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Tuesday, February 10, 2026
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भारत का पौराणिक इतिहास (श्री राम कथा)” पुस्तक का भव्य लोकार्पण

“श्री राम कथा पर आधारित पुस्तक का भव्य विमोचन

देहरादून। सनातन महापरिषद, भारत के पदाधिकारियों ने उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी से एक शिष्टाचार भेंट की। यह भेंट देहरादून स्थित मुख्यमंत्री निवास पर सम्पन्न हुई, जहां संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सी.एम. पांडे, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री एस.पी. गौड़, उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज ईष्टवाल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री मयंक भारद्वाज, संगठन मंत्री श्री कंचन सुंडली तथा श्री राजेश सुंडली शामिल थे।

इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान विभिन्न अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इनमें विशेष रूप से आगामी हरिद्वार कुंभ 2027 में सनातन महापरिषद की भूमिका, राजा भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम (कोटद्वार) के संरक्षण और विकास से संबंधित विषय, तथा उत्तराखंड राज्य में स्थित प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं पुनः स्थापत्य से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन मुद्दों पर महापरिषद ने मुख्यमंत्री से सकारात्मक सहयोग का अनुरोध किया तथा राज्य सरकार की सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा जताई।

साथ ही, सनातन महापरिषद की उत्तराखंड इकाई ने मुख्यमंत्री श्री धामी से अनुरोध किया कि वे संगठन की उत्तराखंड शाखा में संरक्षक की भूमिका स्वीकार करें, जिससे संगठन को भविष्य में और अधिक सशक्त दिशा में कार्य करने की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन मिल सके।

इस शिष्टाचार भेंट के पश्चात् राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्री अशोक असवाल ने जानकारी दी कि माननीय मुख्यमंत्री ने महापरिषद के सभी सुझावों को बहुत ही गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण से सुना। उन्होंने सभी विषयों पर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया तथा महापरिषद द्वारा किए जा रहे राष्ट्रहितैषी कार्यों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिलाया।

इस विशेष अवसर पर एक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें “भारत का पौराणिक इतिहास (श्री राम कथा)” नामक पुस्तक का भव्य लोकार्पण भी संपन्न हुआ। यह ग्रंथ भारत की पौराणिक धरोहर को संजोने एवं नई पीढ़ी को उससे जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। उपस्थित जनों ने इस पुस्तक के माध्यम से सनातन संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन से संबंधित प्रसंगों को व्यापक रूप से प्रस्तुत किए जाने की सराहना की।

इस संपूर्ण आयोजन ने न केवल संगठन और शासन के मध्य समन्वय को सुदृढ़ किया, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण हेतु एक ठोस पहल की नींव भी रखी।

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