Category: टेक्नोलॉजी

  • उत्तराखंड के युवा रवि ने रचा इतिहास, बनाया उड़ने वाला ई-व्हीकल

    उत्तराखंड के युवा रवि ने रचा इतिहास, बनाया उड़ने वाला ई-व्हीकल

    देखें वीडियो,अल्मोड़ा में तकनीकी परीक्षण

    उम्मीदों की उड़ान…

    कई वर्षों के शोध के बाद तैयार किया हापिडा स्काईनेक्स का प्रोटोटाइप

    अल्मोड़ा। पहाड़ के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है। उनका दावा है कि यह वाहन हवा में उड़ान भरने के साथ ही इलेक्ट्रिक ऊर्जा से संचालित होगा। कई वर्षों के शोध, डिजाइन और तकनीकी परीक्षण के बाद तैयार किए गए इस प्रोटोटाइप का परीक्षण भी किया जा चुका है।

    रवि टम्टा के अनुसार, हवा में उड़ान भरकर परीक्षण करने के बाद अब प्रोटोटाइप को और बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। इस दौरान डिजाइन, शोध और तकनीकी परीक्षणों के कई चरण पूरे किए गए। उनका उद्देश्य ऐसा इलेक्ट्रिक वाहन विकसित करना है, जो भविष्य में परिवहन के वैकल्पिक साधन के रूप में उपयोग किया जा सके।

    उन्होंने बताया कि प्रोटोटाइप का परीक्षण परियोजना के लिए महत्वपूर्ण चरण है। इसे व्यावहारिक और सुरक्षित परिवहन साधन बनाने के लिए अभी कई स्तरों पर परीक्षण किए जाने बाकी हैं। वाहन की सुरक्षा, स्थिरता, क्षमता और प्रदर्शन को लेकर आगे भी परीक्षण किए जाएंगे।

     

    रवि का कहना है कि इस तरह के इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का उपयोग भविष्य में शहरों में यातायात की समस्या कम करने के साथ ही पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। आपात स्थिति में ऐसे वाहनों के जरिए दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

    पहले भी तैयार कर चुके हैं कई उपकरण

    रवि टम्टा इससे पहले भी कई उपयोगी उपकरण तैयार कर चुके हैं। उनके अनुसार, उन्होंने विभिन्न जरूरतों के लिए स्वचालित उपकरणों के साथ दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए भी कई उपयोगी उपकरण विकसित किए हैं।

    भारत में हवाई परिवहन को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य

    रवि का लक्ष्य भारत में हवाई परिवहन के क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करना और इसे सुरक्षित व व्यावहारिक बनाना है। प्रोटोटाइप के परीक्षण के बाद अब परियोजना को अगले चरण में ले जाने की तैयारी की जा रही है।

    सीएम धामी ने रवि को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।

    “हैपिडा स्काइनेक्स” की उड़ान- अल्मोड़ा में किया प्रदर्शन

    अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा ने अपने नवाचार और तकनीकी कौशल का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए “हैपिडा स्काइनेक्स (Hapida Skynex)” नामक स्वयं निर्मित सिंगल सीटेड फ्लाइंग व्हीकल डिवाइस से सफल ट्रायल उड़ान भरकर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
    यह विशेष डिवाइस पूर्णतः इलेक्ट्रिक पावर से संचालित है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण बनाता है। सीमित संसाधनों में तैयार किए गए इस फ्लाइंग व्हीकल ने पूरे देश में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल पैदा किया है।

    स्थानीय हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में आयोजित ट्रायल उड़ान के दौरान जिलाधिकारी अंशुल सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी में रवि टम्टा ने “हैपिडा स्काइनेक्स (Hapida Skynex)” को सफलतापूर्वक उड़ान भराते हुए अपने नवाचार को साकार रूप दिया। इस दौरान सुरक्षा के सभी आवश्यक मानकों का ध्यान रखा गया तथा प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

    “हैपिडा स्काइनेक्स (Hapida Skynex)” की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इलेक्ट्रिक पावर (Electric Power) आधारित यह डिवाइस भविष्य की स्वच्छ एवं सतत तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रवि टम्टा से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर उनकी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह नवाचार प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म देता है। मुख्यमंत्री ने रवि टम्टा के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

    जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने इस उपलब्धि को जनपद के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि ऐसे नवाचार स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं और युवाओं को नई सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से भी नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु हर संभव सहायता दी जाएगी।

  • ऑनलाइन प्रक्रिया से विवाह पंजीकरण हुआ और भी आसान

    ऑनलाइन प्रक्रिया से विवाह पंजीकरण हुआ और भी आसान

    यूसीसी का एक साल

    पहले विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार ऑफिस में उपस्थित होने की थी मजबूरी

     

    देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए, आगामी 27 जनवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समता कायम करने के साथ ही यूसीसी का एक महत्वपूर्ण योगदान प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में रहा है। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के एक साल से कम समय में 4,74,447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है। अब पति – पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं। पहले उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।

    समान नागरिक संहिता लागू होने से पहले, ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे। यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसलिए पति- पत्नी को दो गवाहों के साथ विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। लेकिन यूसीसी के लगभग शत प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं। जिसमें दंपत्ति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज करा, पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के बाद एक साल से कम समय में सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक 4,74,447 विवाह पंजीकरण सम्पन्न हो चुके हैं। इस तरह प्रतिदिन औसत पंजीकरण की संख्या 1400 के करीब पहुंच रही है, जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का औसत प्रतिदिन 67 का आता था। यही नहीं इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने लिवइन रिलेशनशिप में जाने जबकि 02 ने लिवइन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है।

    औसत पांच दिन पंजीकरण
    यूसीसी तहत यूं तो आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसत पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है। जबकि पुराने अधिनियम में एक तो आवेदकों को भौतिक तौर पर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, उस पर विवाह पंजीकरण के लिए समय सीमा भी तय नहीं थी।

    उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए, अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जितनी पारदर्शी और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैँ। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।
    पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

  • उत्तराखंड ओटीटी से क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान

    उत्तराखंड ओटीटी से क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान

    उत्तराखंड के अपने ओटीटी “वीडियोज अलार्म” पर रिलीज हुई फ़िल्म “बिरणी आंखी”

    “बिरणी आंखी” बनी पहली गढवाली फिल्म, थियेटर पर नहीं “वीडियोज अलार्म” ओटीटी पर हुई रिलीज

    उत्तराखंड के पहले ओटीटी “वीडियोज अलार्म” पर गढवाली फिल्म “बिरणी आंखी” आज रिलीज हुई, इसी के साथ उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहुंचाने की कोशिश में आज एक नया अध्याय जुड गया हैं। बिरणी आंखी, गढवाली फिल्म का पोस्टर टिसर सॉन्ग कोटद्वार में 03 जनवरी को रिलीज हुआ था और आज ये फिल्म हम सबके बीच दस्तक दे चुकी हैं।

    इस फिल्म के निर्माता दीपक देव सागर और निर्देशक फैसल सैफी हैं, वही मुख्य कलाकारो में कोटद्वार के सूरज कोटनाला, शिवानी भटट, अंशूल भारद्वाज ने अपने अभिनय से सबको आकर्षित कर गहरी छाप छोड़ी हैं। फिल्म के निर्माता दीपक देव सागर और निर्देशक फैसल सैफी ने ‘बिरणी आंखी’ फिल्म में अपने अनुभव और कौशल से एक ऐसी कहानी परदे पर उखेरी हैं जो दिल को छू लेने वाली हैं, साथ ही फिल्म में मुख्य कलाकारों सूरज कोटनाला, शिवानी भटट, अंशूल भारद्वाज ने अपने अपने किरदार को एक जोरदार तरीके से पेश किया हैं जो की फिल्म में दिखाई दे रहा हैं।

    इस फिल्म की शूटिंग कोटद्वार के निकट के क्षेत्रों के साथ ही दुगड्डा, लैंसडाउन, आमसौड, फतेहपुर और दिल्ली में की गई है। फ़िल्म “बिरणी आंखी” पहाड़ की ज़िंदगी, रिश्तों की गहराई और मानवीय संवेदनाओं को बेहद सशक्त तरीके से प्रस्तुत करती है। कहानी आम पहाड़ी लोगों के संघर्ष, प्रेम और आत्मसम्मान को दर्शाती है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सक्षम है। फ़िल्म “बिरणी आंखी” अब “वीडियोज अलार्म” ऐप और पर उपलब्ध है, जिसे दर्शक कभी भी और कहीं भी देख सकते हैं। फ़िल्म से जुड़े कलाकारों और टीम को उम्मीद है कि दर्शकों का प्यार और समर्थन उत्तराखंडी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

    इस फिल्म की सबसे खास बात ये है की यह फिल्म सिनेमा हॉल में नहीं बल्कि उत्तराखंड के अपने पहले ओटीटी “वीडियोज अलार्म” पर रिलीज हुई हैं, जिसको आप अपने फ़ोन या टीवी पर घर बैठकर ही परिवार के साथ देख सकते हैं. “वीडियोज अलार्म” ओटीटी को भारत सहित 18 देशों में देखा जा रहा है, जो कि अपने आप में ओटीटी की लोकप्रियता को दर्शाता है, ओटीटी “वीडियोज अलार्म” पर अब तक असगार, मीठी मां कु आर्शीवाद, रत्ब्याण, धरती म्यारा कुमाऊं की, शहीद जैसी फिल्मे रिलीज हो चुकी हैं, और आने वाले दिनों में आपको और भी कई नई फिल्म देखने को मिलेगी। ये ऐप आपके एंड्रॉइड फ़ोन, आईओएस फ़ोन और एंड्रॉइड टीवी पर भी उपलब्ध हैं. जिसको आप मात्र 99 रुपए प्रतिवर्ष में देख सकते हैं.
    उत्तराखण्ड के सुदूरवर्ती इलाकों में सिनेमा हॉल न होने के चलते इस ओटीटी “वीडियोज अलार्म” ने गाँव-गाँव तक अपनी पहुँच बनाकर एक नए डिजिटल युग का आगाज कर दिया है, गढ़वाल, कुमाऊँ और जौनसार की खुशबू लिए उत्तराखंड का अपना पहला ओटीटी “वीडियोज अलार्म” अपनी संस्कृति और बोली भाषा को प्रदेश ही नहीं देश विदेश में भी पहुँचाने का काम कर रहा हैं. . “वीडियोज अलार्म” उत्तराखंड का पहला ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो स्थानीय कलाकारों, निर्देशकों और कहानियों को प्राथमिकता देता है। इस प्लेटफॉर्म पर उत्तराखंडी फ़िल्में, वेब सीरीज़, म्यूज़िक और शॉर्ट फ़िल्में लगातार दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

  • स्मार्ट मीटर ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की परेशानियां, बिजली बिल देखकर लोग परेशान

    स्मार्ट मीटर ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की परेशानियां, बिजली बिल देखकर लोग परेशान

    हल्द्वानी में स्मार्ट मीटर के बाद बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी, उपभोक्ता परेशान

    हल्द्वानी में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया के बाद उपभोक्ताओं को बिजली के बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की शिकायतें मिल रही हैं। कुल 1.88 लाख मीटर बदलने के लक्ष्य के तहत अब तक लगभग 30 हजार मीटर बदल दिए गए हैं, लेकिन बिलों की बढ़ी हुई रकम ने स्थानीय लोगों में चिंता और नाराज़गी बढ़ा दी है। ऊर्जा निगम इस मामले में जांच करने और जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है, जबकि उपभोक्ता लगातार बढ़े हुए बिलों को लेकर असमंजस में हैं।

    राज्य सरकार द्वारा बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने के प्रयास के तहत पुराने मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। नैनीताल जिले में 1.88 लाख मीटर बदलने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें से लगभग 1.25 लाख मीटर केवल हल्द्वानी के नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में लगने हैं। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 30 हजार से अधिक मीटर बदले जा चुके हैं, लेकिन इस बदलाव से उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

    नई तकनीक वाले मीटर लगाने के बाद कई क्षेत्रों में लोगों को पहले से दोगुने या उससे भी ज्यादा बिजली बिल प्राप्त हो रहे हैं। इस वजह से स्थानीय निवासियों का गुस्सा स्मार्ट मीटरों को लेकर तेज़ हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी बिजली की खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, फिर भी बिल काफी ज्यादा आ रहे हैं, जो उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है। दूसरी ओर, ऊर्जा निगम ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि वे सभी मामलों की जांच कर रहे हैं और सुधार की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, वे स्मार्ट मीटर के सही उपयोग और फायदे के बारे में जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं।

    उपभोक्ताओं के अनुभव
    • मनीष साहू (धान मिल क्षेत्र): मनीष ने बताया कि उनके घर पर जून के मध्य में स्मार्ट मीटर लगाया गया था। पहले उनका मासिक बिल 400 से 700 रुपये के बीच आता था, लेकिन मीटर बदलने के बाद जुलाई का बिल 1700 रुपये आ गया। उन्होंने कहा, “हमारे बिजली के इस्तेमाल में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, फिर भी इतना अधिक बिल आना समझ से बाहर है।”

    • लक्ष्मी सैनी (मुरारजीनगर): लक्ष्मी ने बताया कि उनके घर में पिछले महीने नया स्मार्ट मीटर लगाया गया। पहले उनका बिल लगभग 350 से 500 रुपये के बीच था, लेकिन जुलाई में उन्हें दो बार बिल प्राप्त हुए — पहले 320 रुपये का और फिर 900 रुपये का भुगतान संदेश। उन्होंने अभी तक दोनों बिलों का भुगतान नहीं किया है।

    • अंकिता पाल (धान मिल क्षेत्र): अंकिता ने कहा कि अप्रैल में उनका बिजली बिल 615 रुपये था, लेकिन नए मीटर लगने के बाद पिछले महीने उनका बिल बढ़कर 1226 रुपये हो गया। वे इस अचानक बढ़ोतरी को लेकर काफी परेशान हैं और समझ नहीं पा रही हैं कि यह इतना अधिक बिल कैसे आया।

    ऊर्जा निगम का पक्ष

    ऊर्जा निगम ने कहा है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरे जिले में तेजी से जारी है और यह तकनीक बिजली की खपत को अधिक सही तरीके से रिकॉर्ड करती है। बिलों में हुई बढ़ोतरी के मामलों की जांच की जा रही है ताकि यदि कोई तकनीकी खराबी या माप में त्रुटि हो तो उसे ठीक किया जा सके। निगम अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अनुरोध किया है कि वे बिल में किसी भी असामान्यता के लिए तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही, ऊर्जा निगम ने बताया कि वे स्मार्ट मीटर के फायदे और सही उपयोग को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रहे हैं, ताकि उपभोक्ता इस नई तकनीक को बेहतर समझ सकें।

    जहाँ स्मार्ट मीटर से बिजली वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और आधुनिकता लाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं उपभोक्ताओं के बढ़ते बिल उनकी चिंता का कारण बन रहे हैं। उपभोक्ताओं का यह कहना है कि तकनीक के नाम पर उन्हें वित्तीय बोझ बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में ऊर्जा निगम की जांच और जागरूकता प्रयास इस विवाद को कम करने में कितने सफल होंगे, यह आने वाले समय में देखा जाएगा।

  • जीएसटी चोरी पर लगेगा लगाम, प्रदेश में स्थापित होगी पहली डिजिटल फॉरेंसिक लैब

    जीएसटी चोरी पर लगेगा लगाम, प्रदेश में स्थापित होगी पहली डिजिटल फॉरेंसिक लैब

    जीएसटी चोरी की रोकथाम के लिए प्रदेश में बनेगी पहली डिजिटल फॉरेंसिक लैब, टैक्स जांच प्रक्रिया होगी तेज़ और सटीक

    12.9 करोड़ की लागत से स्थापित होगी अत्याधुनिक लैब, डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण से त्वरित कार्रवाई और राजस्व में वृद्धि की उम्मीद

    देहरादून। प्रदेश में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) चोरी जैसे आर्थिक अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए पहली डिजिटल फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल चुकी है। लगभग 12.9 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह अत्याधुनिक लैब न केवल जीएसटी चोरी की जांच प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाएगी, बल्कि प्रदेश सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की भी संभावना जगाएगी। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गुजरात इस लैब के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।

    राज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल जीएसटी चोरी की जांच के दौरान फर्मों से जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, सर्वर, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल उपकरणों को दिल्ली या हैदराबाद स्थित केंद्रीय प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ता है। इस प्रक्रिया में न केवल काफी समय लगता है, बल्कि जांच में देरी की वजह से कई बार आरोपी साक्ष्य मिटाने या छुपाने में सफल हो जाते हैं, जिससे जांच और राजस्व वसूली पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

    विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “प्रदेश के पास फिलहाल डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच की कोई स्थानीय सुविधा नहीं थी। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा गया था, जिसे अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। लैब के शुरू होने के बाद टैक्स चोरी के मामलों की जांच और कार्रवाई की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी और साक्ष्यों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।”

    डिजिटल फॉरेंसिक लैब में अत्याधुनिक उपकरण और सॉफ्टवेयर लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से डेटा रिकवरी, डेटा एनालिसिस, डिजिटल डिवाइसेज की क्लोनिंग, एन्क्रिप्टेड फाइल्स की डिक्रिप्शन, नेटवर्क ट्रैफिक एनालिसिस, ईमेल और चैट विश्लेषण, मोबाइल फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षित संग्रहण जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से तुरंत महत्वपूर्ण सूचनाएं निकाली जा सकेंगी और दोषियों पर समय रहते शिकंजा कसा जा सकेगा।

    विभाग का कहना है कि लैब की स्थापना से सरकार को जीएसटी चोरी जैसे मामलों में सैकड़ों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की सुरक्षा की उम्मीद है। इसके अलावा, इससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों और करदाताओं में यह संदेश जाएगा कि डिजिटल माध्यम से टैक्स चोरी अब आसान नहीं रही।

    राज्य कर विभाग योजना बना रहा है कि लैब के साथ-साथ अपने अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिलवाया जाए, ताकि वे डिजिटल साक्ष्यों को सही ढंग से जब्त और विश्लेषण कर सकें। यह लैब भविष्य में ई-वे बिल की जांच, फर्जी इनवॉइसिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट की धोखाधड़ी, शेल कंपनियों के नेटवर्क का पर्दाफाश और बोगस बिलिंग जैसे मामलों में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    अधिकारियों का मानना है कि प्रदेश की अपनी डिजिटल फॉरेंसिक लैब होने से न केवल जांच की गति बढ़ेगी, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों की गोपनीयता और प्रमाणिकता भी सुनिश्चित की जा सकेगी, जो न्यायिक कार्रवाई में निर्णायक होती है। सरकार को विश्वास है कि इस कदम से कर प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और प्रदेश के राजस्व में वृद्धि होगी, जिससे विकास कार्यों को और बल मिलेगा।

    गा, जिससे निवेशकों और उद्योग जगत का भरोसा भी मजबूत होगा। यह पहल प्रदेश को डिजिटल युग की चुनौतियों से नवीनतम तकनीक से लैस यह लैब न सिर्फ टैक्स मामलों की जांच में मददगार होगी, बल्कि प्रदेश को साइबर अपराध, कॉरपोरेट धोखाधड़ी और डिजिटल फ्रॉड के मामलों में भी तकनीकी सहयोग प्रदान कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुविधा के चलते प्रदेश में व्यवसायिक माहौल अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेनिपटने में अग्रणी बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

  • रुड़की के व्यक्ति से 38 लाख की साइबर ठगी, शेयर ट्रेडिंग एप के जरिए जालसाजी

    रुड़की के व्यक्ति से 38 लाख की साइबर ठगी, शेयर ट्रेडिंग एप के जरिए जालसाजी

    शेयर ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर साइबर ठगों ने उड़ाए 38 लाख, रुड़की निवासी से धोखाधड़ी

    साइबर अपराधियों ने एक बार फिर शातिराना तरीके से शेयर ट्रेडिंग में मोटी कमाई का झांसा देकर रुड़की के एक व्यक्ति से करीब 38.37 लाख रुपये की ठगी कर डाली। पीड़ित की शिकायत पर साइबर अपराध थाना, देहरादून में मामला दर्ज कर लिया गया है।

    सुभाषनगर, रुड़की निवासी पीड़ित ने बताया कि 26 अप्रैल को उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जिसमें शेयर मार्केट में निवेश से जुड़ी जानकारी और कमाई के टिप्स दिए जा रहे थे। कुछ ही घंटों बाद ग्रुप में बड़ी कमाई का झांसा देते हुए एक लिंक भेजा गया।

    लिंक के जरिए एक फर्जी एप डाउनलोड करवाई गई, जिसमें पीड़ित से अकाउंट बनवाकर पंजीकरण कराया गया। इसके बाद निवेश के नाम पर कई चरणों में 38.37 लाख रुपये बताए गए खातों में जमा कराए गए। जब पीड़ित ने अपने निवेश की रकम निकालने की कोशिश की तो उससे और पैसे मांगे गए, जिससे उसे ठगी का अहसास हुआ।

    डिप्टी एसपी साइबर क्राइम, अंकुश मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की तलाश जारी है।

  • ई-वाहन यात्रियों के लिए खुशखबरी, यात्रा मार्ग पर चार्जिंग सुविधा शुरू

    ई-वाहन यात्रियों के लिए खुशखबरी, यात्रा मार्ग पर चार्जिंग सुविधा शुरू

    यात्रियों को राहत: यात्रा मार्ग पर ई-चार्जिंग स्टेशन तैयार
    ग्रीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल

    श्रीनगर। चारधाम यात्रा को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए, प्रदेश सरकार ने इस यात्रा सीजन से 25 स्थानों पर ई व्हीकल चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध करा दी है।
    इससे यात्रा में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार चारधाम यात्रा को ग्रीन यात्रा की थीम पर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में परिवहन विभाग (28)और टीएचडीसी (10)के सहयोग से चारधाम यात्रा मार्ग पर 38 ई व्हीकल चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इसमें से यात्रा शुरू होने तक 25 स्टेशन शुरु किए जा चुके हैं, जहां यात्री आसानी से अपने ई व्हीकल को चार्ज करवा रहे हैं। ज्यादातर  स्टेशन जीएमवीएन की प्रापर्टी में स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक स्टेशन पर 60 किलोवाट क्षमता के यूनिवर्सल चार्जर लगाए गए हैं, जिनमें 30-30 किलोवाट की दो चार्जिंग गन शामिल हैं। जीएमवीएन के एमडी विशाल मिश्रा ने बताया कि ग्रीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए मुख्य पड़ावों पर ई-चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की गई है, ताकि यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित हो सकें। अकेले जनपद रुद्रप्रयाग में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित चार जीएमवीएन गेस्ट हाउसों पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की गई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप इस वर्ष चारधाम यात्रा को हरित यात्रा के रूप में आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में यात्रा मार्ग पर ईवी चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि उत्तराखंड को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में भी एक सार्थक कदम साबित होगी। सरकार का उद्देश्य है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण, रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म और हरित पर्यटन को नई दिशा दी जा सके।

    पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री उत्तराखंड
    यहां हैं ई चार्जिंग स्टेशन

    उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मंगलौर, रुड़की, बड़कोट, स्यानाचट्टी, फूलचट्टी, जानकीचट्टी, कौडियाला, श्रीनगर, श्रीकोट, गौचर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, कालेश्वर, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, औली, पांडुकेश्वर बद्रीनाथ, स्यालसौड़, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, घनसाली आदि।

  • राज्य में 4G-5G नेटवर्क विस्तार को मिलेगी नई रफ्तार – मुख्य सचिव

    राज्य में 4G-5G नेटवर्क विस्तार को मिलेगी नई रफ्तार – मुख्य सचिव

    राज्य में मोबाइल नेटवर्क सुधार की दिशा में नई पहल

    देहरादून। राज्य में तेज़ और सुलभ मोबाइल नेटवर्क सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में बीएसएनएल, एयरटेल और जियो नेटवर्क के राज्य स्तरीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक का उद्देश्य राज्य के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक मोबाइल नेटवर्क की पहुँच को बेहतर बनाना और लोगों को निर्बाध डिजिटल सेवाएं प्रदान करना रहा।

    बैठक के दौरान प्रदेश में 4जी और 5जी नेटवर्क की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें नेटवर्क विस्तार के दौरान सामने आ रही विभिन्न बाधाओं और चुनौतियों को चिन्हित कर उनके समाधान के उपायों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने नेटवर्क विस्तार में आ रही समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए यह आश्वासन दिया कि राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि तकनीकी अवरोधों को शीघ्र सुलझाया जा सके और प्रदेश के नागरिकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।

    उन्होंने राज्य और जनपद स्तर पर नेटवर्क संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग समितियों के गठन की आवश्यकता पर बल दिया और इस दिशा में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने निदेशक आईटीडीए को इस कार्य हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया, जिससे नेटवर्क विस्तार कार्यों की निगरानी और समन्वय में एकरूपता बनी रहे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि नेटवर्क विस्तार की नियमित समीक्षा के लिए नोडल अधिकारी स्तर पर प्रत्येक माह दो बार तथा सचिव आईटी स्तर पर प्रति माह एक बैठक आयोजित की जाए, ताकि कार्य की प्रगति का मूल्यांकन और आवश्यक सुधार समय रहते किए जा सकें।

    बैठक में विद्युत आपूर्ति से संबंधित समस्याओं पर भी चर्चा की गई, जिसमें मुख्य सचिव ने यूपीसीएल को निर्देशित किया कि वह भी अपने स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे, जिससे नेटवर्क टावरों की स्थापना और संचालन में आ रही बिजली संबंधी अड़चनों का समाधान शीघ्रता से किया जा सके।

    मुख्य सचिव ने बीएसएनएल को विशेष रूप से निर्देश दिए कि वह राज्य में 4जी सैचुरेशन (विस्तार) के कार्य में तेजी लाए और इसके लिए आवश्यक संसाधनों का समुचित उपयोग करे। इसके साथ ही उन्होंने चारधाम यात्रा मार्गों पर नेटवर्क कवरेज को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि तीर्थयात्रियों को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की संचार समस्या का सामना न करना पड़े।

    उन्होंने यह स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने, तकनीकी ढांचे को सुदृढ़ करने और प्रत्येक क्षेत्र तक तेज़ इंटरनेट की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि सशक्त नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर से न केवल नागरिकों को सुविधा होगी, बल्कि राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

    इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव आईटी नीतेश कुमार झा, निदेशक आईटीडीए नीतिका खंडेलवाल, बीएसएनएल, एयरटेल और जियो के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे। इन सभी अधिकारियों ने न केवल बैठक में भागीदारी निभाई, बल्कि अपने-अपने संस्थानों की ओर से प्रदेश में नेटवर्क विस्तार और तकनीकी मजबूती के लिए अब तक किए गए प्रयासों की विस्तारपूर्वक जानकारी भी साझा की। उन्होंने यह बताया कि किस प्रकार से वे विभिन्न भौगोलिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना करते हुए सेवा विस्तार के लिए कार्य कर रहे हैं।

    इसके साथ ही अधिकारियों ने भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिसमें नेटवर्क कवरेज को और अधिक व्यापक बनाने, दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने तथा 4जी और 5जी सेवाओं की पहुंच को गाँव-गाँव तक ले जाने की योजनाएं शामिल थीं। इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्य सरकार के सहयोग और समन्वय की आवश्यकता को भी उन्होंने रेखांकित किया। इस संवाद से स्पष्ट हुआ कि सभी टेलिकॉम कंपनियाँ राज्य में डिजिटल अधोसंरचना को मजबूत बनाने को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और एक साझा रणनीति के तहत मिलकर कार्य करने के लिए तत्पर हैं।

  • एआई युग में भी मानवता का बने रहना आवश्यक: डीजी

    एआई युग में भी मानवता का बने रहना आवश्यक: डीजी

    जनसंपर्क में एआई की भूमिका पर कार्यशाला
    राष्ट्रीय जनसम्पर्क दिवस – “रिसपॉन्सिबल यूज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस : रोल ऑफ पब्लिक रिलेशन’’ पर परिचर्चा
    पीआरएसआई देहरादून चैप्टर ने कार्यक्रम का आयोजन किया

     

    देहरादून। महानिदेशक सूचना/उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. बंशीधर तिवारी ने कहा कि एआई के दौर में भी मनुष्यता को बनाए रखना जरूरी है। आज के तकनीकी दौर में हम सभी अपनी जिम्मेदारी समझे। राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर सोमवार को देहरादून में पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के देहरादून चैप्टर द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यकाशाला का विषय ‘‘रिसपॉन्सिबल यूज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस : रोल ऑफ पब्लिक रिलेशन’’ रखा गया।
    कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि महानिदेशक सूचना एवं उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, बद्रीकेदार मंदिर समिति के सी.ई.ओ. विजय थपलियाल, अध्यक्ष पी.आर.एस.आई. देहरादून चैप्टर रवि विजारनिया द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

    मुख्य अतिथि बंशीधर तिवारी, महानिदेशक सूचना/उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए. ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज के तकनीकी दौर में हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक का वर्तमान समय में जिस प्रकार से तेजी से विकास हो रहा है, उसमें हम सभी की जिम्मेदारी बन जाती है कि हम मनुष्यता की भावना को सर्वोपरि रखे। एआई तकनीक के उपयोग से समय की बचत होती है, उस समय का उपयोग हम किस प्रकार से करते है, यह भी हम सभी को समझना होगा। सोशल मीडिया के साथ-साथ परिवार एवं समाज से भी जुड़े रहे।

    किसी भी प्रकार की सूचना को आगे बढ़ाने या भेजने से पहले एक बार विचार अवश्य करना होगा कि सूचना सही है या गलत। कोई भी गलत सूचना एक बार प्रसारित हो जाती है, तो उसका प्रभाव व्यक्ति एवं समाज दोनो पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि एआई से कंटेट बनाया जा सकता है, लेकिन उसमें स्वयं के विचारों और अनुभवों का समावेश भी जरूरी है। एआई का जिम्मेदारी के साथ उपयोग, हम सभी का कर्तव्य है और इस बारे में अधिक से अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।

    एआई

    कार्यक्रम में विशेष अतिथि संयुक्त निदेशक, सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय ने कहा कि जब भी नई तकनीक आती है, तो उसकी अपनी चुनौतियां होती है, साथ ही नये अवसर और नई संभावनाएं भी बनती हैं। आज जब सभी जगह ए.आई. की होड सी लगी है, तब हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ए.आई. का किस सीमा तक उपयोग किया जाय। हमें यह भी सोचना होगा कि हम पूरी तरह से ए.आई. पर ही निर्भर न हो जाय, हमें अपनी क्षमता को बनाये रखना है। जनसंपर्क के क्षेत्र में एआई केवल सहयोगी की भूमिका तक ही सीमित रहे। एआई से होने वाले लाभ एवं दुष्परिणाम के संबंध में जनजागरूकता करने की आवश्यकता है।

    कार्यक्रम में न्यूज-18 चैनल के संपादक अनुपम त्रिवेदी ने कहा कि हम सभी को समझना होगा कि विज्ञान सुविधा देता है, तो समस्याएं भी देता है। उन्होंने कहा कि आज ए.आई. का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि ए.आई. के गलत उपयोग के कारण आज फेक न्यूज हम सभी के सामने बड़ी चुनौती है। इसके लिए जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क क्षेत्र में व्यक्तिगत संबंध ही महत्वूपर्ण है, इसमें ए.आई. उतना उपयोगी सिद्ध नही हो सकता है।

    बदरी केदार मंदिर समिति के सी.ई.ओ. विजय थपलियाल ने कहा कि ए.आई. के दौर में हम ए.आई. से सभी कुछ प्राप्त कर सकते है, लेकिन इमोशन नही। इमोशन केवल मनुष्य के पास ही है। उन्होंने कहा कि हमे ए.आई. तकनीक को वरदान या चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा।

    कार्यशाला में तकनीकी विषय विशेषज्ञ के रूप में आकाश शर्मा ने ‘‘जनसंपर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग” विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि ए.आई. हमारा स्थान नहीं ले रहा है, बल्कि हमारे कार्य को अधिक प्रभावशाली बना रहा है। जनसंपर्क लोगों का काम है, और ए.आई. सिर्फ उसे तेज और सटीक बनाने में हमारी मदद करता है। एआई के विभिन्न टूल्स की जानकारी दी।

    ChatGPT : प्रेस रिलीज, सोशल मीडिया पोस्ट और नारे आदि जल्दी और रचनात्मक तरीके से तैयार करने वाला AI लेखन सहायक।
    2. Canva AI –
    पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया ग्राफिक्स आदि को डिज़ाइन करने का आसान और तेज़ टूल जिसमें ऑटोमैटिक लेआउट और डिजाइन सजेशन होता है।
    3. Google Forms –
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    लाइव इवेंट्स के दौरान ऑडियंस से इंटरेक्टिव पोल और सवाल-जवाब के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मंच।
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    6. Buffer / Hootsuite –
    सोशल मीडिया पोस्ट को शेड्यूल करने और कई प्लेटफॉर्म पर एकसाथ पब्लिश करने के लिए प्रयुक्त टूल्स।
    7. Meltwater / Brand24 –
    ऑनलाइन मीडिया और सोशल मीडिया पर ब्रांड या अभियान की निगरानी और विश्लेषण के लिए प्रयुक्त निगरानी टूल्स।
    8. Talkwalker –
    सोशल मीडिया और न्यूज़ पर ब्रांड की मौजूदगी और भावनात्मक विश्लेषण (sentiment analysis) करने वाला टूल।
    Google Alerts –
    किसी भी कीवर्ड या विषय पर नई खबर आते ही ईमेल सूचना देने वाला मुफ्त टूल।
    सामाजिक मीडिया प्रबंधन (Social Media Management)
    9. Later –
    Instagram, Facebook आदि के लिए पोस्ट शेड्यूलिंग और कंटेंट प्लानिंग टूल।
    10. SocialBee –
    कई सोशल मीडिया चैनलों पर नियमित रूप से सामग्री प्रकाशित करने और रीपोस्ट करने का टूल।

    1. Mailchimp – ईमेल न्यूज़लेटर और अभियान भेजने के लिए सबसे लोकप्रिय और सहज टूल।
      1. Hunter.io –
        प्रभावशाली व्यक्तियों या पत्रकारों के ईमेल ढूंढने और cold outreach के लिए उपयोगी टूल।

    पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष श्री रवि बिजारनिया ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनिल वर्मा द्वारा किया गया।
    इस अवसर पर पी.आर.एस.आई. देहरादून चैप्टर के सचिव अनिल सती, कोषाध्यक्ष सुरेश चन्द्र भट्ट, सदस्य सुधाकर भट्ट, वैभव गोयल, राकेश डोभाल, अजय डबराल, दीपक शर्मा, प्रशांत रावत, ज्योति नेगी, शिवांगी, मनमोहन भट्ट, संजय सिंह, प्रताप सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

  • किसानों की किस्मत संवारेंगे मिलेट्स, कीवी और ड्रैगन फ्रूट

    किसानों की किस्मत संवारेंगे मिलेट्स, कीवी और ड्रैगन फ्रूट

    राज्य के तीन लाख से अधिक किसानों की बदलेगी किस्मत
    मिलेट्स, कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन दे रही है सरकार

    देहरादून। राज्य सरकार किसानों को परम्परागत खेती के बजाय नगदी फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में राज्य कैबिनेट ने बीते दिनों मिलेट्स पॉलिसी, कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट खेती की योजना पर मुहर लगाई है, जिसमें कुल मिलाकर 3 लाख 17 हजार से अधिक किसान लाभांवित होंगे।

    उत्तराखण्ड स्टेट मिलेट्स पालिसी के तहत राज्य सरकार ने 2030-31 तक 11 पर्वतीय जिलों के लिए कुल 134.89 करोड रुपए की कार्ययोजना पर मुहर लगाई है। इसमें मण्डुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना उत्पादक किसानों को बीज एंव जैव उर्वरक पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, साथ ही कृषको को मिलेट की बुवाई करने पर पंक्ति बुवाई पर रु0 4000 प्रति हैक्टेयर और सीधी बुवाई पर रु0 2000 प्रति हैक्टेयर की प्रोत्साहन धनराशि दी जायेगी। मिलेट पॉलिसी के तहत प्रत्येक वर्ष विकासखण्ड स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए 02 कृषक / समूह को पुरस्कार किया जायेगा। साथ ही प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर 01 मिलेट प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की जायेगी। योजना के तहत 3 लाख से अधिक किसानों को लाभ देने का लक्ष्य है। सरकार इसके तहत श्रीअन्न फूड पार्क की स्थापना भी करेगी।

    इसी तरह उत्तराखण्ड कीवी नीति के तहत वर्ष 2030-31 तक राज्य सरकार कीवी उद्यान स्थापना के लिए कुल लागत 12 लाख प्रति एकड़ का 70 प्रतिशत राजसहायता प्रदान करेगी। जिसमें 30 प्रतिशत लाभार्थी का अंश होगा। यह नीति भी हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर को छोड़कर राज्य के शेष 11 जनपदों में लागू होगी। कीवी पालिसी के अन्तर्गत कुल रु0 894 करोड की कार्ययोजना तैयार की गई है, नीति के तहत 3500 हैक्टेयर क्षेत्रफल को आच्छादित किये जाने का लक्ष्य है, जिसमे करीब 17500 किसान लाभान्वित होंगे। अभी राज्य के लगभग 683 हैक्टेयर के क्षेत्रफल में 382 मैट्रिक टन कीवी का उत्पादन किया जा रहा है। इसी तरह ड्रैगन फ्रूट खेती योजना के उधमसिंहनगर, हरिद्वार, नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, देहरादून, टिहरी में ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को आधुनिक / वैज्ञानिक पद्यति के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा।

    योजना के तहत वर्ष 2027–28 तक15 करोड़ की धनराशि खर्च की जाएगी। जिससे 450 किसान लाभांवित होंगे। प्रस्तावित योजना में उद्यान स्थापना के लिए 08 लाख प्रति एकड़ का 80 प्रतिशत राजसहायता का प्राविधान है एवं शेष 20 प्रतिशत कृषक द्वारा वहन किया जाएगा। वर्तमान में राज्य के लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल में 70 मै०टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन किया जा रहा है।