राठौर जेल से बाहर, ऊर्जा निगमों के कथित भ्रष्टाचार पर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

एक दूसरे के कच्चे चिठ्ठे खोल रहे
उर्मिला-आरती व ध्यानी

रिहाई के बाद राठौर पर टिकी निगाहें

हाईकोर्ट की सख्ती और दून अदालत की राहत: उत्तराखंड के दो चर्चित मामलों में बड़े घटनाक्रम

सत्ता, सिस्टम और अदालत: ऊर्जा निगम जांच पर हाईकोर्ट सक्रिय, राठौर मामले में राहत

नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और एक बड़े विभाग से जुड़े दो चर्चित मामलों में गुरुवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। एक ओर नैनीताल हाईकोर्ट ने ऊर्जा निगमों में कथित भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
वहीं अंकिता भंडारी के कथित ‘वीआईपी’ के ‘खुलासे’ के बाद प्रभारी दुष्यंत गौतम की ओर से दर्ज कराए गई पुलिस रिपोर्ट के बाद गिरफ्तार पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को गिरफ्तारी के चार दिन बाद अदालत से जमानत मिल गई।
दोनों मामलों ने प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को फिर तेज कर दिया है।

मिली राहत, रिहाई के आदेश

देहरादून। अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े वायरल ऑडियो मामले में गिरफ्तार पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से जमानत मिल गई है। 14 जून को गिरफ्तार किए गए राठौर को गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि प्रकाश की अदालत ने राहत देते हुए जमानत मंजूर कर दी।
अदालत ने माना कि उनके खिलाफ लगाई गई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(6) (जबरन वसूली) जमानती प्रकृति की है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जा सकता है।

राठौर की ओर से अधिवक्ता अभिलाष शर्मा ने पक्ष रखा, जबकि अभियोजन पक्ष ने गिरफ्तारी को उचित ठहराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपित पर लगाई गई धारा जमानती श्रेणी में आती है। इसके आधार पर अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही धनराशि की जमानत पर रिहाई के आदेश दिए।

अब क्या ‘खुलासा’ करेंगे पूर्व विधायक

गौरतलब है कि वायरल ऑडियो प्रकरण और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों को लेकर सुरेश राठौर पिछले कई महीनों से विवादों में रहे हैं। इसी मामले में उनके खिलाफ विभिन्न थानो में मुकदमे दर्ज किए गए थे और हाल ही में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।

ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक कथित वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद चर्चा में आया था।
इस मामले में उनके खिलाफ कई शिकायतें और मुकदमे दर्ज हुए। भाजपा ने भी उन्हें अनुशासनहीनता और विवादों के चलते छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
दूसरी ओर, अभिनेत्री उर्मिला सनावर ,आरती गौड़ और उक्रांद नेता राकेश ध्यानी के बीच सोशल मीडिया में जबरदस्त वाकयुद्ध चल रहा है। उर्मिला ने ध्यानी पर गम्भीर प्रकृति के आरोप लगाए हैं। जबकि आरती गौड़ ने उर्मिला की गिरफ्तारी की मांग की है। ये सभी एक दूसरे के पुराने कच्चे चिठ्ठे खोल रहे हैं।

कुछ महीने पूर्व उर्मिला और राकेश ध्यानी के एक ही कार में सफर करते हुए औए हंसी ठिठोली का वीडियो भी वॉयरल हो रहा है। और अब तीनों एक दूसरे के चरित्र हनन को खूब उछाल रहे हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड की जारी सीबीआई जॉच के बीच राठौर की गिरफ्तारी और मामले से जुड़े उर्मिला, आरती, राकेश ध्यानी की सोशल मीडिया में जारी जंग ने राजनीति को फिर गर्मा कर दिया है।

सीबीआई जांच के परिणाम का इंतजार

अब जमानत मिलने के बाद पूर्व विधायक राठौर क्या कहते हैं,किस को निशाने पर लेते हैं। इस पर भी निगाहें टिकी हुई हैं। गौरतलब है कि गिरफ्तारी से पूर्व राठौर ने मीडिया को कहा था कि उनके खिलाफ साजिश हो रही है।

ऊर्जा निगमों में कथित भ्रष्टाचार मामला -हाईकोर्ट सख्त

ऊर्जा निगमों में कथित अनियमितताओं का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। शिकायतकर्ता आशीष सैनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड (पिटकुल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन (यूपीसीएल) समेत विभिन्न ऊर्जा उपक्रमों में नियमों के विपरीत नियुक्तियां की गईं। इसके अलावा निविदा प्रक्रियाओं में अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ियां और प्रशासनिक स्तर पर पक्षपात के आरोप भी लगाए गए।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस संबंध में ऊर्जा विभाग को विस्तृत शिकायत भेजे जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से जवाब तलब किया और अब शिकायत पर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता को भी एक हफ्ते के अंदर आरोपों के संदर्भ में शपथ पत्र पेश करने को कहा है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य के ऊर्जा निगम लंबे समय से भर्ती, खरीद और ठेकों को लेकर विवादों में रहे हैं। ऊर्जा प्रदेश के सपने को साकार करने में असफल रहे ऊर्जा निगमों की कार्यप्रणाली राज्य गठन के समय से ही चर्चा में रही है।

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