बच्चों के साथ बिताया आत्मीय समय, सफलता के दिए मंत्र
रामनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार रविवार को रामनगर के अहाना रिसॉर्ट हैलीपेड पहुँचे।
इस दौरान हैलीपैड पर भारी संख्या में क्षेत्र के बच्चे एकत्रित हुए उन्हें देखते ही स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बच्चों के बीच स्वयं पहुंच गए। मुख्यमंत्री के बच्चों के पास पहुंचते ही बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने मुख्यमंत्री के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाईं और उनसे आत्मीय संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ कुछ समय बिताते हुए उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को जीवन में अनुशासन, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरंतर प्रयास, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान बच्चों ने भी मुख्यमंत्री के साथ बिताए इन यादगार पलों का भरपूर आनंद लिया और उनके साथ सेल्फी व समूह फोटो खिंचवाए।
इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र से आए लोगों की समस्याओं को भी सुना तथा उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देश दिए।
रामनगर पंहुचने पर मंडलायुक्त दीपक रावत, आईजी निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ.मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय, बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, राकेश नैनवाल, संजय डॉर्बी, इंदर रावत आदि ने स्वागत किया।
टिकट नहीं मिला तो भाजपा नेत्री निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव
यमकेश्वर। लंबी खामोशी के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री विजया बड़थ्वाल ने यमकेश्वर विधानसभा से चुनावी अखाड़े में उतरने का ऐलान कर दिया दिया है।
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष , पूर्व अध्यक्ष, उत्तराखंड महिला आयोग तथा यमकेश्वर से तीन बार विधायक रह चुकीं विजया बड़थ्वाल ने हाल ही में दिल्ली,लखनऊ व देहरादून में पार्टी नेताओं से मिलकर अपना दावा ठोक दिया।
हाल ही में उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लगातार मुलाकातें की हैं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष, गढ़वाल सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी, तथा लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल से हुई मुलाकातें विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात
2002,2007 व 2012 में यमकेश्वर विधानसभा से चुनाव जीत चुकी विजया बड़थ्वाल की सक्रियता व दावे से भाजपा के अंदर हलचल मची हुई है।
गौरतलब है कि 2017 में भाजपा ने विजया बड़थ्वाल का टिकट काटकर पूर्व सीएम जनरल खंडूड़ी की बेटी ऋतु खंडूड़ी को यमकेश्वर से टिकट देकर विजया बड़थ्वाल समर्थकों को करारा झटका दिया था।
बाद में भरपाई के लिए विजया बड़थ्वाल को 2018 में महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। 2021 में आयोग का कार्यकाल खत्म होने के बाद कुसुम कंडवाल को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। विजया बड़थ्वाल का कार्यकाल रिपीट नहीं किया गया। और न ही 2022 का विधानसभा चुनाव का ही टिकट दिया गया।
2022 में भाजपा ने एक बार फिर विजया को दरकिनार करते हुए कांग्रेस से पार्टी में शामिल हुई रेणु बिष्ट को यमकेश्वर से चुनाव लड़वा दिया। और ऋतु खण्डूड़ी को शिफ्ट कर कोटद्वार से चुनाव लड़ाया गया। विजया बड़थ्वाल के समर्थक एक बार फिर मन मसोस कर रह गए।
हालिया, इन उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़ी हुई जनसंपर्क गतिविधियाँ, क्षेत्रीय दौरे और जनता के बीच लगातार सक्रिय उपस्थिति ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
बीएल संतोष से भेंट
खण्डूड़ी व निशंक सरकार में मंत्री रहीं विजया बड़थ्वाल ने पार्टी महासचिव बीएल संतोष व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली में मुलाकात कर चुनावी दावा पेश किया है। साथ ही अन्य नेताओं से मिलकर उनका समर्थन भी जुटाया है।
इधऱ, यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद भाजपा विधायक रेणु बिष्ट के खिलाफ माहौल देखा जा रहा है। वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय विधायक रेणु बिष्ट लगातार विपक्ष के निशाने पर है। सीबीआई जांच की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी मर्डर अभी भी चर्चा के केंद्र में है। सूत्रों के मुताबिक जारी पार्टी सर्वे के परिणाम को देखते हुए भाजपा नेतृत्व यमकेश्वर में एक बार फिर टिकट बदलने के मूड में है।
क्षेत्र की ताजा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कोटद्वार नगर निगम के मेयर व पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत,पूर्व ब्लाक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा व बीकेटीसी के चर्चित अध्यक्ष हेमंत द्वेदी का नाम भी दावेदारों में शुमार है।
लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल
इधऱ, पूर्व कैबिनेट मंत्री विजया बड़थ्वाल की जारी भागदौड़ ने अन्य दावेदारों की सांसें फुला दी है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो विजया बड़थ्वाल निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। उनकी इस मंशा को भांपते हुए कांग्रेस व उक्रांद भी विजया बड़थ्वाल का मन टटोल रही है…
देहरादून। विश्व विख्यात निशानेबाज स्वर्गीय जसपाल राणा की माताजी श्रीमती श्यामा देवी का 28 जून को सायं 8:00 बजे दिल्ली के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
संयोगवश, आज ही के दिन 28 जून 1976 को सायं 8:00 बजे उत्तरकाशी में जसपाल राणा का जन्म हुआ था। ठीक 50 वर्ष बाद उसी दिन और उसी समय पर उनकी माताजी ने अंतिम सांस ली।
गौरतलब है कि बीते 12 जून को भारत के दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में को नई दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में निधन हो गया। जर्मनी से लौटते समय दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जसपाल के निधन के बाद उनकी माता जी की तबियत गम्भीर रूप से खराब होने पर उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ जनप्रतिनिधि नारायण सिंह राणा की धर्मपत्नी एवं प्रख्यात भारतीय निशानेबाज, पद्मश्री स्व. जसपाल राणा की माताजी श्रीमती श्यामा देवी राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत पुण्यात्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति एवं समस्त परिजनों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की कामना की है
अंतिम चरण में पहुंचीं एनएचएआई की दो प्रमुख परियोजनाएं
स्पर टू हरिद्वार और हरिद्वार बाईपास परियोजनाएं अंतिम चरण में, श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए तेज़ी से चल रहा निर्माण कार्य
एनएचएआई द्वारा विकसित की जा रही 51 किलोमीटर लंबी छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर टू हरिद्वार परियोजना का लगभग 92 प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ
यह कॉरिडोर दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ते हुए हलगोया मुस्तकम से प्रारंभ होकर भड़ेड़ी राजपूताना स्थित मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-58 तक पहुंचेगा
देहरादून। आगामी अर्धकुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) हरिद्वार में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने के लिए तेजी से कार्य कर रहा है। हरिद्वार में निर्माणाधीन स्पर टू हरिद्वार और हरिद्वार बाईपास (पैकेज-1) परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद न केवल शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करेंगी, बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को भी सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी।
एनएचएआई द्वारा विकसित की जा रही 51 किलोमीटर लंबी छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर टू हरिद्वार परियोजना का लगभग 92 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 46 किलोमीटर छह-लेन मार्ग का निर्माण पूरा किया जा चुका है। यह कॉरिडोर दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ते हुए हलगोया मुस्तकम से प्रारंभ होकर भड़ेड़ी राजपूताना स्थित मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-58 तक पहुंचेगा। परियोजना के पूर्ण होने से दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश से पहले ही एक वैकल्पिक, तेज और निर्बाध मार्ग उपलब्ध होगा।
इसी प्रकार 15 किलोमीटर लंबे हरिद्वार बाईपास (पैकेज-1) का लगभग 77 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा अब तक 9 किलोमीटर फोर-लेन सड़क का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। यह बाईपास बहादराबाद से प्रारंभ होकर एनएच-34 पर चंडी देवी मंदिर के निकट समाप्त होगा। इसके संचालन में आने के बाद हर की पैड़ी, चंडी चौक, शंकराचार्य चौक सहित शहर के भीतरी हिस्सों में यातायात का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम होने की उम्मीद है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों को जाम से राहत मिलेगी।
इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद हरिद्वार की यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में हरिद्वार आने वाले अधिकांश वाहन शहर के भीतर से होकर गुजरते हैं, जिससे सप्ताहांत, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग जाता है। हरिद्वार में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई सड़क अवसंरचना को चरणबद्ध तरीके से सुदृढ़ कर रहा है। स्पर टू हरिद्वार परियोजना बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश से पहले ही वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगी, जबकि हरिद्वार बाईपास शहर के भीतर अनावश्यक यातायात दबाव को कम करेगा। इससे स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं सभी को कम समय में सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, हरिद्वार–मुजफ्फरनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुरकाजी, फलौदा, मंगलौर, बहादराबाद और ज्वालापुर जैसे भीड़भाड़ वाले जंक्शनों पर फ्लाईओवर, व्हीक्युलर अंडरपास (वीयूपी) तथा सर्विस रोड का निर्माण भी किया जा रहा है। इन कार्यों के पूरा होने से दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुरक्षा बढ़ेगी, चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा और आगामी अर्धकुंभ के दौरान वाहनों का संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा।
एनएचएआई द्वारा पूर्व में विकसित मुजफ्फरनगर–नेपाली फार्म चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग पहले से ही संचालन में है, जो हरिद्वार, ऋषिकेश और चारधाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं एवं यात्रियों को बेहतर और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है। आगामी अर्धकुंभ के दौरान भी यह मार्ग यातायात के दबाव को कम करने और वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यातायात को और अधिक सुरक्षित एवं स्मार्ट बनाने के लिए एनएचएआई
हरिद्वार–मुजफ्फरनगर, स्पर टू हरिद्वार तथा हरिद्वार बाईपास मार्गों पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) भी लागू कर रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से यातायात की रियल-टाइम निगरानी, सड़क उपयोगकर्ताओं को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने, यातायात नियमों के अनुपालन पर नजर रखने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
एनएचएआई का लक्ष्य है कि अर्धकुंभ-2027 से पहले इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूर्ण कर हरिद्वार में आधुनिक, सुरक्षित और सुगम सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराया जाए। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल श्रद्धालुओं को जाम से राहत मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलेगी।
वीआईपी मेहमानों पर ही नहीं, सदस्यों पर भी खूब उड़ा दान-चढ़ावे का पैसा
देहरादून। अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आज नया खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति के कुछ सदस्यों ने एक वर्ष से कम अवधि में टीए/डीए के नाम पर अनाप-शनाप तरीके से लाखों रूपये का भुगतान लिया है। उन्होंने श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन के दुरूपयोग पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मीडियाकर्मियों से बातचीत में सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने बताया कि बीकेटीसी ने सूचना अधिकार के तहत जानकारी दी है कि सदस्यों को मंदिर एक्ट की धारा- 26 (च) के तहत समिति के कार्यकलापों से संबंधित कार्य के लिए यात्रा करने पर पारिश्रमिक या यात्रा भत्ते का प्रावधान है। सदस्यों को विधायकों के समान दैनिक भत्ते की राशि छः हजार रूपये और मार्ग व्यय के रूप में 4 रूपये प्रति किमी दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसका तात्पर्य यह है कि जब कोई सदस्य मंदिर समिति से संबंधित कार्य करेगा तो ही उसे यात्रा भत्ता व दैनिक भत्ता प्राप्त होगा। यानी, बीकेटीसी बोर्ड की बैठकों और विभिन्न उप समितियों की बैठकों में शामिल होने पर ही भत्ते का प्रावधान है। बीकेटीसी बोर्ड के वर्तमान सदस्यों का मनोनयन विगत वर्ष जून माह में हुआ था। मगर कुछ सदस्यों द्वारा आठ माह की अवधि में अनाप-शनाप तरीके से भुगतान लिया गया है। जबकि इस अवधि में बोर्ड की एक ही बैठक आहूत हुई थी। मगर उप समितियों की बैठकें और धामों के व्यक्तिगत भ्रमण को सरकारी कार्यक्रम दिखा कर भत्ते ले लिए गए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इस वर्ष फरवरी में बसंत पंचमी पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि निर्धारित करने के लिए नरेंद्रनगर राजमहल में जो कार्यक्रम आयोजित हुआ था, उसमें अधिकांश सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दिखा कर भुगतान प्राप्त किया है। जबकि यह कार्यक्रम टिहरी राजपरिवार द्वारा आयोजित किया जाता है और इसमें सदस्यों की उपस्थिति से मंदिर का कोई हित नहीं जुड़ा हुआ है।
इसी प्रकार धामों के कपाट बंद होने के अवसरों पर भी कुछ सदस्यों द्वारा अपनी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान लिया गया है। कुछ सदस्यों के केदारनाथ दौरे के हेलीकॉप्टर किराए का भुगतान भी मंदिर के पैसों से किया गया है।
उन्होंने बताया कि एक सदस्य डॉ विनीत पोस्ती द्वारा केदारनाथ, बदरीनाथ व तुंगनाथ के कपाट बंद होने और मद्महेश्वर मेले में शामिल होने पर भत्ते लिए गए। एक अन्य सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण ने बदरीनाथ, केदारनाथ, तुंगनाथ के साथ ही मध्यमहेश्वर की यात्रा कर भुगतान प्राप्त किया। पुष्पाण की मध्यमहेश्वर यात्रा की पत्रावली पर लेखा अनुभाग ने आपत्ति लगाई कि बिल अध्यक्ष द्वारा सत्यापित नहीं है। इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि बीकेटीसी के पदाधिकारियों द्वारा जिस प्रकार से श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन को व्यक्तिगत स्वार्थों में खर्च किया जा रहा है, वह घोर आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि मंदिर एक्ट में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत सदस्यों को भी लोकसेवक की परिधि में रखा गया है। इसलिए मंदिर के धन का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि विगत दिनों सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मंदिर के धन से वीआईपी श्रद्धालुओं की आवभगत का मुद्दा भी उठाया गया था, जिस पर उठा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। नेगी ने बीकेटीसी के एक उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण द्वारा अपनी पत्नी को अपने साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखा कर बारह हजार रूपये और रुद्रप्रयाग में अपने घर पर कार्यालय दिखा कर पच्चीस हजार रूपये प्रतिमाह भुगतान लेने का मामला उजागर किया गया था। इसके अलावा मंदिर कोष से ग्यारह लाख रूपये केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों को बांटने का खुलासा भी किया था।
₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास
किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं
रुद्रपुर । कृषि विभाग द्वारा आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी तथा जनपद प्रभारी मंत्री एवं परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर ₹46.32 करोड़ की लागत से निर्मित 9 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा ₹323.34 करोड़ की लागत के 32 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। इस प्रकार कुल ₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब खेत बचेंगे तो जमीन बचेगी, जमीन बचेगी तो पृथ्वी बचेगी और पृथ्वी बचेगी तो जीवन सुरक्षित रहेगा। उन्होंने किसानों से मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि भूमि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धरती माता है, जिसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री का दायित्व किसानों के प्रथम सेवक के रूप में कार्य करना है तथा किसानों की सेवा ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज चावल उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है तथा कृषि क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश प्रत्येक चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निकट भविष्य में हॉर्टिकल्चर हब के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा। इस दिशा में भारत सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सेब, अखरोट एवं बादाम सहित उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के उत्पादन हेतु मुक्तेश्वर में ₹100 करोड़ की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। बड़ी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹4 करोड़ तथा छोटी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹2 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चौबटिया (अल्मोड़ा) में ₹15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के सहयोग से उत्तराखंड में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹15 करोड़ की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य हेतु ₹65 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्रदेश में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए ₹104 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जा रही है, जिससे किसानों को मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सकेगी तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिकाधिक लाभ लेने तथा मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देकर भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित किया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखी जा सकती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ किसान, स्वस्थ मिट्टी तथा स्वस्थ कृषि व्यवस्था ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का जनआंदोलन है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना तथा डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। यदि मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होगा तो कृषि उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को ₹3 लाख तक का ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। नहरों से सिंचाई की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जा रही है तथा फार्म मशीनरी बैंक योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सशक्त बनाने के लिए रेनफेड फार्मिंग परियोजना भी स्वीकृत की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फल, सब्जी एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। पॉलीहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, सीए स्टोरेज तथा मेगा फूड पार्क जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार योजनाएं एवं संसाधन उपलब्ध करा सकती है, किंतु कृषि क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसानों से मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने, प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि का संरक्षण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुए घेरबाड़ के लिए ₹65 करोड़, जैविक खेती के लिए ₹10 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराने तथा मंडुवा एवं झंगोरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने का अनुरोध किया।
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, उत्तम दत्ता, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मनोज पाल, सचिव डॉ. एस.एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, पंकज उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कृषक एवं आमजन उपस्थित रहे।
पंतनगर। पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित दो दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वे हरित क्रांति की पावन भूमि पंतनगर में आकर धन्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय भारतीय कृषि के इतिहास का गौरवशाली केंद्र है, जिसने देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि उद्यमी तथा उत्कृष्ट मानव संसाधन प्रदान कर कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश ही नहीं, बल्कि विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।
चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय को परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगम बताते हुए कहा कि देश आज लगभग 377 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। देश के अन्न भंडार पूरी तरह भरे हुए हैं तथा चावल उत्पादन में भारत, चीन को पीछे छोड़कर विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि गेहूं का उत्पादन भी अधिशेष है तथा भारतीय गेहूं एवं बासमती चावल की मांग विश्वभर में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में पंतनगर विश्वविद्यालय का योगदान अतुलनीय है और इसलिए वे इस पावन भूमि को बार-बार नमन करते हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में धरातल से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है और उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने पंतनगर में विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल विद्यार्थियों से नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य से संवाद किया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे।
उन्होंने कहा कि वे पंतनगर सिखाने नहीं, बल्कि सीखने आए हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय ने केवल डिग्रियां नहीं बांटीं, बल्कि देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता तथा कृषि उद्यमी दिए हैं, जिन्होंने भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। बढ़ता तापमान, गिरता भूजल स्तर, बदलता मौसम, मिट्टी का बिगड़ता स्वास्थ्य तथा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग जैसी समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से ही संभव है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के क्षेत्र में देश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने में कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि उत्पादों से संबंधित जितने भी अंतरराष्ट्रीय समझौते किए गए हैं, वे किसानों और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर किए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प तभी साकार होगा, जब कृषि विकसित होगी और किसान समृद्ध होंगे।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि यदि प्रतिदिन पौधा लगाना संभव न हो, तो कम से कम अपने जन्मदिन पर अवश्य एक पौधा लगाएं, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर बल देते हुए फल एवं विविध कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कृषि उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों एवं विशेषज्ञों की समिति बनाकर ठोस सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि उन पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को राज्य के विकास से जोड़ते हुए कृषि, अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं के मार्गदर्शन में सक्रिय योगदान दें।
मुख्यमंत्री ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित पूर्व छात्र कार्यशाला “ब्रेन 3.0 (बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग)” को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की हरित क्रांति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस विश्वविद्यालय ने देश को ऐसे वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी और कृषि विशेषज्ञ दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि “ब्रेन 3.0” केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ने वाला प्रभावी मंच है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकले विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। पूर्व छात्र विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी शक्ति और उसकी गौरवशाली परंपरा के सशक्त प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उस सफलता और अनुभव को समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के साथ साझा करना।
मुख्यमंत्री ने पूर्व छात्रों से युवाओं के लिए मेंटरशिप कार्यक्रम चलाने, अनुसंधान कार्यों में सहयोग देने, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने तथा शिक्षा जगत और उद्योगों के बीच मजबूत सेतु बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से परिवर्तन का नेतृत्व करने वाला युवा है। ऐसे में अनुभवी पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन युवाओं को नई दिशा और नई ऊंचाइयां प्रदान कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि जैसी आधुनिक तकनीकों का युग है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप विश्वविद्यालयों और पूर्व छात्रों को भी अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बनानी होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय कृषि आज छोटे एवं बिखरे खेतों, जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान, युवाओं के पलायन, सीमित बाजार पहुंच तथा जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सामूहिक सहभागिता से संभव है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, डिजिटल मार्केटिंग तथा कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में किसानों और युवाओं का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास है, जिसमें गांव, गरीब, किसान, महिलाएं और युवा सभी समान रूप से सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई स्टार्टअप नीति, कौशल विकास कार्यक्रमों और नवाचार आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है। विशेष रूप से कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, ड्रोन तकनीक और कृषि आधारित स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजकर अपने नवाचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय और उसके पूर्व छात्रों का सहयोग इस अभियान को और अधिक गति देगा।
उन्होंने पूर्व छात्रों से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड को केवल अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि के रूप में न देखें, बल्कि उसके विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझें और जहां भी कार्यरत हों, अपने ज्ञान एवं अनुभव का एक हिस्सा उत्तराखंड के विकास के लिए अवश्य समर्पित करें।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र परिवार आने वाले वर्षों में न केवल विश्वविद्यालय के विकास, बल्कि उत्तराखंड और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इससे पहले, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर संग्रहालय एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ धान की फसल की रोपाई भी की। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हरित क्रांति की जननी पंतनगर विश्वविद्यालय में उपस्थित सभी अतिथियों एवं पूर्व छात्रों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद हमारी कृषि भूमि अवश्य कम हुई है, लेकिन कृषि उत्पादन में 3 लाख टन की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय को हेरिटेज विश्वविद्यालय घोषित किए जाने का अनुरोध किया।
पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, सचिव डॉ. एस. एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, कुलसचिव दीपा विनय सहित अनेक अधिकारी एवं पूर्व छात्र उपस्थित रहे।
राज्य बनने के बाद पहली बार पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली का निर्यात
पिथौरागढ़ की तीन सहकारी समितियों ने किया था प्रोडक्शन
आने वाले दिनों में 30 टन मछली सप्लाई करने की तैयारी
देहरादून। राज्य निर्माण के बाद पहली बार उत्तराखंड की मछली इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची हैं। पिथौरागढ़ जिले की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को पांच मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं। अच्छी खबर ये भी है कि उत्तराखंड आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछलियों के निर्यात की तैयारी कर रहा है।
राज्य सचिवालय के मीडिया सेंटर में शुक्रवार को मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रेस काॅफ्रेंस में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला एवं मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियों ने ये मछलियां तैयार की थीं। कोल्ड-चेन बनाए रखते हुए मछली को गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां प्रसंस्करण के बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका सफलतापूर्वक निर्यात किया गया। इससे 33 मत्स्य पालकों को लगभग ₹23.50 लाख की आय प्राप्त हुई है।
कैबिनेेट मंत्री के अनुसार-उत्तराखंड के इस पहले निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग एवं परिवहन के लिए ₹5.40 लाख की गैप फंडिंग सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं हितधारकों से स्थापित संपर्को का यह सकारात्मक परिणाम है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य बाजारों में भी निर्यात की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है। इस क्रम में आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछली का निर्यात विदेशों में किए जाने की तैयारी की जा रही है।
धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खोलने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
इस संबंध में धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार-मत्स्य पालकों को विपणन सहायता उपलब्ध कराने हेतु वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ एमओयू किया गया, जिसके अंतर्गत अब तक ₹2.10 करोड़ मूल्य की 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।
मत्स्य क्षेत्र का दायरा बढ़ा, निरंतर हो रही प्रगति
राज्य में मत्स्य क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा है। विभागीय मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2022 तक जहां राज्य में मात्र 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं। मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2012-17 में जहां मात्र दो प्रतिशत थी, वह बढ़कर वर्ष 2022-26 में 11 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2026-27 में राज्य अंतर्गत 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य लगभग ₹165 करोड़ है।
विभाग का बजट भी बढ़ा, नौकरी के अवसर भी
बहुगुणा के अनुसार, मत्स्य विभाग का वार्षिक बजट वर्ष 2021-22 में ₹55.76 करोड़ से बढ़ कर वर्ष 2026-27 में ₹261.41 करोड़ हो गया है। पिछले चार वर्षों में मत्स्य पालन क्षेत्र में 5,646 मत्स्य पालकों हेतु स्वरोजगार के अवसर सृजित किए गए। विभाग में 33 नियमित नियुक्तियां की गई हैं।
सरकार की योजनाएं हो रहीं गेम चेंजर साबित
मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि सरकार के स्तर पर शुरू की गईं नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे है। मत्स्य क्षेत्र वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था के तीव्र गति से विकसित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक बन चुका है। साथ ही, ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रेस काॅफ्रेंस में निदेशक मत्स्य चंद्र सिंह धर्मशक्तू भी उपस्थित रहे।
सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से डीएम और एसएसपी से की मुलाकात
देहरादून। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने देहरादून के डीएम और एसएसपी से मुलाकात की और साम्प्रदायिक घृणा फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। दोनों अधिकारियों को बताया गया कि देहरादून जिले में 6 या 7 लोग ऐसे हैं, जो लगातार घृणा फैला रहे हैं। उन पर कार्रवाई नहीं की गई तो सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा।
डीएम आशीष चौहान का कहना था कि उन्हें पहली बार देहरादून में नियुक्ति मिली है, यहां के इस तरह के तत्वों के बारे में वे जानकारी लेंगे और पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहेंगे। एसएसपी प्रमेन्द्र डोवाल ने कहा कि इनमें से एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज है और जांच की जा रही है, बाकी लोगों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। प्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह के लोग कोटद्वार से लेकर बैरागीवाला तक वीडियो फुटेज में साफ तौर पर नफरत बयानबाजी करते देखे गये हैं, लेकिन उनके खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज करने केे बजाय अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाता है।
डीएम और एसएसपी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में बैरागीवाला में विनोद कुमार के सभी हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। लेकिन अफसोस जताया गया है कि इस घटना के बाद बैरागीवाला में कुछ साम्प्रदायिक तत्वों ने नफरत फैलाने की कोशिश की। यहां तक कि पुलिस पर भी पथराव किया गया। इस घटना की आड़ में घृणा भरे वक्तव्य दिये गये और नफरती भाषा इस्तेमाल की गई। कहा गया कि ललित शर्मा नाम के व्यक्ति ने तो सारी सीमाएं लांघ हुए यहां तक कह दिया कि मुस्लिम महिलाओं के पेट में जो बच्चे हैं, उन्हें भी निकाल कर मारने का प्रयास करेंगे. इसके अलावा मस्जिदों पर खुद ही बुलडोजर चलाने जैसी बातें भी उक्त व्यक्ति ने कही। यह भाषा अत्यंत आपत्तिजनक है और इनके इरादे बेहद आपराधिक हैं।
ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को भी याद दिलाया गया था, जिसमें कोर्ट ने उत्तराखंड के मामले में ही टिप्पणी करते हुए कहा था कि हेट स्पीच के मामले में पुलिस को शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिए और स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। लेकिन हाल फिलहाल की घटनाएं बताती हैं कि नफरतियों के चेहरे साफ होते हुए भी अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं।
प्रतिनिधि मंडल में उत्तराखंड महिला मंच के कमला पंत, निर्मला बिष्ट, विमला कोली मंजू बलौदी, उत्तराखंड इंसानियत मंच के हरिओम पाली, त्रिलोचन भट्ट, भारत ज्ञान-विज्ञान समिति के कमलेश खंतवाल, चेतना आंदोलन के राजेन्द्र शाह, सीपीआई माले के इंद्रेश मैखुरी, सीपीएम के राजेन्द्र पुरोहित, कांग्रेस की सुजाता पॉल, पवन क्षेत्री के साथ ही तलाफत हुसैन, मनीष, अलमाशुद्दीन सिद्किी आदि कई लोग मौजूद थे।
देहरादून। प्रदेश में सभी मुख्य नदियों के जलस्तर की सिंचाई विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है जनपद मुख्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए गए हैं।
मानसून के दौरान सड़कों के अवरुद्ध होने से बड़ी संख्या में लोग मार्ग खुलने की घंटों प्रतीक्षा करते हैं। ऐसे में हमें सजग रहना चाहिए और सड़कों को खोलने में तत्परता दिखाने के साथ-साथ वैकल्पिक मार्ग को भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यही लक्ष्य है कि हम पूरी तरह से समर्पित होकर कार्य करें और मानसून के दौरान यात्रा में जो अवरोध आते हैं उसका तत्काल समाधान हो।
उक्त बात प्रदेश के लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को यमुना कालोनी, स्थित सिंचाई भवन सभागार में उपस्थित लोक निर्माण एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ मानसून सीजन की तैयारीयों को लेकर हुई समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कही। उन्होंनेविभागीय अधिकारियों से कहा कि यदि हम सजगता के साथ काम करेंगे तो मानसून का सीजन बिना किसी अवरोध के ठीक से निकल जायेगा। समीक्षा बैठक के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि सभी जनपद मुख्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए गए हैं तथा देहरादून में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के साथ ही वह 24×7 क्रियाशील है। केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के माध्यम से सभी जनपदों से प्रतिदिन नदियों के जलस्तर तथा वर्ष के आंकड़े प्राप्त किया जा रहे हैं संवेदनशील स्थानों पर निरंतर निगरानी की जा रही है।
सिंचाई मंत्री महाराज ने कहा कि राज्य में कुल 113 बाढ़ चौकियां 15 जून से पूर्व जिला प्रशासन के सहयोग से स्थापित कर ली गई हैं तथा मानसून में बाढ़ तथा जल भराव की दृष्टि से 304 संवेदनशील स्थलों का भी चिन्हिकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि मानसून से पूर्व नदियों में बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों का चैनेलाइजेशन का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। राज्य के विभिन्न शहरों में ड्रेनेज की समस्या के निदान हेतु GIS based Strom water master drainage plan तैयार किए गए हैं तथा जनपद हरिद्वार के भगवानपुर इंडस्ट्रियल एरिया में ड्रेनेज कार्य पूर्ण कर लिया गया है। सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन जलाशयों के बांधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है एवं उचित स्थलों पर बोल्डर, आर.बी.एम. एवं रेट की व्यवस्था आपात स्थिति हेतु सुनिश्चित की गई है तथा जलाशयों पर वॉयरलैस स्टेशन भी संचालित किया जा रहे हैं।
लोनिवि मंत्री सतपाल महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मानसून के दौरान यदि कोई सड़क बंद होती है तो उसकी पूर्व सूचना लोगों को पहले ही पूर्ववर्ती स्टेशन पर मिल जानी चाहिए ताकि वह वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग कर अपने गंतव्य तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि मानसून सीजन को देखते हुए प्रदेश में सभी सड़कों के उचित रखरखाव के निर्देश विभाग को दिए गए हैं सड़कों के पैच वर्क के तहत 3946 पैच वर्क में से विभाग ने लक्ष्य से अधिक 3968 पैच वर्क पूर्ण कर लिये हैं। 1199 ऐसी सड़के हैं जो हर सीजन में प्रभावित होती हैं उनके वैकल्पिक मार्गों को तैयार रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। सड़कों पर जेसीबी की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
समीक्षा बैठक में लोनिवि के अपर सचिव विनीत कुमार, महावीर चौहान, अपर सचिव सिंचाई गरिमा रौंकली, लोनिवि के प्रमुख अभियंता रमेश चंद्र शर्मा एवं सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष कुमार पाण्डेय सहित दोनों विभागों के अनेक अधिकारी उपस्थित थे। इस मौके पर जनपद मुख्यालय पर स्थित लोनिवि एवं सिंचाई विभाग के अधिकारी भी बैठक में वर्चुअल शामिल हुए।