देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखण्ड को नया प्रभारी व सह प्रभारी दे दिया है। दुष्यंत गौतम व सह प्रभारी रेखा वर्मा की छुट्टी कर दी गयी है।
ताजा सूची के मुताबिक राम माधव को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। अरविंद मेनन व बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी बनाया गया है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी और दुष्यन्त गौतम को लेकर राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ा हुआ था।
उर्मिला सनावर व भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की मोबाइल वार्ता के बाद गौतम व संगठन महामंत्री अजेय कुमार का नाम खूब उछाला गया।
कांग्रेस समेत अन्य संगठन भी विरोध में उतरे हुए थे। हाल ही में नितिन नवीन के हल्द्वानी दौरे में दुष्यंत गौतम की मौजूदगी को विपक्ष ने प्रमुख मुद्दा बनाया हुआ था।
विधानसभा 2027 के चुनावों को देखते हुए संघ पृष्ठभूमि के राम माधव की ताजपोशी को भाजपा के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
अरविंद मेनन व बांसुरी स्वराज की नियुक्ति भी भाजपा में उत्साह पैदा करने वाली बताई जा रही है।
भाजपा नेतृत्व ने कई राज्यों के प्रभारी व सह प्रभारी की घोषणा की है।
चार सिद्धपीठों के बाद संविधान और राज्य आंदोलन के प्रतीकों को किया नमन
देहरादून। स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय तक राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की देहरादून वापसी के बाद सियासी सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
सोमवार को चार सिद्धपीठों के दर्शन के बाद मंगलवार को हरदा ने घंटाघर पहुंचकर डॉ. भीमराव अंबेडकर और उत्तराखंड आंदोलन के प्रमुख नेता इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
इस दौरान रावत ने भाजपा पर संविधान, महंगाई, बेरोजगारी और धर्म की राजनीति को लेकर निशाना साधा और कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव के लिए जुटने का आह्वान किया।
दोपहर करीब 12:30 बजे घंटाघर पहुंचे रावत ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और संविधान की रक्षा का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का संविधान, समानता और सामाजिक न्याय का संदेश देश का मार्गदर्शन करता रहेगा। रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर धर्म की राजनीति को आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि समाज में आपसी प्रेम और भाईचारा भारत की पहचान रहा है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
रावत ने 2024 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने कई क्षेत्रों में भाजपा को जवाब दिया है।
इसके बाद करीब एक बजे रावत ने इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि बडोनी को उत्तराखंड का गांधी कहा जाता है और राज्य आंदोलन में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
चार सिद्धपीठों में दर्शन, कांग्रेस की वापसी का संकल्प
इससे पहले दिल्ली से आने के बाद सोमवार को रावत ने देहरादून के कालू सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, माणक सिद्ध और मांडू सिद्ध में पूजा-अर्चना की थी। उनके साथ पूर्व मंत्री गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक हरीश धामी, मनोज तिवारी समेत पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। रावत ने इन धार्मिक स्थलों पर प्रदेश की सुख-समृद्धि और कांग्रेस की राजनीतिक वापसी का संकल्प व्यक्त किया।
रावत ने कहा कि स्वास्थ्य कारणों से वह लंबे समय तक राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर रहे, लेकिन अब वह कार्यकर्ताओं के बीच लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से हटाने की जिम्मेदारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उठानी होगी। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवा निराश हैं और जनता गंभीर समस्याओं से जूझ रही है।
चंदन जीना प्रकरण से गरमाया सियासी माहौल
हरीश रावत की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है, जब उनके पूर्व OSD और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बहस तेज है।
10 सितंबर को ईडी ने वीपीडीओ परीक्षा-2016 में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जीना के आवास समेत कई स्थानों पर तलाशी ली थी। ईडी की कार्रवाई में लाखों की नकदी, सोना और महंगी घड़ियां बरामद किए जाने की बात सामने आई है।
कार्रवाई के बाद रावत ने अपने राजनीतिक कार्यकाल की जांच कराने की खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनके कार्यकाल को लेकर सवाल हैं तो आयोग गठित कर पूरे कार्यकाल की जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार के दौरान हुई भर्तियों में पद के दुरुपयोग की गुंजाइश नहीं थी।
ईडी कार्रवाई और रावत की ओर से कांग्रेस के पदों से इस्तीफे की पेशकश के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में भी हलचल रही है। हालांकि, सोमवार को चार सिद्धपीठों की यात्रा और मंगलवार को अंबेडकर-बडोनी को नमन के कार्यक्रमों के जरिये रावत ने कार्यकर्ताओं के बीच अपनी सक्रियता का संदेश दिया। सोमवार को उन्होंने कहा था कि चुनाव से पहले ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं और वह फिलहाल पार्टी के एक सिपाही हैं।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव की कमान संभाले कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने हरीश रावत के हालिया दौरे से दूरी बनाई हुई है। हरदा के कई पुराने साथी अवश्य नजर आ रहे हैं।
सहसपुर से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके आर्येन्द्र शर्मा की हरीश रावत के साथ मौजूदगी नये राजनीतिक संकेत दे रही है।
सहसपुर से हरक सिंह रावत ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। ऐसे में पूर्व सीएम एनडी तिवारी के ओएसडी रहे आर्येन्द्र शर्मा ने हरदा को पकड़ कर हरक को भी अपना सन्देश पहुंचा दिया।
बहरहाल, पूर्व सीएम हरीश रावत की इस सक्रियता ने चुनावी तैयारियों और रणनीति पर अतिरिक्त गर्मी तो पैदा कर ही दी है।
महंगाई में हजारों टन तेल की आहुति पर भाजपा को घेरा
देहरादून। कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ हरक सिंह रावत ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नरेंद्र मोदी द्वारा अपने जन्म दिवस के अवसर पर दीपोत्सव मनाने पर तीखा हमला बोला उन्होंने कहा कि जिस देश में महंगाई चरम पर है आम आदमी के घर में दो वक्त का चूल्हा भी जलना मुश्किल हो रहा है उस समय मोदी जी के लिए दीप जलाने और अपने आपको उनका सच्चा भक्त दिखाने के होड़ लगी हुई है।
और हजारों टन तेल की आहुति देने को नेता तैयार हैं ।
अगर ये दीपक देश की जानता उनके कामो से ख़ुश होकर जलाती तो बात अलग थी। उन्होंने कहा की देश के युवाओं के साथ छल करने का काम इस देश के प्रधानमंत्री ने किया है।
उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली योजना है।
देश के लाखों युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर भर्ती की तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है।
चार वर्ष की सेवा के बाद भविष्य की अनिश्चितता युवा 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में प्रवेश करता है और चार वर्ष बाद लगभग 21-22 वर्ष की उम्र में उसे दोबारा रोजगार की तलाश करनी पड़ सकती है। कांग्रेस का सवाल है कि इतने कम समय में युवा अपने परिवार और भविष्य को किस प्रकार सुरक्षित करेगा?
स्थायी सैनिक और अग्निवीर में असमानता का सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। जब दोनों देश की सुरक्षा के लिए समान जोखिम उठाते हैं, तो सेवा की अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के मामले में इतना बड़ा अंतर क्यों?
गोदियाल ने कहा कि सैनिक को केवल चार वर्ष के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी मानना उचित नहीं। सेना में अनुभव, अनुशासन और विशेषज्ञता वर्षों की सेवा से विकसित होती है।
प्रीतम सिंह ने कहा की अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है।
उत्तराखंड की सैन्य परंपरा अत्यंत गौरवशाली रही है। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवार सेना में रोजगार को पीढ़ियों से अपनी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते रहे हैं। अग्निवीर व्यवस्था का उत्तराखंड के युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ‘पक्की नौकरी’ चाहिए, चार साल का इंतजार नहीं।
आज देश में बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिनाई के बीच युवा वर्षों तक तैयारी करता है। चार वर्ष की सेवा के बाद फिर से रोजगार की दौड़ में लौटना उसके लिए गंभीर चुनौती है।
पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले सैनिकों और चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त एवं दीर्घकालिक व्यवस्था क्या है?
75 प्रतिशत युवाओं का क्या होगा इस प्रश्न का उत्तर आज तक नहीं मिल पाया है,
योजना की सबसे बड़ी चिंता यही है कि नियमित सेवा में सीमित संख्या में युवाओं के चयन के बाद शेष युवाओं के लिए रोजगार का स्थायी रोडमैप क्या है।
सरकार स्पष्ट करेकृसेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए कितनी स्थायी नौकरियां सुनिश्चित कैसे होगी।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ हरक सिंह रावत ने कहा की केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण अथवा प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस सरकार से वास्तविक नियुक्तियों का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग करे।
उन्होंने कहा की उत्तराखंड एक सैन्य बाहुल्य राज्य है यहाँ हर घर में एक सैनिक है जब यहाँ कोई शहीद होता है तो उसकी माता पिता बहन सब गौरवान्वित महसूस करते हैं अग्निवीर योजना देश के और प्रदेश के युवाओं की भावनाओं के साथ खेलने जैसा है,सेना की भर्ती को रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम न बनाया जाए।
सेना राष्ट्र की सुरक्षा का सर्वोच्च संस्थान है। भर्ती नीति का उद्देश्य मजबूत, प्रशिक्षित और अनुभवी सैन्य बल तैयार करना होना चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि जिन युवाओं ने वर्षों तक सेना में स्थायी भर्ती की तैयारी की, उनके लिए भर्ती व्यवस्था को अचानक बदलना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित भर्ती की मांग की सेना की नियमित भर्ती प्रक्रिया को मजबूत किया जाए, रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाए और युवाओं को पर्याप्त भर्ती अवसर दिए जाएं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सैन्य बहुल राज्य उत्तराखंड के युवाओं के लिए सेना में नियमित भर्ती के पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए जाएं तथा अग्निवीरों के पुनर्वास की विशेष नीति बनाई जाए।
सेवा से बाहर होने वाले युवाओं के लिए ‘रिहैबिलिटेशन पैकेज’ की घोषणा करनी चाहिए,
सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने कहा की पहले 80 हजार युवाओं को हर साल युवाओं को रोजगार मिलता था जो अब घट कर 47000 रह गए हैं, जिसमे अगर सिर्फ 25% को स्थायी तौर ओर लेंगे तो इसका मतलब ये हुआ की सिर्फ 12 हजार युवा प्रति वर्ष स्थाई नौकरी पा रहे हैं।
सेना में जहाँ पहले ये आंकड़ा एक लाख पार था । ये डेटा 2023 का सरकार का है। उन्होंने कहा कि सरकार
सरकार स्पष्ट करे कि चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं को उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और बैंक ऋण में क्या ठोस सुविधाएं दी जा रही हैं।
कांग्रेस देश की मजबूत सेना और युवाओं के सम्मानजनक रोजगारकृदोनों के पक्ष में है। हमारा विरोध सेना या सैनिकों से नहीं, बल्कि ऐसी भर्ती व्यवस्था से है जो युवाओं के भविष्य को अनिश्चित बनाती है सरकार बताए कि चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं का रोजगार का पक्का इंतजाम क्या है?
अब तक कितने अग्निवीरों को चार वर्ष बाद स्थायी सरकारी रोजगार मिला? सेना में नियमित भर्ती के रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे?उत्तराखंड के कितने युवाओं ने अग्निवीर योजना के माध्यम से भर्ती पाई और उनमें से कितनों को आगे स्थायी सेवा मिली?
क्या सरकार अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने को तैयार है?
क्या सरकार अग्निवीरों को भविष्य में नियमित सैनिकों के समान सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा देने पर विचार करेगी?
“देश के युवाओं को चार साल की नौकरी नहीं, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य चाहिए। सेना को प्रयोगशाला नहीं बनाया जा सकता। अग्निवीरों के भविष्य की गारंटी सरकार को देनी होगी। कांग्रेस युवाओं के रोजगार, सैनिकों के सम्मान और देश की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के लिए अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह आदि उपस्थित रहे।
पहले सत्र में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का मिला मार्गदर्शन
हल्द्वानी । भाजपा की विस्तृत प्रदेश कार्यसमिति का पहला सत्र विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत संकल्प प्रस्ताव अनुमोदन के साथ सम्पन्न हुआ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर बैठक का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, अल्मोड़ा सांसद अजय भट्ट, टिहरी सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कल्पना सैनी, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, दीप्ति रावत, तरुण बंसल एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक मंच पर उपस्थित रहे।
रामपुर रोड के एक निजी प्रतिष्ठान के हरि प्रसाद टम्टा सभागार में हुई इस कार्यसमिति के प्रथम राजनैतिक प्रस्ताव में पीएम मोदी के बतौर पीएम एवं सीएम सेवा के 25 वर्षों की उपलब्धियों और विकसित होते भारत की विस्तृत चर्चा की।
इस प्रस्ताव को नरेश बंसल ने प्रस्तुत किया जिसका अनुमोदन अजय भट्ट, रेखा आर्य, महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और मदन कौशिक द्वारा किया गया।
इसी तरह दूसरे राजनीतिक प्रस्ताव में किस तरह विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत के संकल्प पर चर्चा की गयी। इस प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने प्रस्तुत किया। और डाक्टर कल्पना सैनी, विजय बहुगुणा द्वारा किया गया।
बैठक के प्रदेश प्रभारी दुष्यन्त कुमार गौतम एवं सह प्रभारी रेखा वर्मा ने भी मार्गदर्शन दिया है।
सीएम धामी के नेतृत्व में 2027 में विजयी होंगे- तीरथ
तीरथ सिंह रावत सादगी, सौम्यता और सहजता की प्रतिमूर्ति -धामी
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का देहरादून में भव्य स्वागत
उत्तराखंड की संस्कृति से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्तः धामी
विकसित भारत-विकसित उत्तराखंड के जरूरी है मोदी और धामी
देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा कि सीएम धामी विकसित भारत के पीएम मोदी के विजन को आगे बढ़ा रहे हैं। और 2027 के विधानसभा चुनाव में सीएम धामी व प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में भाजपा विजयी होगी।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुधवार को पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीरथ सिंह रावत का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाना पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व मिलने से प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीरथ सिंह रावत सादगी, सौम्यता और सहजता की प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने संगठन के विभिन्न दायित्वों का पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह जिम्मेदारी उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का सम्मान है। निश्चित रूप से उनके अनुभव का लाभ भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगा।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड जैसे शांत और सामाजिक समरसता वाले प्रदेश को जातियों के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के पास विकास और जनहित के मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वह समाज में विभाजन पैदा करने की राजनीति कर रही है। उत्तराखंड की जनता को जातियों में बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की कांग्रेस की कोशिश कभी सफल नहीं होगी।
हल्द्वानी प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में जिस प्रकार आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले नारे लगाए गए तथा मूत्र से भरी बोतलें फेंकने जैसा घृणित कृत्य किया गया, वह किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इसके बाद संबंधित स्थान का शुद्धिकरण किया गया, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इस पर भी राजनीति दिखाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को देश और प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले इस घृणित कृत्य के खिलाफ उन्होंने आवाज क्यों नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्यों पर राजनीति करने के बजाय कांग्रेस को स्पष्ट रूप से इसकी निंदा करनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस के लिए धार्मिक भावनाओं का अपमान भी राजनीतिक चश्मे से देखने का विषय है?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड में तुष्टीकरण की राजनीति और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देवभूमि की शांति, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के साथ कानून पूरी कठोरता से अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को भड़काने, माहौल खराब करने अथवा कानून-व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास करेगा, उसके लिए उत्तराखंड में सिर्फ जेल की जगह है। सरकार किसी के दबाव में नहीं आएगी और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तराखंड भी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए देवभूमि की विशिष्ट पहचान, संस्कृति और मूल स्वरूप को मजबूत करने का कार्य किया है।
कार्यक्रम में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने स्वागत एवं अभिनंदन के लिए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत के साथ जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसे साकार करने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं और आगामी विधानसभा चुनाव भी धामी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
रावत ने कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी जनता तक पहुंचाने तथा बूथ स्तर पर संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका कार्यकर्ता है। संगठन कार्यकर्ताओं के परिश्रम और समर्पण से खड़ा होता है और भाजपा में पद से बड़ा कार्यकर्ता होता है। उन्होंने प्रत्येक कार्यकर्ता से आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी निष्ठा और एकजुटता के साथ जुटने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, माननीय कैबिनेट मंत्री खजान दास,सांसद नरेश बंसल, प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल, दीप्ति रावत भारद्वाज समेत कई पदाधिकारीगण एवं कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।
प्रदेश के एकमात्र निर्दलीय महापौर समेत 10 पार्षद हुए भाजपाई
प्रदेश के सभी 11 नगर निगमों में भाजपा के मेयर
देहरादून। विधानसभा चुनाव की जारी हलचल के बीच तोड़ फोड़ का खेल शुरू हो गया है। नगर निगम चुनाव में भाजपा की बागी उम्मीदवार व निर्दलीय तौर पर मेयर का चुनाव जीतने वालीं आरती भंडारी और उनके पति लखपत भंडारी ने घर वापसी की है।
बुधवार को श्रीनगर की मेयर आरती भंडारी के साथ दस पार्षदों ने प्रदेश मुख्यालय में भाजपा की सदस्यता ली।
इसके साथ ही सभी 11 नगर निगमों में मेयर की सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट एवं कैबिनेट मंत्रीधन सिंह रावत ने श्रीनगर नगर निगम के कांग्रेस के दो पार्षदों समेत कुल 10 पार्षदों को भी पार्टी में शामिल कराया।
गौरतलब की जनवरी 2025 में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर लखपत भंडारी ने बगावत कर अपनी पत्नी आरती भंडारी को निर्दलीय मेयर का चुनाव लड़वा दिया। और जीत हासिल की।
श्रीनगर मेयर के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी।की हार कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत की हार मानी गयी थी। चुनाव प्रचार के दौरान लखपत भंडारी ने श्रीनगर से भाजपा विधायक व मंत्री धन सिंह रावत पर कई संगीन आरोप लगाए थे।
पार्टी प्रदेश मुख्यालय में हुए इस ज्वाइनिंग कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा, परिवार के पुराने लोगों के आपस मिलने जैसी खुशी आज महसूस हो रही है। हम पार्टी को परिवार के रूप में मानते हैं, जब बड़ी संख्या में लोग जुड़ते हैं, तो हमारे परिवार का हिस्सा बन जाते हैं।
इस दौरान कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने भंडारी दम्पत्ति को घर वापसी की बधाई देते हुए स्वागत किया। कहा कि जल्द ही श्रीनगर में एक बड़ा कार्यक्रम करेंगे । और एक हजार नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ा जाएगा।
पार्टी की सदस्यता लेने वाली श्रीनगर मेयर श्रीमती आरती भंडारी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री धामी समेत प्रदेश नेतृत्व का इस अवसर के लिए आभार व्यक्त किया। हमारी पहले भी सोच एक थी, आज हम सब की सोच एक है और अब हम सब को मिलकर भाजपा के लिए काम करना है। भाजपा सनातन धर्म और संस्कृति को केंद्र में रखकर कार्य करती है, जो हम सबकी मूल भावना के अनुरूप है। वहीं स्वीकारा कि निश्चित तौर पे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी थीं कि नगर निगम चुनाव में हमें विभिन्न परिस्थिति में अलग होकर चुनाव लड़ना पड़ा था। लेकिन हमारी विचारधारा हमेशा भाजपा के प्रति थी और मेरे लिए बहुत खुशी और गर्व की बात है कि आज मेरी पुनः अपने घर में वापसी हुई है। उन्होंने कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत का भी आभार प्रकट किया कि आपने पुनः अपनी टीम में हमें शामिल किया और एक बार पुनः पार्टी की सेवा करने का मौका दिया।
वहीं पार्टी की सदस्यता लेने वाले वरिष्ठ नेता लखपत भंडारी ने बताया कि बहुत सारे लोगों ने अपनी ताकत लगाई, किसी भी प्रकार से हम उनके साथ जुड़ जाएं, बहुत प्रलोभन दिए। लेकिन मेरी विचारधारा जिस परिवार से जुड़ी है, मैं उसको छोड़ नहीं सकता था। इसमें सबसे बड़ी जो भूमिका थी, वह मेरी पत्नी और श्रीनगर महापौर की, उन्होंने भी कहा कि हम जिस दिन किसी पार्टी को ज्वाइन करेंगे तो भारतीय जनता पार्टी परिवार को ही ज्वाइन करेंगे, अन्यथा निर्दलीय ही रहेंगे।
श्रीनगर नगर निगम से पार्टी ज्वाइन करने वालों में निर्दलीय पार्षद श्रीमती अंजनी भंडारी, श्रीनति मीणा देवी, श्रीमती भावना चौहान, प्रवेश चमोली, श्री विजय कुमार चमोली, आशीष नेगी, धर्म सिंह रावत, नरेंद्र सिंह रावत, कांग्रेस से पार्षद राजकुमार, अनुराग चौहान के नाम प्रमुख है।
इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, तरुण बंसल, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, पौड़ी जिला प्रभारी नलिन भट्ट, पौड़ी जिला अध्यक्ष कमल किशोर रावत भी मौजूद रहे।
देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नयी टीम के ऐलान के साथ ही प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की भी गुपचुप विदाई की भी कहानी लिख दी गयी।
सोमवार को घोषित टीम में उत्तराखंड से पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उनके वनवास को खत्म किया गया। जबकि
पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी तीसरी बार भी राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की भूमिका में नजर आएंगे। उनके इस पद पर बने रहने से उत्तराखण्ड भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया में बने रहने की संभावनाएं पूरी तरह बनी रहेगी। राज्य के कई ज्वलंत मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर छाए रहने की उम्मीद है।
इसके अलावा उत्तराखण्ड से महेंद्र पांडेय को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी एवं आलोक भट्ट को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक नियुक्त किया गया है। जबकि अभी तक राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष की भूमिका में नजर आ रहे राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का नाम नितिन नवीन की नई सूची में दर्ज नहीं हो पाया।
बहरहाल, नितिन नवीन की टीम के आठ नये राष्ट्रीय महामंत्री की सूची में दुष्यंत गौतम का नाम नहीं होना प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह फैसला लेकर भाजपा हाईकमान ने प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की भी बिना शोर शराबे के हौले से रुखसती कर दी। जबकि पार्टी नेतृत्व पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार को पहले ही राजस्थान की दिशा में भेज चुका है।
दरअसल, प्रदेश के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी के तौर पर अजेय कुमार और दुष्यंत गौतम का नाम खूब उछला। अंकिता के माता पिता ने भी इन दोनों भाजपा नेताओं का सार्वजनिक तौर पर नाम लिया।
बाद में ज्वालापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की मोबाइल टॉक और चैट में भी इन दोनों नेताओं का नाम सामने आया।
प्रदेश से लेकर देश तक तूफान मच गया। और जेल में बंद तीनों अभियुक्तों को सजा मिलने के बाद सरकार को पहले एसआईटी और फिर सीबीआई जांच के लिए बाध्य होना पड़ा।
सुरेश राठौर को जेल भी भुगतनी पड़ी। गौतम ने भी कोर्ट की शरण लेकर तमाम नोटिस भेजे।
जांच के दौरान पूर्व विधायक ने स्वीकार किया वो नशे/नींद में इन नेताओं का वीआईपी के तौर पर नाम लिया। यह भी चर्चा है कि सीबीआई जांच में भी कथित वीआईपी का कोई सुराग नहीं मिला। और यह आरोप पुष्ट भी नहीं हुआ। अब यह जांच लगभग क्लोज ही मानी जा रही है।
कथित वीआईपी के मुद्दे पर विपक्षी दल समेत कई संगठन अभी भी सड़कों पर है। लिहाजा, चुनावी साल में भाजपा को इस मुद्दे पर हो रहे राजनीतिक नुकसान को देखते हुए अजेय कुमार को राजस्थान शिफ्ट किया गया। हालांकि, अजेय कुमार को बड़ा राज्य मिलने पर विपक्ष व जन संगठनों ने आंखे भी तरेरी थी।और अजेय कुमार के बाद दुष्यंत गौतम को भी पार्टी ने उत्तराखंड से लगभग किनारे ही कर दिया था। होर्डिंग से दुष्यंत गौतम के पोस्टर गायब हो गए। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक तौर पर दुष्यंत गौतम को शिफ्ट करने के बजाय नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम के ऐलान तक इंतजार किया।
अब राष्ट्रीय महामंत्री की सूची से नाम कटने के बाद यह साफ ही गया है कि उत्तराखंड को चुनावी साल में जल्द ही नया प्रदेश प्रभारी मिलेगा। इसके अलावा भाजपा को नये चुनाव प्रभारी को भी फाइनल करना है।
इसके अलावा, पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भी संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। 2024 में पौड़ी से सांसदी का टिकट कटने के बाद से तीरथ रावत वनवास झेल रहे थे। 2024 में हरिद्वार से पूर्व सीएम निशंक की जगह त्रिवेंद्र रावत को आजमाया गया था। इधऱ, 2024 से पूर्व सीएम निशंक को भी कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है…
ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी पर आरोप लगा रही भाजपा
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा और राज्य सरकार पर पेपर लीक, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ तथा जन मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं भाजपा वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष और राहुल गांधी पर आरोप लगाने में जुटी है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में धस्माना ने कहा कि वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में सामने आए पेपर लीक मामले ने सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में लगभग एक दर्जन पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है और नकल माफिया को संरक्षण मिला हुआ है।
धस्माना ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आस्था के केंद्र भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम में 223 किलो सोना गायब होने, बद्रीनाथ धाम में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी तथा अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन मामलों पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में पेपर लीक, नकल माफिया और मंदिरों के चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी।
कैबिनेट मंत्री खजान दास की ओर से राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए धस्माना ने कहा कि देशभर में युवा और छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष संसद और सड़कों पर युवाओं की आवाज उठा रहा है, लेकिन भाजपा इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर अनर्गल आरोप लगा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं की मांगों की अनदेखी करती है और आंदोलनरत छात्रों पर बल प्रयोग करती है, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराए। राहुल गांधी ने भी युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाने का काम किया है, जिससे भाजपा असहज महसूस कर रही है।
धस्माना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पेपर लीक की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जबकि भाजपा और राज्य सरकार वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं।
‘गोदियाल ने समिति के संसाधनों और दान राशि का दुरुपयोग किया’
‘जांच प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं गणेश गोदियाल ‘
देहरादून। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों को निराधार और जांच को प्रभावित करने की कोशिश बताया है।
उन्होंने कहा कि बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की एसआईटी, विभागीय तथा उच्चस्तरीय जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने गणेश गोदियाल द्वारा लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि गिरफ्तार आरोपी ने किसी के निर्देश पर कार्य करने की बात कही है, तो गोदियाल को इसकी जानकारी कहां से मिली?
उन्होंने पूछा कि क्या गोदियाल की आरोपी से बातचीत हुई है अथवा उन्हें जांच एजेंसियों से कोई गोपनीय जानकारी प्राप्त हुई है? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तथ्यों के इस तरह के बयान देकर कांग्रेस जांच को प्रभावित करने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने गणेश गोदियाल के मंदिर समिति अध्यक्ष रहते हुए लिए गए निर्णयों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि एक कर्मचारी को नियमों की अनदेखी कर इंटरनेट कोऑर्डिनेटर से व्यक्तिगत सहायक के पद पर पदोन्नत किया गया और इसके लिए निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित पद आज भी विभाग में रिक्त है।
द्विवेदी ने दावा किया कि अपने 14 माह के कार्यकाल में उन्होंने मंदिर समिति का कोई भी कर्मचारी निजी उपयोग में नहीं रखा, जबकि पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में समिति के संसाधनों का निजी और राजनीतिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति की दान राशि और बजट का उपयोग अधीनस्थ मंदिरों, धर्मशालाओं और संस्कृत विद्यालयों के विकास के बजाय अन्य कार्यों में किया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 की जांच रिपोर्ट में भी समिति के संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। उनका आरोप है कि मंदिर समिति के धन का उपयोग विवेकाधीन कोष की तरह कर विभिन्न व्यक्तियों और संस्थानों को लाभ पहुंचाने में किया गया।
उन्होंने दोहराया कि जांच पूरी होने के बाद सत्य स्वयं सामने आएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी प्रकरण में BKTC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग, मुख्यमंत्री की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी प्रकरण में हुए नए खुलासो का हवाला देते हुए बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की कड़ियां मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रही हैं और इसकी निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय न्यायिक समिति का गठन किया जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में गणेश गोदियाल ने कहा कि मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी एवं पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान के कथित खुलासे से कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
उनके अनुसार, जांच में चौहान ने बताया है कि उसे निर्देश प्रमोद नौटियाल से मिलते थे और नौटियाल को निर्देश BKTC अध्यक्ष से प्राप्त होते थे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में ये तथ्य सही साबित होते हैं तो यह केवल व्यक्तिगत स्तर की चोरी नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का मामला है।
गोदियाल ने कहा कि नैतिकता के आधार पर हेमंत द्विवेदी को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार को उन्हें पद से हटाना चाहिए, ताकि जांच प्रभावित न हो और साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे से जुड़े धन और राशन सामग्री का उपयोग यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक लाभ के लिए किए जाने की शिकायतें पहले भी उठाई गई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार उनके पुराने कार्यकाल से जुड़े आरोपों को उठाकर मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम से जुड़े इस पूरे प्रकरण की जांच किसी उच्चस्तरीय समिति से कराई जानी चाहिए, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश द्वारा की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हेमंत द्विवेदी को बद्री-केदार मंदिर समिति जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान का अध्यक्ष किन आधारों पर बनाया गया।
गौरतलब है कि बदरीनाथ चढ़ावा चोरी में पुलिस प्रमोद नौटियाल और राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर चुकी है। इस मुद्दे पर बीकेटीसी अध्यक्ष ने गोदियाल को बदरी-केदार मंदिर के प्रांगण में खुली बहस को चुनौती दी है।।