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Friday, April 17, 2026
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लोकायुक्त नहीं, फिर भी भ्रष्टाचार शिकायतों का सिलसिला जारी

भ्रष्टाचार की कुल 1732 शिकायतें लोकायुक्त की नियुक्ति के इंतजार में

लोकायुक्त नहीं लेकिन हो चुके हैं 19.64 करोड़ रूपये खर्च

देहरादून। बेशक प्रदेश में लोकायुक्त की।नियुक्ति नहीं हो पाई लेकिन भ्र्ष्टाचार की शिकायतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य में 12 साल से अधिक समय से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है।
लोकायुक्त कार्यालय को लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों के पुलिंदे खूब मिल रही है। और बिना लोकायुक्त के लोकायुक्त कार्यालय पर 19.64 करोड़ रूपये से अधिक खर्च हो चुके है।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने लोकायुक्त उत्तराखंड कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी से उत्तराखण्ड लोकायुक्त कार्यालय में प्राप्त शिकायतों व उसके कार्यालय पर खर्च के संबंध में सूचनाएं मांगी थी।
लोक सूचना अधिकारी प्रमोद कुमार जोशी ने 20 मार्च को शिकायतों व खर्च के विवरण की प्रतियां उपलब्ध करायी है।
नदीम को उपलब्ध विवरणों के अनुसार 20 मार्च तक कुल 1732 शिकायतें लोकायुक्त के इंतजार में लम्बित है। लोकायुक्त पद रिक्त होने की तिथि 01-11-2013 से सूचना उपलब्ध कराने की तिथि 20 मार्च 2026 तक कुल 1096 भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई है।

वर्ष 2022 से 2025 तक 118 शिकायतें प्राप्त हुई है। वर्ष 2026 में सूचना उपलब्ध कराने की तिथि तक प्राप्त शिकायतों की संख्या 15 हैं। लोकायुक्त का पद रिक्त होने की तिथि 01-11-2013 सेें 2021 तक प्राप्त शिकायतों में 01-11-2013 से 31-12-2014 तक 422, वर्ष 2015 में 181, वर्ष 2016 में 97, वर्ष 2017 में 86 वर्ष 2018 में 54, वर्ष 2019 में 67 कोविड महामारी के वर्ष में भी 24 शिकायतें (परिवाद) तथा 2021 में 22 शिकायतें प्राप्त हुई है।

नदीम को उपलब्ध करायी सूचना के अनुसार माननीय लोकायुक्त न्यायमूर्ति मदन मोहन घिल्डियाल की 31-10-2013 को सेवा निवृत्ति के उपरान्त लोकायुक्त उत्तराखंड में अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति का प्रकरण राज्य सरकार के स्तर पर प्रक्रियाधीन है।
जनहित याचिका संख्या 161/2021 की गत 18 मार्च को सुनवाई करते हुये उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता तथा न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी लोकायुक्त की नियुक्ति न करने पर नाराजगी जताते हुये स्टेटस बताने के लिये 2 सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 01 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गयी है। इससे पूर्व 27 जून 2023 के आदेश से मुख्य न्यायाधीश व न्यायमूर्ति विपिन सांधी तथा न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने सरकार को लोकायुक्त नियुक्ति की प्रक्रिया अधिकतम 6 सप्ताह में पूर्ण करने के आदेश दिये थे।
इस आदेश में सरकार की ओर से प्रस्तुत अपर सचिव ललित मोहन रयाल के शपथ पत्र का उल्लेख करते हुये लोकायुक्त पर वित्तीय वर्ष 2022-23 तक 29 करोड़ 73 लाख 99 हजार 44 रू. खर्च का उल्लेख किया था ।

इसमें यह भी उल्लिखित है कि सुप्रीम कोर्ट में जी.आई.एल सं0 57/2016 (अश्विनी कुमार बनाम उत्तराखंड राज्य) में सरकार द्वारा लोकायुक्त नियुक्ति के सम्बन्ध में आश्वासन दिया गया था जिसका पालन नहीं किया गया है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 27 जून 2023 के आदेश में उल्लेखित तथा नदीम को उपलब्ध सूचना उपलब्ध कराने की तिथि तक वर्ष वार लोकायुक्त न रहने वाले वर्ष 2014-15 से 2025-26 ( 20 मार्च 2026 तक) कुुल रू. 19 करोड़ 64 लाख 51 हजार 724 की धनराशि खर्च हुई है।

इसमें वर्ष 2014-15 में 145.12 लाख, 2015-16 में 133.52, लाख, वर्ष 2016-17 में 176.89 लाख, वर्ष 2017-18 में 188.29 लाख, वर्ष 2018-19 में 213.46 लाख, वर्ष 2019-20 में 209.51, वर्ष 2020-21 में 198.48 लाख, वर्ष 2021-22 में 197.43, वर्ष 2022-23 में 244.48 लाख, वर्ष 2023-24 में 204.11, वर्ष 2024-25 में 128.69 तथा वर्ष 2025-26 में 69.51 लाख की खर्च धनराशि शामिल है।

गौरतलब है कि बीते कई सालों में सरकार व शासन से जुड़े अहम किरदारों पर भ्र्ष्टाचार के गम्भीर आरोप लगते रहे हैं।

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