Category: उत्तराखंड

  • खटीमा के एकलव्य विद्यालय को 10 करोड़ की बड़ी सौगात

    खटीमा के एकलव्य विद्यालय को 10 करोड़ की बड़ी सौगात

    खटीमा। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को याद किया और जनजातीय समाज के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जनजातीय मामलों के लिए पृथक मंत्रालय का गठन किया गया। इसका उद्देश्य थारू, बोक्सा, जौनसारी सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना था। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन वर्ष 1999 में हुआ था।

    केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों के साझा प्रयासों से खटीमा में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने घोषणा की कि खटीमा स्थित एकलव्य विद्यालय के विस्तार एवं सुविधाओं के लिए भारत सरकार लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

    उन्होंने बताया कि लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हॉस्टल का टेंडर पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा। विद्यालय में 240 बालकों और 240 बालिकाओं सहित कुल 480 विद्यार्थियों के अध्ययन की क्षमता होगी। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की निर्धारित क्षमता भी 480 विद्यार्थियों की है।

    केंद्रीय मंत्री ने खटीमा के एकलव्य विद्यालय के शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के अन्य स्थानों, जिनमें बाजपुर, चकराता तथा देहरादून का कालसी क्षेत्र शामिल हैं, में भी ऐसे विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

    जुएल ओराम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि क्षेत्र की जनजातीय समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

    जनजातीय संस्कृति और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व की सराहना : किरेन रिजिजू

    केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड की जनजातीय विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में थारू, बोक्सा, जौनसारी और राजी सहित विभिन्न जनजातीय समुदाय निवास करते हैं, जिनकी विशिष्ट संस्कृति और परंपराएं राज्य की पहचान को समृद्ध बनाती हैं।

    उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, सुरंग दुर्घटनाओं, भूस्खलन और अन्य विपरीत परिस्थितियों के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा जनसेवक सदियों में मिलता है।

    रिजिजू ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में जनजातीय समाज के कल्याण और उनकी पहचान को नई प्राथमिकता मिली है। स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान देते हुए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के माध्यम से विकास की पहुंच दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और मिजोरम सहित विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय प्रतिनिधियों एवं कलाकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने सभी समुदायों से अपनी सांस्कृतिक विरासत, पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में जनजातीय समाज की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

    विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने प्रस्तुत कीं सांस्कृतिक झलकियां

    उत्तराखंड आदि रंगोत्सव में राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मिजोरम और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत एवं कला की प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और लोक प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

    कैबिनेट मंत्री खजान दास ने उत्तराखंड आदि रंगोत्सव में पधारे सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए आयोजन के लिए सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, कलाकारों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा,खजान दास, राम सिंह कैड़ा, भरत सिंह चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार, विधायक सरिता आर्या, दर्जा राज्यमंत्री गीता राम गौड़, रणजीत सिंह नामधारी, विनय रुहेला, मोहनी पोखरिया, गम्भीर सिंह धामी, फरजाना बेगम, किशन सिंह किन्ना, उत्तम दत्ता, लीलावती राणा, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल सहित जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति एवं अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

  • हरदा के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व सख्त! जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

    हरदा के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व सख्त! जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

    प्रभारी के पत्र के बाद भी हरदा आज निकालेंगे जनसंवाद यात्रा

    कांग्रेस आलाकमान भी सख्ती के मूड में

    नई दिल्ली/ देहरादून। कांग्रेस आलाकमान भी सख्त रुख अपनाए हुए है। और पूर्व सीएम हरीश रावत भी कुमाऊं के जसपुर से हल्द्वानी तक जनसंवाद कार्यक्रम में जुटे हैं। यह यात्रा आज सोमवार 5 अक्टूबर को होनी है।

    पार्टी संगठन से इतर निकाली जा रही हरदा की इस निजी जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी हाईकमान कड़ा पत्र जारी कर चुका है।
    प्रदेश प्रभारी सैलजा ने जनसंवाद यात्रा को लेकर हरदा को नसीहत देते हुए यात्रा रोकने को कहा है। लेकिन हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया में अपने तेवर जाहिर कर दिए है।
    हरीश रावत को भेजे पत्र में प्रभारी सैलजा ने कहा कि –
    हमारे संज्ञान में आया है कि आप राज्य में एक यात्रा निकाल रहे हैं। इस संबंध में न तो मुझसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से कोई चर्चा की गई है। इसके अलावा, हाल ही में आपके द्वारा कुछ विवादास्पद बयान दिए जाने की भी जानकारी मिली है।
    राज्य में विधानसभा चुनाव अगले कुछ महीनों में होने हैं और ऐसे समय में पार्टी को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। आप समझेंगे कि इस महत्वपूर्ण समय पर इस तरह का कोई समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा।
    अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इन कार्यक्रमों को आगे न बढ़ाएं।

    इधऱ, कुछ घण्टे पहले हरीश रावत ने भी इशारों में ‘प्यार पर पहरा’आदि शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस के झंडे तले जनसंवाद यात्रा के श्रीगणेश के लिए कमर कस ली है।
    हरदा ने जसपुर से हल्द्वानी जनसंवाद यात्रा से ठीक पहले सोशल पोस्ट में लिखा है-
    साथियों, चुनौती बड़ी है। लेकिन उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए हमारा संकल्प भी दृढ़ है! ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ के इस दौर में अब रुकना नहीं है। उठो, चलो… राज्य में बदलाव लाना है और कांग्रेस को वापस लाना है!
    जसपुर से हल्द्वानी तक, आइए आज साथ मिलते हैं, संवाद करते हैं और देवभूमि के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं।

    कांग्रेस हाईकमान के पत्र के बाद हरदा ने अपना कार्यक्रम स्थगित नहीं किया। चुनावी टीम से साल भर पहले बाहर किये गए हरदा की इस जनसंवाद यात्रा के बाद कांग्रेस नेतृत्व के कड़ा रुख अपनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
    कुछ दिन पहले ही बीमारी से उठने के बाद हरीश रावत की पार्टी के समानांतर अपने कार्यक्रम आयोजित करने से दिल्ली तक कलह ने भी पैर पसार लिए है।
    कांग्रेस के बाकी सभी गुट हरदा के एकला मूव को चुनावी तैयारियों के लिए ग्रहण मानकर चल रहे है। हालांकि, हरीश समर्थक जनसंवाद यात्रा को कांग्रेस के हक में बता रहे हैं।
    लेकिन इस चकल्लस के बाद कांग्रेस का रायता बिखरना शुरू हो गया है। भाजपा भी इसी स्वर्णिम मौके को लपकने के लिए तैयार बैठी है।अगर, हरदा की निजी स्तर पर किए जा रहे कार्यक्रम नहीं रुके तो पार्टी हाईकमान बड़ा कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं। कांग्रेस की यह अंदरूनी जंग ‘निर्णायक’ मोड़ पर पहुंचती दिख रही है…

  • सेवा संकल्प अभियान: बालिका धाम पहुंचे विधायक गैरोला

    सेवा संकल्प अभियान: बालिका धाम पहुंचे विधायक गैरोला

    बच्चों को बांटी आवश्यक सामग्री

    देहरादून। सेवा संकल्प अभियान के तहत विधायक बृजभूषण गैरोला ने बद्रीपुर स्थित अपना घर बालिका धाम पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों को फल एवं आवश्यक सामग्री वितरित की। साथ ही संस्था के संचालक मोहम्मद इलियास और सहयोगी कर्मियों को बच्चों की देखभाल, शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए सम्मानित किया।

    विधायक गैरोला ने कहा कि समाज के जरूरतमंद बच्चों की देखभाल, शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए समर्पित संस्थाओं को सहयोग देना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने ऐसी संस्थाओं के सेवा कार्यों की सराहना की।

    इस अवसर पर बद्रीपुर के पार्षद वीरेंद्र वालिया, नत्थनपुर के पार्षद मेहरबान सिंह भंडारी, भाजपा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष रेखा बिंजोला, मंडल उपाध्यक्ष आशीष कंडारी, डॉ. प्रमोद सिंह रावत, भाजपा नेत्री रेखा चमोली और संस्था के संचालक मोहम्मद इलियास मौजूद रहे।

  • गांधी-शास्त्री जयंती पर मुख्यमंत्री ने किया भावपूर्ण स्मरण

    गांधी-शास्त्री जयंती पर मुख्यमंत्री ने किया भावपूर्ण स्मरण

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवता के सिद्धांत सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता के लिए प्रासंगिक हैं।

     

    मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का स्मरण करते हुए कहा कि उनका सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका ‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोष देश के जवानों और किसानों के सम्मान तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सदैव रेखांकित करता रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महान विभूतियों के आदर्श हमें राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

  • साहस और बहादुरी के लिए 18 वीरों को मिला सम्मान

    साहस और बहादुरी के लिए 18 वीरों को मिला सम्मान

    वन्यजीव सप्ताह-2026 का किया शुभारंभ

    वन्य जीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले कुल 18 लोगों को ₹ 51,000 – ₹ 51000 की धनराशि देने की घोषणा

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को एफ.आर.आई कैंपस में वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ किया।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन्य जीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले, एवं अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरे की जान बचाने वाले कुल 18 लोगों को भी सम्मानित किया। इस सम्मान के साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी 18 लोगों को 51 हज़ार की धनराशि देने की भी घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों एवं वन्यजीव फोटोग्राफी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने वन्य जीव पर आधारित निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से हर जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने और उसकी प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए वहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य करेगी जिससे यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। सनातन संस्कृति ने हमेशा मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। देवी-देवताओं के साथ जुड़े पशु-पक्षी भी इसी भाव को प्रकट करते हैं। प्राचीन समय से प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण हमारी जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा वन्यजीव सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में जन-जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि वन्यजीवों के जंगल सुरक्षित और उनके रास्ते खुले रहें। राज्य सरकार, विकास परियोजनाएं के साथ ही वन्यजीवों की सुविधा को भी प्राथमिकता में रख रही है। इस सोच का उदाहरण दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर है।

    मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य – हिमालय, घने जंगल, नदियां, झीलें और समृद्ध जैव-विविधता से आच्छादित है। राज्य की सबसे बड़ी पूंजी यहां की प्रकृति है, जिम कॉर्बेट, राजाजी जैसे नेशनल पार्क हमारी पहचान हैं। जहां वर्ष भर लाखों पर्यटक आते हैं। उन्होंने कहा सरकार की प्राथमिकता प्रकृति के साथ संतुलन बनाते हुए वाइल्डलाइफ टूरिज्म को आगे बढ़ाने की है। जहां जंगल भी सुरक्षित रहें और इको-टूरिज्म, होमस्टे जैसी गतिविधियों से स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण भी शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से इस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, जिससे हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जाए। उन्होंने कहा वन्यजीव भी सुरक्षित रहें और इससे लोगों को भी कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा राज्य में जंगलों की निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है। साथ ही कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। राज्य सरकार, राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, ताकि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को वहीं रोजगार मिले और वे प्रकृति के संरक्षण में भी सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने कहा एक लाख युवाओं को “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” बनाने की दिशा में भी कार्य आगे बढ़ रहा है। इस योजना के माध्यम से नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, इको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन से जुड़े कौशल को रोजगार और उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी शैक्षिक यात्राएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ा रही है। ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हमारी प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “मिशन LiFE” हमें पर्यावरण की रक्षा हमारी रोजमर्रा की आदतों का हिस्सा बनने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में GEP( ग्रास इन्वायरनमेंट प्रोडक्ट) के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ प्रभावित नागरिकों की मदद करना भी है। सरकार ने वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को ₹ 6 लाख से बढ़ाकर ₹ 10 लाख किया है। वन्यजीव हमले में घायल होने वाले नागरिकों के इलाज का खर्च भी अब राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से भी आह्वान किया कि जब भी वे जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान या धार्मिक स्थल पर जाएं तो वहां गंदगी न फैलाएं, प्लास्टिक न छोड़ें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा सभी का प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।

    वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हमारा राज्य, देवभूमि के साथ वन भूमि भी है। यहां 71 प्रतिशत से ज्यादा वन भूमि का क्षेत्र है।राज्यवासियों की आजीविका में भी वन्य जीव का महत्वपूर्व योगदान है। वन्यजीव , प्रकृति के साथ रोजगार के लिए भी जरूरी। उन्होंने कहा वन्यजीवों की सुरक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वर्ष की थीम ” जुड़े आवास – वन्य जीवन का विकास* है। उन्होंने कहा ह्यूमन वाइल्डलाइफ कंफ्लिक्ट को रोकने के लिए कई कॉरिडोर का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

    वन मंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और आजादी भी उतनी महत्वपूर्ण है जितना आम जन की। उन्होंने कहा राज्य सरकार द्वारा वनों को आम आदमी की आजीविका से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा निश्चित ही ऐसे कार्यक्रम विशेष रूप से हमारी युवा पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करेंगे।

    इस पर विधायक सविता कपूर, राजीव तलवार, प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हाफ) कपिल लाल , प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना गैरवाल, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • उत्तराखंड के मुद्दों पर एकजुट होंगे सामाजिक संगठन

    उत्तराखंड के मुद्दों पर एकजुट होंगे सामाजिक संगठन

    जनसंवाद में भू-कानून समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा

    देहरादून। रचनात्मक कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के सभागार में उत्तराखंड जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। दिनभर चले कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले जनता का घोषणा पत्र तैयार करने और विभिन्न मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करने पर सहमति बनी।

    कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित हुआ। पहले सत्र में पांच अलग-अलग समूहों में प्रदेश के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें पैनलिस्ट के साथ आम प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

    वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने भू-कानून में हुए बदलावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लगातार संशोधनों से उत्तराखंड की जमीन के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। डॉ. प्रेम बहुखंडी ने पलायन पर चर्चा करते हुए कहा कि पलायन अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन लोगों का अपने गांव और पहाड़ की ओर लौटना भी जरूरी है। विजय भट्ट ने अनियोजित शहरीकरण के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई।

    वरिष्ठ पत्रकार एमएसए काजमी और अधिवक्ता रजिया बेग ने अल्पसंख्यक समुदाय के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे पर विचार रखे। आरपी विशाल और जबर सिंह ने दलित उत्पीड़न की घटनाओं को सामने रखा। पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने सांप्रदायिक और दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की।

    राहुल कोटियाल ने सरकारी जमीनों की बिक्री का मुद्दा उठाया। दीपा कौशल ने महिला अधिकारों और उत्पीड़न के मामलों में न्याय की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। सामाजिक कार्यकर्ता अरण्य रंजन ने बढ़ती पर्यटक और तीर्थयात्री संख्या के बीच व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। सरदार तेजिंदर सिंह ने किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की।

    संजय जैन ने संविधान के मूल्यों और समाजवाद पर विचार रखे। हिमांशु अरोड़ा ने विकास परियोजनाओं के नाम पर पेड़ों के कटान पर चिंता जताई, जबकि अमन गुप्ता ने ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ भेदभाव समाप्त करने की आवश्यकता बताई। जगदंबा मैठाणी ने पहाड़ के कुटीर उद्योगों के सामने खड़ी चुनौतियों को उठाया।

    जनसंवाद में किसाऊ बांध, लोक कलाकारों की उपेक्षा, नौले-धारों के संरक्षण और पर्यावरण को हो रहे नुकसान समेत कई अन्य मुद्दे भी उठे।

    रचनात्मक कांग्रेस के मुख्य सारथी संदीप दीक्षित ने संगठन के उद्देश्य और कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि यह मंच केवल कांग्रेस का मंच नहीं, बल्कि जन संगठनों का मंच है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद भी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और उसे जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का काम मंच करता रहेगा।

    कार्यक्रम में उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, विमला कोली, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश भाई, गरिमा दसौनी और सुजाता पॉल समेत कई लोगों ने विचार रखे।
    कार्यक्रम का संचालन रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश सारथी भुवन पाठक ने किया।

  • प्रशिक्षु अधिकारियों ने लिया आपदा प्रबंधन कार्यों का जायजा

    प्रशिक्षु अधिकारियों ने लिया आपदा प्रबंधन कार्यों का जायजा

    आपदा के प्रत्येक चरण में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका- प्रकाश चंद्र

    प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों को दी आपदा प्रबंधन के संस्थागत ढांचे की जानकारी

    देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में वर्ष 2024 एवं 2026 बैच के प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों ने राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था, संस्थागत ढांचे तथा आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों में पुलिस एवं आपदा प्रबंधन तंत्र की भूमिका की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिवादन, राहत एवं पुनर्वास के साथ-साथ आपदा के दौरान पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों एवं विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तंत्र से भी अवगत कराया गया।

    इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, आईआरएस (इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम) की अवधारणा एवं संरचना, चेतावनी प्रसारण तंत्र, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका, नीतिगत दिशा-निर्देशों तथा राज्य स्तर पर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारी एसईओसी और डीईओसी की कार्य प्रणाली से भी रूबरू हुए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने कहा कि आपदा प्रबंधन के संपूर्ण चक्र-आपदा पूर्व, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद की प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाली प्रमुख एजेंसियों में से एक होता है, जिसकी जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग देना भी होती है।
    उन्होंने बताया कि आपदा के समय पुलिस की प्रमुख भूमिका में प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना, सुरक्षित निकासी, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, राहत सामग्री के निर्बाध वितरण में सहयोग, संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा, अफवाहों पर नियंत्रण तथा सटीक सूचना का संप्रेषण शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य, अग्निशमन, एसडीआरएफ एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

    इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों को भविष्य में एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में आपदा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतिक एवं नेतृत्वकारी भूमिकाओं का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में डेडिकेशन, डिवोशन, मानवीय संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की कुंजी होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को आपदा प्रबंधन की जमीनी समझ प्रदान करेंगे तथा वे भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, डाॅ. पीडी माथुर, प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक दक्ष शोखंद, लव शर्मा, सुश्री अदिति पुनेठा, हिमांशु दिवाकर, आदित्य तिवारी, दिव्येश उपाध्याय, अंकित थपलियाल, समीरण भट्ट, विनय सिंह, दीप्ति कैड़ा एवं तनुजा बिष्ट उपस्थित रहे।

  • आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम की पहल

    आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम की पहल

    देहरादून। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को पोषण किट एवं आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल अंतर्गत न्याय पंचायत बिलखेत के प्राथमिक विद्यालय में सात आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मिलन समारोह आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री से रंगोली व पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। 2 लाभार्थी को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट,
    4 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण किट तथा 4 किशोरियों को टी-शर्ट वितरित की गई। 4 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर पोषण कीट वितरण की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल आंगन मिलन समारोह का शुभारंभ मुख्यातिथि भाजपा की महिला मोर्चा जिला मंत्री रजनी मौर्या ने किया उन्होंने
    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को
    उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया सम्मानित होने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री
    बिलखेत- 2 सुमित्रा देवी, धुराली शशि देवी, तोली वाडियूँ सरोजनी देवी,

    चोपड़ा अनीता देवी को सम्मानित किया गया
    सीडीपीओ सुषमा रावत ने केंद्र व राज्य की विभिन्न योजनाओं, पात्रता एवं लाभ की जानकारी दी गई। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं भाजपा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष अंजू देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिलखेत प्रिया देवी,सुपरवाइजर माया राणा,प्रधान अध्यापिका सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को पोषण किट एवं आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल अंतर्गत न्याय पंचायत बिलखेत के प्राथमिक विद्यालय में सात आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मिलन समारोह आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री से रंगोली व पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। 2 लाभार्थी को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट,
    4 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण किट तथा 4 किशोरियों को टी-शर्ट वितरित की गई। 4 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर पोषण कीट वितरण की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल आंगन मिलन समारोह का शुभारंभ मुख्यातिथि भाजपा की महिला मोर्चा जिला मंत्री रजनी मौर्या ने किया उन्होंने
    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को
    उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया सम्मानित होने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री
    बिलखेत- 2 सुमित्रा देवी, धुराली शशि देवी, तोली वाडियूँ सरोजनी देवी,
    चोपड़ा अनीता देवी को सम्मानित किया गया
    सीडीपीओ सुषमा रावत ने केंद्र व राज्य की विभिन्न योजनाओं, पात्रता एवं लाभ की जानकारी दी गई। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं भाजपा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष अंजू देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिलखेत प्रिया देवी,प्रधान अध्यापिका पूर्णिमा जैरवाण विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

    पीएलवी जगमोहन डांगी ने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर की विधिक सहायता एवं कानूनी सेवाओं की जानकारी दी।
    बाल विकास कल्जीखाल की सुपरवाइजर माया राणा ने भी कार्यक्रमों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं समुचित विकास पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया गया। आंगनबाड़ी मिलन कार्यक्रम को सफल संपादन में कार्यकत्री बूंगा सीमा देवी,बिलखेत ,सुनीता देवी,उदय राणा,गोपाल कुमार का सहयोग रहा।
    संचालन पीएलवी जगमोहन डांगी ने किया।

  • पशु चिकित्सा परिषद की बैठक में अहम मुद्दों पर चर्चा

    पशु चिकित्सा परिषद की बैठक में अहम मुद्दों पर चर्चा

    नई नियमावली पर मंथन

    पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास पर जोर

    देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद की द्वितीय कार्यकारिणी की पहली बैठक बुधवार को परिषद सभागार में अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में परिषद की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने, पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास और प्रस्तावित उत्तराखण्ड पशुचिकित्सा परिषद नियमावली-2026 के प्रावधानों पर चर्चा की गई।

    बैठक में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के अधिष्ठाता के प्रतिनिधि डॉ. मंजुल काण्डपाल और रजिस्ट्रार डॉ. प्रलयंकर नाथ सहित नवनिर्वाचित व नामित सदस्य मौजूद रहे।

    रजिस्ट्रार ने नवनिर्वाचित एवं नामित सदस्यों को भारतीय पशुचिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 के विभिन्न प्रावधानों तथा प्रस्तावित नियमावली-2026 की जानकारी दी। परिषद की ओर से प्रदेश के पशुचिकित्साविदों के कौशल विकास और नई पशुचिकित्सा तकनीकों से अवगत कराने के लिए इस वर्ष भी सतत पशुचिकित्सा शिक्षा (सीवीई) कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया।

    निदेशक पशुपालन डॉ. उदय शंकर ने कार्यकारिणी को मजबूत और प्रभावी बनाने तथा पशुचिकित्साविदों के हित में काम करने पर जोर दिया। उन्होंने पशुपालकों और पशुचिकित्साविदों के हितों के बीच समन्वय स्थापित कर विभाग को आवश्यक सुझाव उपलब्ध कराने की बात कही।
    अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल ने बताया कि प्रस्तावित उत्तराखण्ड पशुचिकित्सा परिषद नियमावली-2026 शासन को भेजी जा चुकी है। शासन से अनुमोदन के बाद परिषद पशुपालकों और पशुचिकित्साविदों के हित में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगी। नियमावली के माध्यम से परिषद को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक विधिक अधिकार भी प्राप्त होंगे।

    बैठक में नवनिर्वाचित सदस्य डॉ. राहुल कुमार जोशी, डॉ. आलोक कुडियाल, डॉ. दीप्ति अरोड़ा और डॉ. कमल दुर्गापाल तथा नामित सदस्य डॉ. अमित देवराड़ी, डॉ. कल्पेन्द्र कोहली और डॉ. रचना कुमारी उपस्थित रहे।

  • पाबौ के भू-धंसाव की टीएचडीसी करेगी जांच

    पाबौ के भू-धंसाव की टीएचडीसी करेगी जांच

    आपदा प्रभावित परिवारों के क्षति का आंकलन करेगी उच्च स्तरीय टीम

    क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों व पेयजल लाइनों की तत्काल मरम्मत के निर्देश

    देहरादून। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के पाबों विकासखंड के 29 आपदा प्रभावित परिवारों के क्षति की उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा जांच की जायेगी।
    इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग को कार्यवाही करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा क्षेत्र में आपदा से क्षतिग्रस्त मोटरमार्गों, पुलों व पेयजल लाइनों को शीघ्र मरम्मत करने के निर्देश भी विभागीय अधिकारियों को दिये।

    कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में आपदा से हुये नुकसान को लेकर विभिन्न विभागों की बैठक ली। जिसमें आपदा प्रबंधन विभाग, लोक निर्माण विभाग, पेयजल निगम, जलसंस्थान, पीएमजीएसवाई तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी उपस्थित रहे।

    बैठक में डॉ रावत ने पाबों ब्लॉक के 29 आपदा प्रभावित परिवारों के क्षति का आंकलन किया जायेगा, इसके लिये उच्च स्तरीय समिति गठित कर जांच के निर्देश आपदा प्रबंधन विभाग को दे दिये गए हैं। इसके अलावा प्रभावितों को आपदा नीति के तहत शीघ्र उचित मुआवजा मुहैया करने को कहा। अलावा उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आपदा से क्षतिग्रस्त विभिन्न मोटरमार्गों का शीघ्र पुनर्निर्माण कर आवागमन बहाल करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। साथ ही उन्होंने पाबों में हो रहे भू-धंसाव का टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कार्पोरेशन (टीएचडीसी) से स्थलीय सर्वेक्षण कर ट्रीटमेंट करने के निर्देश दिये। डॉ रावत ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309 (बुआखाल-बैजरों) कई जगहों पर क्षतिग्रस्त होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा उन्होंने लोक निर्माण विभाग व पीएमजीएसवाई के अंतर्गत क्षतिग्रस्त सड़कों को भी शीघ्र मरम्मत कर आवाजाही बहाल करने के निर्देश दिये।

    बैठक में आपदा से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को ठीक कर पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये साथ ही भिड़ाहस्यूडी, विडोलस्यूं एवं ढिक्वाल गांव पेयजल पम्पिंग योजना को शीघ्र पूरा कर क्षेत्र में पेयजलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिये।

    बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग राजेश चंद्र शर्मा, मुख्य अभियंता उत्तराखंड पेयजल निगम संजय सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन) वन विभाग सुशांत पटनायक, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान मनीष सेमवाल, मुख्य अभियंता एन.एस. बिष्ट, अधीक्षण अभियंता पेयजल निगम मोहम्मद मीसम, अनुपम रतन, राजेश सिंह, मोहित उनियाल सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।