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  • रेल कनेक्टिविटी विस्तार पर सीएम ने की चर्चा

    रेल कनेक्टिविटी विस्तार पर सीएम ने की चर्चा

    केन्द्रीय रेल मंत्री ने दिया प्रस्तावों पर आवश्यक कार्यवाही किये जाने का आश्वासन

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर राज्य में रेल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, रेल संपर्क के विस्तार तथा राज्य की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर चर्चा की।
    मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, धार्मिक एवं पर्यटन महत्व तथा जनहित की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रस्ताव केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में से एक है। चारधाम यात्रा, हरिद्वार एवं ऋषिकेश के धार्मिक स्थलों, योग एवं आध्यात्मिक पर्यटन तथा आगामी कुम्भ-2027 के आयोजन के दृष्टिगत प्रतिवर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु एवं पर्यटक राज्य में पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती यात्री संख्या एवं पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए राज्य में आधुनिक, सुदृढ़ एवं सुविधाजनक रेल नेटवर्क का विस्तार समय की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री को अवगत कराया कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुम्बई में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड मूल के नागरिक निवास करते हैं, जिनका अपने गृह राज्य से निरंतर आवागमन बना रहता है। इसके साथ ही चारधाम, बाबा नीम करौली धाम (श्री कैंची धाम), जागेश्वर धाम सहित राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। वर्तमान में मुम्बई से हरिद्वार एवं रामनगर के लिए संचालित रेल सेवाओं की संख्या एवं आवृत्ति यात्रियों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है, जिससे यात्रा सीजन, चारधाम यात्रा, अवकाश एवं त्योहारों के दौरान यात्रियों को आरक्षण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मुम्बई-देहरादून के मध्य वन्दे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा प्रारम्भ करने तथा मुम्बई-हरिद्वार एवं मुम्बई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यात्रियों, प्रवासी उत्तराखण्डवासियों एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी तथा राज्य में पर्यटन, व्यापार एवं निवेश को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने मुम्बई-देहरादून के मध्य वन्दे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा प्रारम्भ करने तथा मुम्बई-हरिद्वार एवं मुम्बई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन रेल सेवाओं के विस्तार से यात्रियों, प्रवासी उत्तराखण्डवासियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधा प्राप्त होगी तथा राज्य में पर्यटन, व्यापार एवं निवेश को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने देहरादून-कोटा रेल सेवा को सूरत-वड़ोदरा-मुम्बई तक विस्तारित करने तथा रामनगर-मुम्बई एवं हरिद्वार-मुम्बई रेल सेवाओं को नियमित अथवा सप्ताह में कम से कम तीन दिन संचालित किए जाने का भी अनुरोध किया।

    मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन को बंद कर उसकी भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB), उत्तराखण्ड सरकार एवं रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA), रेल मंत्रालय के मध्य एसेट मॉनेटाइजेशन एवं ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की समग्र मास्टर प्लानिंग के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में RLDA को आवश्यक औपचारिक निर्देश प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया।

    मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रमुख रेल परियोजनाओं के संबंध में किच्छा-सितारगंज-खटीमा नई रेल लाइन परियोजना की सम्पूर्ण लागत भारत सरकार द्वारा वहन किए जाने, सर्वेक्षण कार्य से संबंधित स्थानीय किसानों की चिंताओं का समाधान किए जाने तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतर्गत शीघ्र रेल संचालन प्रारम्भ करने का अनुरोध किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आजीविका एवं अन्य कारणों से मुम्बई सहित देश के विभिन्न स्थानों में निवास करते हैं। वहीं चारधाम, बाबा नीम करौली धाम (श्री कैंची धाम), जागेश्वर धाम सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। राज्य के कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशन रामनगर, देहरादून एवं हरिद्वार हैं, जहां से पर्वतीय क्षेत्रों के यात्रियों को रेल सुविधा उपलब्ध होती है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेल सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री ने विशेष बल दिया।

    मुख्यमंत्री ने टनकपुर से संचालित त्रिवेणी एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस एवं दौराई एक्सप्रेस के यात्रा मार्ग में पड़ने वाले बनबसा रेलवे स्टेशन पर अल्प समय के ठहराव की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि बनबसा भारत-नेपाल सीमा से लगा हुआ व्यापारिक एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है तथा यहां भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की यूनिट भी स्थापित है। बनबसा स्टेशन पर ठहराव से स्थानीय नागरिकों, यात्रियों एवं सेना को बेहतर परिवहन सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने बनबसा स्टेशन पर उक्त रेल सेवाओं के अल्प ठहराव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की।

    मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण के अंतर्गत रायवाला से देहरादून तक लंबित कार्य को शीघ्र पूर्ण करने तथा हरिद्वार, हर्रावाला, देहरादून, खटीमा, लक्सर, रुड़की, टनकपुर एवं बनबसा रेलवे स्टेशनों के सौन्दर्यीकरण एवं विस्तारीकरण का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने उक्त प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की।

    मुख्यमंत्री ने खटीमा-मझोला पीलीभीत के मध्य रेलवे फाटक संख्या-18C को जनहित में पुनः खोले जाने का अनुरोध भी केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि रेलवे फाटक बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों, कृषकों एवं पर्यटकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित कोकोडायल पार्क में आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए रेलवे फाटक का संचालन पुनः प्रारम्भ किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति प्रदान कर दी है।

    केंद्रीय रेल मंत्रीअश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत विभिन्न प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

  • शिक्षा विभाग की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल ने वैश्विक मंच पर फहराया परचम

    शिक्षा विभाग की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल ने वैश्विक मंच पर फहराया परचम

    विश्व के 47 देशों में एससीईआरटी का डिजिटल प्रशिक्षण टाॅप-6 परियोजना में हुआ शामिल

    यूनेस्को के टीचर ट्रेनिंग अवार्ड से सम्मनित होगा उत्तराखंड का एससीईआरटी संस्थान

    देहरादून । राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा विकसित ‘बिल्डिंग फ्यूचर-रेडी टीचर थ्रो एआई’ परियोजना को वैश्विक मंच पर खूब सराहना मिली। इस परियोजना को यूनेस्को के एआई फाॅर एजुकेशन अवार्ड-2026 के टीचर ट्रेनिंग अवार्ड वर्ग में विश्व की शीर्ष छह परियोजनाओं में शामिल किया गया, जिसकी घोषणा स्विट्जरलैण्ड के जिनेवा में आयोजित एआई फाॅर गुड ग्लोबल समिट-2026 में की गई। आगामी 1 सितम्बर, 2026 से यह परियोजना ग्लोबल इम्पावरमेंट प्रोग्राम का हिस्सा बनेगी ताकि अन्य देश भी अपने यहां शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ बना सके। एससीईआरटी द्वारा तैयार डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल विश्व की शीर्ष परियोजनाओं में चयनित होना प्रदेश के लिये ऐतिहासिक व गौरव का क्षण है।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयी शिक्षा में नवाचार, डिजिटल तकनीक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण व्यवस्था को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि आज एससीईआरटी की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान प्रदेश के हजारों शिक्षकों, एससीईआरटी की टीम, विषय विशेषज्ञों एवं शिक्षा विभाग के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है। डाॅ. रावत ने बताया कि यह दूसरी बार है जब एससीईआरटी के एआई आधारित शिक्षक प्रशिक्षण माॅडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला है। इससे पहले यूनेस्को-आईआईटीई द्वारा प्रकाशित वैश्विक केस स्टडी में भी राज्य के एआई एवं डिजिटल तकनीक आधारित नवाचारों को स्थान दिया गया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था की दिशा में उत्तराखण्ड के प्रयासों की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

    डाॅ. रावत ने बताया कि एससीईआरटी द्वारा विकसित ‘फंडामेंटल्स आॅफ एआई एंड आईसीटी टूल फाॅर स्कूल टीचर्स’ आॅनलाइन कोर्स ने राज्य में डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण को नई दिशा प्रदान की। इस अभिनव कार्यक्रम के जरिये प्रदेशभर के शिक्षकों को एआई, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, डिजिटल शिक्षण, आॅनलाइन मूल्यांकन तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके तहत 49 हजार से अधिक शिक्षकों का पंजीकरण कराया गया जबकि 47 हजार से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण पूर्ण कर प्रमाण पत्र प्राप्त किये। राज्य के लगभग 97 फीसदी विद्यालय इस कार्यक्रम से जुडे़, जिसके चलते 15 हजार से अधिक विद्यालयों तक डिजिटल प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित हुई। जिसकी प्रगति की ई-सृजन एआई चैटबाॅट तथा विद्या समीक्षा केन्द्र डैशबोर्ड के माध्यम से रियल टाइम निगरानी की गई।

    बयान
    एससीईआरटी द्वारा विकसित एआई शिक्षक प्रशिक्षण आगामी 1 सितम्बर, 2026 से यूनेस्को के ग्लोबल इम्पावरमेंट प्रोग्राम का हिस्सा बनेगी, ताकि अन्य देश भी अपने यहां शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ बना सकेंगे। वैश्विक स्तर पर एससीईआरटी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षक प्रशिक्षण तथा समावेशी शिक्षा माॅडल वैश्विक स्तर पर भी प्रभावी पहचान बना रहे हैं। – डाॅ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • समग्र शिक्षा के तहत निर्माण कार्यों को शीघ्र करें पूर्णः डाॅ. धन सिंह रावत

    समग्र शिक्षा के तहत निर्माण कार्यों को शीघ्र करें पूर्णः डाॅ. धन सिंह रावत

    वर्चुअल क्लासेज से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के दिये निर्देश

    कहा, निर्माण कार्यों में लेटलतीफी पर होगी कार्रवाई

    देहरादून। सूबे में समग्र शिक्षा के तहत संचालित विभिन्न निर्माण कार्य समयबद्ध पूर्ण हो इसके लिये विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। योजना के अंतर्गत विभिन्न वित्तीय वर्षों के अधूरे पड़े कार्यों को ससमय पूरा करने के साथ ही नये निर्माण कार्यों को भी निश्चित समय सीमा के भीतर पूर्ण करने को कहा गया है। इसके अलावा समग्र शिक्षा व पीएम-श्री विद्यालयों में स्थापित होने वाले विभिन्न वर्चुअल क्लासेज के कार्यों में भी तेजी लाने को कहा गया है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के निर्देश भी अधिकारियों को दे दिये गये है।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय स्थित सभागार में समग्र शिक्षा परियोजना की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने समग्र शिक्षा के अन्तर्गत निर्माण कार्यों में हो रही लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुये कहा कि परियोजना के अंतर्गत विगत वित्तीय वर्षों में स्वीकृत निर्माण कार्य अभी तक अधूरे पड़े हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। डाॅ. रावत ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर 7803 निर्माण कार्य स्वीकृत हुये हैं जिसमें से 5735 निर्माण कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं जबकि 1068 निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के साथ ही नवीन कार्यों को भी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिये। इसके लिये उन्होंने सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक सप्ताह महानिदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये, साथ ही उन्होंने निर्माण कार्यों में लेटलतीफी करने वाले कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करने को उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजने के भी निर्देश दिये। विभागीय मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 12 स्पोर्ट्स काॅम्पलैक्स के निर्माण कार्य दो सप्ताह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये।

    विभागीय मंत्री डाॅ. रावत ने 266 डिजिटल लाइब्रेरी, समग्र शिक्षा व पीएम-श्री विद्यालयों में स्वीकृत 1203 आईसीटी क्लासेज तथा 2320 स्मार्ट क्लासेज को स्थापित किये जाने संबंधी कार्यों में तेजी लाकर उन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये, ताकि विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को आधुनिक एवं गुणवत्तपूर्ण शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

    बैठक में विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोण्डे, निदेशक एससीईआरटी वंदना गब्र्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद कुमार सिमल्टी, निदेशक प्राथमिक शिक्षा के.एस. रावत, उप निदेशक जे.पी. काला, उप राज्य परियोजना निदेशक पल्लवी नैन, अजीत भण्डारी, प्रद्युमन सिंह रावत सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

    उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

    यह उपलब्धि राज्य के लिए मील का पत्थर – सीएम धामी

    नई शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास’ अभियान की सफलता

    शिक्षा के क्षेत्र में रचा नया इतिहास

    देहरादून। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। नई शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास (Understanding of Lifelong Learning for All in Society)’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत राज्य ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित साक्षरता के सभी मानकों को पूरा कर लिया है। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को राज्यपाल की सहमति से उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित कर दिया गया।

    उत्तराखंड से पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल कर चुके हैं। अब उत्तराखंड भी इस गौरवशाली सूची में शामिल हो गया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि सरकार के सतत प्रयासों और प्रदेशवासियों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, सतत शिक्षा और जीवनोपयोगी कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी तथा राज्य सरकार इन्हें प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य घोषित होना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। उनके अनुसार साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, आत्मनिर्भरता और समग्र विकास का आधार है। यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड के लिए एक नया कीर्तिमान है।

    शिक्षा मंत्री ने इस सफलता का श्रेय शिक्षकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, स्वयंसेवकों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों को देते हुए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव रवीनाथ रमन ने कहा कि पूर्ण साक्षरता सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारशिला है तथा ‘उल्लास’ कार्यक्रम के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वहीं महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोंडे ने कहा कि राज्य के सभी जनपदों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और समुदाय के साझा प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हो सकी है। आगे भी शिक्षा की गुणवत्ता और आजीवन सीखने के अवसरों को और मजबूत बनाया जाएगा।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर पर होगा व्यापक शोध

    पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर पर होगा व्यापक शोध

    तैयार होगी शोध-आधारित रणनीति

    देहरादून। उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों से भोजन नली अर्थात् इसोफेगस के कैंसर से पीड़ित मरीज उपचार के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में दिखाई दे रहे रुझानों को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग ने इस विषय पर व्यापक शोध शुरू करने का निर्णय लिया है।

    इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना होगा कि पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में भोजन नली के कैंसर के पीछे तम्बाकू, धूम्रपान, शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म चाय, भोजन या अन्य पेय पदार्थों का नियमित सेवन, फल एवं सब्जियों की कमी, पोषण संबंधी असंतुलन, मोटापा, एसिड रिफ्लक्स, घरों के भीतर धुएं का संपर्क, पेयजल की गुणवत्ता, पर्यावरणीय परिस्थितियां तथा अन्य स्थानीय कारणों की क्या भूमिका है। किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय सभी संभावित जोखिम कारकों का व्यवस्थित एवं प्रमाण-आधारित अध्ययन किया जाएगा।
    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने बताया कि अस्पताल में उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी जिलों से भोजन नली के कैंसर के अनेक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अब तक कई मरीजों का सर्जरी, कीमोथेरेपी तथा अन्य आधुनिक उपचार विधियों से सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। अस्पताल में उपचार प्राप्त कर चुके कई मरीज पांच वर्ष से अधिक समय से जीवित हैं और सामान्य एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भोजन नली के कैंसर की जांच और उपचार के लिए अपर जीआई एंडोस्कोपी, बायोप्सी, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन तथा अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन जांचों के आधार पर बीमारी की अवस्था, मरीज के सामान्य स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति का आकलन कर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांचों अथवा उपचार के लिए संबंधित विशेषज्ञ केन्द्रों के साथ समन्वय भी किया जाता है।

    अस्पताल में कीमोथेरेपी, ओपन एवं दूरबीन विधि से कैंसर सर्जरी, ऑपरेशन के बाद गहन चिकित्सा, दर्द नियंत्रण, पोषण सहायता, फिजियोथेरेपी तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जटिल मामलों में कैंसर विशेषज्ञ, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा पोषण विशेषज्ञ मिलकर मरीज की उपचार योजना तैयार करते हैं।

    डॉ. गर्ग ने बताया कि चयनित मरीजों में भोजन नली के कैंसर का ऑपरेशन दूरबीन विधि, अर्थात् मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी, से भी किया जाता है। इसमें छाती और पेट पर बड़े चीरे लगाने के बजाय छोटे छेदों के माध्यम से सर्जरी की जाती है। उचित मरीज के चयन और अनुभवी सर्जिकल टीम द्वारा किए जाने पर इस तकनीक से ऑपरेशन के बाद दर्द, फेफड़ों से संबंधित जटिलताओं और अस्पताल में रहने की अवधि को कम करने तथा मरीज को शीघ्र सामान्य गतिविधियों में लौटने में सहायता मिल सकती है।
    भोजन नली का कैंसर मुख्यतः दो प्रकार का होता है। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का संबंध तम्बाकू, धूम्रपान, शराब, अत्यधिक गर्म भोजन या पेय पदार्थ तथा पोषण की कमी से हो सकता है। दूसरे प्रकार, एडेनोकार्सिनोमा, का संबंध लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स, बैरेट इसोफेगस और मोटापे से हो सकता है। कई मरीजों में एक से अधिक जोखिम कारक एक साथ मौजूद रहते हैं।

    डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने कहा कि भोजन नली का कैंसर प्रारम्भिक अवस्था में प्रायः कोई स्पष्ट लक्षण उत्पन्न नहीं करता। इसलिए निगलने में लगातार कठिनाई, ठोस भोजन का अटकना, बार-बार भोजन वापस आना, बिना कारण वजन कम होना, छाती में दर्द या जलन, लगातार खांसी अथवा आवाज में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से निगलने में बढ़ती कठिनाई होने पर मरीज को शीघ्र विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यकता होने पर अपर जीआई एंडोस्कोपी करानी चाहिए।

    कैंसर की शीघ्र पहचान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रारम्भिक अवस्था में बीमारी का पता चलने पर पूर्ण उपचार और लंबे समय तक स्वस्थ रहने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे मरीजों को एंडोस्कोपिक उपचार, सर्जरी अथवा संयुक्त उपचार से दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। बीमारी के शरीर के अन्य अंगों तक फैल जाने के बाद उपचार अधिक जटिल हो जाता है और परिणाम अपेक्षाकृत कम अनुकूल होते हैं।
    शोध के दौरान मरीजों की आयु, निवास स्थान, खान-पान, तम्बाकू एवं शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म खाद्य या पेय पदार्थों की आदत, पोषण की स्थिति, पेशा, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियां, पर्यावरणीय संपर्क, बीमारी की अवस्था, उपचार और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य चिकित्सा एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ भी सहयोग स्थापित किया जाएगा।

    अस्पताल का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं है, बल्कि शोध के आधार पर भोजन नली के कैंसर की रोकथाम, उच्च जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान, जन-जागरूकता, उपयुक्त जांच और बचाव संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करना भी है। यह शोध उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में कैंसर के वास्तविक कारणों और बदलते स्वरूप को समझने तथा भविष्य की कैंसर नियंत्रण नीति और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • उत्तराखण्ड में 9 और 10 जुलाई को भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी

    उत्तराखण्ड में 9 और 10 जुलाई को भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी

    कई जनपदों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा की संभावना

    देहरादून। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 09 एवं 10 जुलाई, को उत्तराखण्ड के कई जनपदों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा, आकाशीय बिजली चमकने तथा तेज से अत्यंत तेज वर्षा के दौर की संभावना व्यक्त की गई है। इसे देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (एसईओसी) ने सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक एहतियाती एवं सतर्कता संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    पूर्वानुमान के अनुसार 09 जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर एवं चम्पावत जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    10 जुलाई को पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चम्पावत एवं बागेश्वर जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट, जबकि देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा एवं पिथौरागढ़ जनपदों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र ने सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने, आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों एवं विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने, सड़क मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला सूचना अधिकारियों को मौसम संबंधी चेतावनी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।

    सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक यात्रा से बचें, विशेषकर पर्वतीय एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से परहेज करें। नदी-नालों और बरसाती गधेरों के समीप न जाएं तथा खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।

    उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन अथवा आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

    उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों एवं मानवबल की उपलब्धता सुनिश्चित रखते हुए 24×7 सतर्कता बनाए रखें।

  • बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामले में बीकेटीसी कर्मी निलंबित

    बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामले में बीकेटीसी कर्मी निलंबित

    विपक्ष का भारी विरोध, बीकेटीसी ने उठाया कदम

    व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल तत्काल प्रभाव से निलंबित

    निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित

    जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी की घटना को लेकर गठित जांच समिति ने बीकेटीसी कर्मी को निलंबित कर दिया है।

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

    समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।

    प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की प्रारंभिक आख्या का परीक्षण करने पर आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। समिति ने यह भी माना कि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ (जनपद चमोली) से संबद्ध किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी तथा उन्हें जांच एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग देना अनिवार्य होगा।

    बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्वेदी पर हमला बोला हुआ है।

  • दिवंगत पत्रकार खुशहाल गिरि गोस्वामी को श्रद्धांजलि, नम आँखों से किया स्मरण

    दिवंगत पत्रकार खुशहाल गिरि गोस्वामी को श्रद्धांजलि, नम आँखों से किया स्मरण

    देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य खुशहाल गिरि गोस्वामी के आकस्मिक निधन पर क्लब में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। पत्रकारिता जगत के अनेक वरिष्ठ जनों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    गोस्वामी का 4 जुलाई (शनिवार) को गंभीर बीमारी के चलते जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया था। उनके निधन से उत्तरांचल प्रेस क्लब एवं पत्रकारिता जगत में गहरा शोक व्याप्त है।

    इस अवसर पर प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय सिंह राणा ने कहा कि खुशहाल गिरि गोस्वामी का सरल स्वभाव और पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सभी के लिए प्रेरणास्रोत थी।
    उन्होंने बताया कि गोस्वामी मूल रूप से चौखुटिया, अल्मोड़ा से है और वे अपने पीछे कैंसर पीड़ित पत्नी व दो पुत्रों को छोड़ गए।

    महामंत्री योगेश सेमवाल ने दिवंगत खुशहाल गिरि गोस्वामी की पत्रकारिता और उनके सरल व्यवहार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तरांचल प्रेस क्लब स्व. खुशहाल गिरि गोस्वामी के परिवार के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

    इस अवसर पर प्रेस क्लब वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह नेगी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सोबन सिंह गुसाईं, कोषाध्यक्ष मनीष डंगवाल, कार्यकारिणी सदस्य रश्मि खत्री, मनबर सिंह रावत, वरिष्ठ सदस्य लक्ष्मी प्रसाद बड़ोनी, राजेश बड़थ्वाल, महेश पाण्डेय, राजकिशोर तिवारी, वीरेन्द्र सिंह नेगी, राजकुमार धीमान, राजेश बहुगुणा, शहजाद अली, बिजेन्द्र सिंह राणा, किशोर रावत, योगेश शैली समेत कई सदस्य मौजूद रहे।

  • डीएम का बड़ा फैसला: डेयरी प्रबंधक का वेतन रोका

    डीएम का बड़ा फैसला: डेयरी प्रबंधक का वेतन रोका

    जालसाज व धोखेबाजों पर कठोर कार्रवाई की तैयारी

    ‘समाधान दिवस’ – 169 शिकायतें, कई का मौके पर समाधान

    अवैध प्लाटिंग और कब्जों पर प्रशासन सख्त

    देहरादून । डीएम ने कलेक्ट्रेट परिसर में आहूत ‘समाधान दिवस’ में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेयरी), रायपुर रोड के प्रबंधक के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए।

    अधोईवाला निवासी नितिन कुमार ने शिकायत की कि दुग्ध संघ में कार्यरत उनकी माता को बार-बार चक्कर काटने के बाद भी एसीपी का भुगतान नहीं किया गया है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डीएम ने दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेयरी), रायपुर रोड के प्रबंधक के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए और पीड़ित को तुरंत भुगतान सुनिश्चित करने को कहा।

    समाधान दिवस में भूमि विवाद, अवैध कब्जे, अतिक्रमण, आपदा क्षतिपूर्ति और पारिवारिक प्रताड़ना से जुड़े मामले प्रमुखता से छाए रहे। मामलों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया।

    भू-माफियाओं और अवैध कब्जों पर सख्त एक्शन

    मेहूँवाला में सरकारी नहर पर दीवार बनाकर किए गए अवैध कब्जे की शिकायत पर एसडीएम को तत्काल मौके पर जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    छिद्दरवाला व कृसाली में जनजाति की भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा जबरन कब्जा कर प्लाटिंग करने और एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की खरीदी हुई जमीन की बाउंड्रीवॉल तोड़कर कब्जा करने के मामलों में एसडीएम ऋषिकेश और तहसीलदार को तुरंत कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।

    ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट स्थित ऐतिहासिक खुर्जा वाली धर्मशाला की भूमि पर एमडीडीए व प्रशासन के आदेशों की अवहेलना कर किए जा रहे अवैध निर्माण पर एसडीएम को तुरंत कड़ा एक्शन लेने के निर्देश दिए।

    बुजुर्गों और महिलाओं की पीड़ा पर दिखाई संवेदनशीलता

    बंजारावाला की 61 वर्षीय बुजुर्ग शकुंतला द्वारा बहू-बेटों की प्रताड़ना की शिकायत पर एसडीएम सदर को ‘भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत दर्ज वाद पर तत्काल सुनवाई कर राहत देने के निर्देश दिए गए। वहीं, चुक्खूवाला के एक अन्य बुजुर्ग दंपत्ति को सुरक्षा दिलाने के लिए सीओ पुलिस और तहसीलदार को जिम्मेदारी सौंपी गई।
    बच्चों के पालन-पोषण के लिए शराब की लत से ग्रसित पति की संपत्ति अपने नाम कराने की मांग लेकर आई महिला की मदद के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी को पूरे परिवार की काउंसलिंग करने के निर्देश दिए गए। दहेज के कथित झूठे मुकदमे और 40 लाख रुपये की डिमांड से परेशान अम्बीवाला निवासी तारा वती के मामले को महिला प्रकोष्ठ को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए।

    शिक्षा और दिव्यांगों को आर्थिक मदद

    जनता दरबार में उत्तराखंड प्राविधिक विश्वविद्यालय (सुद्धोवाला) में बीटेक कर रही एक छात्र की फीस के लिए आर्थिक सहायता, एक दिव्यांग महिला द्वारा गुजारे के लिए मदद और कुडियाल निवासी महिला द्वारा अपनी बेटी की तृतीय सेमेस्टर की पढ़ाई जारी रखने के लिए ‘नंदा सुनंदा’ से दोबारा आर्थिक सहायता की गुहार लगाई गई, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर त्वरित विचार करने का आश्वासन दिया गया।

    इसके अतिरिक्त, देवपुरम में सड़क निर्माण न होने से आवागमन की असुविधा पर नगर आयुक्त और बंजारावाला में अव्यवस्थित हॉट बाजार को हटाने व रेहड़ी-फड़ वालों के सत्यापन के लिए सीओ पुलिस को निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने समाधान दिवस पर प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज जन शिकायतों का भी प्राथमिकता पर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    समाधान दिवस में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे 169 फरियादियों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी गंभीर समस्याएं रखीं। डीएम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकतर शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया, जबकि शेष मामलों में संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए।

    जनता दरबार में अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशा) स्मृता परमार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश तिवारी, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा, एसडीएम विनोद कुमार, एसडीएम अपर्णा ढ़ौडियाल, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, तहसीलदार सुरेन्द्र देव, तहसीलदार विवेक राजौरी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी व वर्चुअल माध्यम से एसडीएम व अन्य अधिकारी मौजूद थे।

  • ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़े का शुभारंभ

    ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़े का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री की उपलब्धि पर राज्यपाल ने दी बधाई

    ₹219 करोड़ से अधिक लागत की 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास

    ’उत्तराखण्ड विकास और निवेश का नया केंद्र बनकर उभरा – राज्यपाल’

    जनसेवा ही सरकार का मूल मंत्र, वर्ष 2035 तक विकसित एवं श्रेष्ठ उत्तराखण्ड निर्माण का लक्ष्य – मुख्यमंत्री

    ऋषिकेश। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को आईडीपीएल ग्राउंड में आयोजित ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण: जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को संबोधित किया।
    इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद की ₹219 करोड़ से अधिक लागत की 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

    राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि यह अभियान लोकसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक नागरिक तक सम्मान, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचे। राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष से अधिक समय तक दायित्व निभाने की उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जनता के विश्वास, लोकतांत्रिक स्थिरता और विकास की निरंतरता का प्रतीक है।

    राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड ने पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अनेक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जिसने समानता, न्याय और सामाजिक समरसता की भावना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सशक्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान तथा प्रभावी भू-कानून जैसे निर्णय जनहित और सुशासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि राज्य की विकास यात्रा में महिलाओं, युवाओं, किसानों और सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण तथा ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं को महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    राज्यपाल ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्विकास कार्य, पर्यटन और होमस्टे योजना के विस्तार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं ने उत्तराखण्ड को विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं से स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे नवाचार आधारित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा’ का संदेश राज्य की क्षमता और संभावनाओं पर उनके विश्वास का परिचायक है। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के माध्यम से इस संकल्प को साकार किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज से पांच वर्ष पूर्व उन्हें देवभूमि उत्तराखण्ड की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ था और यह यात्रा जनसेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश की जनता का विश्वास, स्नेह एवं आशीर्वाद ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए यह अवसर उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन एवं जनसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उत्तराखण्ड को विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कृषि, पर्यटन, उद्योग, निवेश, स्वरोजगार एवं सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। नई स्टार्टअप नीति, एक जनपद-दो उत्पाद, होमस्टे योजना, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, नारी सशक्तिकरण योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। चारधाम यात्रा, शीतकालीन यात्रा, राष्ट्रीय खेलों एवं जी-20 बैठकों के सफल आयोजन से राज्य को नई पहचान मिली है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। राज्य की जीएसडीपी में वृद्धि, प्रतिव्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट, नए उद्योगों की स्थापना तथा स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या उत्तराखण्ड की प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स पलायन को भी गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अनेक ऐतिहासिक एवं साहसिक निर्णय लिए हैं। समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी भावना के साथ ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनभागीदारी, सेवा और विकास के संकल्प के साथ उत्तराखण्ड को वर्ष 2035 तक विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रदेशवासियों के सहयोग से उत्तराखण्ड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, डॉ धन सिंह रावत, खजान दास, भरत चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, मुन्ना सिंह चौहान, बृज भूषण गैरोला, सुरेश गड़िया, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, विनोद चमोली, सहदेव सिंह पुंडीर, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय,महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान एवं अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारीगण उपस्थित थे।