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Wednesday, March 18, 2026
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युवाओं को नशे और मोबाइल एडिक्शन के खिलाफ किया गया जागरूक

राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में NSS शिविर का चौथा दिन

​खाड़ी (टिहरी गढ़वाल)। राजकीय महाविद्यालय खाडी में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण पर पोस्टर प्रतियोगिता, स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण के विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। चतुर्थ दिवस के प्रथम सत्र में स्वयंसेवियों द्वारा चिड़ीयाली ग्राम सभा में स्वच्छता अभियान एवं जन जागरूकता अभियान चलाया जिसमें छात्र-छात्राओं ने ग्राम सभा के पंचायती घर एवं जल स्रोतों की साफ सफाई की तत्पश्चात ग्राम सभा में पर्यावरण स्वच्छता मतदान एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से संबंधित नारों के साथ जन जागरूकता फैलाया ।

बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में स्वास्थ्य विभाग टिहरी गढ़वाल की प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. रीना सिंह उपस्थित रहीं। उन्होंने स्वयंसेवकों को वर्तमान समय की दो सबसे बड़ी चुनौतियों—नशा और मोबाइल एडिक्शन—के प्रति जागरूक किया।

तंबाकू और नशे के दुष्प्रभावों पर प्रहार
​राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. रीना सिंह ने स्वयंसेवकों को तंबाकू और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा:
​नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि उसके सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी अंधकार में धकेल देता है।

कैंसर, हृदय रोग और मानसिक अवसाद जैसे गंभीर रोगों का मूल कारण अक्सर नशा ही होता है।

मोबाइल एडिक्शन: एक अनसुनी बीमारी
​डॉ. सिंह ने युवाओं में बढ़ते मोबाइल एडिक्शन (Nomophobia) पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक ‘साइलेंट किलर’ बताया। उन्होंने स्वयंसेवकों को बताया कि कैसे अत्यधिक मोबाइल का उपयोग एकाग्रता की कमी, नींद न आना और सामाजिक अलगाव का कारण बन रहा है। उन्होंने इससे बचने के लिए ‘डिजिटल डिटॉक्स’ और रचनात्मक शौक पालने की सलाह दी।

सरकारी योजनाओं की जानकारी
​शिविर में भारत सरकार द्वारा नशा मुक्ति हेतु चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की गई। डॉ. सिंह ने
​ युवाओं को जागरूक करते हुए कहा यदि कोई युवा नशें की जद में आ जाएं तो सरकार द्वारा संचालित ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत युवाओं को पुनर्वास केंद्रों और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की सहायता लेनी चाहिए।
​एनएसएस स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी है कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक इस संदेश को पहुँचाएं।
​”युवा शक्ति ही देश की असली पूंजी है। यदि युवा नशे और तकनीक के दुरुपयोग से बचकर अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाएं, तो भारत को पुनः विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।” — डॉ. रीना सिंह, मनोचिकित्सक

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य प्रो 0 अरुण कुमार सिंह और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती मीना द्वारा मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त किया गया। सभी स्वयंसेवकों, एंटी ड्रग्स कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉक्टर शनव्वर, डॉ संगीता बिजलवाण जोशी एवं दीपक ,पंकज सभी ने मिलकर समाज को नशा मुक्त बनाने की शपथ ली।

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