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  • छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

    छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

    उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत व सुशासन मॉडल से परिचय कराया

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की।

    मुख्यमंत्री ने सभी पत्रकारों का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौन्दर्य और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि तीव्र गति से विकास के नए आयाम स्थापित करने वाला राज्य भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के पत्रकारों का उत्तराखण्ड भ्रमण राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं विकास यात्रा को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परम्पराओं, लोक संस्कृति तथा हिमालयी सभ्यता के कारण देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां स्थित चारधाम, पंचकेदार, पंचबदरी, पंचप्रयाग, हेमकुंड साहिब, पूर्णागिरि, जागेश्वर, आदि कैलाश एवं ओम पर्वत जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाकर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन तथा होमस्टे आधारित पर्यटन को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना विकसित किए जाने के कारण उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र के इस आध्यात्मिक स्थल को वैश्विक पहचान मिली है। इसके परिणामस्वरूप आदि कैलाश सहित सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखण्ड में 25 करोड़ से अधिक पर्यटक एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं, जो राज्य की बढ़ती लोकप्रियता तथा पर्यटन क्षेत्र में विकसित हुई आधुनिक सुविधाओं का प्रमाण है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन (Round the Year Tourism) के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। विशेष रूप से शीतकालीन यात्रा (Winter Yatra) को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे चारधाम एवं अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शीतकालीन गद्दी स्थलों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा केदार एवं भगवान बदरीविशाल की नगरी को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बनाने के उद्देश्य से केदारनाथ एवं बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत व्यापक पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष मार्गदर्शन में इन दोनों धामों में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा अनुभव में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई संपर्क के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तराखण्ड तक पहुंच और अधिक सुगम होगी तथा पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। साथ ही रेल सेवाओं एवं हवाई सेवाओं का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध हो रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास पर राज्य सरकार विशेष ध्यान दे रही है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, पेयजल एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन विकास के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आज सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश, उद्योग, स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास, कृषि, बागवानी तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार विकास और विरासत के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ हैं। उनके माध्यम से समाज तक सही और सकारात्मक जानकारी पहुंचती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ से आए पत्रकार उत्तराखण्ड की विकास यात्रा, पर्यटन संभावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी पहलों को निकट से जानने के बाद अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करेंगे, जिससे देवभूमि उत्तराखण्ड की सकारात्मक छवि देशभर में और अधिक सुदृढ़ होगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों के माध्यम से समस्त छत्तीसगढ़वासियों को आगामी कुंभ में देवभूमि उत्तराखण्ड आने का सादर आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का विराट पर्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में देवभूमि पहुंचकर इस दिव्य एवं भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे तथा उत्तराखण्ड के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव का अनुभव करेंगे।

    पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत एवं समय प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने उत्तराखण्ड में हो रहे विकास कार्यों, बेहतर आधारभूत संरचना, पर्यटन क्षेत्र में हुए परिवर्तन तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहलों की सराहना की।

    इस अवसर पर सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक के. एस. चौहान, छत्तीसगढ़ सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक धनंजय राठौर तथा छत्तीसगढ़ से आए 20 से अधिक पत्रकार उपस्थित रहे।

  • वरिष्ठ पत्रकार खुशहाल गिरी गोस्वामी का निधन, पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

    वरिष्ठ पत्रकार खुशहाल गिरी गोस्वामी का निधन, पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

    पत्रकार साथियों ने दी श्रद्धांजलि

    देहरादून। लम्बी बीमारी के बाद वरिष्ठ पत्रकार खुशहाल गिरी गोस्वामी का जॉलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया। खुशहाल लम्बे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनका अंतिम संस्कार 5 जुलाई को हरिद्वार में किया जाएगा। वे अपने पीछे पत्नी व दो पुत्रों को छोड़ गए।
    खुशहाल गिरी गोस्वामी ने 2008 में फरीदाबाद से आकर देहरादून से शुरू हो रहे ‘हिंदुस्तान’ अखबार में जॉइन किया था। बीते 18 साल से वे हिंदुस्तान में कार्य कर रहे थे। उन्होंने कई मुद्दों पर बेबाक रिपोर्टिंग की। जिन पर सरकार को कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ा।

    उनके निधन की खबर से उत्तराखंड के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वे लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे और अपनी सहज कार्यशैली, निष्पक्ष रिपोर्टिंग तथा सौम्य व्यवहार के लिए जाने जाते थे।

    खुशहाल गोस्वामी ने अपने पत्रकारिता जीवन में सामाजिक सरोकारों, जनहित के मुद्दों और स्थानीय समाचारों को प्रमुखता से उठाया। अपने सहयोगी स्वभाव और पेशेवर प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने पत्रकारिता जगत में विशेष पहचान बनाई। उनके निधन से मीडिया जगत ने एक अनुभवी और संवेदनशील पत्रकार खो दिया है।

    उनके निधन की सूचना मिलते ही विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने गहरा शोक व्यक्त किया। अनेक पत्रकार साथियों ने उन्हें सोशल मीडिया में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि खुशहाल गोस्वामी का सरल व्यक्तित्व, विनम्र व्यवहार और पत्रकारिता के प्रति समर्पण हमेशा याद किया जाएगा। पत्रकारों ने खुशहाल के साथ बिताए दिनों को भी याद किया।
    विभिन्न पत्रकार संगठनों ने भी उनके निधन को पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

  • यूजीसी नेट: 4 वर्षीय डिग्री धारकों के साथ भेदभाव पर उठे सवाल

    यूजीसी नेट: 4 वर्षीय डिग्री धारकों के साथ भेदभाव पर उठे सवाल

    डॉ. सुशील उपाध्याय

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह प्रावधान है कि चार वर्षीय स्नातक उपाधि प्राप्त करने वाले मेधावी युवा, जिन्होंने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हों, वे सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकते हैं। किंतु यूजीसी की नेट परीक्षा में चार वर्षीय स्नातक उपाधि धारकों को ‘नेट फॉर लेक्चररशिप’ के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि इन्हें पीएचडी हेतु जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) तथा ‘नेट फॉर पीएचडी’ के लिए पात्र माना गया है।
    यूजीसी की ओर से एनटीए द्वारा आयोजित की गई नेट परीक्षा इस दृष्टि से विशिष्ट रही कि इसमें चार वर्षीय स्नातक उपाधि प्राप्त युवाओं को भी स्नातकोत्तर उपाधि धारकों के समान इसमें सम्मिलित होने का अवसर दिया गया। किंतु यह अवसर कई विसंगतियों से भरा हुआ दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई युवा स्नातकोत्तर उपाधि की ‘अपीयरिंग’ श्रेणी में नेट के लिए आवेदन करता है, तो उसे नेट उत्तीर्ण करने की तिथि से अपनी स्नातकोत्तर उपाधि पूर्ण करने के लिए दो वर्ष का समय दिया जाता है। लेकिन यह सुविधा उन युवाओं को नहीं दी गई है, जो चार वर्षीय बीटेक, बीएस, बीए विद रिसर्च आदि के आधार पर इस परीक्षा में सम्मिलित हुए।

    गौरतलब है कि यूजीसी द्वारा नेट के अंकों के आधार पर सफल अभ्यर्थियों की तीन श्रेणियों में घोषणा की जाती है। पहली श्रेणी ‘नेट-जेआरएफ’ की होती है, जिसके अंतर्गत अभ्यर्थी को पीएचडी करने हेतु फेलोशिप मिलती है तथा सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता भी प्राप्त होती है। दूसरी श्रेणी केवल ‘नेट’ की होती है, जिसके आधार पर सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता मिलती है। तीसरी श्रेणी ‘नेट फॉर पीएचडी’ की होती है, जो केवल पीएचडी प्रवेश के लिए मान्य है।

    यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि जो युवा चार वर्षीय स्नातक उपाधि के आधार पर इस परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं, उन्हें जेआरएफ तथा ‘नेट फॉर पीएचडी’ के लिए तो पात्र माना गया, किंतु सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता से बाहर रखा गया। वर्तमान व्यवस्था में यदि कोई युवा स्नातकोत्तर उपाधि के आधार पर नेट उत्तीर्ण करता है, तो सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के बाद उस पर यह बंधन नहीं होता कि वह केवल स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को ही पढ़ाएगा और स्नातकोत्तर स्तर को नहीं। अर्थात नेट उत्तीर्ण करने के बाद वह समान अथवा उच्चतर स्तर पर अध्यापन की पात्रता प्राप्त कर लेता है। किंतु यही अवसर चार वर्षीय स्नातक उपाधि धारकों को नहीं दिया गया।

    इतना ही नहीं, उन्हें अपनी स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने अथवा पूर्ण करने के लिए वह दो वर्षीय समय-सीमा भी नहीं दी गई है, जो स्नातकोत्तर उपाधि धारक अभ्यर्थियों को प्रदान की जाती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि चार वर्षीय स्नातक उपाधि के बाद केवल एक वर्ष में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की जा सकती है। यदि इन युवाओं को भी दो वर्ष का समय दिया जाए, तो वे भी इस अवधि में अपनी पीजी डिग्री पूर्ण कर सकते हैं।
    एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि स्नातकोत्तर उपाधि धारकों के लिए सामान्य श्रेणी में 55 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ नेट परीक्षा में सम्मिलित होने की पात्रता निर्धारित की गई है, जबकि चार वर्षीय स्नातक उपाधि धारकों के लिए सामान्य वर्ग में 75 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग में 70 प्रतिशत अंकों की न्यूनतम अर्हता तय की गई है। इतनी ऊंची अर्हता के बावजूद, यदि वे नेट उत्तीर्ण कर भी लें, तो उनका नेट तभी उपयोगी होगा जब वे जेआरएफ स्तर की सफलता प्राप्त करें। यह पूरी प्रक्रिया समान अवसर के सिद्धांत से मेल नहीं खाती। ध्यान रहे कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मेधावी विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधि के बिना ही पीएचडी में प्रवेश देने का प्रावधान किया गया है, जबकि यूजीसी नेट इसके विपरीत दिशा में जाता दिखता है।

    इस परीक्षा का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष विषयों के निर्धारण से जुड़ा हुआ है। उदाहरण के लिए, एक ही विषय के अंतर्गत ‘बौद्ध, जैन, गांधी एवं शांति अध्ययन’ को सम्मिलित कर दिया गया है, जबकि इन चारों के बीच प्रत्यक्ष अकादमिक संबंध स्थापित करना कठिन है। उल्लेखनीय है कि पाली और प्राकृत भाषाओं को अलग विषय के रूप में रखा गया है। बेहतर यह होता कि ‘पाली एवं बौद्ध अध्ययन’ तथा ‘प्राकृत एवं जैन अध्ययन’ को विषय के रूप में निर्धारित किया जाता, क्योंकि अधिकतर विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर इन्हीं रूपों में ये विषय संचालित होते हैं। वहीं ‘गांधी एवं शांति अध्ययन’ को एक पृथक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है, जिसका बौद्ध अथवा जैन अध्ययन से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
    इसी प्रकार ‘इस्लामी अध्ययन एवं अरब संस्कृति’ को एक विषय बनाया गया है, जबकि ‘हिंदू अध्ययन’ और ‘भारतीय संस्कृति’ को दो अलग-अलग विषयों के रूप में निर्धारित किया गया है। बेहतर यह होता कि ‘हिंदू अध्ययन एवं भारतीय संस्कृति’ को एकीकृत विषय के रूप में रखा जाता, ताकि दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्राप्त हो सके।

    प्रबंधन, अर्थशास्त्र एवं श्रमिक कल्याण ऐसे विषय हैं, जिनके अंतर्गत उनसे संबंधित अनेक उपविषयों को सम्मिलित किया गया है, किंतु एजुकेशन और पॉलिटिकल साइंस के मामले में ऐसा नहीं किया गया। पॉलिटिकल साइंस को एक अलग विषय के रूप में रखा गया है, जबकि इसके अंतर्गत आने वाले अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अफ्रीका अध्ययन, सोवियत अध्ययन, चीनी अध्ययन आदि को अलग-अलग विषयों के रूप में स्थान दिया गया है। यही स्थिति एजुकेशन विषय की भी है, जहां एजुकेशन को अलग विषय बनाया गया है, वहीं एडल्ट एजुकेशन के अंतर्गत अनेक अन्य क्षेत्रों को समाहित कर दिया गया है।

    विषयों के निर्धारण का आधार क्या है, यह स्वयं में बहस का विषय है। उदाहरण के लिए, स्त्री अध्ययन के अंतर्गत सामाजिक विज्ञान, मानविकी और भाषा विषयों के स्नातकोत्तर उपाधि धारकों को पात्र माना गया है, जबकि भाषाओं का इस विषय से प्रत्यक्ष संबंध स्पष्ट नहीं है।

    विषय निर्धारण के संदर्भ में अच्छा यह होता कि यूजीसी देशभर में संचालित चार वर्षीय स्नातक तथा एक/दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का विस्तृत ब्यौरा एकत्र कर उन्हें व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत करती। इससे भविष्य में अभ्यर्थियों को नियुक्ति के समय यह समस्या नहीं आती कि उनका स्नातकोत्तर विषय भिन्न है, जबकि यूजीसी नेट का विषय किसी व्यापक क्षेत्र को समाहित करता है।

    इन परिस्थितियों में आवश्यकता इस बात की है कि यूजीसी द्वारा नेट की संरचना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के अनुरूप पुनर्गठित किया जाए। चार वर्षीय स्नातक उपाधि धारकों को भी स्नातकोत्तर उपाधि पूर्ण करने के लिए दो वर्ष की समय-सीमा प्रदान की जानी चाहिए। साथ ही, उन्हें सशर्त रूप से ‘नेट फॉर लेक्चररशिप’ की पात्रता भी दी जा सकती है, ताकि वे स्नातकोत्तर उपाधि पूर्ण करने के बाद समान अवसर का लाभ प्राप्त कर सकें। यदि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से वास्तव में मेधा-आधारित और लचीली उच्च शिक्षा व्यवस्था स्थापित करना चाहती है, तो यूजीसी-नेट जैसी केंद्रीय परीक्षाओं की संरचना को भी उसी अनुरूप पुनर्गठित करना होगा। अन्यथा नीति तथा उसके क्रियान्वयन के बीच का अंतर मेधावी युवाओं में असंतोष और असमंजस दोनों उत्पन्न करेगा।

  • पाँच साल की जनसेवा, विकास की नई इबारत: सीएम धामी ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

    पाँच साल की जनसेवा, विकास की नई इबारत: सीएम धामी ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

    ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का दूसरा चरण शुरू

    अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगी योजनाएं

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यसेवक के रूप में जनसेवा के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बीते पाँच वर्षों में सुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता देते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।

    उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून तथा मदरसा बोर्ड के स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को सरकार की प्रमुख उपलब्धियां बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं, जबकि महिला आरक्षण, निवेश, पर्यटन, चारधाम अवसंरचना, स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की है, जिसके तहत जनसमस्याओं का मौके पर समाधान और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए जनता से निरंतर सहयोग की अपील की।
    गौरतलब है कि पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2021 में बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

    पढ़ें, मुख्यमंत्री का संदेश

    प्रिय प्रदेशवासियों,

    आप सभी के स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद से मुख्यसेवक के रूप में जनसेवा के पाँच वर्ष पूर्ण हुए हैं। सेवा, सुशासन और जनकल्याण की यह यात्रा 1.25 करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, आकांक्षाओं और सहयोग को समर्पित है।

    आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार के संकल्प के साथ इन पाँच वर्षों में हमने विकास और सांस्कृतिक अस्मिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए। समान नागरिक संहिता (UCC), सशक्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून तथा देश में नई मिसाल कायम करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इन कदमों ने उत्तराखंड को सुशासन, समानता और पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया। युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, मातृशक्ति को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, निवेश, रोजगार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा चारधाम सहित धार्मिक एवं पर्यटन अवसंरचना के व्यापक विकास को नई गति मिली।

    पूर्ण पारदर्शिता के साथ 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर प्रदान किए गए। सैनिकों, किसानों, युवाओं और मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए अनेक जनहितकारी निर्णय लिए गए। सौर ऊर्जा, होमस्टे और स्वरोजगार को नई ऊर्जा मिली तथा रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन से पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली, राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन, ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश की ग्राउंडिंग तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में उत्तराखंड के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने विकास के नए आयाम स्थापित किए है।

    इसी जनसेवा के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज से “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के दूसरे चरण का शुभारंभ भी किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के बीच पहुँचकर जनसमस्याओं के समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाने तथा सेवा और सुशासन की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य करेगी।

    विकसित उत्तराखंड – विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर आपके विश्वास, सहयोग और सहभागिता के साथ हम जनसेवा, सुशासन और समृद्धि की इस यात्रा को और अधिक गति और नई ऊँचाइयाँ प्रदान करने के लिए निरंतर संकल्पबद्ध हैं।

    आपका विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति है।

    जय हिंद!
    जय उत्तराखंड!

  • श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावा प्रकरण की जांच शुरू, आदेश जारी

    श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावा प्रकरण की जांच शुरू, आदेश जारी

    बीकेटीसी ने सोशल मीडिया का संज्ञान लिया

    दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई – हेमंत

    तथ्यों की पुष्टि से पहले भ्रामक आरोपों से बचें : मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़

    श्री बदरीनाथ धाम/ देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि सोशल मीडिया में श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे एवं दान में कथित हेराफेरी के संबंध में जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें मंदिर समिति ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।

    इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच के लिए जांच समिति गठित करने के आदेश दे दिए गए हैं। तथा स्पष्टीकरण तलब किया गया है।जांच पूर्ण होने के उपरांत यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सोशियल मीडिया में जिस कर्मचारी को उनका “निजी सचिव” बताया जा रहा है, वह उनका कोई निजी सचिव नहीं है। संबंधित कर्मचारी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है तथा वैयक्तिक सहायक के रूप में पूर्व में भी मंदिर समिति के तीन अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। इसलिए सोशल मीडिया में उसके संबंध में प्रसारित किये जा रहे आरोप सही पाये जाते है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी

    इधर, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर से संबंधित जो प्रकरण गत 2 जुलाई शाम से सोशियल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें प्राप्त कथित शिकायत के आधार पर बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की आज जांच करायी गयी है। उपलब्ध फुटेज में अपेक्षित स्पष्टता नहीं है, फिर भी विषय की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मामले से बीकेटीसी अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है।

    मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि अध्यक्ष के निर्देशों के अनुपालन में संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति गठित किए जाने संबंधी आख्या अध्यक्ष को प्रेषित की जा रही है।
    समिति गठित होने के बाद वह सभी तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

    उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई प्रतिकूल तथ्य या अनियमितता संज्ञान में आती है तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप दोषियों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।

    मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि यह प्रकरण उत्तराखंड के विश्वविख्यात एवं करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री बदरीनाथ धाम से जुड़ा हुआ है। इसलिए जब तक किसी भी आरोप की विधिवत जांच के माध्यम से पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार के अपुष्ट अथवा भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। सभी से अपेक्षा है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संयम बरतें, ताकि पवित्र धाम की गरिमा एवं छवि पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

  • 71 लाख मतदाताओं के आवेदन पत्रों का डिजिटलीकरण पूरा

    71 लाख मतदाताओं के आवेदन पत्रों का डिजिटलीकरण पूरा

    SIR को लेकर की राजनैतिक दलों के साथ बैठक

    8 लाख से अधिक ”अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल

    1 लाख 23 हजार 836 मृत, 4 लाख 77 हजार 148 स्थाई रुप से शिफ्ट

    राजनैतिक दलों ने नियुक्त किए 23 हजार से अधिक BLA नियुक्त

    देहरादून। उत्तराखण्ड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के सम्बंध में शुक्रवार को अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ0 विजय कुमार जोगदंडे ने सचिवालय में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों से अनकलेक्टेड श्रेणी के मतदाताओं के घर-घर सत्यापन अभियान में सहयोग करने की अपील की।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। 8 जून से 7 जुलाई तक प्रदेश में गणना पत्रों के वितरण और डिजिटाइज का कार्य पूर्ण होना है। उन्होंने राजनैतिक दलों को अवगत कराया कि प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाताओं के सापेक्ष 70 लाख 98 हजार 501 मतदाताओं के फार्म डिजिटाइज कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 लाख 39 हजार 486 मतदाता ”अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल हैं। जिसके अन्तर्गत 1 लाख 23 हजार 836 मृत, 4 लाख 77 हजार 148 स्थाई रुप से शिफ्ट, 61764 पहले से पंजीकृत,1 लाख 68 हजार 259 अनुपस्थित और 8479 मतदाता अन्य कारणों से ”अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल हैं। इस प्रकार कुल 79 लाख 45 हजार 658 मतदताओं को डिजिटाइज कर दिया गया है।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन किया जाएगा इसके साथ ही 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 के बीच दावे एवं आपत्तियों को दर्ज करने का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक नोटिस की अवधि एवं दावे आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एसआईआर में राजनैतिक दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों से शत प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स नियुक्त करने की अपील की। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखण्ड में 11733 पोलिंग बूथ के सापेक्ष वर्तमान में प्रदेश में राजनैतिक दलों द्वारा 23 हजार 102 बीएलए की तैनाती कर दी गई है।

    बैठक में उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित सहित भाजपा से राजकुमार पुरोहित, कांग्रेस पार्टी से अमरेंद्र बिष्ट, आम आदमी पार्टी से श्याम बाबू पांडेय, बीएसपी से सत्यपाल, सीपीआई(एम) से अनंत आकाश उपस्थित रहे।

  • विकास योजनाओं को गति देने पर उत्तराखण्ड सरकार व यूएनडीपी ने किया मंथन

    विकास योजनाओं को गति देने पर उत्तराखण्ड सरकार व यूएनडीपी ने किया मंथन

    देहरादून। मुख्स सचिव आनन्द बर्द्धन से शुक्रवार को सचिवालय में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव सुश्री ईजाबेल (Ms. Isabelle Tschan) ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों पर चर्चा हुयी।

    मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड में सुश्री ईजाबेल एवं उनकी टीम का स्वागत किया। कुछ विशेष क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्किल एवं रोजगार, कार्बन क्रेडिट, डिजीटाईजेशन एवं ऑनलाईन सिस्टम का विकास एवं बच्चे के जन्म से ट्रेकिंग सिस्टम लागू करने के लिए यूएनडीपी द्वारा उनकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की साक्षरता दर बहुत अच्छी है, यहां युवाओं को कौशल विकास पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यूएनडीपी से प्रदेश में कौशल विकास के साथ आजीविका के क्षेत्र में कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तरखण्ड में कौशल विकास एवं रोजगार पर विशेष फोकस किए जाने की आवश्यकता है।

    मुख्य सचिव ने यूएनडीपी से कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में भी सहयोग किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड एक हिमालयी राज्य है, जिसमें 70 प्रतिशत फॉरेस्ट लैण्ड है। यह पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में डिजिटल और ऑनलाइन सिस्टम को बढ़ाने एवं बच्चे के जन्म से ही ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों में यूएनडीपी से सहयोग की बात कही।

    यूएनडीपी से सुश्री ईजाबेल ने बताया कि यूएनडीपी प्रदेश में सार्वजनिक नीति और सुशासन (सीपीपीजीजी) के साथ ही सतत् विकास लक्ष्य को तेजी से बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। यूएनडीपी प्रदेश में सतत विकास लक्ष्य का स्थानीयकरण और एकीकरण, निगरानी और मूल्यांकन, सार्वजनिक नीति, उत्पादक अर्थव्यवस्था और उद्यमिता, आईटी और एमआईएस, संचार और क्षमता निर्माण के साथ ही सीएसआर और निजी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य एक व्यापक समझौता ज्ञापन हुआ है, जो जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम में कमी और लचीलापन, आजीविका, कौशल विकास (जिसमें सर्कुलर इकोनॉमी भी शामिल है), सिस्टम को मज़बूत करना एवं ज्ञान प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।

    इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र सिंह भण्डारी, यूएनडीपी से सत्यम चौहान एवं श्री प्रदीप मेहता भी उपस्थित थे।

  • नियुक्ति पत्र: जनसेवा के संकल्प और विश्वास का प्रतीक

    नियुक्ति पत्र: जनसेवा के संकल्प और विश्वास का प्रतीक

    मुख्यमंत्री ने पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के 182 तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के 5 अभ्यर्थियों सहित 187 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 में चयनित 182 अभ्यर्थियों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में वैयक्तिक सहायक के पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल सरकारी सेवा में प्रवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, अपेक्षाओं और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था तथा 71 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिनमें से केवल 182 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा, कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पद का अर्थ शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यालय में सम्मान, विश्वास और समयबद्ध समाधान का अनुभव होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की है। आज 187 और युवाओं के इस अभियान से जुड़ने के साथ राज्य सरकार की युवा हितैषी प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक युवा को उसकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को राज्य से बाहर जाने के लिए विवश न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी, दोनों को उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस संकल्प को साकार करने में नवचयनित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने का दायित्व अधिकारियों और कर्मचारियों का होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने वाले प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर संविधान, कानून और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, रामसिंह कैड़ा, विधायक श्रीमती सविता कपूर, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति कोटिया, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, रविनाथ रमन, चंद्रेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पांडेय, एस.एन. पाण्डेय, डीजी होमगार्ड डॉ. पी. वी. के प्रसाद, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए बढ़ाई गई समय-सीमा

    शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए बढ़ाई गई समय-सीमा

    स्थानांतरण एक्ट से छूट के लिये भी कार्मिक विभाग को भेजा जायेगा प्रस्ताव

    कहा, पदोन्नति प्रकरणों के समाधान को अध्यादेश होगा अंतिम विकल्प

    देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण के लिये अतिरिक्त समय मांगने के साथ ही स्थानांतरण एक्ट से छूट देने का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा जायेगा, ताकि प्रदेश के जिन विद्यालयों में पर्याप्त छात्र संख्या के बावजूद शिक्षकों के पद रिक्त हैं उनको भरा जा सके। इसके अलावा शिक्षकों के पदोन्नति प्रकरण के स्थाई समाधान को अंतिम विकल्प के रूप में अध्यादेश लाने पर भी विचार गया जा सकता है। इस संबंध में शासन स्तर पर न्याय, कार्मिक एवं वित्त विभाग के साथ सहमति बना ली गई है।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक ली, जिसमें मुख्य सचिव सहित, न्याय, कार्मिक व वित्त विभाग के उच्चाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण एवं पदोन्नति के लम्बित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण को विचार-विमर्श किया गया। डा. रावत ने बताया कि शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण एवं वरिष्ठता का प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के चलते विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार का निर्णय नहीं लिया जा सका है। उक्त के दृष्टिगत उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण को लेकर स्थानांतरण एक्ट में छूट के साथ ही समयवृद्धि की मांग का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजे जाने का निर्णय लिया गया है, ताकि विद्यालयों में लम्बे समय से रिक्त शिक्षकों के पदों को धारा-27 एवं अनुरोध श्रेणियों के आधार पर भरा जा सके। इसके लिये महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को शीघ्र दोनों प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है। डाॅ. रावत ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत शिक्षकों के वरिष्ठता प्रकरण भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके चलते विभाग पदोन्नति देने में असमर्थ है, जबकि शिक्षक संगठन लगातार पदोन्नति की मांग को लेकर मुखर है। जिसको देखते हुये शासन ने कोर्ट के निर्णय में समय लगने की सम्भावना के मध्यनजर अंतिम विकल्प के रूप में पदोन्नति हेतु अध्यादेश लाने का विकल्प खुला रखा है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को अध्यादेश का प्रस्ताव भी तैयार रखने को कहा गया है, ताकि उच्च न्यायालय में दायर वादों का समय पर निराकरण न होने के दृष्टिगत अध्यादेश लाकर वरष्ठिता का निर्धारण करते हुये शिक्षकों पदोन्नति दी जा सके।

    बैठक में शिक्षकों के त्रिस्तरीय ढांचे सहित एससीईआरटी व डायट के नये ढांचे के गठन एवं नियमावली बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये। इसके अतिरिक्त विभागीय मंत्री ने कहा कि सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों के शत-प्रतिशत प्रस्ताव तीन दिन के भीतर मंगा लिये जाय, ताकि धनराशि आवंटित की जा सके। उन्होंने प्रदेशभर के सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत शौचालय निर्माण सुनिश्चित करने के साथ-साथ पेयजल, विद्युत आपूर्ति एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये। इसके अतिरिक्त अशासकीय विद्यालयों के प्रांतीयकरण तथा शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को नियमानुसार जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।

    बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन, प्रमुख सचिव न्याय अमित कुमार, सचिव कार्मिक शैलेष बगोली, सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा नमामि बंसल, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, अपर सचिव वित्त गंगा प्रसाद, संयुक्त निदेशक संस्कृत शिक्षा मंजू भारती सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • पदक विजेता खिलाड़ियों को तय समय में सरकारी नौकरी मिलेगी: धामी

    पदक विजेता खिलाड़ियों को तय समय में सरकारी नौकरी मिलेगी: धामी

    राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के अनुरूप ही राज्य में लाई जाए नई खेल नीति

    मुख्यमंत्री ने खेल विश्वविद्यालय – गोलापार , हल्द्वानी में आगामी माह से सत्र को प्रारंभ करने के दिए निर्देश

    38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान विकसित किए गए बुनियादी ढांचे के रख-रखाव के लिए कार्य योजना हो तैयार

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा में समायोजित करने की प्रक्रिया को तय समय के अंदर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा आउट ऑफ टर्न नौकरी पाने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को खेल विभाग में ही नियुक्त मिले सके, इस पर भी कार्ययोजना बनाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा केंद्र सरकार द्वारा लाई गई राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के अनुरूप ही राज्य में नई खेल नीति लाई जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय-गोलापार, हल्द्वानी में आगामी माह से सत्र को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा गोलापार स्टेडियम में प्रवेश प्रक्रिया एवं कोच, कर्मचारी, अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा एक ब्लॉक एक मिनी स्टेडियम के तहत मिनी स्टेडियमों के निर्माण कार्य में भी तेजी लाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लेगेसी प्लान पर तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून, हल्द्वानी गोलापार स्टेडियम, रुद्रपुर वेलोड्रोम, टिहरी झील, हरिद्वार एवं पिथौरागढ़ स्थित स्टेडियमों में विकसित की गई सुविधाओं को खिलाड़ियों के लिए और उपयोगी बनाई जाएं। उन्होंने कहा 38वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान विकसित किए गए बुनियादी ढांचे के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए एवं इसके लिए कार्य योजना बनाई जाए।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगामी 39वें राष्ट्रीय खेल 2027 के लिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न विधाओं में विशेष प्रशिक्षण शिविर संचालन शुरू किया जाए। विभिन्न खेल संघों के साथ खिलाड़ियों की चयन/ चिन्हीकरण प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा राज्य सरकार का संकल्प आगामी राष्ट्रीय खेलों में और बेहतर प्रदर्शन कर देवभूमि को खेलभूमि के रूप में भी स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला एक स्पोर्ट्स के तहत सभी जनपदों में निर्धारित खेलों के लिए संबंधित जनपदों में कोचिंग, प्रतिभा पहचान एवं प्रतिस्पर्धा को भी विकसित किया जाए। प्रत्येक जिला खेल छात्रावास को उस जनपद के निर्धारित खेल हेतु ODOS खेल नर्सरी के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी तक गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं पहुंचाना तथा उन्हें अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों को साकार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं है। उन्होंने कहा विभागीय अधिकारी खिलाड़ियों की आवश्यकता अनुसार राज्य में खेल योजनाओं को आगे बढ़ाएं।

    बैठक में बताया गया कि अब तक कुल 29 मेडल धारक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में समायोजित किया जा चुका है। इसके साथ एक ब्लॉक एक मिनी स्टेडियम के तहत अब तक कुल 48 मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जा चुका है। वहीं 10 मिनी स्टेडियम का कार्य गतिमान है। अन्य मिनी स्टेडियमों पर भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई गतिमान है।

    बैठक में बताया गया कि भारत के प्रथम महिला आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट का कार्य तेजी से गतिमान है। इस कॉलेज के संचालन के लिए कुल 16 पद सृजित किए गए हैं। इसकी प्रवेश प्रक्रिया भी गतिमान है। साथ ही उत्तराखण्ड का प्रथम एवं भारत का दसवां राज्य खेल विश्वविद्यालय — गोलापार, हल्द्वानी में विश्वविद्यालय सभागार, केंद्रीय पुस्तकालय, स्वास्थ्य केंद्र, कैफेटेरिया, अनुसंधान केंद्र, शूटिंग रेंज, सेमिनार हॉल, बैडमिंटन हॉल, फुटबॉल मैदान, हॉकी मैदान, 8 लेन एथलीट ट्रैक, सहित कुल 39 अवसंरचना घटक का विकास किया जा रहा है।

    बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, निदेशक खेल दीप्ति सिंह, संयुक्त निदेशक शक्ति सिंह, उप निदेशक नीरज गुप्ता, सहायक निदेशक राजेश ममंगाई एवं अन्य लोग मौजूद रहे।