Category: पर्यटन

  • अक्टूबर में एक बार फिर शुरू होगी आदि कैलाश परिक्रमा

    अक्टूबर में एक बार फिर शुरू होगी आदि कैलाश परिक्रमा

    70 किलोमीटर अल्ट्रा रन से
    स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

    देहरादून। बीते साल से धामी सरकार आदि कैलाश परिक्रमा रन और नीति अल्ट्रा एक्सट्रीम रन को वार्षिक आयोजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आदि कैलाश परिक्रमा रन के दूसरे संस्करण की तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि सीएम के विशेष निर्देश पर आदि कैलाश परिक्रमा रन का दूसरा संस्करण 24 और 25 अक्टूबर, 2026 को नई ऊर्जा और व्यापक जनसहभागिता के साथ आयोजित किया जाएगा।

    बैठक में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भट्टगाई, कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर, जिला पर्यटन विकास अधिकारी पिथौरागढ़, जिला पर्यटन विकास अधिकारी नैनीताल तथा उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के उप निदेशक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
    बैठक में पर्यटन सचिव ने जिला प्रशासन द्वारा की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए प्रस्तावित उच्च हिमालयी अल्ट्रा मैराथन के आयोजन, मार्ग निर्धारण, विभिन्न श्रेणियों और आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष प्रतियोगिता में 70 किलोमीटर अल्ट्रा रन श्रेणी को भी शामिल किया जाएगा, जिससे यह आयोजन देश के प्रमुख अल्ट्रा मैराथन आयोजनों में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा।
    उन्होंने निर्देश दिए कि खिलाड़ियों के सत्यापन और प्रतियोगिता के मानकों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी तथा भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के मानकों के अनुरूप आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाए।
    पर्यटन सचिव ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों, चिकित्सा सहायकों और पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता, सुरक्षा प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था तथा पूरे मार्ग पर आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि जिला स्तर पर भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय बैठक 27 जुलाई को प्रस्तावित है।
    जिलाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि आयोजन क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 1,400 बिस्तरों की आवासीय क्षमता उपलब्ध है। इस पर पर्यटन सचिव ने वर्तमान और संभावित आवासीय क्षमता का आकलन करने के लिए पुनः वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का अध्ययन कराने के निर्देश दिए।
    उन्होंने जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पिथौरागढ़ को प्रस्तावित मार्ग का शीघ्र निरीक्षण कर विभिन्न श्रेणियों के मार्गों का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश दिए। साथ ही जलपान केंद्र, चिकित्सा सहायता केंद्र, शौचालय, विश्राम स्थल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का चिन्हांकन समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने को कहा।
    बैठक में पूरे मार्ग पर इंटरनेट संपर्क व्यवस्था का व्यापक परीक्षण कराने तथा जहां आवश्यकता हो वहां दूरसंचार एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर नेटवर्क व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि प्रतिभागियों, आयोजन टीम और सुरक्षा एजेंसियों को निर्बाध संचार सुविधा उपलब्ध हो सके।

    उन्होंने कहा कि इस वर्ष आयोजन का विशेष फोकस वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी, ग्राम प्रतिनिधियों की सहभागिता, सामुदायिक भोज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय परंपराओं के माध्यम से क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना होगा।
    उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • दून के पर्यटन विकास अधिकारी निलंबित, प्रशासन का सख्त कदम

    दून के पर्यटन विकास अधिकारी निलंबित, प्रशासन का सख्त कदम

    होम-स्टे योजना में भ्रष्टाचार

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई

    अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपी जांच

    देहरादून। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना के तहत अनुदान राशि जारी करने के एवज में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
    प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए परिषद ने उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और विभिन्न सूचनाओं में होम-स्टे योजना के तहत अनुदान वितरण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

    मामले की जांच के लिए परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें नियमानुसार जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    निलंबन अवधि के दौरान बृजेन्द्र पाण्डेय का मुख्यालय उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, देहरादून रहेगा। इस अवधि में उन्हें वित्तीय नियमों के तहत देय जीवन-निर्वाह भत्ता एवं अन्य अनुमन्य भत्ते दिए जाएंगे। साथ ही, उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि निलंबन अवधि के दौरान वे किसी अन्य सरकारी या निजी सेवा, व्यापार अथवा व्यवसाय से जुड़े नहीं हैं।

  • ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’: रोमांच और सीमांत संस्कृति का संगम

    ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’: रोमांच और सीमांत संस्कृति का संगम

    गमसाली से मलारी तक एमटीबी चैलेंज में दिखा जबरदस्त जज्बा

    चमोली। सीमांत जनपद चमोली की सुरम्य एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति घाटी में 31 मई से 2 जून तक आयोजित ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के अंतिम दिन गमसाली से मलारी के मध्य 30 किलोमीटर एमटीबी (माउंटेन बाइकिंग) चैलेंज प्रतियोगिता का रोमांचक आयोजन किया गया।

    दुर्गम पहाड़ी रास्तों, चुनौतीपूर्ण ट्रैक और मनमोहक प्राकृतिक वादियों के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता में देशभर से आए 100 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

    30 किलोमीटर पुरुष एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता में खरिकसिंग अडॉनिस तांगपू ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सूरज राणा मगर दूसरे एवं प्रकाश थापा मगर तीसरे स्थान पर रहे।

    महिला वर्ग की 30 किलोमीटर एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता में अवनी डरियाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। संध्या मौर्या दूसरे तथा इंद्रा कुमारी तमांग तीसरे स्थान पर रहीं।

    15 किलोमीटर पुरुष एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता में प्रज्जवल चौहान प्रथम, इशांत सिंह अधिकारी द्वितीय तथा अश्विन रौथान तृतीय स्थान पर रहे। वहीं महिला वर्ग में प्रिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

    पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना एवं आईटीबीपी के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में देश के 27 राज्यों से आए कुल 1200 से अधिक प्रतिभागीयों ने हिस्सा लिया। तीन दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाना तथा युवाओं में फिटनेस एवं साहसिक खेलों के प्रति जागरूक करना है।

    पूरे आयोजन के दौरान नीति घाटी खेल, साहस, संस्कृति और पर्यटन गतिविधियों का जीवंत केंद्र बनी रही। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, भारतीय सेना, आईटीबीपी, चिकित्सा विभाग, पर्यटन विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • रोमांच से भरपूर ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ में सैकड़ों धावकों ने लगाई दौड़

    रोमांच से भरपूर ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ में सैकड़ों धावकों ने लगाई दौड़

    फिट इंडिया मुहिम और सीमांत पर्यटन को नई उड़ान देने की पहल

    देशभर से पहुंचे 933 धावक

    चमोली । जनपद की सुरम्य एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति घाटी में रविवार को तीन दिवसीय  ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का भव्य शुभारंभ हुआ।

    पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना एवं आईटीबीपी के सहयोग से आयोजित इस अनूठे आयोजन में देश के 28 राज्यों से आए 933 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाना तथा युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

    कार्यक्रम का शुभारंभ काबीना मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने फ्लैग ऑफ कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास और पर्यटन बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘फिट इंडिया’ मुहिम को सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना है।

    उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांव और अधिक मजबूत होंगे।

    जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का आयोजन 31 मई से 2 जून तक किया जाएगा। पहले दिन रिमखिम-नीति-मलारी 75 किलोमीटर अल्ट्रा रन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 117 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वहीं मलारी-नीति-मलारी 42 किलोमीटर अल्ट्रा रन में 118 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।

    कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने शुभारम्भ किया

    उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में 5, 10 एवं 21 किलोमीटर की हॉफ मैराथन स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा। समापन अवसर पर गमसाली से मलारी के मध्य 30 किलोमीटर एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।

    इससे पूर्व शनिवार रात्रि मलारी गांव में पर्यटन विभाग द्वारा सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। लोकगायक किशन महिपाल ने अपने लोकप्रिय लोकगीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभागियों एवं स्थानीय लोगों ने देर रात तक उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

    यही नहीं सीमांत गांव गमशाली में ग्रामीणों ने धावकों।के लिए रात्रिभोज की भी व्यबस्था की।

    इस अवसर पर दर्जा राज्य मंत्री हरक सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्त्वाल, महामंत्री अरुण मैठाणी, विनोद कनवासी, गृह सचिव शैलेश बगोली, सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, भारतीय सेना एवं आईटीबीपी के अधिकारी-जवान, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

  • सीमांत पर्यटन को नई उड़ान देगी ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’

    सीमांत पर्यटन को नई उड़ान देगी ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’

    नीति घाटी में 31 मई एवं 01 जून को आयोजित होगी ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’

    देहरादून। उत्तराखंड की दुर्गम नीति घाटी में 31 मई एवं 01 जून 2026 को आयोजित होने वाला ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ भारत में तेजी से विकसित हो रहे एडवेंचर पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना के समन्वय से आयोजित यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने, सैन्य-नागरिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा हिमालय के दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक संभावनाओं को नई पहचान देने का प्रयास है।

    चमोली जनपद में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित नीति घाटी अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचाई वाले दुर्गम भूभाग और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि, भौगोलिक दूरस्थता और सीमित आधारभूत सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र अब तक अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन जैसे आयोजन इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा इसे सतत पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    इस अल्ट्रा रन में 75 किमी, 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी एवं 5 किमी की विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें पेशेवर खिलाड़ियों के साथ-साथ शौकिया धावक भी भाग लेंगे। प्रतिभागियों को तीव्र चढ़ाई, कम ऑक्सीजन स्तर और बदलते मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना होगा। यही कारण है कि यह प्रतियोगिता देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति दौड़ों में से एक मानी जा रही है, जिसमें शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी आवश्यक है।

    इस आयोजन की एक विशेषता नागरिक प्रशासन और भारतीय सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय है। नीति घाटी जैसे दुर्गम एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सेना की लॉजिस्टिक क्षमता, चिकित्सा सुविधाएं और संचालन विशेषज्ञता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टेंट एवं आवास व्यवस्था से लेकर चिकित्सा सहायता और मार्ग सुरक्षा सुनिश्चित करने तक, सेना की भागीदारी आयोजन को सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संपन्न कराने में अहम योगदान दे रही है।

    यह पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। आयोजन के दौरान बढ़ने वाली पर्यटकों की संख्या से होम-स्टे, परिवहन, भोजन एवं गाइड सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही यह सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के व्यापक उद्देश्य को भी समर्थन प्रदान करेगा।

    यह आयोजन सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में सरकार की ‘वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज’ अवधारणा के अनुरूप भी है। प्रतिभागियों और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन इस क्षेत्र को एक जीवंत और सुलभ पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

    पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन भी इस आयोजन के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं। आयोजकों द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तथा प्रतिभागियों के बीच जागरूकता बढ़ाने जैसे उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि घाटी की प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रह सके।

    आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। समन्वय बैठकें, मार्ग सर्वेक्षण, चिकित्सा योजना एवं लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रतिभागियों एवं स्थानीय समुदायों में इस आयोजन को लेकर उत्साह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

    नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि साहस, एकता और प्रगति का प्रतीक है। यह आयोजन दर्शाता है कि खेल किस प्रकार विकास, राष्ट्रीय एकीकरण और राष्ट्र गौरव का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

  • धारी देवी पर्यटन सर्किट के निर्माण में लायें तेजीः डाॅ. धन सिंह रावत

    धारी देवी पर्यटन सर्किट के निर्माण में लायें तेजीः डाॅ. धन सिंह रावत

    समीक्षा बैठक में राहू मंदिर को पर्यटन सर्किट में जोड़ने के दिये निर्देश

    कहा, पर्यटकों को आकर्षित करने में सहायक बनेंगे पयर्टन सर्किट

    देहरादून । श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत निर्माणाधीन धारीदेवी-कमलेश्वर-देवलगढ़-खिर्सू- क्यूँकलेश्वर-पौड़ी पर्यटन सर्किट के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही पैठाणी स्थित राहु मंदिर के कार्यों को भी युद्ध स्तर पर करने को कहा गया है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां के पर्यटन सर्किट का लुत्फ उठा सके।

    सूबे कैबिनेट मंत्री व श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डाॅ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर पैठाणी स्थित राहु मंदिर व धारीदेवी-कमलेश्वर-देवलगढ़-खिर्सू- क्यूँकलेश्वर-पौड़ी पर्यटन सर्किट के विकास कार्यों की समीक्षा की। जिसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने व गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये। डाॅ. रावत ने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही व हिलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जायेगी। डाॅ. रावत ने पैठाणी स्थित राहु मंदिर परिसर में घाट निर्माण, पार्किंग व हैलीपैड के निर्माण कार्यों को तेजी से करने के निर्देश दिये। इसके अलावा उन्होंने धारी देवी, देवलगढ़, खिर्सू व कण्डोलिया पौड़ी पर्यटन सर्किट को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि धारी देवी, खिर्सू, क्यूंकालेश्वर व कण्डोलिया के कार्य लगभग पूर्ण कर दिये गये हैं। जबकि कमलेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार का कार्य गतिमान है, इसी प्रकार देवलगढ़ में भी पर्किंग हेतु भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।

    बैठक में अपर सचिव पर्यटन अभिषेक रोहिल्ला, एमडी गढ़वाल मंडल विकास निगम कुसुम चैहान, अधीक्षण अभियंता आरडब्ल्यूडी तेजपाल सिंह सहित पर्यटन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • टिहरी झील बनेगी विश्वस्तरीय पर्यटन और खेलों का बड़ा केंद्र: सीएम

    टिहरी झील बनेगी विश्वस्तरीय पर्यटन और खेलों का बड़ा केंद्र: सीएम

    टिहरी लेक फेस्टिवल’ – कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे निर्माण होगा

    नौ मार्च तक चलने वाले ‘टिहरी लेक फेस्टिवल’ की भव्य शुरूआत

    सीएम ने किया कोटी डोबरा पर्यटन मार्ग का वर्चुअल शिलान्यास

    नई टिहरी। पर्यटन, साहसिक खेल के साथ ही पर्यावरण और संस्कृति के स्पष्ट संदेश के बीच ‘हिमालयन 0.2 द टिहरी लेक फेस्टिवल’ का भव्य शुभारंभ हो गया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन करते हुए विश्वास प्रकट किया कि सुंदर टिहरी झील आने वाले समय में देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में साहसिक खेलों और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी। इस मौके पर उन्होंने घोषणा कि कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे का निर्माण कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में देश-विदेश से आए खिलाड़ियोें के साथ ही अन्य मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा आध्यात्मिकता और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम रही है। हमारी नदियां, हमारे पर्वत, हमारी झीलें और हमारी परंपराएं पूरे विश्व को आकर्षित करती रही हैं। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टिहरी झील के किनारे आयोजित ये महोत्सव पर्यटन, खेल और स्थानीय संस्कृति तीनों को एक मंच पर लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

    उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसी टिहरी झील प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण होने के साथ- साथ साहसिक खेलों के आयोजन स्थल के रूप में तेजी से उभर रही है। यहां आयोजित होने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न जल क्रीड़ा प्रतियोगिताएं न केवल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रही हैं, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने का काम भी कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने टिहरी को लेकर अपनी सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य है कि टिहरी को वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर स्पोर्ट्स के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए टिहरी झील में कयाकिंग, कैनोइंग, जेट-स्की, पैरा-सेलिंग, स्कूबा डाइविंग और अन्य साहसिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ताकि हमारे युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने कहा कि टिहरी झील के आसपास विकसित हो रहा यह खेल और पर्यटन तंत्र स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर पैदा कर रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि टिहरी झील केवल एक पर्यटन स्थल ही न रहे, बल्कि खेल, संस्कृति और प्रकृति के संगम का वैश्विक केंद्र भी बने। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव जगजाहिर है और उन्होंने स्वयं यहां आकर हमें प्रेरित और प्रोत्साहित किया है। मुख्यमंत्री ने पर्यटन और साहसिक खेलों को प्रोत्साहन देेने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का खास तौर पर जिक्र किया। इस क्रम में उन्होंने आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई-एल्टीट्यूड मैराथन, माणा में एमटीबी चैैलेंज, एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी जैसे बडे़ स्तर के आयोजनों की चर्चा की।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि हमारे युवा केवल अवसरों की प्रतीक्षा न करें, बल्कि अपने सामथ्र्य और परिश्रम से नए अवसरों का सृजन भी करें। उन्होंने कहा कि आज टिहरी में 400 से अधिक युवा पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह जानकारी खुशी देने वाली है। पूर्ण विश्वास है कि ये युवा भविष्य में उत्तराखंड को वैश्विक पैराग्लाइडिंग मानचित्र पर स्थापित करने में अवश्य सफल रहेंगे।

    अपने संबोधन में उन्होंने टिहरी क्षेत्र में विकास कार्यों की तस्वीर को सामने रखा। उन्होंने बताया कि टिहरी क्षेत्र के के समग्र विकास हेतु लगभग 1300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर कार्य गतिमान है। इसमें टिहरी झील का विकास, रिंग रोड का निर्माण, तिमाड़ गांव को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित करने जैसे प्र्रमुख कार्य शामिल हैं। इसके अलावा यहां भिलंगना विकासखंड की सुनारगांव ग्राम पंचायत को एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। विशिष्ट पहाड़ी शैली में एक नया आंगनबाड़ी भवन भी बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में जिले के सभी ब्लाक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 10 कॉम्पेक्टर केंद्रों और 4267 कूड़ा संग्रहण केंद्रों की स्थापना का भी जिक्र किया।

    इस मौके पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक किशोर उपायाय, विक्रम सिंह नेगी, विनोद कंडारी, शक्तिलाल शाह, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष संजय नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण, जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल, नगर पालिका परिषद नई टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत व चंबा की अध्यक्ष सोबनी धनोला, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय सिंह रावत प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

    इससे पहले, मुख्यमंत्री का यहां पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। सीएम ने देवडोलियों से आशीर्वाद भी लिया ।

    कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का शिलान्यास

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का रिमोट दबाकर वर्चुअल शिलान्यास किया। यह मार्ग एशियन डेवलपमेंट बैंक के स्तर पर वित्त पोषित है,जिसकी कुल लागत 318 करोड़ है। इस मार्ग की लंबाई करीब 15 किलोमीटर है।

    नौ मार्च तक होंगी विभिन्न गतिविधियां

    -टिहरी लेक फेस्टिवल में नौ मार्च तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साहसिक खेल व पर्यटन गतिविधियों के अलावा लोक संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।

  • सैलानियों से गुलज़ार औली, विंटर कार्निवल की शानदार शुरुआत

    सैलानियों से गुलज़ार औली, विंटर कार्निवल की शानदार शुरुआत

    कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने किया उद्घाटन

    औली, चमोली। बहुप्रतीक्षित औली राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप एवं विंटर कार्निवल 2026 का भव्य शुभारंभ 13 फरवरी को प्रातः 11:00 बजे औली स्थित स्की लिफ्ट के निकट किया गया।

    चार दिवसीय यह विशाल शीतकालीन आयोजन (13–16 फरवरी 2026) Uttarakhand Tourism Development Board द्वारा जिला प्रशासन, चमोली एवं Garhwal Mandal Vikas Nigam (जीएमवीएन) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सतपाल महाराज कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार द्वारा किया गया। अपने संबोधन में सतपाल महाराज ने औली को उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कीइंग गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

    उन्होंने कहा कि औली में अपार संभावनाएं हैं, जो देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने एवं उत्तराखंड को अग्रणी शीतकालीन खेल गंतव्य के रूप में स्थापित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

    कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके उपरांत स्थानीय लोक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। मुख्य अतिथि का स्वागत इंडियन आर्मी बैंड द्वारा किया गया। सतपाल महाराज ने विभिन्न स्कीइंग टीमों एवं प्रतिभागियों से औपचारिक भेंट भी की।

    विधायक कर्णप्रयाग अनिल नौटियाल एवं उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने अपने संबोधन में Uttarakhand Tourism Development Board एवं जीएमवीएन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के भव्य आयोजन राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेंगे।

    प्रतिभागियों द्वारा मार्च पास्ट का प्रदर्शन किया गया तथा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। मुख्य ढलान पर आईटीबीपी द्वारा प्रभावशाली स्कीइंग प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन घोषित किया गया।

    इस अवसर पर धीराज सिंह गर्ब्याल (आईएएस), सचिव पर्यटन; विशाल मिश्रा (आईएएस), प्रबंध निदेशक, जीएमवीएन; गौरव कुमार (आईएएस), जिलाधिकारी चमोली; तथा कमांडेंट, आईटीबीपी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

    13 से 16 फरवरी तक आयोजित यह चैंपियनशिप एवं विंटर कार्निवल प्रतिस्पर्धात्मक शीतकालीन खेलों, साहसिक गतिविधियों और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।

    राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप में 3 कि.मी. (महिला) एवं 5 कि.मी. (पुरुष) स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। विंटर कार्निवल के अंतर्गत स्नो मैराथन, स्नो शू रेस, औली मैराथन, बच्चों के स्नो गेम्स, चेयरलिफ्ट राइड तथा स्नो योग जैसी रोमांचक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं, जो प्रतिभागियों एवं पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

    कार्निवल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की जा रही है। इस अवसर पर Pandavas – उत्तराखंड फोक बैंड द्वारा लाइव प्रस्तुति दी गई, जिसने हिमाच्छादित पर्वतों के मध्य वातावरण को और भी उत्सवमय बना दिया।

    अंत में विशाल मिश्रा (आईएएस), प्रबंध निदेशक, जीएमवीएन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विंटर कार्निवल उत्तराखंड की लोक परंपराओं, संगीत और सामुदायिक सहभागिता को प्रदर्शित करने का एक सशक्त मंच है, जो औली की हिमाच्छादित वादियों में भव्य उत्सव का वातावरण निर्मित करता है।

  • केंद्रीय बजट भारत के उज्ज्वल और टिकाऊ भविष्य की आधारशिला: सीएम

    केंद्रीय बजट भारत के उज्ज्वल और टिकाऊ भविष्य की आधारशिला: सीएम

    पर्यटन, विनिर्माण, आयुष, ग्रीन एनर्जी, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना को मिलेगा नया विस्तार

    हल्द्वानी। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने  बुधवार को हल्द्वानी  में आयोजित प्रेस वार्ता में केन्द्रीय बजट 2026-27 को विकसित भारत-2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताया।
    उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए देश की आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक नींव को मजबूत करता है।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय में की गई उल्लेखनीय वृद्धि से दीर्घकालिक विकास की मजबूत आधारशिला रखी गई है। उन्होंने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ देश की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सरकार के लिए विकास केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव का माध्यम है।
    यह बजट मध्यम वर्ग, करदाताओं और श्रमिकों के लिए राहत और सम्मान का प्रतीक है। नवाचार, विनिर्माण और रोजगार को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह बजट देश की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा, जो दीर्घकालीन आर्थिक मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय यह दर्शाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शक्ति मानती है।
    सात नए आर्थिक कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स ढांचे का विस्तार निवेश, उद्योग और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देगा।
    वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग, दिल्ली-वाराणसी एवं वाराणसी-सिलीगुड़ी उच्च-गति रेल कॉरिडोर न केवल कनेक्टिविटी परियोजनाएं हैं, बल्कि ये व्यापार, पर्यटन, रोजगार और राष्ट्रीय एकता के नए द्वार खोलने वाले कदम हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट से उत्तराखंड के समावेशी विकास को सीधा लाभ मिलेगा। पर्वतीय, सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है।
    उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के लिए केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा ₹17,414.57 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश को इस वर्ष ₹1,841.16 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ के विस्तार का जो अनुरोध किया गया था, उसे इस बजट में न केवल स्वीकार किया गया है, बल्कि इसके प्रावधान भी बढ़ाए गए हैं।
    यह राशि संशोधित अनुमान ₹1,44,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,85,000 करोड़ कर दी गई है, जो ₹41,000 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि को दर्शाती है।

    उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड आजीविका से उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। रेलवे क्षेत्र में उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जो 2009-2014 की तुलना में 26 गुना अधिक है। राज्य में ₹39,491 करोड़ की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
    ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। 11 रेलवे स्टेशन अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित किए जा रहे हैं, 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, 54 कवच सिस्टम और 106 फ्लाईओवर/अंडरपास के साथ-साथ 3 वंदे भारत और एक अमृत भारत एक्सप्रेस से राज्य की कनेक्टिविटी सुदृढ़ हुई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को बजट में विशेष प्रोत्साहन मिला है, जिससे राज्य में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। ग्रीन एनर्जी और सतत विकास के लिए हरित ऊर्जा और ग्रीन इकोनॉमी पर विशेष बल दिया गया है, जिससे उत्तराखंड को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। आयुष, फार्मा, खादी, हथकरघा तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।

    उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बजट अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावासों की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
    ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 किसानों को सशक्त करता है, युवाओं को अवसर देता है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है, पर्वतीय राज्यों को नई पहचान देता है और देश को आत्मनिर्भरता से विकसित राष्ट्र की ओर मजबूती से आगे ले जाता है।
    बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित एवं समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—सीमांत क्षेत्रों, गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा।
    उन्होंने यह भी कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्य के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है तथा राज्य सरकार द्वारा केंद्र को दिए गए प्रस्तावों को बजट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित किया गया है, जो सहकारी संघवाद का सशक्त उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री  धामी ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला सिद्ध होगा और राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास में मील का पत्थर बनेगा।

  • औली बनेगा एडवेंचर हब, 13–16 फरवरी तक साहसिक खेलों का रोमांच

    औली बनेगा एडवेंचर हब, 13–16 फरवरी तक साहसिक खेलों का रोमांच

    राष्ट्रीय शीतकालीन खेल प्रतियोगिताओं 2026

    देहरादून। ‘औली स्कीइंग विंटर कार्निवल एवं राष्ट्रीय शीतकालीन खेल प्रतियोगिता/चैंपियनशिप 2026’ का आयोजन 13 से 16 फरवरी 2026 तक चमोली जनपद के प्रसिद्ध स्की स्थल औली में किया जाएगा। आयोजन मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में किया जा रहा है।

    इस कार्निवल में अल्पाइन स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्की माउंटेनियरिंग (स्किमो) जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और साहसिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आयोजन की विस्तृत रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।

    बैठक की अध्यक्षता पर्यटन परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने की।
    बैठक में खेल व्यवस्थाओं, सुरक्षा मानकों, प्रतिभागियों की सुविधाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।

    आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) निभाएगा, जबकि इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) तकनीकी सहयोग, प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

    MD GMVN

    आयोजन का कार्यक्रम
    13 फरवरी 2026 (गुरुवार):
    प्रतिभागियों का पंजीकरण, उद्घाटन समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्थानीय स्कीइंग प्रदर्शन, आईटीबीपी द्वारा स्की एवं रेस्क्यू डेमोंस्ट्रेशन तथा स्की माउंटेनियरिंग (वर्टिकल एवं स्प्रिंट) रेस।
    14 फरवरी 2026 (शुक्रवार) – प्रतियोगिता दिवस प्रथम:
    अल्पाइन स्कीइंग – जाइंट स्लालम (पुरुष एवं महिला), स्नोबोर्ड – जाइंट स्लालम।
    15 फरवरी 2026 (शनिवार) – प्रतियोगिता दिवस द्वितीय:
    अल्पाइन स्कीइंग – स्लालम (पुरुष एवं महिला), स्नोबोर्ड – स्लालम, स्की माउंटेनियरिंग – स्प्रिंट।
    16 फरवरी 2026 (रविवार):
    समापन समारोह, पुरस्कार वितरण एवं प्रतिभागी टीमों की विदाई।
    कार्निवल के दौरान गढ़वाली और कुमाऊंनी लोक संस्कृति, पारंपरिक कला, स्थानीय व्यंजन और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण होंगी। आयोजन से स्थानीय युवाओं को रोजगार, होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। बैठक में औली को स्थायी विंटर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने के लिए नियमित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन पर भी सहमति बनी।

    औली: भारत का प्रमुख स्की डेस्टिनेशन

    समुद्र तल से 2500 से 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली देश के प्रमुख स्की स्थलों में शामिल है। यहां 3 से 5 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक ढलान, घने ओक और देवदार के जंगल तथा नंदा देवी, कामेत और माना जैसे हिमालयी शिखरों के मनोरम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। जोशीमठ से औली तक एशिया की दूसरी सबसे लंबी रोपवे (गोंडोला) भी प्रमुख आकर्षण है।
    औली पूर्व में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्की एवं स्नोबोर्डिंग प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर चुका है। आईटीबीपी यहां उच्च ऊंचाई प्रशिक्षण के लिए जानी जाती है और नियमित रूप से प्रभावशाली स्की डेमोंस्ट्रेशन प्रस्तुत करती है। राज्य सरकार शीतकालीन पर्यटन को साल भर के पर्यटन मॉडल से जोड़ने पर कार्य कर रही है।
    इस अवसर पर सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल ने कहा कि औली स्कीइंग विंटर कार्निवल उत्तराखंड की शीतकालीन पर्यटन क्षमता, साहसिक खेलों की परंपरा और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सशक्त करेगा तथा औली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

    बैठक में बी.एल. राणा, लक्ष्मीराज चौहान, रोमिल चौधरी, अमित लोहनी, अरविंद गौड़, सीमा नौटियाल और शीतल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।