मतदाताओं की संख्या अधिक है। उन्होंने निर्देश दिए मंडलायुक्त, डीईओ/ईआरओ द्वारा जांच की गई एसएसडी सूची की भी समीक्षा करें। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि बूथ लेवल अधिकारी ऐब्सेंट,शिफ्टेड और डेथ (ASD) सूची में शामिल मतदाताओं के गणना फार्म पर यथोचित टिप्पणी अवश्य अंकित करें। ऐसी प्रत्येक टिप्पणी पर बीएलओ सहित बूथ अवेयरनेस ग्रुप के सदस्यों के हस्ताक्षर प्राप्त करें

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि आगामी 14 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियों के निस्तारण के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 70 ईआरओ के साथ ही 800 एईआरओ की भी तैनाती की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जनपद इस बात का विशेष ध्यान रखें कि नोटिस फेज में किसी भी मतदाता को अनावश्यक परेशानी ना हो। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने निर्देश दिए कि पहाड़ी क्षेत्रों में दावे आपत्तियों के निस्तारण के लिए न्याय पंचायत स्तर पर कैंम्प लगाने हेतु रोस्टर तैयार किया जाए। मैदानी क्षेत्र के मतदाताओं की सुविधा के लिए तहसील के अतरिक्त नगर निगम,नगर पंचायत और वार्ड लेवल पर कैंप का रोस्टर तैयार किया जाए। बैठक में कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरुप, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी,सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास उपस्थित रहे।

  • ट्रांसफर सत्र समाप्त, फिर भी 3 दिन का अतिरिक्त मौका!

    ट्रांसफर सत्र समाप्त, फिर भी 3 दिन का अतिरिक्त मौका!

    देखें आदेश, आयुर्वेद निदेशालय के आदेश पर उठे सवाल

    30 जून अंतिम तिथि के बाद 3 जुलाई तक मांगे स्थानांतरण प्रस्ताव

    शासन के नियमों से अलग आदेश चर्चा में

    देहरादून। उत्तराखंड शासन द्वारा वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 के लिए 30 जून 2026 अंतिम तिथि निर्धारित किए जाने के बावजूद आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय ने स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है। निदेशक विजय कुमार जोगदंडे के हस्ताक्षर से 30 जून को जारी कार्यालय आदेश अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

    कार्यालय आदेश में कहा गया है कि वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 के तहत स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करने के लिए समिति का गठन किया गया था, लेकिन निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद भी समिति ने प्रस्ताव उपलब्ध नहीं कराए। ऐसे में समिति को निर्देशित किया गया है कि वह आगामी तीन दिनों के भीतर स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर निदेशक के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे, ताकि आगे की कार्रवाई में विलंब न हो।

    यहीं से सवाल खड़े होने लगे हैं। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 30 जून 2026 वार्षिक स्थानांतरण की अंतिम तिथि है और इसके बाद स्थानांतरण सत्र समाप्त माना जाएगा। ऐसे में 30 जून को ही जारी आदेश में 3 जुलाई तक प्रस्ताव मांगे जाने का औचित्य क्या है? प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी नहीं हुई, तो बाद की कार्रवाई नियमों के अनुरूप होने पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

    सूत्रों के अनुसार, आयुष विभाग में स्थानांतरण सूची को लेकर लंबे समय तक सहमति नहीं बन सकी। यह भी चर्चा है कि एक वरिष्ठ अधिकारी के संभावित तबादले की अटकलों के चलते समिति अंतिम सूची पर निर्णय नहीं ले सकी। कुछ सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि डिस्पैच रजिस्टर को वरिष्ठ स्तर पर अपने नियंत्रण में रखा गया, जिससे आदेशों के निर्गमन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    गौरतलब है कि वर्तमान में आईएएस विजय कुमार जोगदंडे के पास अपर सचिव आयुष और निदेशक आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं की दोहरी जिम्मेदारी है। इसके अलावा वे मुख्य सचिव के स्टाफ ऑफिसर तथा अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी का दायित्व भी संभाल रहे हैं। अब देखना होगा कि शासन इस आदेश को किस दृष्टि से देखता है और स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

  • दून के पर्यटन विकास अधिकारी निलंबित, प्रशासन का सख्त कदम

    दून के पर्यटन विकास अधिकारी निलंबित, प्रशासन का सख्त कदम

    होम-स्टे योजना में भ्रष्टाचार

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई

    अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपी जांच

    देहरादून। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना के तहत अनुदान राशि जारी करने के एवज में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
    प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए परिषद ने उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और विभिन्न सूचनाओं में होम-स्टे योजना के तहत अनुदान वितरण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

    मामले की जांच के लिए परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें नियमानुसार जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    निलंबन अवधि के दौरान बृजेन्द्र पाण्डेय का मुख्यालय उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, देहरादून रहेगा। इस अवधि में उन्हें वित्तीय नियमों के तहत देय जीवन-निर्वाह भत्ता एवं अन्य अनुमन्य भत्ते दिए जाएंगे। साथ ही, उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि निलंबन अवधि के दौरान वे किसी अन्य सरकारी या निजी सेवा, व्यापार अथवा व्यवसाय से जुड़े नहीं हैं।

  • शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फेरबदल, वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले

    शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फेरबदल, वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले

    देखें तबादला आदेश

    विनोद प्रसाद सिमल्टी बने प्रभारी माध्यमिक शिक्षा निदेशक

    विनोद  बने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के सचिव

    कई अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभार

    देहरादून। उत्तराखंड शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पांच वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण और नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-2 की ओर से जारी आदेश के अनुसार स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत गठित स्थानांतरण समिति की संस्तुति के आधार पर अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
    कई अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
    जारी आदेश के अनुसार उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर में अपर शिक्षा निदेशक के पद पर कार्यरत विनोद प्रसाद सिमल्टी को अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक शिक्षा), निदेशालय देहरादून के पद पर तैनात करते हुए प्रभारी निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) का दायित्व भी सौंपा गया है।
    अपर शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत को उनके वर्तमान पद के साथ प्रभारी निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) तथा अपर राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, उत्तराखंड का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
    संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून विनोद कुमार को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर (नैनीताल) का सचिव नियुक्त किया गया है।
    मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल गोविंद राममनोहरी जायसवाल को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), देहरादून के पद पर स्थानांतरित करते हुए प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।

    इसी प्रकार जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), पौड़ी रणजीत सिंह नेगी को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), नैनीताल बनाया गया है। उन्हें प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल के साथ मंडलीय लोक सेवा अधिकरण की खंडपीठ नैनीताल एवं उच्च न्यायालय में विभागीय वादों की पैरवी के लिए नोडल अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।
    शासन ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से अपने नवीन पदों का कार्यभार ग्रहण कर इसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराएं।

    देखें आदेश

  • सूचना विभाग में रामपाल सिंह रावत को मिली सहायक निदेशक की जिम्मेदारी

    सूचना विभाग में रामपाल सिंह रावत को मिली सहायक निदेशक की जिम्मेदारी

    शासन ने जारी किया पदोन्नति आदेश

    व्यवस्थाधिकारी से सहायक निदेशक पद पर प्रमोशन, दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रहेगी नियुक्ति

    देहरादून। उत्तराखंड शासन ने सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में कार्यरत व्यवस्थाधिकारी रामपाल सिंह रावत को पदोन्नत कर सहायक निदेशक नियुक्त किया है।
    इस संबंध में मंगलवार को शासन की ओर से प्रोन्नति आदेश जारी कर दिया गया।

    जारी आदेश के अनुसार, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में वेतन लेवल-7 (₹44,900–1,42,400) पर कार्यरत रामपाल सिंह रावत को नियमित चयनोपरांत कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सहायक निदेशक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई है। उन्हें वेतन लेवल-10 (₹56,100–1,77,500) का लाभ मिलेगा।

    शासन ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के साथ उन्हें दो वर्ष की निर्धारित परिवीक्षा अवधि पर रखा जाएगा। इस संबंध में राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद आदेश जारी किया गया है।

    शासन के सचिव शैलेश बगौली की ओर से जारी आदेश की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।

  • सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का सम्मानपूर्वक विदाई समारोह

    सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का सम्मानपूर्वक विदाई समारोह

    सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारी पुलिस परिवार का अभिन्न अंग-डोभाल

    देहरादून। पुलिस अधीक्षक विकासनगर पंकज गैरोला व अन्य अधिकारी/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति पर पुलिस लाइन में विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
    विदाई समारोह के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा पुलिस अधीक्षक पंकज गैरोला के कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए सेवाकाल के दौरान उनकी कर्तव्यनिष्ठा व आमजन की समस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता की सराहना की।

     

    साथ ही पुलिसकर्मियों के प्रति उनके सहयोगात्मक व्यवहार की प्रशंसा करते हुए अधीनस्थांे के साथ टीम भावना से उनकी कार्य करने की क्षमता को सराहा।
    इस दौरान एसएसपी परमेन्द्र डोभाल द्वारा सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति के पश्चात अच्छे स्वास्थय व दीर्द्यायु कि कामना करते हुए उन्हें विश्वास दिलाया कि वे हमेशा पुलिस परिवार का अभिन्न अंग रहेंगे तथा भविष्य में भी उनकी हर सम्भव सहायता के लिये पुलिस परिवार सदैव उनके साथ खडा रहेेगा।

    समारोह के दौरान सेवानिवृत्त होने वाले अधिकरियांे/कर्मचारियों द्वारा अपने सेवाकाल में ड्यूटी के दौरान सामने आने वाली समस्याओं एवं चुनौतियों तथा उनके निराकरण हेतु किये गये प्रयासों से सम्बन्धित अपनेे अनुभवों को साझा किया गया।

    विदाई समारोह के दौरान सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों को शाल, स्मृति चिन्ह तथा उपहार देकर भावभीनी विदाई दी गयी । और अपेक्षा की कि भविष्य में भी पुलिस को उनके अनुभवों का लाभ व मार्ग दर्शन मिलता रहेगा।

    तीस जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों का विवरण –

    1- पंकज गैराला, अपर पुलिस अधीक्षक
    2- राजेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक ना0पु0
    3- विजेन्द्र कुमार, अ0उ0नि0 ना0पु0
    4- गिरीश चन्द्र लोहनी, लीडिंग फायरमैन
    5- भगवान सिंह नेगी, हे0कां0 ना0पु0

    विदाई समारोह के दौरान पुलिस अधीक्षक अपराध, पुलिस अधीक्षक नगर, पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश, जनपद के समस्त क्षेत्राधिकारी, अन्य अधिकारी/कर्मचारीगण तथा सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के परिजन मौजूद रहे।

  • सीएम धामी के पांच वर्ष पूर्ण होने पर जनकल्याणकारी शिविरों का आयोजन

    सीएम धामी के पांच वर्ष पूर्ण होने पर जनकल्याणकारी शिविरों का आयोजन

    4 जुलाई को ऋषिकेश आईडीपीएल मैदान में लगेगा वृहद बहुउद्देशीय शिविर

    ऋषिकेश से होगा ‘सेवा सप्ताह’ का शंखनाद

    देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार के पांच वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने के अवसर पर प्रदेशभर में सात दिवसीय विशेष वृहद जन कल्याणकारी शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।

    जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वारश् के संकल्प के साथ शुरू हो रहे इस अभियान के तहत आगामी 4 जुलाई को ऋषिकेश के आईडीपीएल मैदान में एक विशाल बहुउद्देशीय और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। इस मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं शिरकत करेंगे।

    ऋषिकेश में आयोजित होने वाले इस महाशिविर की तैयारियों का जायजा लेने मंगलवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल जिले के आला अधिकारियों के साथ आईडीपीएल मैदान पहुंचे। स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि ऋषिकेश भौगोलिक रूप से एक ‘स्ट्रैटेजिक लोकेशन’ (सामरिक स्थान) है। इसे देखते हुए इस शिविर में देहरादून के साथ-साथ पड़ोसी जनपद टिहरी और हरिद्वार से भी बड़ी संख्या में आम जनता और लाभार्थियों के पहुंचने की उम्मीद है। जनता की सुविधा के लिए तीनों जिलों के विभागीय अधिकारी एक साथ मौजूद रहेंगे और एक ‘इंटीग्रेटेड एफर्ट’ (एकीकृत प्रयास) के तहत मौके पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे।

    जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ‘त्वरित लाभ और त्वरित समाधान’ होना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान एक विशाल चिकित्सा शिविर लगाया जाएगा, जहां क्रोनिक (गंभीर व पुरानी) बीमारियों की जांच से लेकर सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के कार्ड मौके पर ही बनाए जाएंगे।
    बहुउद्देशीय शिविर में विभिन्न विभागों की स्टॉल लगेंगी, जिससे आम जनता को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। महाशिविर में उमड़ने वाली भारी भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी ने सुरक्षा, ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं ताकि आने वाले लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

    प्रदेश में ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ अभियान के तहत आगामी 4 जुलाई से शुरू होने वाले ‘सेवा सप्ताह’ के भव्य आयोजन के लिए उत्तराखंड सूचना विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। तैयारियों को समय से अंतिम रूप देने के लिए सूचना विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल मैदान का स्थलीय निरीक्षण किया।
    उन्होंने मुख्य मंच निर्माण, आम जनता के सुगम आवागमन, पार्किंग और बैठक व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। महानिदेशक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम में आने वाले आम जनमानस को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी पुख्ता इंतजाम समय रहते दुरुस्त कर लिए जाएं।

    निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंन्द्र डोबाल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह सहित रेखीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।