Category: मेरा गांव

  • खेतों में सीएम ने किया धान रोपण, किसानों की मेहनत को किया सलाम

    खेतों में सीएम ने किया धान रोपण, किसानों की मेहनत को किया सलाम

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खेतों में उतरकर किसानों के श्रम को किया नमन

    खेतों

    परंपरागत “हुड़किया बौल” के जरिए देवताओं से की खुशहाली की कामना

    खटीमा। उत्तराखंड के नगरा तराई क्षेत्र में शनिवार को एक खास और दिल छू लेने वाला नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर खुद खेतों में जाकर धान की रोपाई की। यह दृश्य न केवल किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा था, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों के दिलों में मुख्यमंत्री के प्रति सम्मान और भरोसे को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।

    मुख्यमंत्री ने किसानों के बीच जाकर उनके साथ मिलकर खेतों में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और अपनी बचपन की उन यादों को ताजा किया, जब वे भी इसी मिट्टी में खेलते और मेहनत करते थे। उन्होंने कहा, “मिट्टी की खुशबू और खेतों की ठंडी पांवों में लगने वाली चुभन में एक अनोखा एहसास होता है, जो हमें जीवन के सरल और सच्चे मूल्यों से जोड़ता है। ये मिट्टी ही है जो हमें जीवन देती है, हमारी संस्कृति को संजोती है।”

    उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों की मेहनत केवल हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ नहीं है, बल्कि वे हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के भी आधार हैं। “हमारा विकास तभी संभव है, जब हमारे अन्नदाताओं का जीवन सुरक्षित और समृद्ध हो,” उन्होंने कहा।

    मुख्यमंत्री के इस कृषि से जुड़े कदम का सबसे खास पहलू था उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति “हुड़किया बौल” का गायन। उन्होंने भूमि के देवता भूमियां, जल के देवता इंद्र और मेघ देवता की वंदना करते हुए खेत की मेड़ पर खड़े होकर देवताओं से वर्षा की प्रार्थना की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप और हुड़क के सुरों के बीच इस वंदना ने पूरे माहौल को और भी दिव्य और आध्यात्मिक बना दिया।

    ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यमंत्री का यह कदम एक नई ऊर्जा लेकर आया है। उन्होंने कहा, “सीएम साहब के खेतों में आकर रोपाई करना और हमारी परंपराओं में शामिल होना, यह हम सबके लिए गर्व की बात है। इससे हमें लग रहा है कि सरकार हमारी वास्तविक समस्याओं को समझती है और हमें साथ लेकर चलना चाहती है।”

    इस अवसर पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ और अधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री के इस प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के संपर्क से किसान और सरकार के बीच विश्वास का पुल मजबूत होगा, जिससे कृषि क्षेत्र में विकास की नयी राह खुलेगी। साथ ही, उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नए अनुदानों से अवगत कराने के वादे भी दोहराए।

    खेतों

    मुख्यमंत्री ने संवाद में यह भी कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, फसल संरक्षण और सिंचाई के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसान की समस्या ही सरकार की प्राथमिकता होगी और कृषि क्षेत्र में नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

    इस मौके पर क्षेत्र के कई किसान और ग्रामीण भी मौजूद थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के हाथों से धान की रोपाई की प्रक्रिया देखी और खुशी जाहिर की। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने इस अवसर को यादगार बताया।

    यह घटना सिर्फ एक खेती का काम नहीं थी, बल्कि किसानों और सरकार के बीच एक भावनात्मक और सांस्कृतिक सेतु का निर्माण था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर यह संदेश दिया कि वे किसानों के साथ हर परिस्थिति में खड़े हैं और उनकी हर समस्या का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    खेतों

  • हर गांव तक पहुंचेगा योग अभियान

    हर गांव तक पहुंचेगा योग अभियान

    महिला शक्ति को अधिक से अधिक योग से जोड़ा जाएगा

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस – योग मेले, हरित योग और योग पर आधारित प्रतियोगिताओं का होगा आयोजन
    योग को रोजगार से जोड़ने के भी मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

    देहरादून। ग्राम स्तर तक योग अभियान चलाया जाए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष योग शिविरों का आयोजन किया जाए। योग पर निबंध, भाषण, पोस्टर और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाय। योग और आयुष मेले के आयोजन के साथ ही हरित योग के कार्यक्रम भी किए जाएं। डिजिटल माध्यम से भी योग को प्रचारित किया जाए योग के क्षेत्र में जन जागरूकता लाने वालों को सम्मानित भी किया जाय। योग से साथ जनसहभागिता से नियमित स्वच्छता अभियान भी चलाया जाए।आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश अधिकारियों को दिए।

    योग

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योग न केवल हमारी प्राचीन परंपरा है, बल्कि यह आज की जीवनशैली में संतुलन और स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम भी है। हमें युवाओं, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को इस आयोजन से जोड़ना होगा। योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम भव्य, व्यवस्थित और जन-सहभागिता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, योग की पवित्र भूमि है, और यहां से पूरे विश्व को योग का संदेश गया है, इसलिए यहां के कार्यक्रमों की एक विशेष पहचान होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति को अधिकतम योग से जोड़ा जाय। योग और ध्यान के साथ ही वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाए। जनपदों में योग और आयुष मेले आयोजित किए जाएं। योग को रोजगार से भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि और योग भूमि के रूप में उत्तराखंड की वैश्विक स्तर पर अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि योग का आध्यात्मिक रूप से भी प्रस्तुत किया जाए। राज्य के प्रमुख दैवीय स्थलों और पर्वतीय क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर योग के कार्यक्रम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने आयुष विभाग, शिक्षा विभाग, युवा कल्याण विभाग, पर्यटन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सूचना विभाग एवं जिला प्रशासन को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

    बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, सचिन कुर्वे, एडीजी ए. पी. अंशुमन, अपर सचिव विजय जोगदंडे और महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

  • उत्तराखंड के गांव ने शराब पर प्रतिबंध, सामूहिक बहिष्कार की दी चेतावनी

    उत्तराखंड के गांव ने शराब पर प्रतिबंध, सामूहिक बहिष्कार की दी चेतावनी

    उत्तराखंड के सत्यों गांव ने शराब के खिलाफ उठाया सख्त कदम, विवाह और अन्य शुभ आयोजनों में शराब परोसने पर सामूहिक बहिष्कार की घोषणा

    उत्तराखंड के लमगड़ा ब्लाक स्थित सत्यों गांव ने नशे की लत और उसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गांव के ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि अब किसी भी शादी, जन्मदिन या अन्य शुभ अवसरों पर शराब परोसी जाएगी, तो आयोजकों का सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा। यह निर्णय शराब के बढ़ते दुष्प्रभावों को रोकने और गांव में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

    गांव में बढ़ती नशाखोरी की समस्या को देखते हुए, स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर इस कदम का समर्थन किया है। गांव में शराब की बढ़ती लत, जहां अपराध और विवादों में इज़ाफा हो रहा है, वहीं यह युवा पीढ़ी को भी नशे की ओर आकर्षित कर रही है। इस माहौल को बदलने के लिए सत्यों गांव के ग्रामीणों ने रविवार को एक बैठक आयोजित की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अब से किसी भी समारोह में शराब परोसी गई, तो न केवल आयोजक बल्कि उनका सामूहिक बहिष्कार भी किया जाएगा।

    गांव में अब से विवाह, नामकरण, जन्मदिन जैसे शुभ कार्यों के अलावा होली, दीपावली और चुनाव जैसे आयोजनों में शराब परोसने का विरोध किया जाएगा। शराब परोसने वाले परिवार को पूरा गांव बहिष्कृत करेगा और उनके निमंत्रणों का बहिष्कार किया जाएगा। यह निर्णय न केवल समाज के भले के लिए है, बल्कि गांव के शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।

    ग्रामीणों का मानना है कि इस पहल के जरिए गांव में शराब का चलन बंद होगा और युवा पीढ़ी को इस नशे से बाहर निकाला जा सकेगा। इसके लिए सभी गांववासियों से सहयोग की अपील की गई है। बैठक में हरीश सिंह, दीवान सतवाल, जसवंत सिंह, बालम सिंह, राम सिंह, प्रेम सिंह, गोपाल सिंह, नरसिंह, अनिल सिंह, बची सिंह और अन्य महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं।

    नशे के खिलाफ बनाई गई संरक्षक समिति

    इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम संरक्षक समिति का भी गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष के रूप में ग्राम प्रधान नीमा सतवाल, उपाध्यक्ष के रूप में पुष्पा देवी, सचिव के रूप में गीता आर्या और अनीता देवी को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा, 12 अन्य सक्रिय सदस्यों को भी इस समिति में शामिल किया गया है, जो इस पहल को गांवभर में लागू करने के लिए काम करेंगे।

    बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर कड़ी नज़र

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति गांव में जमीन खरीदता है, तो उसे गांव की पानी की सप्लाई से कोई कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। कुछ बाहरी लोग पहले ही गांव में जमीन खरीद चुके हैं और सार्वजनिक रास्तों को बंद कर दिया है, जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि गांव के प्राकृतिक संसाधनों और सार्वजनिक रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    सत्यों गांव का यह पहल न केवल समाज की भलाई के लिए है, बल्कि यह गांव के लोगों के लिए एक प्रेरणा भी है, जो अपने समाज और संस्कृति को बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। यह कदम गांव में शांति, सौहार्द और खुशहाली लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • पर्यटकों का बढ़ता रुझान ‘ब्वारी गांव’ की ओर

    पर्यटकों का बढ़ता रुझान ‘ब्वारी गांव’ की ओर

    उत्तरकाशी का मथोली गांव बना महिला सशक्तिकरण की मिसाल
    होम स्टे संचालन से लेकर पयर्टकों को विलेज टूर तक कराती हैं महिलाएं

    उत्तरकाशी। पयर्टकों का रुख आमतौर पर हर्षिल वैली या मोरी- सांकरी की तरफ ही होता है। ऐसे में चिन्यालीसौढ़ ब्लॉक के मथोली गांव की महिलाओं ने अपने आतिथ्य सत्कार और कौशल से गांव को पयर्टकों के लिए नया ठिकाना बना दिया है। यहां होम स्टे संचालन से लेकर विलेज टूर तक महिलाएं ही संचालित करवा रही हैं।

    मथोली को पहाड़ के आम गांव से पयर्टक गांव के रूप में बदलने का श्रेय जाता है गांव के युवक प्रदीप पंवार को। प्रदीप पंवार को कोविड 19 लॉकडाउन के दौरान अपना गांव लौटना पड़ा, सौभाग्य से उनके पास पयर्टन क्षेत्र में काम करने का अनुभव था। इसलिए उन्होंने गांव के पास मौजूद अपनी छानी (गौशाला) को होम स्टे में बदल कर, इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया। इसी के साथ प्रदीप पंवार ने गांव की महिलाओं को ही होम स्टे संचालन (आतिथ्य सत्कार, भोजन बनाने, ट्रैकिंग, विलेज टूर) का प्रशिक्षण दिया। साथ ही गांव की ब्रांडिंग ‘ब्वारी विलेज’ के तौर पर की, ताकि महिला सशक्तिकरण का संदेश दूर तक पहुंचे।

    इस बीच उन्होंने गांव में घस्यारी प्रतियोगिता के जरिए भी, पयर्टकों के लिए विलेज लाइफ की नई झलक प्रस्तुत की। जो पर्यटकों को खूब भा रही है। स्थानीय महिला अनीता पंवार बताती हैं कि गांव में अब अन्य महिलाएं भी अपनी छानियों को होम स्टे में परिवर्तित करने के लिए आगे आई हैं। प्रदीप पंवार बताते हैं कि अब उन्होंने अपने होम स्टे को पयर्टन विभाग में पंजीकृत करवा दिया है, जिससे वो ऑनलाइन बुकिंग भी ले सकते हैं। प्रदीप बताते हैं कि आठ मार्च 2022 से उन्होंने अपने होम स्टे की शुरुआत की थी, इसके बाद से यहां करीब एक हजार पयर्टक आ चुके हैं, जिससे करीब 20 महिलाओं को समय समय पर काम मिलता है।

    गांव

    5331 होम स्टे पंजीकृत हैं
    पयर्टन विभाग के पास इस समय 5331 होम स्टे पंजीकृत हैं। जो ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। सरकार पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत होम स्टे की लागत पर मैदानी क्षेत्र में 25 प्रतिशत और पहाड़ी क्षेत्र में 33 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करती है।

    मथोली गांव, ग्रामीण पर्यटन के साथ ही महिला सशक्तिकरण का भी उदाहरण है। यदि गांव का कोई परिवार होम स्टे संचालन के लिए आगे आता है, तो उन्हें पर्यटन विभाग की सभी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। साथ ही पंजीकरण प्रक्रिया में भी सहयोग किया जाएगा। मथोली गांव से अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

    गांव

    bijania: #Inspiring Stories

    Matholi Village in Uttarkashi Sets an Example of Women Empowerment

    From running homestays to organizing village tours, women lead the way

    Matholi village in Chinyalisaur block is now popularly known as “Bwari Gaon”

    In Uttarkashi district, tourists usually head towards Harsil Valley or Mori-Sankri. However, the women of Matholi village in the Chinyalisaur block have transformed their village into a new tourist destination with their warm hospitality and skills. From managing homestays to conducting village tours, everything is being handled by women.

    The credit for turning Matholi from a regular mountain village into a tourist hotspot goes to a young local, Pradeep Panwar. During the COVID-19 lockdown, Pradeep had to return to his village. Fortunately, he had prior experience in the tourism sector. He converted his nearby cowshed (locally known as “chhani”) into a homestay and opened it for tourists. At the same time, he trained local women in hospitality, cooking, trekking, and village tours. He also branded the village as “Bwari Village” to spread the message of women empowerment far and wide.

    गांव

    Additionally, through events like the “Ghasyari Competition,” he introduced tourists to unique aspects of village life, which have been widely appreciated. Local woman Anita Panwar shares that more women in the village are now coming forward to convert their own chhanis into homestays. Pradeep Panwar mentions that his homestay is now registered with the tourism department, enabling him to accept online bookings. He started his homestay on March 8, 2022, and since then, around 1,000 tourists have visited, providing employment to around 20 women from time to time.

    5,331 Homestays Registered

    Currently, 5,331 homestays are registered with the tourism department, most of which are run by women in rural areas. Under the Pandit Deen Dayal Upadhyay Homestay Scheme, the government provides a subsidy of up to 25% in plains and up to 33% in hilly areas for the cost of setting up a homestay.

    Matholi village is a model for both rural tourism and women empowerment. If any family from the village wants to start a homestay, they will be given access to all tourism department schemes and assistance with the registration process. Other villages should take inspiration from Matholi.
    Pushkar Singh Dhami, Chief Minister

  • Uttarakhand: बढ़ने के बजाए घट गईं क्षेत्र पंचायतों की पांच सीट,परिसीमन से हुआ खुलासा

    Uttarakhand: बढ़ने के बजाए घट गईं क्षेत्र पंचायतों की पांच सीट,परिसीमन से हुआ खुलासा

    प्रदेश में पिछले पांच साल में बढ़ने के बजाए क्षेत्र पंचायतों की पांच सीटें कम हो गईं हैं। राज्य में पंचायतों के आबादी के हिसाब से किए गए परिसीमन से यह तस्वीर सामने आई है। सभी सीट पर्वतीय जिलों की है।

    जिला पंचायतों की इन वर्षों में मात्र दो सीट बढ़ी हैं, जिससे साफ है कि राज्य गठन के 24 साल बाद भी उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पलायन का दर्द कम नहीं हुआ। प्रदेश में हरिद्वार को छोड़कर अन्य 12 जिलों में पंचायतों का परिसीमन किया गया है। ग्राम और ग्राम पंचायत वार्ड के परिसीमन के बाद विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को क्षेत्र और जिला पंचायतों के परिसीमन की रिपोर्ट जारी कर दी गई है।

    मात्र दो नई जिला पंचायतें वजूद में आई
    वर्ष 2024 के लिए किए गए इस परिसीमन में हरिद्वार को छोड़कर अन्य 12 जिलों में क्षेत्र पंचायतों की 2,936 सीटें हैं, जबकि पांच साल पहले वर्ष 2020-21 में किए गए परिसीमन में इन जिलों में क्षेत्र पंचायतों की 2,941 सीटें थी। इसमें सबसे अधिक पिथौरागढ़ जिले में क्षेत्र पंचायतों की तीन सीट कम हुई हैं

    इसके अलावा चमोली और रुद्रप्रयाग में भी क्षेत्र पंचायतों की सीटें कम हुई हैं, जबकि जिला पंचायतों के परिसीमन में मात्र दो नई जिला पंचायतें वजूद में आई हैं। वर्ष 2020-21 में हुए जिला पंचायतों के परिसीमन में हरिद्वार को छोड़कर 12 जिलों में जिला पंचायतों की 341 सीटें थी, जो पांच साल में बढ़कर मात्र 343 हुई हैं।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आबादी के हिसाब से पंचायतों का परिसीमन किया गया है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में निकायों के विस्तार से भी पंचायतों की सीट घटी और बढ़ी हैं। वहीं, ग्राम पंचायत 27 और पंचायत वार्डों की संख्या 138 बढ़ी है।

    नए परिसीमन के बाद जिला पंचायतों की सीटें

    प्रदेश में जिला पंचायतों के नए परिसीमन के बाद अल्मोड़ा में जिला पंचायतों की सीट 45, नैनीताल में 27, बागेश्वर में 19, पिथौरागढ़ में 32, ऊधमसिंह नगर में 35, पौड़ी गढ़वाल में 38, टिहरी गढ़वाल में 45, चमोली में 26, रुद्रप्रयाग में 18, उत्तरकाशी में 28, देहरादून में 30 सीटें हैं, जबकि चंपावत में शहरी विकास विभाग की अधिसूचना के तहत विकासखंड पाटी के तहत परिसीमन नहीं किया जा सका है। परिसीमन 2024 से पहले इस जिले में जिला पंचायत की 15 सीट हैं।

    आबादी के हिसाब से पंचायतों का परिसीमन किया गया है। क्षेत्र पंचायत का मानक औसतन 1,250 की जनसंख्या है, जबकि जिला पंचायत का 12,000 और ग्राम पंचायत का 500 एवं इससे अधिक का मानक है। -मनोज तिवारी, उप निदेशक पंचायत

  • फेरी वाले और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक, अब इस गांव की सीमा पर लगाया गया बोर्ड

    फेरी वाले और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक, अब इस गांव की सीमा पर लगाया गया बोर्ड

    बीते दिनों अन्य जगहों पर हुई घटनाओं के बाद जखोली ब्लॉक के ग्राम पंचायत कांडा-भरदार के ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय के बाद यहां एक बोर्ड लगा दिया, जिसमें लिखा गया कि बाहरी लोगों को प्रवेश बंद है।

    जखोली ब्लॉक के ग्राम पंचायत कांडा-भरदार के ग्रामीणों ने फेरी करने वाले और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस संबंध में गांव की सीमा में तीन अलग-अलग स्थानों पर बाकायदा सूचना बोर्ड भी लगा दिए हैं। ग्राम पंचायत मेदनपुर ने भी बाहरी लोगों के गांव में प्रवेश पर रोक लगा दी है।

    बीते सितंबर माह में केदारघाटी के कई गांवों में फेरी वाले, गैर हिंदू और रोहिंग्या के गांवों में प्रवेश और व्यापार करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। इन गांवों की सीमा पर सूचना पट्ट भी लगाए गए थे। सूचना पर पुलिस ने इन गांवों में लगे आपत्तिजनक बोर्ड हटा दिए थे। बाद में बाहरी लोगों के गांव में प्रवेश पर रोक लगा दी थी।

    तब ग्रामीणों कहना था कि, बाहरी लोग फेरी, मोबाइल सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की मरम्मत के नाम पर गांवों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत स्तर पर यह पहल की गई है। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद सूचना बोर्ड को संशोधित कर बाहरी और फेरी वालों के गांवों में प्रवेश व व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई।
    पांच हजार रुपये लगेगा जुर्माना
    अब, जखोली विकासखंड के कांडा-भरदार में बाहरी और फेरी वालों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इस संबंध में गांव की सीमा में तीन तरफ सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इस संबंध में ग्राम पंचायत कांडा के ग्राम प्रधान अमित रावत ने बताया कि ग्रामीणों की सहमति पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। बीते दिनों पहाड़ के अलग-अलग कस्बों में घटित घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जो भी फेरी वाला या अन्य बाहरी गांव में घूमता पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाएगा।

    सूचना बोर्ड लगाने के लिए स्वतंत्र

    पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध घिल्डियाल ने बताया कि ग्राम पंचायत अपने सीमा क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश को वर्जित करने के लिए इस तरह के सूचना बोर्ड लगाने के लिए स्वतंत्र है। कहीं पर भी किसी धर्म विशेष या किसी जाति, समुदाय को अंकित कर कोई भी बोर्ड या सूचना चस्पा नहीं की जा सकती है, ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी।

  • अल्मोड़ा के गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश होने पर बैन, जबरन दाखिल होने पर सख्त ऐक्शन की चेतावनी

    अल्मोड़ा के गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश होने पर बैन, जबरन दाखिल होने पर सख्त ऐक्शन की चेतावनी

    अल्मोड़ा जिले के एक गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। गांव में प्रवेश करने को नियम भी बनाए गए हैं। इसके अलावा, गांव में चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं।

    उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में लोगों ने गांव में प्रवेश के लिए नियम बनाया है। स्याल्दे विकासखंड की भाकुड़ा ग्रामसभा में अपरिचित लोगों को सत्यापन के बाद ही गांव में प्रवेश मिलेगा। इससे संबंधी एक चेतावनी बोर्ड भी गांव के गेट पर लगा दिया गया है।

    ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ों में भूमाफिया और अपराधियों के बढ़ते दखल के कारण यह फैसला लिया है। स्याल्दे के भाकुड़ा गांव में मंगलवार को ग्राम प्रधान ने अपराधों से निपटने के लिए ग्रामीणों के साथ बैठक की। ग्राम प्रधान हेमा देवी ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि बिना पुलिस सत्यापन किसी भी अपरिचित को भी गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

    गांव के गेट पर इस सूचना का बोर्ड लगाया गया है। उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपये जुर्माना होगा। जरूरी दस्तावेजों के साथ ग्रामसभा की अनुमति के बाद ही बाहरी व्यक्ति गांव में प्रवेश कर सकेगा।

    पूरे विकासखंड के गांवों को प्रेरित किया जाएगा
    क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय उनियाल का कहना है कि आपराधिक घटनाओं, भूमाफिया के आतंक पर अंकुश के लिए भाकुड़ा ग्रामसभा में ही नहीं अन्य गांवों में भी सख्ती बरतने की तैयारी है। स्याल्दे ब्लॉक सभी ग्राम सभाओं के प्रधानों को भी प्रेरित किया जाएगा।

    कालीगड़ और ऐंचोली में लग चुका है प्रतिबंध
    अल्मोड़ा जिले में ही सल्ट विकासखंड के कालीगड़ और लमगड़ा विकासखंड के ऐंचोली गांव में पहले ही ऐसे चेतावनी बोर्ड लगाए जा चुके हैं। इन चेतावनी बोर्ड के जरिए बाहरी लोगों पर जमीन खरीदने पर पाबंदी भी लगाई गई है। वहीं, स्याल्दे ब्लॉक के गांव भाकुड़ा में ग्राम प्रधान के इस फैसले का सभी ने स्वागत किया है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, भूमाफिया, फेरी वालों के गलत व्यवहार के मद्देनजर यह निर्णय लिया है। ब्लॉक के सभी गांवों को भी प्रेरित किया जाएगा।

    विजय उनियाल, बीडीसी सदस्य, भाकुड़ा-बसई
    ग्रामासभा की बैठक में सभी की सहमति से यह निर्णय लिया है। बिना सत्यापन के गांव में घूमने या व्यापार करने पर पांच हजार रुपये जुर्माना तय किया है, यह निर्णय लेना जरूरी हो गया था।

    हेमा देवी, ग्राम प्रधान, भाकुड़ा (अल्मोड़ा)