चीन के शुल्क बढ़ाने से कैलास मानसरोवर यात्रा पर असर, टनकपुर बना वैकल्पिक रास्ता

कैलास मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू, टनकपुर मार्ग से गुजरेगी यात्रा

2019 के बाद पहली बार कैलास मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो रही है। कोरोना महामारी के कारण यह पवित्र मानसरोवर यात्रा पिछले तीन वर्षों से बंद थी, जिससे शिवभक्तों में इस यात्रा को लेकर भारी उत्सुकता और उमंग देखी जा रही है। इस बार यात्रा कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की देखरेख में आयोजित की जाएगी। केएमवीएन ने मानसरोवर यात्रा की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया है और सुनिश्चित किया है कि श्रद्धालुओं को पूरी सुविधा एवं सुरक्षा प्रदान की जाए। यात्रा की शुरुआत 30 जून से होगी और पहला दल 5 जुलाई को टनकपुर पहुंचेगा। इस बार कुल 250 श्रद्धालु पांच अलग-अलग दलों में विभाजित होकर हिमालय की कठिनाइयों को पार करते हुए टनकपुर-पिथौरागढ़-धारचूला मार्ग से कैलास मानसरोवर तक पहुँचेंगे। टनकपुर से शुरू होने वाला यह मार्ग पारंपरिक रूप से भी महत्वपूर्ण है और मानसखंड जैसे धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। यह मार्ग इसलिए भी चुना गया है क्योंकि इसमें यात्रियों के लिए आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं की उपलब्धता बेहतर है।

चीन के शुल्क बढ़ाने से महंगी हुई कैलास मानसरोवर यात्रा

इस बार की मानसरोवर यात्रा पहले की तुलना में आर्थिक रूप से ज्यादा बोझिल होगी। 2019 के बाद चीन ने अपने वीज़ा शुल्क में करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। जहां पहले यात्रियों को चीन के लिए लगभग 77 हजार रुपये का शुल्क देना पड़ता था, अब यह बढ़कर करीब 95 हजार रुपये या 1100 डॉलर हो गया है। इसके अलावा, दिल्ली में मेडिकल जांच, ईको टेस्ट और अन्य औपचारिकताओं के लिए भी लगभग 10,400 रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम भी अपनी सेवाओं के लिए करीब 51 हजार रुपये प्रति यात्री लेगा। कुल मिलाकर कैलास मानसरोवर यात्रा की लागत 1.84 लाख रुपये के करीब पहुँच गई है, जो पहले की तुलना में लगभग 17 से 20 हजार रुपये ज्यादा है। अधिकारियों का कहना है कि इस वृद्धि में डॉलर की विनिमय दर में आए बदलाव भी एक बड़ा कारण है। इस बढ़े हुए खर्च के बावजूद यात्रा में कोई कमी नहीं की गई है और सभी जरूरी व्यवस्थाएं बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया है, ताकि श्रद्धालु पूरी शांति और सुरक्षा के साथ यात्रा कर सकें।

मानसरोवर यात्रा का विस्तारित शेड्यूल और स्वास्थ्य जांच की नई व्यवस्था

पहले यह यात्रा लगभग 20 से 21 दिनों में पूरी होती थी, लेकिन इस बार इसकी अवधि बढ़ाकर 23 दिन कर दी गई है। यह विस्तार इसलिए किया गया है ताकि यात्रियों को प्रत्येक पड़ाव पर आराम और अनुकूलन के लिए पर्याप्त समय मिल सके, जिससे उच्च हिमालय की कठिनाइयों का सामना बेहतर ढंग से किया जा सके। कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान श्रद्धालु टनकपुर, धारचूला, गुंजी, नाभीढांग, तकलाकोट, दरचेन, डेरफुक, ज़ुनझुई पु, कुजु, चौकोड़ी और अल्मोड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से गुजरेंगे, जहां उन्हें विश्राम और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया भी इस बार अपडेट की गई है पहले यात्रियों की जांच धारचूला, पांगु और गुंजी में होती थी, लेकिन अब दिल्ली और गुंजी में ही मेडिकल जांच कराई जाएगी। इसका उद्देश्य मानसरोवर यात्रा के दौरान होने वाली स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों को रोकना और तीव्र उपचार सुनिश्चित करना है। केएमवीएन के महाप्रबंधक विजय नाथ शुक्ल ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं निश्चित समय सीमा में पूरी कर ली जाएंगी और यात्रियों को सुरक्षित व सुव्यवस्थित यात्रा का भरोसा दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि टनकपुर के साथ-साथ अन्य पड़ावों पर भी आवश्यक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधों को दुरुस्त किया गया है, ताकि कठिन हिमालयी पर्यावरण में श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो।

पर्यावरण सुरक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी विशेष ध्यान

इस बार की कैलास मानसरोवर यात्रा में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। केएमवीएन ने यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को फैलने से रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। सभी यात्रियों और संगठनों को पर्यावरण अनुकूल सामग्री इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, स्थानीय समुदायों ने भी यात्रा को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने यात्रियों के लिए खाने-पीने, आवास और मार्गदर्शन में सहायता प्रदान करने की बात कही है। स्थानीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी मानसरोवर यात्रियों के लिए आयोजित किए जाएंगे, जिससे यह यात्रा केवल आध्यात्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक अनुभव भी बनेगी

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